BhanwaR
BhanwaR Aug 18, 2017

Plz slowly read this.......May be u like.

#ज्ञानवर्षा
*धीरे धीरे पढिये पसंद आएगा...*

👌मुसीबत में अगर मदद मांगो तो सोच कर मागना क्योंकि मुसीबत थोड़ी देर की होती है और एहसान जिंदगी भर का.....🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾

👌कल एक इन्सान रोटी मांगकर ले गया और करोड़ों कि दुआयें दे गया, पता ही नहीँ चला की, गरीब वो था की मैं.... 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾

👌जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

👌बचपन भी कमाल का था खेलते खेलते चाहें छत पर सोयें या ज़मीन पर, आँख बिस्तर पर ही खुलती थी..🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹.

👌खोए हुए हम खुद हैं, और ढूंढते भगवान को हैं...🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁🦁

👌अहंकार दिखा के किसी रिश्ते को तोड़ने से अच्छा है कि माफ़ी मांगकर वो रिश्ता निभाया जाये....🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯

👌जिन्दगी तेरी भी अजब परिभाषा है.. सँवर गई तो जन्नत, नहीं तो सिर्फ तमाशा है...💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥

👌खुशीयाँ तकदीर में होनी चाहिये, तस्वीर मे तो हर कोई मुस्कुराता है..🌼🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷.

👌ज़िंदगी भी वीडियो गेम सी हो गयी है एक लेवल क्रॉस करो तो अगला लेवल और मुश्किल आ जाता हैं.....🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴

👌इतनी चाहत तो लाखों रुपये पाने की भी नही होती, जितनी बचपन की तस्वीर देखकर बचपन में जाने की होती है.......🌲🌲🌲🌲🌲🌲

👌हमेशा छोटी छोटी गलतियों से बचने की कोशिश किया करो, क्योंकि इन्सान पहाड़ो से नहीं पत्थरों से ठोकर खाता है..🌳🌳🌳🌳🌳

*मनुष्य का अपना क्या है ?*
*जन्म :-* दुसरो ने दिया
*नाम :-* दुसरो ने रखा
*शिक्षा :-* दुसरो ने दी
*रोजगार :-* दुसरो ने दिया और
*शमशान :-* दुसरे ले जाएंगे
तो व्यर्थ में घमंड किस बात पर करते है लोग 👏🌻🌺🌷🌾🍼🍷

*❤दिल को छुआ हो तो शेयर अवश्य करें 😊

+124 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 190 शेयर

कामेंट्स

बहुत खुशी की बात डॉक्टरों हेतु यह है कि हमारे समाज के बड़े डॉक्टर यह समझ रहे हैं कि वो कितना भी इलाज़ कर ले जब तक जनता खाना पीना ठीक नही खाएगी ऐसे ही नई नई बीमारी होती रहेगी सोचो उस परिवार पर क्या बीतती है जब घर का युवा मुखिया अनजाने में काल का ग्रास बन जाता है। ये मोटे मोटे पेट वाले जो फ़ूड फैक्टरियां चलाते हैं और सरे आम ज्यादा माल बनाने के लिए मिलावट पेलते हैं। दो दिन पहले मैने एक बहुत बड़े ब्रांड का भुजिया नमकीन का पैकेट देखा जिसमे इंग्रेडिएंट्स वाले खाने में लिखा था कॉटन सीड आयल। इसको पढ़ते ही मेरा खून खौल गया क्योंकि हमारे देश मे कॉटन का मतलब है बी टी कॉटन और यह कॉटन जेनेटिकली मोडिफाइड है। इस लिए शुद्ध खाना चाहिए तो किसान से साधे जुडे जो आपको जहर मुक्त खाना मिलावट मुक्त दुध घी उपलब्ध करा सके

+9 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 3 शेयर

बाज पक्षी जिसे हम ईगल या शाहीन भी कहते है। जिस उम्र में बाकी परिंदों के बच्चे चिचियाना सीखते है उस उम्र में एक मादा बाज अपने चूजे को पंजे में दबोच कर सबसे ऊंचा उड़ जाती है। पक्षियों की दुनिया में ऐसी Tough and tight training किसी भी ओर की नही होती। मादा बाज अपने चूजे को लेकर लगभग 12 Kmt. ऊपर ले जाती है। जितने ऊपर अमूमन जहाज उड़ा करते हैं और वह दूरी तय करने में मादा बाज 7 से 9 मिनट का समय लेती है। यहां से शुरू होती है उस नन्हें चूजे की कठिन परीक्षा। उसे अब यहां बताया जाएगा कि तू किस लिए पैदा हुआ है? तेरी दुनिया क्या है? तेरी ऊंचाई क्या है? तेरा धर्म बहुत ऊंचा है और फिर मादा बाज उसे अपने पंजों से छोड़ देती है। धरती की ओर ऊपर से नीचे आते वक्त लगभग 2 Kmt. उस चूजे को आभास ही नहीं होता कि उसके साथ क्या हो रहा है। 7 Kmt. के अंतराल के आने के बाद उस चूजे के पंख जो कंजाइन से जकड़े होते है, वह खुलने लगते है। लगभग 9 Kmt. आने के बाद उनके पंख पूरे खुल जाते है। यह जीवन का पहला दौर होता है जब बाज का बच्चा पंख फड़फड़ाता है। अब धरती से वह लगभग 3000 मीटर दूर है लेकिन अभी वह उड़ना नहीं सीख पाया है। अब धरती के बिल्कुल करीब आता है जहां से वह देख सकता है उसके स्वामित्व को। अब उसकी दूरी धरती से महज 700/800 मीटर होती है लेकिन उसका पंख अभी इतना मजबूत नहीं हुआ है की वो उड़ सके। धरती से लगभग 400/500 मीटर दूरी पर उसे अब लगता है कि उसके जीवन की शायद अंतिम यात्रा है। फिर अचानक से एक पंजा उसे आकर अपनी गिरफ्त मे लेता है और अपने पंखों के दरमियान समा लेता है। यह पंजा उसकी मां का होता है जो ठीक उसके उपर चिपक कर उड़ रही होती है। और उसकी यह ट्रेनिंग निरंतर चलती रहती है जब तक कि वह उड़ना नहीं सीख जाता। यह ट्रेनिंग एक कमांडो की तरह होती है।. तब जाकर दुनिया को एक बाज़ मिलता है अपने से दस गुना अधिक वजनी प्राणी का भी शिकार करता है। हिंदी में एक कहावत है... *"बाज़ के बच्चे मुँडेर पर नही उड़ते।"* बेशक अपने बच्चों को अपने से चिपका कर रखिए पर उसे दुनियां की मुश्किलों से रूबरू कराइए, उन्हें लड़ना सिखाइए। बिना आवश्यकता के भी संघर्ष करना सिखाइए। वर्तमान समय की अनन्त सुख सुविधाओं की आदत व अभिवावकों के बेहिसाब लाड़ प्यार ने मिलकर, आपके बच्चों को "ब्रायलर मुर्गे" जैसा बना दिया है जिसके पास मजबूत टंगड़ी तो है पर चल नही सकता। वजनदार पंख तो है पर उड़ नही सकता क्योंकि.. _"गमले के पौधे और जंगल के पौधे में बहुत फ़र्क होता है।"

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर

🌹 जय श्री राधेकृष्णा, 🌹 घर पर हमेशा ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बाते । ● घर के नल अथवा टंकी में से पानी टपकता रहता हो तो उसे तुरंत ठीक करवा लेना चाहिए अन्यथा पानी के साथ-साथ घर का पैसा भी बहता जाता है। खर्चों का बोझ इस कदर बढ़ जाता है कि कुछ भी संचय नहीं हो पाता। ● घर में टूटे बर्तन नकारात्मक ऊर्जा को बढावा देते हैं और धन-वृद्धि में रुकावट डालते हैं। इसलिए ऐसा करने से बचें। बेहतर यही है कि घर से टूटे बर्तनों को हटा दें।  ●घर में रद्दी अथवा कूड़ा जमा करके नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये चीजें घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। जिससे धन के रास्ते में आने वाली बाधाओं को बढ़ावा मिलता है।   - पुजारी धीरज कुमार पारीक 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

+10 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर

आज हर घर में कोई न कोई व्यक्ति किसी न किसी समस्या से परेशान है I 1- शुगर (मधुमेह) 2- ब्लड प्रेशर (B.P.) 3- हृदय रोग 4- कोलेस्ट्रॉल 5- कैंसर 6- दमा 7- लकवा ( paralysis ) 8- स्वाइन फ्लू 9- थाइरोइड 10- माइग्रेन 11- थकान 12- आर्थराइटिस 13- गठिया 14-जोड़ों का दर्द 15- कमर में दर्द 16- बदन दर्द 17- सेक्सुअल समस्या 18- मोटापा 19- त्वचा / चर्म रोग 20- सोराइसिस 21-लूकोडर्मा 23- बवासीर 24- एसिडिटी 25- श्वसन संबंधी समस्या 26- पाचन सम्बंधित रोग 27- एंटी एजिंग 28- लीवर से जुडी कोई भी परेशानी 29- अनिद्रा 30- अनीमिया (खून की कमी) 31- मानसीक तनाव 32- खांसी 33- साईनस 34- पेट में गैस बनना 35- पैर के तलवे मे जलन 36- आखों से संबंधित रोग 37- स्वेद प्रदर 38- मlसिक धर्म (M.C.) अनियमितता इत्यादि! ★ दोस्तों अगर आप इनमें से किसी भी समस्या से परेशान हैं और काफी समय से दवाओं के सेवन से भी कोई फायदा नहीं हो रहा है आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ जीवन पाए Vijay luthra herbalist B63 roop nagar haldwani Dist. Nainital uttrakhand 7248369088, 8126679758 दवा पार्सल द्वारा भेजी जाएगी

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर
Tarlok singh Panesat Mar 26, 2019

+6 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 0 शेयर

🙏🕉️कृपया एक बार विचार अवश्य करें🕉️🙏 सत्य बोलने मे श्रेष्ठ और महान कार्य करने मे कष्ट के पांच चरण आते है उत्साह गिराने वाले निंदा करने वाले आलोचना करने वाले उपहास उड़ाने वाले विरोध करने वाले जो मनुष्य इन पांच परिस्थिति मे बिना विचलित हुए अडि़ग रहते हुए दृढनिश्चयी , दूरदर्शी , पारदर्शी व ईश्वर पर विश्वास रखने वाला होता है उसकी विजय निश्चित होती है क्योकि सत्य परेशान हो सकता हैं पर पराजित नही ऐसे ही अवतारी युगपुरुष , महापुरुष को ही लोग भ्रम वश भगवान के समान मानने लगते है और उन्हे ईश्वर का अवतार मानकर उनके अनुयायी बन जाते है "जिंदा" जिस्म की कोई "अहमियत" नही ... "मजार" बन जाने दो "मेले" लगा करेगे ..... कृपया सत्य का अनुशरण अवश्य करें 🙏🙏🙏भागो नही , जागो तुम 🙏🙏🙏 🙏🙏🙏🙏 संगठित हो। 🙏🙏🙏🙏 🇳🇵🇳🇵🇳🇵 शशांक आर्य शैंकी 🇳🇵🇳🇵🇳🇵

+5 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 6 शेयर
Mahesh Bhargava Mar 26, 2019

+254 प्रतिक्रिया 59 कॉमेंट्स • 136 शेयर

🌿 *आयुर्वेदिक डॉक्टरो को जोलाछाप कहने वालो इस मेसेज को ध़्यान से पढ़े आैर जाने आखिर कोन है जोलाछाप ?* 🌿 ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ ❇ हंमेशा से ही ऐलोपैथी विग्यान आयुर्वेद को आधारहीन ऐवं कीसी कामका नही कहकर आयुर्वेदिक डॉक्टरो की बेइज्जती करतां आयां है लेकिन सब पैथी का बाप तो आयुर्वेद ही है | आैर अगर आयुर्वेद नही होतां तो आज ऐलोपैथी भी नही होतां यह बात हमारे इस मेसेज को पुरां पढ़कर आप भी जान जायेंगे | ❇ *ऐलोपैथी मे उपयोग होने वाली महत्वपुर्ण दवाइयां जो निचे दी गइ है वह "आयुर्वेदिक प्लान्ट" से बनती है निचे का मेसेज पुरां पढ़िये आैर जाने केसे ऐलोपैथी वाले आयुर्वेदिक आैषधि को लेटिन नाम देकर अपनी चिकित्सा पैथी कहलाते है |* 1) Tinacardin - यह दवाइ गीलोय के सत्व से बनती है | 2) Curcumin- यह दवाइ आयुर्वेदिक आैषधि हल्दी सत्व से बनती है | 3) Coral - यह दवाइ प्रवाल पिष्टी से बनने वाली दवाइ है | 4) Hyprobromide - यह दवाइ खुरासानी अजवाइन का ऐक्ट्रेक्ट है | 5) Quinone - यह दवाइ कुनैन की जड से तैयार होती है | 6) Pentaprazole - यह दवाइ खाने सा सोडा से तैयार होती है | 7) Pramhexin -यह ऐलोपैथी दवाइ वासा सत्व से बनती है | 8) Revocin - यह दवाइ सर्पगंधा के ऐक्ट्रेक्ट से बनी होती है | 9) Ginseng - यह चाइनां जिनसेंग नामक आैषधि से बनती है | 10) Diclpfenac- यह दवाइ अफिण से बनाइ जाती है | 11) Colcicine - यह दवाइ सुरंजन नामक आैषधी से बनती है | 12) Taxol - यह द्रोणपुष्पी के ऐक्ट्रेक्ट से बनाइ जाती है | 13) Atropine - यह धतुरपञ से बनने वाली ऐलोपैथी दवाइ है | 14 ) Eno - इनो १००% आयुर्वेदिक आैषधी से बनाइ जाती है | ❇ *उपर दी गइ ऐलोपैथी दवाइयो मे १०० % आयुर्वेदिक आैषधी को लेकर इसका ऐक्ट्रेक्ट निकालकर या तो उसका सत्व निकालकर लेटिन नाम देकर अंग्रेजी दवाइयो का नाम देकर मार्केट मे खुब बिक रही है आैर लोग इसको खुब खा भी रहे हे |* यह जानकारी सभी लोगो तक शेयर करें जो आयुर्वेद को जोलाछार समजते है | *राजिव दिक्षित जी अमर रहो* *स्वदेशी अपनाये, देश बचाये |* 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰

+1 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 8 शेयर

क्या देवता भोग ग्रहण करते हैं???? हिन्दू धर्म में भगवान को भोग लगाने का विधान है ...क्या सच में देवतागण भोग ग्रहण करते हैं? हां , ये सच है .. शास्त्र में इसका प्रमाण भी है ..गीता में भगवान् कहते है ...'' जो भक्त मेरे लिए प्रेम सेपत्र, पुष्प, फल, जल आदि अर्पण करता है ,उस शुद्ध बुद्धि निष्काम प्रेमी भक्त का प्रेमपूर्वक अर्पण किया हुआ , वह पत्र पुष्प आदि मैं ग्रहण करता हूँ ...गीता ९/२६ अब वे खाते कैसे हैं , ये समझना जरुरी है हम जो भी भोजन ग्रहण करते है , वे चीजे पांच तत्वों से बनी हुई होती है .... क्योकि हमारा शरीर भी पांच तत्वों से बना होता है .. इसलिए अन्न, जल, वायु,प्रकाश और आकाश तत्व की हमें जरुरत होती है ,जो हम अन्न और जल आदि के द्वारा प्राप्त करते है। देवता का शरीर पांच तत्वों से नहीं बना होता , उनमे पृथ्वी और जल तत्व नहीं होता ... मध्यम स्तर के देवताओ का शरीर तीन तत्वों से तथा उत्तम स्तर के देवता का शरीर दो तत्व -- तेज और आकाश से बना हुआ होता है ... इसलिए देव शरीर वायुमय और तेजोमय होते है। यह देवता वायु के रूप में गंध, तेज के रूप में प्रकाश को ग्रहण और आकाश के रूप में शब्द को ग्रहण करतेहै। यानी देवता गंध, प्रकाश और शब्द के द्वारा भोग ग्रहण करते है। जिसका विधान पूजा पध्दति में होता है। जैसे जो हम अन्न का भोग लगाते है , देवता उस अन्न की सुगंध को ग्रहण करते है,उसी से तृप्ति हो जाती है। जो पुष्प और धुप लगाते है ,उसकी सुगंध को भी देवता भोग के रूप में ग्रहण करते है। जो हम दीपक जलाते है ,उससे देवता प्रकाश तत्व को ग्रहण करते है। आरती का विधान भी उसी के लिए है,जो हम मन्त्र पाठ करते है ,या जो शंख बजाते है या घंटी घड़ियाल बजाते है ,उसे देवता गण ''आकाश '' तत्व के रूप में ग्रहण करते है। यानी पूजा में हम जो भी विधान करते है ,उससे देवता वायु,तेज और आकाश तत्व के रूप में '' भोग '' ग्रहण करते है। जिस प्रकृति का देवता हो , उस प्रकृति का भोग लगाने का विधान है . !!! इस तरह हिन्दू धर्म की पूजा पद्धति पूर्ण ''वैज्ञानिक '' है !

+22 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 21 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB