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कामेंट्स

Shivsanker Shukla Sep 15, 2021
सुप्रभात भैया जी राधे राधे

Radhe Krishna Sep 15, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जी 🙏🏻🌹

🌷JK🌷 Sep 15, 2021
🌹🌹Jai Sri Ganesh🌹🌹 Good morning ji🙏

Neha Sharma Sep 15, 2021
*ॐ श्री गणेशाय नमः*🙏🌺🌺 *आज का भगवद् चिंतन..... *हमारी संस्कृति में अन्न को देवता माना गया है....अन्न ब्रह्म है....कहते भी है....जैसा खाए अन्न वैसा हो जाए मन.... हमारे पूर्वज भोजन व्यवस्था का पूर्ण ध्यान रखते थे.... शुद्धता.... शुचिता.... कब खाएं....क्या खाएं....क्या ना खाएं....पूरी नियमावली थी....।* *पर इस बदलते वक्त में सब धीरे धीरे बदल गया....विकास की इस दौड़ में हम भोजन की उस पुरातन व्यवस्था से विमुख हुए जा रहे हैं....कोई बात नहीं....पर थोड़ा सा ध्यान हम अब भी रख सकते हैं.... हम जो भी खाएं श्री ठाकुर जी को नैवेद्य अर्पित कर खाएं....या यूं समझें हम वो ही खाएं जो ठाकुर जी को समर्पित हो सके....जब हम ठाकुर जी को भोग लगा प्रसाद पाएंगे....तो वो स्वत: अमृत तुल्य हो गया....।* *जैसा भोजन वैसा ही भजन....जैसा भजन वैसी भक्ति....जैसी भक्ति वैसी ठाकुर जी की शरणानुगति.... फ़िर तो भीतर बाहर सब ब्रह्म....* *जय-जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌺🌺

Pinu Dhiman Jai Shiva 🙏 Sep 15, 2021
जय श्री गणेश जी सुप्रभात वंदन भाई जी 🙏🏵️🙏गणपति जी की कृपा और आशीर्वाद से आपके सारे मनोरथ सिद्ध हो आप की सभी मनोकामनाएं पूरी हो आप हमेशा खुश रहो स्वस्थ रहो सुखी रहो भाई जी 🙏🙌🪔🔔🪔🔔🪔🔔🪔🔔🪔🔔🪔🔔🪔🔔

💖Poonam Sharma💖 Sep 15, 2021
🙏💐OM GANESHAY NAMO NAMAH 💐🙏 JAI SHREE RADHE KRISHNA JI 💐🙏GOOD DAY 💐HAVE A NICE DAY 💐🙏

VarshaLohar Sep 15, 2021
shubh dophar vandan jai shree krishna radhey radhey.🙏

dhruvwadhwani Sep 15, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे जय जय श्री राधे कृष्णा

kamlesh goyal Oct 16, 2021

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Amit Kumar Oct 14, 2021

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Sarla Rana Oct 15, 2021

. कल शनिवार दिनांक 16.10.2021 को आनेवाली है, संवत् २०७८ आश्विन मास के शुक्लपक्ष की 👇🏻 "पापांकुशा एकादशी" आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहते हैं। इस एकादशी पर मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, जो मनुष्य कठिन तपस्याओं के द्वारा फल प्राप्त करते हैं, वही फल इस एकादशी पर शेषनाग पर शयन करने वाले श्रीविष्णु को नमस्कार करने से ही मिल जाते हैं और मनुष्य को यमलोक के दु:ख नहीं भोगने पड़ते हैं। यह एकादशी उपवासक (व्रत करने वाले) के मातृपक्ष के दस और पितृपक्ष के दस पितरों को विष्णु लोक लेकर जाती है। पापाकुंशा एकादशी हजार अश्वमेघ और सौ सूर्ययज्ञ करने के समान फल प्रदान करने वाली होती है। इस एकादशी व्रत के समान अन्य कोई व्रत नहीं है। इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति इस एकादशी की रात्रि में जागरण करता है वह स्वर्ग का भागी बनता है। इस एकादशी के दिन दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु भक्तों के लिए एकादशी के दिन व्रत करना प्रभु भक्ति के मार्ग में प्रगति करने का माध्यम बनता है। "व्रत विधि" इस व्रत का पालन दशमी तिथि के दिन से ही करना चाहिए। दशमी तिथि पर सात धान्य अर्थात गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर की दाल नहीं खानी चाहिए, क्योंकि इन सातों धान्यों की पूजा एकादशी के दिन की जाती है। जहां तक संभव हो दशमी तिथि और एकादशी तिथि दोनों ही दिनों में कम से कम बोलना चाहिए। दशमी तिथि को भोजन में तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए और पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। एकादशी तिथि पर सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प अपनी शक्ति के अनुसार ही लेना चाहिए यानी एक समय फलाहार का या फिर बिना भोजन का। संकल्प लेने के बाद घट स्थापना की जाती है और उसके ऊपर श्रीविष्णुजी की मूर्ति रखी जाती है। इसके साथ भगवान विष्णु का स्मरण एवं उनकी कथा का श्रवण किया जाता है। इस व्रत को करने वाले को विष्णु के सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए। इस व्रत का समापन एकादशी तिथि में नहीं होता है, बल्कि द्वादशी तिथि की प्रात: में ब्राह्माणों को अन्न का दान और दक्षिणा देने के बाद ही यह व्रत समाप्त होता है। "कथा" प्राचीन समय में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नामक एक बहेलिया रहता था। वह बड़ा क्रूर था। उसका सारा जीवन पाप कर्मों में बीता। जब उसका अंत समय आया तो वह मृत्यु के भय से कांपता हुआ महर्षि अंगिरा के आश्रम में पहुंचकर याचना करने लगा- हे ऋषिवर, मैंने जीवन भर पाप कर्म ही किए हैं। कृपा कर मुझे कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे मेरे सारे पाप मिट जाएं और मोक्ष की प्राप्ति हो जाए। उसके निवेदन पर महर्षि अंगिरा ने उसे पापांकुशा एकादशी का व्रत करके को कहा। महर्षि अंगिरा के कहे अनुसार उस बहेलिए ने पूर्ण श्रद्धा के साथ यह व्रत किया और किए गए सारे पापों से छुटकारा पा लिया। "महत्व" पापांकुशा एकादशी व्रत में यथासंभव दान व दक्षिणा देनी चाहिए। पूर्ण श्रद्धा के साथ यह व्रत करने से समस्त पापों से छुटकारा प्राप्त होता है। शास्त्रों में एकादशी के दिन की महत्ता को पूर्ण रुप से प्रतिपादित किया गया है। इस दिन उपवास रखने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। जो लोग पूर्ण रूप से उपवास नहीं कर सकते उनके लिए मध्याह्न या संध्या काल में एक समय भोजन करके एकादशी व्रत करने की बात कही गई है। एकादशी जीवों के परम लक्ष्य, भगवद भक्ति, को प्राप्त करने में सहायक होती है। यह दिन प्रभु की पूर्ण श्रद्धा से सेवा करने के लिए अति शुभकारी एवं फलदायक माना गया है। इस दिन व्यक्ति इच्छाओं से मुक्त हो कर यदि शुद्ध मन से भगवान की भक्तिमयी सेवा करता है तो वह अवश्य ही प्रभु की कृपापात्र बनता है। ----------:::×:::---------- "जय जय श्रीहरि" ******************************************* "श्रीजी की चरण सेवा" की सभी धार्मिक, आध्यात्मिक एवं धारावाहिक पोस्टों के लिये हमारे पेज से जुड़े रहें तथा अपने सभी भगवत्प्रेमी मित्रों को भी आमंत्रित करें👇 https://www.facebook.com/श्रीजी-की-चरण-सेवा-724535391217853/

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Kanta Kamra Oct 16, 2021

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Mamta Chauhan Oct 16, 2021

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Vandana Singh Oct 16, 2021

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Shudha Mishra Oct 16, 2021

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