।। आज का सुविचार ।। इस पृथ्वी पर मानव ही सबसे सर्वश्रेष्ठ प्राणी है और सबसे अधिक धर्म, जाति, मजहब में बटा हुआ है।

।। आज का सुविचार ।।

इस पृथ्वी पर मानव ही सबसे सर्वश्रेष्ठ प्राणी है और सबसे अधिक धर्म, जाति, मजहब में बटा हुआ है।

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कामेंट्स

Kailashprasad Vishwakarma Sep 11, 2021
श्री जय माँ भगवती आप की जय हो ।। श्री जय राधे राधे राधे जय हो।।

Rani Sep 11, 2021
jai shree shnidev ji🙏🌹

kirshna kirshna Sep 11, 2021
see all friends good evening Jai shree krishna krishna 🙏🙏 ahemdabad Gujratसुप्रभात

Ramesh Kumar Shiwani Sep 11, 2021
JAI SHREE RADHE KRISHNA JI SHUBH RATRI VANDAN PRANAAM SHREE JAI SHRIRAM JI 🙏🌹🙏

Rakesh Kumar Patel Sep 12, 2021
जय श्री राधे कृष्णा सुप्रभात वंदन

Soni Mishra Oct 26, 2021

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Soni Mishra Oct 25, 2021

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Soni Mishra Oct 23, 2021

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Gopal Jalan Oct 25, 2021

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करवा चौथ अक्टूबर 24, 2021 विशेष 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ करवा चौथ व्रत का हिन्दू संस्कृति में विशेष महत्त्व है। इस दिन पति की लम्बी उम्र के पत्नियां पूर्ण श्रद्धा से निर्जला व्रत रखती है। https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=4911728808858079&id=100000630247964 करवा चाैथ पर इस वर्ष रात 11 बजकर 35 मिनट तक वरियान योग रहेगा। वरीयान योग मंगलदायक कार्यों में सफलता प्रदान करता है। साथ ही चंद्रमा पूरे समय रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस नक्षत्र में चंद्रमा का पूजन करना बेहद ही शुभ माना जाता है। इसी के साथ ज्योतिष के अनुसार चतुर्थी तिथि को चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में विराजमान रहेगा। पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए ये व्रत बहुत अच्छा है। करवा चौथ महात्म्य 〰️〰️🔸🔸〰️〰️ छांदोग्य उपनिषद् के अनुसार चंद्रमा में पुरुष रूपी ब्रह्मा की उपासना करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इससे जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता है। साथ ही साथ इससे लंबी और पूर्ण आयु की प्राप्ति होती है। करवा चौथ के व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणोश तथा चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अघ्र्य देकर पूजा होती है। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल,उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री रखकर सास अथवा सास के समकक्ष किसी सुहागिन के पांव छूकर सुहाग सामग्री भेंट करनी चाहिए। महाभारत से संबंधित पौराणिक कथा के अनुसार पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी पर्वत पर चले जाते हैं। दूसरी ओर बाकी पांडवों पर कई प्रकार के संकट आन पड़ते हैं। द्रौपदी भगवान श्रीकृष्ण से उपाय पूछती हैं। वह कहते हैं कि यदि वह कार्तिक कृष्ण चतुर्थी के दिन करवाचौथ का व्रत करें तो इन सभी संकटों से मुक्ति मिल सकती है। द्रौपदी विधि विधान सहित करवाचौथ का व्रत रखती है जिससे उनके समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं। इस प्रकार की कथाओं से करवा चौथ का महत्त्व हम सबके सामने आ जाता है। सरगी का महत्त्व 〰️〰️〰️〰️〰️ करवा चौथ में सरगी का काफी महत्व है। सरगी सास की तरफ से अपनी बहू को दी जाती है। इसका सेवन महिलाएं करवाचौथ के दिन सूर्य निकलने से पहले तारों की छांव में करती हैं। सरगी के रूप में सास अपनी बहू को विभिन्न खाद्य पदार्थ एवं वस्त्र इत्यादि देती हैं। सरगी, सौभाग्य और समृद्धि का रूप होती है। सरगी के रूप में खाने की वस्तुओं को जैसे फल, मीठाई आदि को व्रती महिलाएं व्रत वाले दिन सूर्योदय से पूर्व प्रात: काल में तारों की छांव में ग्रहण करती हैं। तत्पश्चात व्रत आरंभ होता है। अपने व्रत को पूर्ण करती हैं। महत्त्व के बाद बात आती है कि करवा चौथ की पूजा विधि क्या है? किसी भी व्रत में पूजन विधि का बहुत महत्त्व होता है। अगर सही विधि पूर्वक पूजा नहीं की जाती है तो इससे पूरा फल प्राप्त नहीं हो पाता है। चौथ की पूजन सामग्री और व्रत की विधि 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ करवा चौथ पर्व की पूजन सामग्री👇 कुंकुम, शहद, अगरबत्ती, पुष्प, कच्चा दूध, शक्कर, शुद्ध घी, दही, मेंहदी, मिठाई, गंगाजल, चंदन, चावल, सिन्दूर, मेंहदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, दीपक, रुई, कपूर, गेहूँ, शक्कर का बूरा, हल्दी, पानी का लोटा, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ, दक्षिणा के लिए पैसे। सम्पूर्ण सामग्री को एक दिन पहले ही एकत्रित कर लें। व्रत वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहन लें तथा शृंगार भी कर लें। इस अवसर पर करवा की पूजा-आराधना कर उसके साथ शिव-पार्वती की पूजा का विधान है क्योंकि माता पार्वती ने कठिन तपस्या करके शिवजी को प्राप्त कर अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था इसलिए शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा का धार्मिक और ज्योतिष दोनों ही दृष्टि से महत्व है। व्रत के दिन प्रात: स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोल कर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें। करवा चौथ पूजन विधि 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ प्रात: काल में नित्यकर्म से निवृ्त होकर संकल्प लें और व्रत आरंभ करें। व्रत के दिन निर्जला रहे यानि जलपान ना करें। व्रत के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें- प्रातः पूजा के समय इस मन्त्र के जप से व्रत प्रारंभ किया जाता है- 'मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।' अथवा👇 ॐ शिवायै नमः' से पार्वती का, 'ॐ नमः शिवाय' से शिव का, 'ॐ षण्मुखाय नमः' से स्वामी कार्तिकेय का, 'ॐ गणेशाय नमः' से गणेश का तथा 'ॐ सोमाय नमः' से चंद्रमा का पूजन करें। शाम के समय, माँ पार्वती की प्रतिमा की गोद में श्रीगणेश को विराजमान कर उन्हें बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी अथवा लकड़ी के आसार पर शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा की स्थापना करें। मूर्ति के अभाव में सुपारी पर नाड़ा बाँधकर देवता की भावना करके स्थापित करें। पश्चात माँ पार्वती का सुहाग सामग्री आदि से श्रृंगार करें। भगवान शिव और माँ पार्वती की आराधना करें और कोरे करवे में पानी भरकर पूजा करें। एक लोटा, एक वस्त्र व एक विशेष करवा दक्षिणा के रूप में अर्पित करें। सौभाग्यवती स्त्रियां पूरे दिन का व्रत कर व्रत की कथा का श्रवण करें। चंद्रोदय के बाद चाँद को अर्घ्य देकर अपने पति के हाथ से जल एवं मिष्ठान खा कर व्रत खोले। करवा चौथ प्रथम कथा 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहाँ तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी। शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। चूँकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है। सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चाँद उदित हो रहा हो। इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चाँद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चाँद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है। वह पहला टुकड़ा मुँह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुँह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है। उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है। सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है। एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियाँ करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियाँ उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से 'यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो' ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है। इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूँकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह के वह चली जाती है। सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है। अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अँगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुँह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है। हे श्री गणेश माँ गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले। करवाचौथ द्वितीय कथा 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ इस कथा का सार यह है कि शाकप्रस्थपुर वेदधर्मा ब्राह्मण की विवाहिता पुत्री वीरवती ने करवा चौथ का व्रत किया था। नियमानुसार उसे चंद्रोदय के बाद भोजन करना था, परंतु उससे भूख नहीं सही गई और वह व्याकुल हो उठी। उसके भाइयों से अपनी बहन की व्याकुलता देखी नहीं गई और उन्होंने पीपल की आड़ में आतिशबाजी का सुंदर प्रकाश फैलाकर चंद्रोदय दिखा दिया और वीरवती को भोजन करा दिया। परिणाम यह हुआ कि उसका पति तत्काल अदृश्य हो गया। अधीर वीरवती ने बारह महीने तक प्रत्येक चतुर्थी को व्रत रखा और करवा चौथ के दिन उसकी तपस्या से उसका पति पुनः प्राप्त हो गया। करवा चौथ तृतीय कथा 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ एक समय की बात है कि एक करवा नाम की पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी के किनारे के गाँव में रहती थी। एक दिन उसका पति नदी में स्नान करने गया। स्नान करते समय वहाँ एक मगर ने उसका पैर पकड़ लिया। वह मनुष्य करवा-करवा कह के अपनी पत्नी को पुकारने लगा। उसकी आवाज सुनकर उसकी पत्नी करवा भागी चली आई और आकर मगर को कच्चे धागे से बाँध दिया। मगर को बाँधकर यमराज के यहाँ पहुँची और यमराज से कहने लगी- हे भगवन! मगर ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है। उस मगर को पैर पकड़ने के अपराध में आप अपने बल से नरक में ले जाओ। यमराज बोले- अभी मगर की आयु शेष है, अतः मैं उसे नहीं मार सकता। इस पर करवा बोली, अगर आप ऐसा नहीं करोगे तो मैं आप को श्राप देकर नष्ट कर दूँगी। सुनकर यमराज डर गए और उस पतिव्रता करवा के साथ आकर मगर को यमपुरी भेज दिया और करवा के पति को दीर्घायु दी। हे करवा माता! जैसे तुमने अपने पति की रक्षा की, वैसे सबके पतियों की रक्षा करना। करवाचौथ चौथी कथा 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ एक बार पांडु पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी नामक पर्वत पर गए। इधर द्रोपदी बहुत परेशान थीं। उनकी कोई खबर न मिलने पर उन्होंने कृष्ण भगवान का ध्यान किया और अपनी चिंता व्यक्त की। कृष्ण भगवान ने कहा- बहना, इसी तरह का प्रश्न एक बार माता पार्वती ने शंकरजी से किया था। पूजन कर चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर फिर भोजन ग्रहण किया जाता है। सोने, चाँदी या मिट्टी के करवे का आपस में आदान-प्रदान किया जाता है, जो आपसी प्रेम-भाव को बढ़ाता है। पूजन करने के बाद महिलाएँ अपने सास-ससुर एवं बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लेती हैं। तब शंकरजी ने माता पार्वती को करवा चौथ का व्रत बतलाया। इस व्रत को करने से स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षा हर आने वाले संकट से वैसे ही कर सकती हैं जैसे एक ब्राह्मण ने की थी। प्राचीनकाल में एक ब्राह्मण था। उसके चार लड़के एवं एक गुणवती लड़की थी। एक बार लड़की मायके में थी, तब करवा चौथ का व्रत पड़ा। उसने व्रत को विधिपूर्वक किया। पूरे दिन निर्जला रही। कुछ खाया-पीया नहीं, पर उसके चारों भाई परेशान थे कि बहन को प्यास लगी होगी, भूख लगी होगी, पर बहन चंद्रोदय के बाद ही जल ग्रहण करेगी। भाइयों से न रहा गया, उन्होंने शाम होते ही बहन को बनावटी चंद्रोदय दिखा दिया। एक भाई पीपल की पेड़ पर छलनी लेकर चढ़ गया और दीपक जलाकर छलनी से रोशनी उत्पन्न कर दी। तभी दूसरे भाई ने नीचे से बहन को आवाज दी- देखो बहन, चंद्रमा निकल आया है, पूजन कर भोजन ग्रहण करो। बहन ने भोजन ग्रहण किया। भोजन ग्रहण करते ही उसके पति की मृत्यु हो गई। अब वह दुःखी हो विलाप करने लगी, तभी वहाँ से रानी इंद्राणी निकल रही थीं। उनसे उसका दुःख न देखा गया। ब्राह्मण कन्या ने उनके पैर पकड़ लिए और अपने दुःख का कारण पूछा, तब इंद्राणी ने बताया- तूने बिना चंद्र दर्शन किए करवा चौथ का व्रत तोड़ दिया इसलिए यह कष्ट मिला। अब तू वर्ष भर की चौथ का व्रत नियमपूर्वक करना तो तेरा पति जीवित हो जाएगा। उसने इंद्राणी के कहे अनुसार चौथ व्रत किया तो पुनः सौभाग्यवती हो गई। इसलिए प्रत्येक स्त्री को अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करना चाहिए। द्रोपदी ने यह व्रत किया और अर्जुन सकुशल मनोवांछित फल प्राप्त कर वापस लौट आए। तभी से हिन्दू महिलाएँ अपने अखंड सुहाग के लिए करवा चौथ व्रत करती हैं। सायं काल में चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही पति द्वारा अन्न एवं जल ग्रहण करें। पति, सास-ससुर सब का आशीर्वाद लेकर व्रत को समाप्त करें। पूजा एवं चन्द्र को अर्घ्य देने का मुहूर्त 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी (करवाचौथ) 24 अक्टूबर को करवा चौथ पूजा मुहूर्त- सायं 05:35 से 06:55 तक। चंद्रोदय- 20:11 चतुर्थी तिथि आरंभ 24 अक्टूबर रात्रि 03:01 पर। चतुर्थी तिथि समाप्त 25 अक्टूबर प्रातः 05:42 पर। 13 घंटे 44 मिनट का समय व्रत के लिए है। ऐसे में महिलाओं को सुबह 6 बजकर 27 मिनट से रात 8 बजकर 11 मिनट तक करवा चौथ का व्रत रखना होगा। करवा चौथ के दिन चन्द्र को अर्घ्य देने का समय रात्रि 8:11 बजे से 8:55 तक है। करवाचौथ के दिन भारत के कुछ प्रमुख नगरों का चंद्रोदय समय 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 1- दिल्ली: 08 बजकर 08 मिनट 2- मुंबई 08 बजकर 47 मिनट 3- बेंगलुरु 08 बजकर 39 मिनट 4- लखनऊ: 07 बजकर 56 मिनट 5- आगरा : 08 बजकर 07 मिनट 6- अलीगढ़: 08 बजकर 06 मिनट 7- मेरठ 08 बजकर 05 मिनट 8- नोएडा 08 बजकर 07 मिनट 9- गोरखपुर 07 बजकर 47 मिनट 10- मथुरा 08 बजकर 08 मिनट 11- सहारनपुर 08 बजकर 03 मिनट 12- बरेली: 07 बजकर 59 मिनट 13- रामपुर : 8 बजे 14- फर्रुखाबाद: 08 बजकर 1 मिनट 15- इटावा : 8 बजकर 05 मिनट 16- जौनपुर : 07 बजकर 52 मिनट 17- कोलकाता: 07 बजकर 36 मिनट 18- जयपुर: 08 बजकर 17 मिनट 19- देहरादून: 8 बजे 20- पटना: 07 बजकर 42 मिनट पर। इन शहरों के लगभग 200 किलोमीटर के आसपास तक चंद्रोदय के समय मे 1 से 3 मिनट का अंतर आ सकता है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ के दिन शाम के समय चन्द्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। चंद्रदेव को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का जप अवश्य करना चाहिए। अर्घ्य देते समय इस मंत्र के जप करने से घर में सुख व शांति आती है। "गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥" इसका अर्थ है कि सागर समान आकाश के माणिक्य, दक्षकन्या रोहिणी के प्रिय व श्री गणेश के प्रतिरूप चंद्रदेव मेरा अर्घ्य स्वीकार करें। सुख सौभाग्य के लिये राशि अनुसार उपाय 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ मेष राशि👉 मेष राशि की महिलाएं करवा चौथ की पूजा अगर लाल और गोल्डन रंग के कपड़े पहनकर करती हैं तो आने वाला समय बेहद शुभ रहेगा। वृषभ राशि👉 वृषभ राशि की महिलाओं को इस करवा चौथ सिल्वर और लाल रंग के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए। इस रंग के कपड़े पहनकर पूजा करने से आने वाले समय में पति-पत्नी के बीच प्यार में कभी कमी नहीं आएगी। मिथुन राशि👉 इस राशि की महिलाओं के लिए हरा रंग इस करवा चौथ बेहद शुभ रहने वाला है। इस राशि की महिलाओं को करवा चौथ के दिन हरे रंग की साड़ी के साथ हरी और लाल रंग की चूड़ियां पहनकर चांद की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से आपके पति की आयु निश्चित लंबी होगी। कर्क राशि👉 कर्क राशि की महिलाओं को करवा चौथ की पूजा विशेषकर लाल-सफेद रंग के कॉम्बिनेशन वाली साड़ी के साथ रंग-बिरंगी चूडि़यां पहनकर पूजा करनी चाहिए। याद रखें इस राशि की महिलाओं को व्रत खोलते समय चांद को सफेद बर्फी का भोग लगाना चाहिए। ऐसा करने से आपके पति का प्यार आपके लिए कभी कम नहीं होगा। सिंह राशि👉 करवा चौथ की साड़ी चुनने के लिए इस राशि की महिलाओं के पास कई विकल्प मौजूद हैं। इस राशि की महिलाएं लाल, संतरी, गुलाबी और गोल्डन रंग चुन सकती है। इस रंग के कपड़े पहनकर पूजा करने से शादीशुदा जोड़े के वैवाहिक जीवन में हमेशा प्यार बना रहता है। कन्या राशि👉 कन्या राशि वाली महिलाओं को इस करवा चौथ लाल-हरी या फिर गोल्डन कलर की साड़ी पहनकर पूजा करने से लाभ मिलेगा। ऐसा करने से दोनों के वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ जाएगी। तुला राशि👉 इस राशि की महिलाओं को पूजा करते समय लाल- सिल्वर रंग के कपड़े पहनने चाहिए। इस रंग के कपड़े पहनने पर पति का साथ और प्यार दोनों हमेशा बना रहेगा। वृश्चिक राशि👉 इस राशि की महिलाएं लाल, मैरून या गोल्डन रंग की साड़ी पहनकर पूजा करें तो पति-पत्नी के बीच प्यार बढ़ जाएगा। धनु राशि👉 इस राशि की महिलाएं पीले या आसमानी रंग के कपड़े पहनकर पति की लंबी उम्र की कामना करें। मकर राशि👉 मकर राशि की महिलाएं इलेक्ट्रिक ब्लू रंग करवा चौथ पर पहनने के लिए चुनें। ऐसा करने से आपके मन की हर इच्छा जल्द पूरी होगी। कुंभ राशि👉 ऐसी महिलाओं को नेवी ब्लू या सिल्वर कलर के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से गृहस्थ जीवन में सुख शांति बनी रहेगी। मीन राशि👉 इस राशि की महिलाओं को करवा चौथ पर लाल या गोल्डन रंग के कपड़े पहनना शुभ होगा। *प्रेम समस्या समाधान के लिए वशीकरण* *नाखूनों के माध्यम से अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली की जॉच करें।* *Powerful आल-इन-वन लक्ष्मी शनि यन्त्र ताबीज़* *यह लक्ष्मी शनि यन्त्र है। यह यन्त्र पूरी उम्र काम करता है। घर में सुख सम्पत्ति के लिए अच्छा रहता है।* *Powerful All-in-One Laxmi Shani Yantr Tabiz* *This is Laxmi Shani Yantr & work for Good Health & Wealth full Life.* 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memory due to accident, can also cure to 90% through diet only* *In typhoid, after my prescribed treatment relief will be in 1 hour and person can easily eat food* *Patients who has a life of 2-4 days only, can also cured through diet within 2 hours to 1 week. Thereafter, they can live long life.* *Cancer, Kidney, Heart Problem , Joint Pain, Skin Disease, Stomach Problem, Piles, Neurology can also cure by diet only.* *In the old age, people have problem in walking, eating, doing activities ,etc. can also be cured only through special diet.* *In dengue, after my prescribed diet treatment relief will be in 10 minutes only.* *Dengue , Swine flu , Typhoid, and any other temperature will be cure by my prescribed diet treatment in 10 minutes only.* *In chickungunya, after my prescribed diet treatment relief will be in 2 hours and person will start walking and activities.* *Health Checkup by Nails & Teeth and Treatment can be done by Diet only.* *( Specialist in Alternative diet Medicine )* *{Loose your extra weight through diet only.* *नियमित आहार को ही बनाऐ आर्युवेदिक आहार* *सिर्फ खान-पान के द्वारा बिना किसी दवाई के बीमारी ठीक करे।* *केंसर,डेंगू,चिकनगुनिया,*त्वचा रोग,मिर्गी,पेट से संबंधित रोग, ल्यूकोरिया, बवासीर,किडनी,जोडो के दर्द, गंठिया भाव (भादी) ( जॉइंट पैन ,कमर दर्द ,और फुल बदन दर्द की शिकायत (शरीर मे अकडन) ) , दमा (Asthma) *🙏🏻🙏🏻ॐ नम: शिवाय🙏🏻🙏🏻* *नाखूनों के माध्यम से अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली की जॉच करें।* *ऑस्ट्रो सुनील गर्ग ( नाखून और दांत )* *( दुनिया में पहली बार )* 7982311549 https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=3852333791463634&id=100000611535652 *Check your immunity system through nails* *Astro Sunil Garg (Nail & Teeth)* *( First Time in The World )* 7982311549 *Janiye apne Business, Career, & Life se judi har samasya ka Samadhan.* *Astro Sunil Garg (Nail & Teeth)* *( First Time in The World )* *Health Checkup by Nails and Teeth and Treatment only by Diet:-* *( Specialist in Alternative Medicine )* *लक्षमी शनि यन्त्र का मूल्य* *एक वर्ष के लिए 51,000/-₹ इक्यावन हजार* *तीन वर्ष के लिए 1,00,000/-₹ एक लाख* *सात वर्ष के लिए 2,00,000/-₹ दो लाख* *लाइफ टाइम के लिए 5,00,000/-₹ पॉच लाख* *Pay to Paytm Number :- 9911020152* State Bank of India, Sunil Kumar Garg SA/C no 10614925460, ( IFS Code: SBIN0000737 ) Pahar Ganj New Delhi 110055, 1/1,Panchkuian Road, Opposite metro pillar no.17, RK Ashram Marg metro station , New Delhi-110001 [email protected] Astro Sunil Garg (Nail & Teeth) *कॉलिंग नंबर :- 9811332914 / 9911020152* *9811332901,7982311549,* *Powerful आल-इन-वन लक्ष्मी शनि यन्त्र ताबीज़* *यह लक्ष्मी शनि यन्त्र है। यह यन्त्र पूरी उम्र काम करता है। घर में सुख सम्पत्ति के लिए अच्छा रहता है।* 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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Gopal Jalan Oct 25, 2021

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Shudha Mishra Oct 25, 2021

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Babbu Bhai Oct 25, 2021

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