Jai Pahari Mata Ji Humari kul ki Devi ke Shree Charno mein naman Jai Pahari Mata Ji Aaj ke darsan 4.1.18

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Durgeshgiri Apr 17, 2021

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Sanjeev sharma Apr 18, 2021

🇱 🇮 🇻 🇪 🇩 🇦 🇷 🇸 🇭 🇦 🇳 👣 🌹👁️🔻👁️🌹 जय माता कुलजा देवी श्री नैना देवी जी🕉️🌺🙏🌹🌻🎇🌹👣🌷🔔🎊🕉️🎈🎉🍍⛳️🙏जय माता कुलजा देवी जी आदि शक्ति जगजननी विश्वविख्यात श्री सिद्ध शक्तिपीठ माता श्री नैना देवी जी के आज के प्रातः काल के श्रृंगार दर्शन हिमाचल प्रदेश बिलासपुर नैना देवी से🙏👣🎉🕉️🌷🎊🌺⛳️🌻👁️❗️👁️🌹👣1⃣8⃣🌷🌹 *अप्रैल* ❤️ *रविवार* 🔱 🎈2⃣0⃣2⃣1️⃣👣🌷 🌻💐✍️...दास संजीव शर्मा🕉️👣 💐🍓 🔔🎉🙏🌹👁️🔻👁️🌹👣 जेष्ठ माता श्री नैना देवी जी सदैव अपनी कृपा बनाए रखें भक्तों पर🕉️ शुभ विक्रम संवत- 2078 शक संवत-1943 *अयन* - उत्तरायण *ऋतु* -वसंत *मास* -चैत्र *पक्ष* - शुक्ल *तिथि* - षष्ठी रात्रि 10:34 तक तत्पश्चात सप्तमी *नक्षत्र* - आर्द्रा 19 अप्रैल प्रातः 05:02 बजे तक तत्पश्चात पुनर्वसु *योग* - अतिगण्ड शाम 07:56 तक तत्पश्चात सुर्कमा *दिशाशूल*- पश्चिम दिशा में *व्रत पर्व* *विवरण* - स्कंद अशोक सूर्य षष्ठी 🏵️ *विशेष*- षष्ठी को नीम के पत्ते और फल दातुन मुंह में डालने से नीच योंनी की प्राप्त होती है । छठै नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं सभी माता के भक्तों को जय माता श्री नैना देवी जी।🎉🌹🎈⛳️👣🔱🐚🔔🙏

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Poonam Aggarwal Apr 17, 2021

🎪🎪* जय श्री स्कंद मां जय माता दी *🎪🎪🙏 🎪🎪🎪🎪🎪🎪🎪🎪🎪🎪🎪 🌻🌼🌺🪴🌺🌼🌻 *पाने को कुछ नहीं,* *ले जाने को कुछ नहीं;* *उड़ जाएंगे एक दिन...* *तस्वीर से रंगों की तरह!* *हम वक्त की टहनी पर...* *बैठे हैं परिंदों की तरह !!* *खटखटाते रहिए दरवाजा...* *एक दूसरे के मन का;* *मुलाकातें ना सही,* *आहटें आती रहनी चाहिए !!* *ना राज़ है... “ज़िन्दगी”* *ना नाराज़ है... “ज़िन्दगी";* *बस जो है, वो आज है... “ज़िन्दगी”* 🌹🙏 सुप्रभात 🙏🌹 💐 आपका दिन मंगलमय हो 💐 *सुबह पुकारूँ, शाम पुकारूँ,* *पुकारूँ मै दिन रात...* ♥️♥️♥️ *बाबा साथ ना छोड़ना* *पकड़े रहना आप मेरा हाथ..🌹* 🌷🌹 *༺꧁ जय श्री श्याम जी꧂༻* [ 🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺 🌹🌳 #जय_जय_श्री_राधे 🌳🌹🙏🏻 बरसाने की राधिका,नंद गांव के श्याम। दोनों के ही चरणों में,कोटि-कोटि प्रणाम।। 🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺

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Jai Mata Di Apr 17, 2021

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षष्ठम दुर्गा: श्री कात्यायनी  माँ दुर्गा के छठे रूप का नाम कात्यायनी है। इनके नाम से जुड़ी कथा है कि एक समय कत नाम के प्रसिद्ध ऋषि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए, उन्हीं के नाम से प्रसिद्ध कात्य गोत्र से, विश्वप्रसिद्ध ऋषि कात्यायन उत्पन्न हुए। उन्होंने भगवती पराम्बरा की उपासना करते हुए कठिन तपस्या की। उनकी इच्छा थी कि भगवती उनके घर में पुत्री के रूप में जन्म लें। माता ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली। कुछ समय के पश्चात् जब महिषासुर नामक राक्षस का अत्याचार बहुत बढ़ गया था, तब उसका विनाश करने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपने अपने तेज़ और प्रताप का अंश देकर देवी को उत्पन्न किया था। महर्षि कात्यायन ने इनकी पूजा की इसी कारण से यह देवी कात्यायनी कहलायीं। अश्विन कृष्ण चतुर्दशी को जन्म लेने के बाद शुक्ल सप्तमी, अष्टमी और नवमी, तीन दिनों तक कात्यायन ऋषि ने इनकी पूजा की, पूजा ग्रहण कर दशमी को इस देवी ने महिषासुर का वध किया। इन का स्वरूप अत्यन्त ही दिव्य है। इनका वर्ण स्वर्ण के समान चमकीला है। इनकी चार भुजायें हैं, इनका दाहिना ऊपर का हाथ अभय मुद्रा में है, नीचे का हाथ वरदमुद्रा में है। बांये ऊपर वाले हाथ में तलवार और निचले हाथ में कमल का फूल है और इनका वाहन सिंह है। आज के दिन साधक का मन आज्ञाचक्र में स्थित होता है। योगसाधना में आज्ञाचक्र का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित साधक कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व अर्पित कर देता है। पूर्ण आत्मदान करने से साधक को सहजरूप से माँ के दर्शन हो जाते हैं। माँ कात्यायनी की भक्ति से मनुष्य को अर्थ, कर्म, काम, मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। मंत्र: चन्द्रहासोज्जवलकरा शाईलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।  या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।  ध्यान: वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्॥  स्वर्णाआज्ञा चक्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्। वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥  पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालंकार भूषिताम्। मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥  प्रसन्नवदना पञ्वाधरां कांतकपोला तुंग कुचाम्। कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम॥  स्तोत्र: कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां। स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥  पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां। सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥  परमांवदमयी देवि परब्रह्म परमात्मा। परमशक्ति, परमभक्ति,कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥  कवच: कात्यायनी मुखं पातु कां स्वाहास्वरूपिणी। ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥  कल्याणी हृदयं पातु जया भगमालिनी॥

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