umesh sharma
umesh sharma Apr 21, 2019

🌹🍀🌷🍃🌹💕🍀🌹🌿🌹. 🌻💝Radhey Radhey💝🌻

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कामेंट्स

Aruna..sharma..(अनु) Apr 21, 2019
very nice post ji Radhe Radhe ji good evening ji have a Butiful Sunday ji...🙏🌹🎊🎊🥀🥀💐💐

Aruna..sharma..(अनु) Apr 21, 2019
🙏Good night ji🙏आप पर सदा प्रभु जी की मेहर बनी रहे जी 🙏💐🌹मिल जाता है दो पल का सुकून बंद आँखों की बंदगी में वरना थोड़ा-थोड़ा परेशां तो हर शख़्स है अपनी जिंदगी में। 🌹🙏🏻 *शुभ रात्रि*🙏🏻 🌹

Queen Apr 21, 2019
🌺 Jai shree radhe radhe krishna bhai Ji Good night Ji aap or apki family pr krishna Ji di kripa bni rahe always be happy bhai Ji 🌺

kiran May 21, 2019

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Aparana Shukla May 21, 2019

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Nathulal Sharma May 21, 2019

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ajay yadav May 21, 2019

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🙏🌹🚩🚩जय श्री राम जी🚩🚩🌹🙏 🙏🌹परमात्मा किसका ध्यान करते हैं...?? 🙏🚩हरे कृष्णा्🚩🙏 महाभारत में आता है, एक बार उद्धव श्रीकृष्ण के महल में पहुंचे। उद्धव ने उनके महल मे ंचारों ओर ढूंढा, श्रीकृष्ण का कहीं पता नहीं चला। उद्धव ने पहरेदारों से पूछा, ‘प्रभु कहां गए हैं ?’ पहरेदारों ने कहा, ‘अभी वे पूजाकक्ष में ध्यान कर रहे हैं।’उद्धव चकित हुए कि प्रभु को भी ध्यान करने की आवश्यकता पड़ती है क्या ? वे पूजाकक्ष की ओर बढ़े। पूजाकक्ष में जब पहुंचे तो श्रीकृष्ण ने उनकी आहट को सुनकर अपनी आंखें खोल दी। उद्धव की ओर मुस्कराकर देखा और उठकर स्वागत किया। उद्धव ने कहा, ‘प्रभु! आप किसका ध्यान कर रहे थे ?’श्रीकृष्ण झेंपते हुए बोले, ‘छोड़ो इन बातों को छोड़ो, बताओ कैसे आना हुआ, चलो बैठते हैं। बहुत दिन के बाद आए।’ दोनों में दोस्ती भी थी। श्रीकृष्ण तो उन्हें मित्रवत प्यार करते थे, परंतु उद्धव जी उनके ईश्वरस्वरूप से परिचित थे और उनके चरणों में प्रेम और भक्ति रखते थे। श्रीकृष्ण उन्हें अपने कक्ष की ओर ले चलने लगे। उद्धव ने कहा, ‘प्रभु! आप बताइए कि आप किसका ध्यान कर रहे थे ?’झेंपते हुए श्रीकृष्ण ने अपनी आंखें नीचे करके कहा, ‘तुम्हारा!’ उद्धव ने कहा, ‘मेरा!’ भगवान की आंखों में प्रेम का सागर तैर गया। उन्होंने कहा, ‘तुम भी तो अहिर्निश मेरा ध्यान करते रहते हो। तुम्हारे दिल से भी तो मैं एक पल के लिए भी ओझल नहीं होता हूं। तू मेरे प्यार में पागल है तो स्वाभाविक है, मैं भी तेंरे प्यार में पागल होऊंगा। तू मेरा ध्यान करता है तो स्वाभाविक ही मैं भी तेरा ध्यान करता हूं।’ भगवान की भक्तवत्सलता देखकर उद्धव फूट३फूटकर रो पड़े। सोचो, भगवान जिस जीव का ध्यान करते हों, उस जीव का भला कैसे कोई बाल भी बांका कर सकता है ? इसलिए तो सद्गुरु कबीर साहब ने कहा- जाप मरे अजपा मरे , अनहद हूं मरी जाय । राम स्नेही न मरे , कहैं कबीर समझाय।। जप तप इत्यादि करनेवाले मर सकते हैं, परंतु राम से प्रेम करनेवाला कभी नहीं मरता, क्योंकि अविनाशी राम के हृदय में भक्त का वास होता है और जो अविनाशी के हृदय में बसता है, वह भी अविनाशी हो जाता है। इसी को तो सद्गुरु कबीर साहब ने कहा- राम मरे तो हम मरे , नातर मरे बलाय । अविनाशी का चेतवा , मरे न मारा जाय।। और- हम न मरैं मरिहैं संसारा। हमकौ मिला जिआवनहारा हरि मरिहैं तौ हमहूं मरिहैं। हरि न मरै हम काहे कौ मरि हैं।। ‘अगर राम मरेगा तो मैं मरूंगा, अगर राम नहीं मरते तो मैं कैसे मरूंगा ? अविनाशी का अंश, अविनाशी का भक्त, अविनाशी का प्रेमी न मरता है न मारा जाता है।’ हमलोगों के हृदय में राम के प्रति जितनी एकनिष्ठता होनी चाहिए, उतनी नहीं हो पाती है। हमलोग संसार की वस्तु, व्यक्ति परिस्थिति इत्यादि को जितना अपना सगा मानते हैं, जितना मोह करते हैं उतना राम से नहीं कर पाते हैं। राम हमारे लिए टाईमपास की वस्तु है। अगर पूछा जाए कि अरे भई! तुम सत्संग नहीं आते! तुम ध्यान नहीं करते ? तुम जप३तप नहीं करते ? तो हम कहते हैं, ‘क्या करें, समय नहीं मिलता।’ मतलब हम जिस राम के हैं, उसके लिए हमारे पास समय नहीं है और जिस संसार से हमारा दो३चार दिन का संबंध है, उसके लिए हमारे पास चैबीसों घंटे का समय है। हमने प्रभु को अखबार पढ़ने से भी ज्यादा महत्त्वहीन समझा। हमने प्रभु को अपने दोस्त यारों से गप्पबाजी करने से भी ज्यादा महत्त्वहीन समझा। हमने प्रभु को टी. वी.सीरियल और मन बहलाव के अन्य साधनों में डूबने से भी ज्यादा महत्त्वहीन समझा। धन हमारे लिए महत्त्वपूर्ण है, पद हमारे लिए महत्त्वपूर्ण है, परिवार हमारे लिए महत्त्वपूर्ण है। इन सब से अगर समय बचेगा तो हम राम के बारे में सोचंगे, वह भी इसलिए जिससे कि हमारा धन बना रहे, हमारा परिवार से लंबे समय तक संबंध बना रहे, हमारा पद अक्षुण्ण हो। राम से प्रेम, राम के कारण नहीं है। राम हमलोगों का असली मालिक है, परंतु अगर दुनिया के लिए राम को भी छोड़ना पड़े तो हम छोड़ने में कोई देर नहीं करेंगे। दुनिया में किसी देवी३देवता, तंत्र३मंत्र, पीर३औलिया आदि के पास इतनी ताकत नहीं है जो राम की इच्छा के बिना किसी को कुछ दे दे। भगवान श्रीकृष्ण भी गीता में कहते हैं, भूतों, देवताओं, पितरों को पूजनेवाले उसी फल को पाते हैं, जिस फल को मैं निर्धारित करता हूं। भूत भी किसी को तभी दे सकता है, जब राम देने को सहमत हों। देवता भी किसी को तभी दे सकते हैं, जब राम देने का समर्थन करते हैं। ग्रह, ये शनि, ये केतु, ये राहु आपके मित्र तभी बन सकते हैं, जब राम इन्हें आपका मित्र बनाना चाहते हों। प्रभु की सृष्टि में कुछ भी मनमाना नहीं चलता। सबके मालिक, सबके स्वामी राम हैं। अखिल सृष्टि राम का ही तो आज्ञपालन करती है।🙏🚩🚩जय श्री राम🚩🚩🙏

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