Shanti Pathak
Shanti Pathak Mar 1, 2021

*जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन* *"सोने की गिन्नियों का बंटवारा"* 🙏🏻🚩🌹 👁❗👁 🌹🚩🙏🏻 एक दिन की बात है. दो मित्र सोहन और मोहन अपने गाँव के मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर बातें कर रहे थे. इतने में एक तीसरा व्यक्ति जतिन उनके पास आया और उनकी बातों में शामिल हो गया. तीनों दिन भर दुनिया-जहाँ की बातें करते रहे. कब दिन ढला? कब शाम हुई? बातों-बातों में उन्हें पता ही नहीं चला. शाम को तीनों को भूख लग आई. सोहन और मोहन के पास क्रमशः ३ और ५ रोटियाँ थीं, लेकिन जतिन के पास खाने के लिए कुछ भी नहीं था. सोहन और मोहन ने तय किया कि वे अपने पास की रोटियों को आपस में बांटकर खा लेंगें. जतिन उनकी बात सुनकर प्रसन्न हो गया. लेकिन समस्या यह खड़ी हो गई है कि कुल ८ रोटियों को तीनों में बराबर-बराबर कैसे बांटा जाए? सोहन इस समस्या का समाधान निकालते हुए बोला, “हमारे पर कुल ८ रोटियाँ हैं. हम इन सभी रोटियों के ३-३ टुकड़े करते हैं. इस तरह हमारे पास कुल २४ टुकड़े हो जायेंगे. उनमें से ८-८ टुकड़े हम तीनों खा लेंगें.” मोहन और जतिन को यह बात जंच गई और तीनों ने वैसा ही किया. रोटियाँ खाने के बाद वे तीनों उसी मंदिर की सीढ़ियों पर सो गए, क्योंकि रात काफ़ी हो चुकी थी. रात में तीनों गहरी नींद में सोये और सीधे अगली सुबह ही उठे. सुबह जतिन ने सोहन और मोहन से विदा ली और बोला, “मित्रों! कल तुम दोनों ने अपनी रोटियों में से तोड़कर मुझे जो टुकड़े दिए, उसकी वजह से मेरी भूख मिट पाई. इसके लिए मैं तुम दोनों का बहुत आभारी हूँ. यह आभार तो मैं कभी चुका नहीं पाऊंगा. लेकिन फिर भी उपहार स्वरुप मैं तुम दोनों को सोने की ये ८ गिन्नियाँ देना चाहता हूँ.” यह कहकर उसने सोने की ८ गिन्नियाँ उन्हें दे दी और विदा लेकर चला गया. सोने की गिन्नियाँ पाकर सोहन और मोहन बहुत खुश हुए. उन्हें हाथ में लेकर सोहन मोहन से बोला, “आओ मित्र, ये ८ गिन्नियाँ आधी-आधी बाँट लें. तुम ४ गिन्नी लो और ४ गिन्नी मैं लेता हूँ.” लेकिन मोहन ने ऐसा करने से इंकार कर दिया. वह बोला, “ऐसे कैसे? तुम्हारी ३ रोटियाँ थीं और मेरी ५. मेरी रोटियाँ ज्यादा थीं, इसलिए मुझे ज्यादा गिन्नियाँ मिलनी चाहिए. तुम ३ गिन्नी लो और मैं ५ लेता हूँ.” इस बात पर दोनों में बहस छोड़ गई. बहस इतनी बढ़ी कि मंदिर के पुजारी को बीच-बचाव के लिए आना पड़ा. पूछने पर दोनों ने एक दिन पहले का किस्सा और सोने की गिन्नियों की बात पुजारी जी को बता दी. साथ ही उनसे निवेदन किया कि वे ही कोई निर्णय करें. वे जो भी निर्णय करेंगे, उन्हें स्वीकार होगा. यूँ तो पुजारी जी को मोहन की बात ठीक लगी. लेकिन वे निर्णय में कोई गलती नहीं करना चाहते थे. इसलिए बोले, “अभी तुम दोनों ये गिन्नियाँ मेरे पास छोड़ जाओ. आज मैं अच्छी तरह सोच-विचार कर लेता हूँ. कल सुबह तुम लोग आना. मैं तुम्हें अपना अंतिम निर्णय बता दूंगा. सोहन और मोहन सोने की गिन्नियाँ पुजारी जी के पास छोड़कर चले गए. देर रात तक पुजारी जी गिन्नियों के बंटवारे के बारे में सोचते रहे. लेकिन किसी उचित निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सके. सोचते-सोचते उन्हें नींद आ गई और वे सो गए. नींद में उन्हें एक सपना आया. उस सपने में उन्हें भगवान दिखाई पड़े. सपने में उन्होंने भगवान से गिन्नियों के बंटवारे के बारे में पूछा, तो भगवान बोले, “सोहन को १ गिन्नी मिलनी चाहिए और मोहन को ७.” यह सुनकर पुजारी जी हैरान रह गए और पूछ बैठे, “ऐसा क्यों प्रभु?” तब भगवान जी बोले, “देखो, राम के पास ३ रोटियाँ थी, जिसके उसने ९ टुकड़े किये. उन ९ टुकड़ों में से ८ टुकड़े उसने ख़ुद खाए और १ टुकड़ा जतिन को दिया. वहीं मोहन में अपनी ५ रोटियों के १५ टुकड़े किये और उनमें से ७ टुकड़े जतिन को देकर ख़ुद ८ टुकड़े खाए. चूंकि सोहन ने जतिन को १ टुकड़ा दिया था और मोहन ने ७. इसलिए सोहन को १ गिन्नी मिलनी चाहिए और मोहन को ७.” पुजारी जी भगवान के इस निर्णय पर बहुत प्रसन्न और उन्हें कोटि-कोटि धन्यवाद देते हुए बोले, “प्रभु. मैं ऐसे न्याय की बात कभी सोच ही नहीं सकता था.” अगले दिन जब सोहन और मोहन मंदिर आकर पुजारी जी से मिले, तो पुजारी जी ने उन्हें अपने सपने के बारे में बताते हुए अंतिम निर्णय सुना दिया और सोने की गिन्नियाँ बांट दीं. मित्रों" जीवन में हम जब भी कोई त्याग करते हैं या काम करते हैं, तो अपेक्षा करते हैं कि भगवान इसके बदले हमें बहुत बड़ा फल देंगे. लेकिन जब ऐसा नहीं हो पाता, तो हम भगवान से शिकायत करने लग जाते हैं. हमें लगता है कि इतना कुछ त्याग करने के बाद भी हमें जो प्राप्त हुआ, वो बहुत कम है. भगवान ने हमारे साथ अन्याय किया है. लेकिन वास्तव में, भगवान का न्याय हमारी सोच से परे है. वह महज़ हमारे त्याग को नहीं, बल्कि समग्र जीवन का आंकलन कर निर्णय लेता है. इसलिए जो भी हमें मिला है, उसमें संतुष्ट रहना चाहिए और भगवान से शिकायतें नहीं करनी चाहिए. क्योंकि भगवान का निर्णय सदा न्याय-संगत होता है और हमें जीवन में जो भी मिल रहा होता है, वो बिल्कुल सही होता है. 🌹🙏🏻🚩 *जय सियाराम* 🚩🙏🏻🌹 🚩🙏🏻 *जय श्री महाकाल* 🙏🏻🚩

*जय श्री राधे कृष्णा जी*
*शुभरात्रि वंदन*

*"सोने की गिन्नियों का बंटवारा"*
🙏🏻🚩🌹 👁❗👁 🌹🚩🙏🏻
एक दिन की बात है. दो मित्र सोहन और मोहन अपने गाँव के मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर बातें कर रहे थे. इतने में एक तीसरा व्यक्ति जतिन उनके पास आया और उनकी बातों में शामिल हो गया.

तीनों दिन भर दुनिया-जहाँ की बातें करते रहे. कब दिन ढला? कब शाम हुई? बातों-बातों में उन्हें पता ही नहीं चला. शाम को तीनों को भूख लग आई. सोहन और मोहन के पास क्रमशः ३ और ५ रोटियाँ थीं, लेकिन जतिन के पास खाने के लिए कुछ भी नहीं था.

सोहन और मोहन ने तय किया कि वे अपने पास की रोटियों को आपस में बांटकर खा लेंगें. जतिन उनकी बात सुनकर प्रसन्न हो गया. लेकिन समस्या यह खड़ी हो गई है कि कुल ८ रोटियों को तीनों में बराबर-बराबर कैसे बांटा जाए?

सोहन इस समस्या का समाधान निकालते हुए बोला, “हमारे पर कुल ८ रोटियाँ हैं. हम इन सभी रोटियों के ३-३ टुकड़े करते हैं. इस तरह हमारे पास कुल २४ टुकड़े हो जायेंगे. उनमें से ८-८ टुकड़े हम तीनों खा लेंगें.”

मोहन और जतिन को यह बात जंच गई और तीनों ने वैसा ही किया. रोटियाँ खाने के बाद वे तीनों उसी मंदिर की सीढ़ियों पर सो गए, क्योंकि रात काफ़ी हो चुकी थी.

रात में तीनों गहरी नींद में सोये और सीधे अगली सुबह ही उठे. सुबह जतिन ने सोहन और मोहन से विदा ली और बोला,

“मित्रों! कल तुम दोनों ने अपनी रोटियों में से तोड़कर मुझे जो टुकड़े दिए, उसकी वजह से मेरी भूख मिट पाई. इसके लिए मैं तुम दोनों का बहुत आभारी हूँ. यह आभार तो मैं कभी चुका नहीं पाऊंगा. लेकिन फिर भी उपहार स्वरुप मैं तुम दोनों को सोने की ये ८ गिन्नियाँ देना चाहता हूँ.”

यह कहकर उसने सोने की ८ गिन्नियाँ उन्हें दे दी और विदा लेकर चला गया. 

सोने की गिन्नियाँ पाकर सोहन और मोहन बहुत खुश हुए. उन्हें हाथ में लेकर सोहन मोहन से बोला, “आओ मित्र, ये ८ गिन्नियाँ आधी-आधी बाँट लें. तुम ४ गिन्नी लो और ४ गिन्नी मैं लेता हूँ.”
लेकिन मोहन ने ऐसा करने से इंकार कर दिया. वह बोला, “ऐसे कैसे? तुम्हारी ३ रोटियाँ थीं और मेरी ५. मेरी रोटियाँ ज्यादा थीं, इसलिए मुझे ज्यादा गिन्नियाँ मिलनी चाहिए. तुम ३ गिन्नी लो और मैं ५ लेता हूँ.”

इस बात पर दोनों में बहस छोड़ गई. बहस इतनी बढ़ी कि मंदिर के पुजारी को बीच-बचाव के लिए आना पड़ा. पूछने पर दोनों ने एक दिन पहले का किस्सा और सोने की गिन्नियों की बात पुजारी जी को बता दी. साथ ही उनसे निवेदन किया कि वे ही कोई निर्णय करें. वे जो भी निर्णय करेंगे, उन्हें स्वीकार होगा.
यूँ तो पुजारी जी को मोहन की बात ठीक लगी. लेकिन वे निर्णय में कोई गलती नहीं करना चाहते थे. इसलिए बोले, “अभी तुम दोनों ये गिन्नियाँ मेरे पास छोड़ जाओ. आज मैं अच्छी तरह सोच-विचार कर लेता हूँ. कल सुबह तुम लोग आना. मैं तुम्हें अपना अंतिम निर्णय बता दूंगा.

सोहन और मोहन सोने की गिन्नियाँ पुजारी जी के पास छोड़कर चले गए. देर रात तक पुजारी जी गिन्नियों के बंटवारे के बारे में सोचते रहे. लेकिन किसी उचित निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सके. सोचते-सोचते उन्हें नींद आ गई और वे सो गए. नींद में उन्हें एक सपना आया. उस सपने में उन्हें भगवान दिखाई पड़े. सपने में उन्होंने भगवान से गिन्नियों के बंटवारे के बारे में पूछा, तो भगवान बोले, “सोहन को १ गिन्नी मिलनी चाहिए और मोहन को ७.”

यह सुनकर पुजारी जी हैरान रह गए और पूछ बैठे, “ऐसा क्यों प्रभु?”

तब भगवान जी बोले, “देखो, राम के पास ३ रोटियाँ थी, जिसके उसने ९ टुकड़े किये. उन ९ टुकड़ों में से ८ टुकड़े उसने ख़ुद खाए और १ टुकड़ा जतिन को दिया. वहीं मोहन में अपनी ५ रोटियों के १५ टुकड़े किये और उनमें से ७ टुकड़े जतिन को देकर ख़ुद ८ टुकड़े खाए. चूंकि सोहन ने जतिन को १ टुकड़ा दिया था और मोहन ने ७. इसलिए सोहन को १ गिन्नी मिलनी चाहिए और मोहन को ७.”

पुजारी जी भगवान के इस निर्णय पर बहुत प्रसन्न और उन्हें कोटि-कोटि धन्यवाद देते हुए बोले, “प्रभु. मैं ऐसे न्याय की बात कभी सोच ही नहीं सकता था.”

अगले दिन जब सोहन और मोहन मंदिर आकर पुजारी जी से मिले, तो पुजारी जी ने उन्हें अपने सपने के बारे में बताते हुए अंतिम निर्णय सुना दिया और सोने की गिन्नियाँ बांट दीं.

मित्रों" जीवन में हम जब भी कोई त्याग करते हैं या काम करते हैं, तो अपेक्षा करते हैं कि भगवान इसके बदले हमें बहुत बड़ा फल देंगे. लेकिन जब ऐसा नहीं हो पाता, तो हम भगवान से शिकायत करने लग जाते हैं. हमें लगता है कि इतना कुछ त्याग करने के बाद भी हमें जो प्राप्त हुआ, वो बहुत कम है. भगवान ने हमारे साथ अन्याय किया है. लेकिन वास्तव में, भगवान का न्याय हमारी सोच से परे है. वह महज़ हमारे त्याग को नहीं, बल्कि समग्र जीवन का आंकलन कर निर्णय लेता है. इसलिए जो भी हमें मिला है, उसमें संतुष्ट रहना चाहिए और भगवान से शिकायतें नहीं करनी चाहिए. क्योंकि भगवान का निर्णय सदा न्याय-संगत होता है और हमें जीवन में जो भी मिल रहा होता है, वो बिल्कुल सही होता है.
🌹🙏🏻🚩 *जय सियाराम* 🚩🙏🏻🌹
🚩🙏🏻 *जय श्री महाकाल* 🙏🏻🚩

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कामेंट्स

Suman Lata Mar 1, 2021
🌷🌷Jai Shri Radhe krishna ji 🙏🙏Shubh ratri vandan meri piyari behena ji 🙏🙏🌷🌷Aap ka daman khushiyon se sda bhara rhe 🌷🌷

💫Shuchi Singhal💫 Mar 1, 2021
Jai Shri Krishna Radhe Radhe Shub Ratri dear sister ji Bhole Baba ki kirpa aapki family pe bni rhe sda Pyari Bhena ji🙏🌿🙏🌿

Rajpal singh Mar 1, 2021
jai shree krishna Radhey Radhey ji good night ji 🙏🙏

Renu Singh Mar 1, 2021
Jai Shree Radhe Krishna 🙏 Shubh Ratri Vandan Meri Pyari Bahena Ji 🙏 Thakur Ji ki kripa Se Aàpka Har Din Har Pal Shubh V Mangalmay ho Bahena Ji 🙏🌹🙏

Radhe Krishna Mar 1, 2021
जय श्री राधे राधे कृष्णा🌹🌹 शुभ रात्रि वंदन🌹🌹

💥Radha Sharma💥 Mar 1, 2021
जय श्री राधे कृष्णा प्यारी बहना जी 🙏

💥Radha Sharma💥 Mar 1, 2021
शुभ रात्रि वंदन प्यारी बहना जी 🙏

dhruv wadhwani Mar 1, 2021
ओम नमः शिवाय शुभ रात्रि जी

Sunil Kumar Saini Mar 1, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जी 👏 शुभ रात्री 🌸 🌸 नमन 🙏 वंदन जी 🏵️ आपका हर पल मंगल हो 🏵️ राधे राधे जी 🙏 ।। 🌹 🌹

k l तिवारी Mar 1, 2021
🌹🌷राधे राधे बहन❤️💜           🌷🌷🌷जय श्री कृष्ण🌷🌷🌷       🌾🌾🌾🌸जय श्री माता की🌺🌾🌾🌾 🌼*******शुभरात्रि*****🌼              🌼***************वन्दन🌼         🌼******मेरी प्यारी बहना******* 🌼🌼🌷राधा रानी🌷 आपको सदा सुखी रखें🌹🌼🌼 🌿🍂🌿हमेशा हँसती रहो💗 मुस्कराती रहो 💝गुनगुनाती रहो🌿🍂🌿

madan pal 🌷🙏🏼 Mar 1, 2021
जय श्री राधे राधे राधे कृष्णा ज़ी शूभ रात्रि वंदन ज़ी आपका हर पल शूभ मंगल हों ज़ी 🌷🕉️🙏🏼🕉️🙏🏼🌹🙏🏼

Anilkumar Marathe Mar 1, 2021
जय श्रीकृष्ण नमस्कार खुशियो की सदाबहार आदरणीय प्यारी शान्ति जी !! 🌹आप जहाँ रहे वहाँ दुआओं की छाँव हो, आपकी आँखों में कभी कोई गम ना हो बस यही दुआ है हमारी कि आपकी खुशियां कभी कम ना हों, ईश्वर का हाथ सदा आप और आपके परिवार पर बना रहे, जिंदगी आपकी खुशियों से भरी रहे यही हमारी शुभकामनाएं !! 🌹शुभ रात्रि वंदन जी !!

GOVIND CHOUHAN Mar 1, 2021
JAI SHREE RADHEY RADHEY JIII 🌺 JAI SHREE RADHEY KRISHNA JII 🌺 SUBH RATRI VANDAN PRANAAM JII DIDI 🙏🙏

Ravi Kumar Taneja Mar 1, 2021
🌹🌹🌹श्रीराम भक्त हनुमानजी की कृपा दृष्टि सपरिवार आप पर बनी रहे 🌹🌹🌹 सियाराम जी का आशीर्वाद आप को सपरिवार मिले 🌹🙏🌹 🌷🌷🌷आपकी दिल की हर एक इच्छा पवनसुत पूरी करे 🌷🌷🌷 🙏जय जय जय बजरंगबली 🙏 सुप्रभात वंदना जी 🙏🥀🙏 प्रभु कृपा आप पर हमेशा बनी रहे🕉🦋🙏🌺🙏🌺🙏🦋🕉

BK WhatsApp STATUS Mar 2, 2021
जय श्री राधे कृष्ण शुभ प्रभात स्नेह वंदन धन्यवाद 🌹🙏🙏

Shanti Pathak Apr 10, 2021

*जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन* : 🌹🌹 *सकारात्मक सोच*🌹🌹 एक राजा के पास कई हाथी थे, लेकिन एक हाथी बहुत शक्तिशाली था, बहुत आज्ञाकारी, समझदार व युद्ध-कौशल में निपुण था। बहुत से युद्धों में वह भेजा गया था और वह राजा को विजय दिलाकर वापस लौटा था, इसलिए वह महाराज का सबसे प्रिय हाथी था। समय गुजरता गया ... और एक समय ऐसा भी आया, जब वह वृद्ध दिखने लगा। अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर पाता था। इसलिए अब राजा उसे युद्ध क्षेत्र में भी नहीं भेजते थे। एक दिन वह सरोवर में जल पीने के लिए गया, लेकिन वहीं कीचड़ में उसका पैर धँस गया और फिर धँसता ही चला गया। उस हाथी ने बहुत कोशिश की, लेकिन वह उस कीचड़ से स्वयं को नहीं निकाल पाया। उसकी चिंघाड़ने की आवाज से लोगों को यह पता चल गया कि वह हाथी संकट में है। हाथी के फँसने का समाचार राजा तक भी पहुँचा। राजा समेत सभी लोग हाथी के आसपास इक्कठा हो गए और विभिन्न प्रकार के शारीरिक प्रयत्न उसे निकालने के लिए करने लगे। लेकिन बहुत देर तक प्रयास करने के उपरांत कोई मार्ग नहि निकला. तब राजा के एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि तथागत गौतम बुद्ध मार्गभ्रमण कर रहे है तो क्यो ना तथागत गौतम बुद्ध से सलाह मांगि जाये. राजा और सारा मंत्रीमंडल तथागत गौतम बुद्ध के पास गये और अनुरोध किया कि आप हमे इस बिकट परिस्थिती मे मार्गदर्शन करे. तथागत गौतम बुद्ध ने सबके अनुरोध को स्वीकार किया और घटनास्थल का निरीक्षण किया और फिर राजा को सुझाव दिया कि सरोवर के चारों और युद्ध के नगाड़े बजाए जाएँ। सुनने वालोँ को विचित्र लगा कि भला नगाड़े बजाने से वह फँसा हुआ हाथी बाहर कैसे निकलेगा, जो अनेक व्यक्तियों के शारीरिक प्रयत्न से बाहर निकल नहीं पाया। आश्चर्यजनक रूप से जैसे ही युद्ध के नगाड़े बजने प्रारंभ हुए, वैसे ही उस मृतप्राय हाथी के हाव-भाव में परिवर्तन आने लगा। पहले तो वह धीरे-धीरे करके खड़ा हुआ और फिर सबको हतप्रभ करते हुए स्वयं ही कीचड़ से बाहर निकल आया। अब तथागत गौतम बुद्ध ने सबको स्पष्ट किया कि हाथी की शारीरिक क्षमता में कमी नहीं थी, आवश्यकता मात्र उसके अंदर उत्साह के संचार करने की थी। हाथी की इस कहानी से यह स्पष्ट होता है कि यदि हमारे मन में एक बार उत्साह – उमंग जाग जाए तो फिर हमें कार्य करने की ऊर्जा स्वतः ही मिलने लगती है और कार्य के प्रति उत्साह का मनुष्य की उम्र से कोई संबंध नहीं रह जाता। *जीवन में उत्साह बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि मनुष्य सकारात्मक रहे।* 🌹 *राधे राधे*🌹 *भाई तू बड़ा हो गया* मायके आयी रमा, माँ को हैरानी से देख रही थी। माँ बड़े ध्यान से आज के अखबार के मुख पृष्ठ के पास दिन का खाना सजा रही थी। दाल, रोटी, सब्जी और रायता। फिर झट से फोटो खींच व्हाट्सप्प करने लगीं। “माँ ये खाना खाने से पहले फोटो लेने का क्या शौक हो गया है आपको ?” “अरे वो जतिन बेचारा, इतनी दूर रह कर हॉस्टल का खाना ही खा रहा है। कह रहा था की आप रोज लंच और डिनर के वक्त अपने खाने की तस्वीर भेज दिया करो उसे देख कर हॉस्टल का खाना खाने में आसानी रहती है। “ “क्या माँ लाड-प्यार में बिगाड़ रखा है तुमने उसे। वो कभी बड़ा भी होगा या बस ऐसी फालतू की जिद करने वाला बच्चा ही बना रहेगा !” रमा ने शिकायत की। रमा ने खाना खाते ही झट से जतिन को फोन लगाया। “जतिन माँ की ये क्या ड्यूटी लगा रखी है? इतनी दूर से भी माँ को तकलीफ दिए बिना तेरा दिन पूरा नहीं होता क्या ?” “अरे नहीं दीदी ऐसा क्यों कह रही हो। मैं क्यों करूंगा माँ को परेशान ?” “तो प्यारे भाई ये लंच और डिनर की रोज फोटो क्यों मंगवाते हो ?” बहन की शिकायत सुन जतिन हंस पड़ा। फिर कुछ गंभीर स्वर में बोल पड़ा : “दीदी पापा की मौत , तुम्हारी शादी और मेरे हॉस्टल जाने के बाद अब माँ अकेली ही तो रह गयी हैं। पिछली बार छुट्टियों में घर आया तो कामवाली आंटी ने बताया की वो किसी- किसी दिन कुछ भी नहीं बनाती। चाय के साथ ब्रेड खा लेती हैं या बस खिचड़ी। पूरे दिन अकेले उदास बैठी रहती हैं। तब उन्हें रोज ढंग का खाना खिलवाने का यही तरीका सूझा। मुझे फोटो भेजने के चक्कर में दो टाइम अच्छा खाना बनाती हैं। फिर खा भी लेती हैं और इस व्यस्तता के चलते ज्यादा उदास भी नहीं होती। “ जवाब सुन रमा की ऑंखें छलक आयी। रूंधे गले से बस इतना बोल पायी भाई तू सच में बड़ा हो गया है….. सदैव प्रसन्न रहिये जो प्राप्त है-पर्याप्त है

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Shanti Pathak Apr 9, 2021

*जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन* नीति कथा एक मन्दिर था । उसमें सभी लोग पगार पर थे। आरती वाला, पूजा कराने वाला आदमी, घण्टा बजाने वाला भी पगार पर था… घण्टा बजाने वाला आदमी आरती के समय, भाव के साथ इतना मसगुल हो जाता था कि होश में ही नहीं रहता था। घण्टा बजाने वाला व्यक्ति पूरे भक्ति भाव से खुद का काम करता था।मन्दिर में आने वाले सभी व्यक्ति भगवान के साथ साथ घण्टा बजाने वाले व्यक्ति के भाव के भी दर्शन करते थे।उसकी भी वाह वाह होती थी… एक दिन मन्दिर का ट्रस्ट बदल गया,और नये ट्रस्टी ने ऐसा आदेश जारी किया कि अपने मन्दिर में *काम करते सब लोग पढ़े लिखे होना जरूरी है। जो पढ़े लिखें नही है, उन्हें निकाल दिया जाएगा।* उस घण्टा बजाने वाले भाई को ट्रस्टी ने कहा कि ‘तुम्हारी आज तक का पगार ले लो। कल से तुम नौकरी पर मत आना।’ उस घण्टा बजाने वाले व्यक्ति ने कहा, “साहेब भले मैं पढ़ा लिखा नही हूं,परन्तु इस कार्य में मेरा भाव भगवान से जुड़ा हुआ है, देखो!” ट्रस्टी ने कहा,”सुन लो तुम पढ़े लिखे नही हो, इसलिए तुम्हे रखने में नही आएगा…” दूसरे दिन मन्दिर में नये लोगो को रखने में आया। परन्तु आरती में आये लोगो को अब पहले जैसा मजा नहीं आता था। घण्टा बजाने वाले व्यक्ति की सभी को कमी महसूस होती थी। कुछ लोग मिलकर घण्टा बजाने वाले व्यक्ति के घर गए, और विनती करी तुम मन्दिर आओ । उस भाई ने जवाब दिया, “मैं आऊंगा तो ट्रस्टी को लगेगा कि मैं नौकरी लेने के लिए आया है। इसलिए मैं नहीं आ सकता।” वहा आये हुए लोगो ने एक उपाय बताया कि ‘मन्दिर के बराबर सामने आपके लिए एक दुकान खोल के देते है। वहाँ आपको बैठना है और आरती के समय घण्टा बजाने आ जाना, फिर कोई नहीं कहेगा तुमको नौकरी की जरूरत है …” उस भाई ने मन्दिर के सामने दुकान शुरू की और वो इतनी चली कि एक दुकान से सात दुकान और सात दुकानो से एक फैक्ट्री खोली। अब वो आदमी मर्सिडीज़ से घण्टा बजाने आता था। समय बीतता गया। ये बात पुरानी सी हो गयी। मन्दिर का ट्रस्टी फिर बदल गया . नये ट्रस्ट को नया मन्दिर बनाने के लिए दान की जरूरत थी मन्दिर के नये ट्रस्टी को विचार आया कि सबसे पहले उस फैक्ट्री के मालिक से बात करके देखते है .. ट्रस्टी मालिक के पास गया ।सात लाख का खर्चा है, फैक्ट्री मालिक को बताया। फैक्ट्री के मालिक ने कोई सवाल किये बिना एक खाली चेक ट्रस्टी के हाथ में दे दिया और कहा चैक भर लो ट्रस्टी ने चैक भरकर उस फैक्ट्री मालिक को वापस दिया । फैक्ट्री मालिक ने चैक को देखा और उस ट्रस्टी को दे दिया। ट्रस्टी ने चैक हाथ में लिया और कहा सिग्नेचर तो बाकी है” मालिक ने कहा मुझे सिग्नेचर करना नंही आता है लाओ *अंगुठा मार देता हुँ,* “वही चलेगा …” *ये सुनकर ट्रस्टी चौक गया और कहा*, “साहेब तुमने अनपढ़ होकर भी इतनी तरक्की की, यदि पढे लिखे होते तो कहाँ होते …!!!” तो वह सेठ हँसते हुए बोला, *”भाई, मैं पढ़ा लिखा होता तो बस मन्दिर में घण्टा बजा रहा होता”* कथा सार- कार्य कोई भी हो, परिस्थिति कैसी भी हो, तुम्हारी *काबिलियत* तुम्हारी *भावनाओ* पर निर्भर करती है । भावनायें *शुद्ध* होगी तो *ईश्वर* और *सुंदर भविष्य* पक्का तुम्हारा साथ देगा ।

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Archana Singh Apr 9, 2021

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Archana Singh Apr 8, 2021

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Deep Apr 10, 2021

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