मायमंदिर फ़्री कुंडली
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💐💐💐💐💐💐💐 main Jeet Rahi hi har Baji:-!:-!:-!:-!:-!;););):-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-!:-! Tere chalte Shyam mijaji 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 Shubh dopahar 💐💐💐💐💐💐💐💐💐 aap sabhi ka din mangalmay ho 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 Radhe Radhe Ji Jai Shri Krishna

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Ganesh Garg Jun 16, 2019

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Jyoti Jitin Ahuja Jun 16, 2019

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Rohit Agarwal Jun 15, 2019

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Gopal Jalan Jun 17, 2019

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pinky maggu Jun 17, 2019

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🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏 🙏🌷🌷जय श्री राधे राधे 🌷🌷🙏 ***** कड़वी बहु ***** जानकी के बहु बेटे शहर में बस चुके थे लेकिन उसका गाँव छोड़ने का मन नहीं हुआ इसलिए अकेले ही रहती थी। वह रोजाना की तरह मंदिर जा कर आ रही थी। रास्ते मे उसका संतुलन बिगड़ा और गिर पड़ी। गाँव के लोगों ने उठाया, पानी पिलाया और समझाया 'अब इस अवस्था में अकेले रहना उचित नहीं। किसी भी बेटे के पास चली जाओ।' जानकी ने भी परिस्थिति को स्वीकार कर बेटे बहुओं को ले जाने के लिए कहने हेतु फोन करने का मन बना लिया। जानकी की तीन बहुएँ थी। एक बड़ी सविता जो आज्ञाकारी मंझली शोभग आज्ञाकारी और छोटी ममता कड़वी। जानकी अति धार्मिक थी। कोई व्रत त्यौहार आता पहले से ही तीनों बहुओं को सचेत कर देती। 'सविता' खुशी खुशी व्रत करती। शोभग भी मान जाती थी लेकिन ममता एक कान से सुनती ओर दूसरे कान से निकाल देती या विरोध पर उतर आती । "आप हर त्योहार पर व्रत रखवा कर उसके आनंद को कष्ट में परिवर्तित कर देती हैं।" "तेरी जुबान लड़ाने की आदत है। कुछ व्रत तप कर ले आगे तक साथ जाएँगे।" दोनों की किसी न किसी बात पर बहस हो जाती। गुस्से में एक दिन जानकी ने कह दिया था "तू क्या समझती है! बुढापे में मुझे तेरी जरूरत पड़ने वाली है। तो अच्छी तरह समझ ले। सड़ जाऊँगी लेकिन तेरे पास नहीं आऊँगी।" अब सबसे पहले उसने सविता को फोन किया "गिर गई हूँ। आजकल कई बार ऐसा हो गया है। सोचती हूँ तुम्हारे पास ही आजाउँ।" सविता ने कहा "नवरात्र में? अभी नहीं माँ जी। नंगे पाँव रह रही हूं आजकल। किसी का छुआ भी नहीं खाती।" शोभाग को भी फोन किया लेकिन उसने भी बहाना कर टाल दिया। जब सविता और शोभाग ही टाल चुकी तो ममता को फोन करने का कोई फायदा नहीं था और अहम अभी टूटा था लेकिन खत्म नहीं हुआ था। फोन पर हाथ रख आने वाले कठिन समय की कल्पना करने लगी थी। तभी फोन की घण्टी बजी। आवाज़ से ही समझ गई थी ममता है "माँ जी गिर गये ना? आपने तो बताया नहीं लेकिन मैंने भी जासूस छोड़ रखे हैं। पोते को भेज रही हूँ लेने।" सासु -"क्या तुझे मेरे शब्द याद नहीं?" ममता -"जिंदगी भर नहीं भूलूँगी। आपने कहा था सड़ जाऊँगी तो भी तेरे पास नहीं आऊँगी। तभी मैंने व्रत ले लिया था इस बुढ़िया को सड़ने नहीं देना है। मेरा तप अब शुरू होगा।" क्योंकि मेरी ने मुझे मेरी माँ ने यह शिक्षा दी थी कि बुढापे में सास , ससुर की ही सबसे बड़ा महाव्रत ओर महातप है । 🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏

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