शनिदेव
शनिदेव Aug 11, 2017

शनिदेव आरती दर्शन, शिंगणापुर से।

शनिदेव आरती:
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनि देव....

श्याम अंग वक्र-दृ‍ष्टि चतुर्भुजा धारी।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
जय जय श्री शनि देव....

क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
जय जय श्री शनि देव....

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
जय जय श्री शनि देव....

देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।

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कामेंट्स

गणेश मामीडवार Aug 12, 2017
निलांजन समाहासम रविपुत्रम यमाग्रजम छायामार्तंड शंभुतम तननमामी शनिष्चनम

गणेश मामीडवार Aug 12, 2017
निलांजन समाहासम रविपुत्रम यमाग्रजम छायामार्तंड शंभुतम तननमामी शनिष्चनम

Ashish Garg Aug 12, 2017
जय शनिदेव महाराज जी

Sushila Sharma. Aug 12, 2017
जय शनि देव महाराज प्रणाम ।

bhagwan bajaj Aug 12, 2017
जय श्री शनिदेव महाराज की जय

गणेश मामीडवार May 26, 2018
निलांजन समाहासम रविपुत्रम यमाग्रजम छायामार्तंड शंभुतम तननमामी शनिष्चनम

simran Dec 14, 2019

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Rajesh Agrawal Dec 14, 2019

शनि चरित्र में कर्म की प्रधानता है। शनि उपासना कर्म और कर्तव्य के प्रति दृढ़ संकल्पित व प्रेरित करती है। शास्त्रों के मुताबिक शनि बुरे कर्म करने पर ही प्राणियों को अनेक तरह से दण्डित करते हैं, जो धार्मिक दृष्टि से शनि दशा, शनि की चाल या शनि की क्रूर दृष्टि के रूप में जानी जाती है। माना जाता है कि सांसारिक जीवन में शनि का यह दण्ड शरीर, मन या आर्थिक परेशानियों के रूप में मिलता है। चूंकि हर प्राणी कर्म व कर्तव्यों से किसी न किसी रूप में जुड़ा होता है, इसलिए जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए पैदा हुई हित या स्वार्थ पूर्ति की भावना से जाने-अनजाने मन, विचार व कर्म दोषों का भागी बनता है। धर्म की दृष्टि से ऐसे दोषों का शमन प्रायश्चित व क्षमा द्वारा संभव है।यही कारण है कि किसी भी रूप में कर्म, विचार या व्यवहार से हुए बुरे कामों के लिए न्यायाधीश शनि का ध्यान कर उनसे विशेष मंत्र से क्षमा मांगना शनि कृपा से सारे रुके, बिगड़े या मनचाहे कामों को पूरा करने का बेहतर उपाय साबित होगा। शनिवार को शनि पूजा कर क्षमा प्रार्थना का विशेष मंत्र बोलें – शनिवार को स्नान के बाद यथासंभव काले वस्त्र पहनकर शनि मंदिर में शनि देव का ध्यान कर प्रतिमा को पवित्र जल, तिल या सरसों का तेल, काला वस्त्र, अक्षत, फूल, नैवेद्य अर्पित करें। सरल शनि मंत्रों जैसे ‘ॐ शं शनिश्चराय नम:’ शनि चालीसा या शनि स्त्रोत का पाठ करें।– मंत्र ध्यान व पूजा के बाद शनिदेव की आरती कर नीचे लिखे मंत्र से जाने-अनजाने हुए बुरे कर्म व विचार के लिये क्षमा मांग आने वाले वक्त को सुखद व सफल बनाने की कामना करें -  अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।।गतं पापं गतं दु:खं गतं दारिद्रय मेव च।आगता: सुख-संपत्ति पुण्योऽहं तव दर्शनात्।।

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Kamlesh Dec 13, 2019

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Asha Bakshi Dec 14, 2019

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Shanti pathak Dec 13, 2019

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Sanjay Singh Dec 14, 2019

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