हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष मत्स्य जयंती चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाई जाती है। मत्स्य पुराण के अनुसार, पुष्पभद्रा नदी के तट पर भगवान विष्णु ने अपना पहला अवतार मत्स्य के रूप में लिया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह कहा जाता है कि इस सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने मत्स्य का अवतार लिया था। उन्होंने एक विशाल नाव का निर्माण किया था और इसमें इस पृथ्वी पर मौजूद सभी जनजातियों को जगह दे कर सबकी जान बचाई थी। कहा जाता है कि जो भक्त मत्स्य जयंती पर भगवान विष्णु की पूजा करता है उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं तथा उस‌ इंसान को अपने किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है। मत्स्य जयंती 2021 मत्स्य जयंती की कथा द्रविड़ देश के राजर्षि सत्यव्रत एक दिन कृतमाला नदी में स्नान कर रहे थे। जलि में जल लेने पर उनके हाथ में एक छोटी सी मछली आ गई। राजा ने मछली को पुन: नदी के जल में छोड़ दिया। जैसे ही उन्होंने मछली को जल में पुनः छोड़ा तो उसने कहा कि हे राजन नदी के बड़े बड़े जीव छोटे जीवों को खा जाते हैं। मुझे भी कोई मारकर खा जाएगा। कृपया मेरे प्राणों की रक्षा करें। यह बात सुनकर मछली को अपने कमंडल में डाल दिया, लेकिन एक ही रात्रि में मछली का शरीर इतना बड़ गया कि कमंडल छोटा पड़ने लगा। तब राजा ने मछली को निकालकर मटके में डाल दिया। वहां भी मछली एक रात में बड़ी हो गई। तब राजा ने मछली को निकालकर अपने सरोवर में डाल दिया। अब वह निश्चिंत थे कि सरोवर में वह सुविधापूर्ण तरीके से रहेगी, लेकिन एक ही रात में मछली के लिए सवरोवर भी छोटा पड़ने लगा।  तब राजा समझ गए कि यह कोई साधारण मछली नहीं है। उन्होंने उस मछली के समक्ष हाथ जोड़कर कहा कि मैं जान गया हूं कि निश्चय ही आप कोई महान आत्मा हैं। यदि यह बात सत्य है, तो कृपा करके बताइए कि आपने मत्स्य का रूप क्यों धारण किया है? तब राजर्षि सत्यव्रत के समक्ष भगवान विष्णु अपने असली स्वरूप में प्रकट हुए और कहा कि हे राजन। हयग्रीव नामक दैत्य ने वेदों को चुरा लिया है। इस कारण जगत में चारों ओर अज्ञान और अधर्म का अंधकार फैला गया है। मैंने हयग्रीव का अंत करने के लिए ही मत्स्य का रूप धारण किया है। आज से सातवें दिन भूमि जल प्रलय में डूब जाएगी। तब तक तुम एक नौका बनवा लो और समस्त प्राणियों के सूक्ष्म शरीर तथा सब प्रकार के बीज लेकर सप्तर्षियों के साथ उस नौका पर चढ़ जाना। प्रचंड आंधी के कारण जब नाव डगमगाने लगेगी, तब मैं मत्स्य रूप में तुम सबको बचाऊंगा। तुम लोग नाव को मेरे सींग से बांध देना। प्रलय के अंत तक मैं तुम्हारी नाव खींचता रहूंगा। उस समय भगवान मत्स्य ने नौका को हिमालय की चोटी से बांध दिया। उसे चोटी को नौकाबंध कहा जाता है। प्रलय का प्रकोप शांत होने पर भगवान ने हयग्रीव का वध किया और वेदों को पुनः ब्रह्माजी को सौंप दिया। भगवान ने प्रलय समाप्त होने पर राजा सत्यव्रत को वेद का ज्ञान वापस दिया। राजा सत्यव्रत ज्ञान-विज्ञान से युक्त हो वैवस्वत मनु कहलाए। उक्त नौका में जो बच गए थे, उन्हीं से संसार में पुनः जीवन चला। मत्स्य जयंती का महत्व जो भक्त मत्स्य जयंती पर भगवान विष्णु के पहले अवतार मत्स्य की पूजा करता है उसे विशेष लाभ मिलता है। मत्स्य जयंती पर मत्स्य पुराण को सुनने और पढ़ने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस दिन जो इंसान मछलियों को आटे की गोली खिलाता है उसे पुण्य मिलता है। मत्स्य जयंती व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है तथा मछलियों को नदी या समुद्र में छोड़ने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं तथा अपनी कृपा बरसाते हैं। ॐ नमो नारायण ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जय श्री कृष्ण राधे राधे नमस्कार 🙏 शुभ रात्री वंदन 👣 🌹 👏 जय श्री राम जय श्री कृष्ण जय श्री हरी ॐ 🙏 🚩 आप का हर पल मस्त रहे स्वस्त रहे नमस्कार 🙏

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष मत्स्य जयंती चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाई जाती है। मत्स्य पुराण के अनुसार, पुष्पभद्रा नदी के तट पर भगवान विष्णु ने अपना पहला अवतार मत्स्य के रूप में लिया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह कहा जाता है कि इस सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने मत्स्य का अवतार लिया था। उन्होंने एक विशाल नाव का निर्माण किया था और इसमें इस पृथ्वी पर मौजूद सभी जनजातियों को जगह दे कर सबकी जान बचाई थी। कहा जाता है कि जो भक्त मत्स्य जयंती पर भगवान विष्णु की पूजा करता है उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं तथा उस‌ इंसान को अपने किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है।

मत्स्य जयंती 2021


मत्स्य जयंती की कथा 
द्रविड़ देश के राजर्षि सत्यव्रत एक दिन कृतमाला नदी में स्नान कर रहे थे। जलि में जल लेने पर उनके हाथ में एक छोटी सी मछली आ गई। राजा ने मछली को पुन: नदी के जल में छोड़ दिया। जैसे ही उन्होंने मछली को जल में पुनः छोड़ा तो उसने कहा कि हे राजन नदी के बड़े बड़े जीव छोटे जीवों को खा जाते हैं। मुझे भी कोई मारकर खा जाएगा। कृपया मेरे प्राणों की रक्षा करें।

यह बात सुनकर मछली को अपने कमंडल में डाल दिया, लेकिन एक ही रात्रि में मछली का शरीर इतना बड़ गया कि कमंडल छोटा पड़ने लगा। तब राजा ने मछली को निकालकर मटके में डाल दिया। वहां भी मछली एक रात में बड़ी हो गई। तब राजा ने मछली को निकालकर अपने सरोवर में डाल दिया। अब वह निश्चिंत थे कि सरोवर में वह सुविधापूर्ण तरीके से रहेगी, लेकिन एक ही रात में मछली के लिए सवरोवर भी छोटा पड़ने लगा। 
तब राजा समझ गए कि यह कोई साधारण मछली नहीं है। उन्होंने उस मछली के समक्ष हाथ जोड़कर कहा कि मैं जान गया हूं कि निश्चय ही आप कोई महान आत्मा हैं। यदि यह बात सत्य है, तो कृपा करके बताइए कि आपने मत्स्य का रूप क्यों धारण किया है?

तब राजर्षि सत्यव्रत के समक्ष भगवान विष्णु अपने असली स्वरूप में प्रकट हुए और कहा कि हे राजन। हयग्रीव नामक दैत्य ने वेदों को चुरा लिया है। इस कारण जगत में चारों ओर अज्ञान और अधर्म का अंधकार फैला गया है। मैंने हयग्रीव का अंत करने के लिए ही मत्स्य का रूप धारण किया है। आज से सातवें दिन भूमि जल प्रलय में डूब जाएगी। तब तक तुम एक नौका बनवा लो और समस्त प्राणियों के सूक्ष्म शरीर तथा सब प्रकार के बीज लेकर सप्तर्षियों के साथ उस नौका पर चढ़ जाना। प्रचंड आंधी के कारण जब नाव डगमगाने लगेगी, तब मैं मत्स्य रूप में तुम सबको बचाऊंगा। तुम लोग नाव को मेरे सींग से बांध देना। प्रलय के अंत तक मैं तुम्हारी नाव खींचता रहूंगा। उस समय भगवान मत्स्य ने नौका को हिमालय की चोटी से बांध दिया। उसे चोटी को नौकाबंध कहा जाता है।
प्रलय का प्रकोप शांत होने पर भगवान ने हयग्रीव का वध किया और वेदों को पुनः ब्रह्माजी को सौंप दिया। भगवान ने प्रलय समाप्त होने पर राजा सत्यव्रत को वेद का ज्ञान वापस दिया। राजा सत्यव्रत ज्ञान-विज्ञान से युक्त हो वैवस्वत मनु कहलाए। उक्त नौका में जो बच गए थे, उन्हीं से संसार में पुनः जीवन चला।

मत्स्य जयंती का महत्व

जो भक्त मत्स्य जयंती पर भगवान विष्णु के पहले अवतार मत्स्य की पूजा करता है उसे विशेष लाभ मिलता है। मत्स्य जयंती पर मत्स्य पुराण को सुनने और पढ़ने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस दिन जो इंसान मछलियों को आटे की गोली खिलाता है उसे पुण्य मिलता है। मत्स्य जयंती व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है तथा मछलियों को नदी या समुद्र में छोड़ने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं तथा अपनी कृपा बरसाते हैं।

ॐ नमो नारायण ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जय श्री कृष्ण राधे राधे नमस्कार 🙏 शुभ रात्री वंदन 👣 🌹 👏 जय श्री राम जय श्री कृष्ण जय श्री हरी ॐ 🙏 🚩 आप का हर पल मस्त रहे स्वस्त रहे नमस्कार 🙏
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष मत्स्य जयंती चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाई जाती है। मत्स्य पुराण के अनुसार, पुष्पभद्रा नदी के तट पर भगवान विष्णु ने अपना पहला अवतार मत्स्य के रूप में लिया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह कहा जाता है कि इस सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने मत्स्य का अवतार लिया था। उन्होंने एक विशाल नाव का निर्माण किया था और इसमें इस पृथ्वी पर मौजूद सभी जनजातियों को जगह दे कर सबकी जान बचाई थी। कहा जाता है कि जो भक्त मत्स्य जयंती पर भगवान विष्णु की पूजा करता है उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं तथा उस‌ इंसान को अपने किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है।

मत्स्य जयंती 2021


मत्स्य जयंती की कथा 
द्रविड़ देश के राजर्षि सत्यव्रत एक दिन कृतमाला नदी में स्नान कर रहे थे। जलि में जल लेने पर उनके हाथ में एक छोटी सी मछली आ गई। राजा ने मछली को पुन: नदी के जल में छोड़ दिया। जैसे ही उन्होंने मछली को जल में पुनः छोड़ा तो उसने कहा कि हे राजन नदी के बड़े बड़े जीव छोटे जीवों को खा जाते हैं। मुझे भी कोई मारकर खा जाएगा। कृपया मेरे प्राणों की रक्षा करें।

यह बात सुनकर मछली को अपने कमंडल में डाल दिया, लेकिन एक ही रात्रि में मछली का शरीर इतना बड़ गया कि कमंडल छोटा पड़ने लगा। तब राजा ने मछली को निकालकर मटके में डाल दिया। वहां भी मछली एक रात में बड़ी हो गई। तब राजा ने मछली को निकालकर अपने सरोवर में डाल दिया। अब वह निश्चिंत थे कि सरोवर में वह सुविधापूर्ण तरीके से रहेगी, लेकिन एक ही रात में मछली के लिए सवरोवर भी छोटा पड़ने लगा। 
तब राजा समझ गए कि यह कोई साधारण मछली नहीं है। उन्होंने उस मछली के समक्ष हाथ जोड़कर कहा कि मैं जान गया हूं कि निश्चय ही आप कोई महान आत्मा हैं। यदि यह बात सत्य है, तो कृपा करके बताइए कि आपने मत्स्य का रूप क्यों धारण किया है?

तब राजर्षि सत्यव्रत के समक्ष भगवान विष्णु अपने असली स्वरूप में प्रकट हुए और कहा कि हे राजन। हयग्रीव नामक दैत्य ने वेदों को चुरा लिया है। इस कारण जगत में चारों ओर अज्ञान और अधर्म का अंधकार फैला गया है। मैंने हयग्रीव का अंत करने के लिए ही मत्स्य का रूप धारण किया है। आज से सातवें दिन भूमि जल प्रलय में डूब जाएगी। तब तक तुम एक नौका बनवा लो और समस्त प्राणियों के सूक्ष्म शरीर तथा सब प्रकार के बीज लेकर सप्तर्षियों के साथ उस नौका पर चढ़ जाना। प्रचंड आंधी के कारण जब नाव डगमगाने लगेगी, तब मैं मत्स्य रूप में तुम सबको बचाऊंगा। तुम लोग नाव को मेरे सींग से बांध देना। प्रलय के अंत तक मैं तुम्हारी नाव खींचता रहूंगा। उस समय भगवान मत्स्य ने नौका को हिमालय की चोटी से बांध दिया। उसे चोटी को नौकाबंध कहा जाता है।
प्रलय का प्रकोप शांत होने पर भगवान ने हयग्रीव का वध किया और वेदों को पुनः ब्रह्माजी को सौंप दिया। भगवान ने प्रलय समाप्त होने पर राजा सत्यव्रत को वेद का ज्ञान वापस दिया। राजा सत्यव्रत ज्ञान-विज्ञान से युक्त हो वैवस्वत मनु कहलाए। उक्त नौका में जो बच गए थे, उन्हीं से संसार में पुनः जीवन चला।

मत्स्य जयंती का महत्व

जो भक्त मत्स्य जयंती पर भगवान विष्णु के पहले अवतार मत्स्य की पूजा करता है उसे विशेष लाभ मिलता है। मत्स्य जयंती पर मत्स्य पुराण को सुनने और पढ़ने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस दिन जो इंसान मछलियों को आटे की गोली खिलाता है उसे पुण्य मिलता है। मत्स्य जयंती व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है तथा मछलियों को नदी या समुद्र में छोड़ने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं तथा अपनी कृपा बरसाते हैं।

ॐ नमो नारायण ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जय श्री कृष्ण राधे राधे नमस्कार 🙏 शुभ रात्री वंदन 👣 🌹 👏 जय श्री राम जय श्री कृष्ण जय श्री हरी ॐ 🙏 🚩 आप का हर पल मस्त रहे स्वस्त रहे नमस्कार 🙏
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष मत्स्य जयंती चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाई जाती है। मत्स्य पुराण के अनुसार, पुष्पभद्रा नदी के तट पर भगवान विष्णु ने अपना पहला अवतार मत्स्य के रूप में लिया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह कहा जाता है कि इस सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने मत्स्य का अवतार लिया था। उन्होंने एक विशाल नाव का निर्माण किया था और इसमें इस पृथ्वी पर मौजूद सभी जनजातियों को जगह दे कर सबकी जान बचाई थी। कहा जाता है कि जो भक्त मत्स्य जयंती पर भगवान विष्णु की पूजा करता है उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं तथा उस‌ इंसान को अपने किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है।

मत्स्य जयंती 2021


मत्स्य जयंती की कथा 
द्रविड़ देश के राजर्षि सत्यव्रत एक दिन कृतमाला नदी में स्नान कर रहे थे। जलि में जल लेने पर उनके हाथ में एक छोटी सी मछली आ गई। राजा ने मछली को पुन: नदी के जल में छोड़ दिया। जैसे ही उन्होंने मछली को जल में पुनः छोड़ा तो उसने कहा कि हे राजन नदी के बड़े बड़े जीव छोटे जीवों को खा जाते हैं। मुझे भी कोई मारकर खा जाएगा। कृपया मेरे प्राणों की रक्षा करें।

यह बात सुनकर मछली को अपने कमंडल में डाल दिया, लेकिन एक ही रात्रि में मछली का शरीर इतना बड़ गया कि कमंडल छोटा पड़ने लगा। तब राजा ने मछली को निकालकर मटके में डाल दिया। वहां भी मछली एक रात में बड़ी हो गई। तब राजा ने मछली को निकालकर अपने सरोवर में डाल दिया। अब वह निश्चिंत थे कि सरोवर में वह सुविधापूर्ण तरीके से रहेगी, लेकिन एक ही रात में मछली के लिए सवरोवर भी छोटा पड़ने लगा। 
तब राजा समझ गए कि यह कोई साधारण मछली नहीं है। उन्होंने उस मछली के समक्ष हाथ जोड़कर कहा कि मैं जान गया हूं कि निश्चय ही आप कोई महान आत्मा हैं। यदि यह बात सत्य है, तो कृपा करके बताइए कि आपने मत्स्य का रूप क्यों धारण किया है?

तब राजर्षि सत्यव्रत के समक्ष भगवान विष्णु अपने असली स्वरूप में प्रकट हुए और कहा कि हे राजन। हयग्रीव नामक दैत्य ने वेदों को चुरा लिया है। इस कारण जगत में चारों ओर अज्ञान और अधर्म का अंधकार फैला गया है। मैंने हयग्रीव का अंत करने के लिए ही मत्स्य का रूप धारण किया है। आज से सातवें दिन भूमि जल प्रलय में डूब जाएगी। तब तक तुम एक नौका बनवा लो और समस्त प्राणियों के सूक्ष्म शरीर तथा सब प्रकार के बीज लेकर सप्तर्षियों के साथ उस नौका पर चढ़ जाना। प्रचंड आंधी के कारण जब नाव डगमगाने लगेगी, तब मैं मत्स्य रूप में तुम सबको बचाऊंगा। तुम लोग नाव को मेरे सींग से बांध देना। प्रलय के अंत तक मैं तुम्हारी नाव खींचता रहूंगा। उस समय भगवान मत्स्य ने नौका को हिमालय की चोटी से बांध दिया। उसे चोटी को नौकाबंध कहा जाता है।
प्रलय का प्रकोप शांत होने पर भगवान ने हयग्रीव का वध किया और वेदों को पुनः ब्रह्माजी को सौंप दिया। भगवान ने प्रलय समाप्त होने पर राजा सत्यव्रत को वेद का ज्ञान वापस दिया। राजा सत्यव्रत ज्ञान-विज्ञान से युक्त हो वैवस्वत मनु कहलाए। उक्त नौका में जो बच गए थे, उन्हीं से संसार में पुनः जीवन चला।

मत्स्य जयंती का महत्व

जो भक्त मत्स्य जयंती पर भगवान विष्णु के पहले अवतार मत्स्य की पूजा करता है उसे विशेष लाभ मिलता है। मत्स्य जयंती पर मत्स्य पुराण को सुनने और पढ़ने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस दिन जो इंसान मछलियों को आटे की गोली खिलाता है उसे पुण्य मिलता है। मत्स्य जयंती व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है तथा मछलियों को नदी या समुद्र में छोड़ने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं तथा अपनी कृपा बरसाते हैं।

ॐ नमो नारायण ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जय श्री कृष्ण राधे राधे नमस्कार 🙏 शुभ रात्री वंदन 👣 🌹 👏 जय श्री राम जय श्री कृष्ण जय श्री हरी ॐ 🙏 🚩 आप का हर पल मस्त रहे स्वस्त रहे नमस्कार 🙏

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कामेंट्स

dhruv wadhwani Apr 17, 2021
जय श्री राधे राधे जय श्री राधे राधे जय श्री राधे राधे जय श्री राधे जय श्री राधे

शामराव ठोंबरे पाटील Apr 17, 2021
@dhruvwadhwani नमस्कार वाधवाणी जी शुभ शनिवार सबका मंगल हो जय श्री राम जय श्री हनुमान जी जय श्री सिता माता की 💐 आपके परिवार 👪 पर श्री राम और हनुमान जी की कृपा सदैव बनी रहे नमस्कार 🙏 आपको धन्यवाद 🙏

M.S.Chauhan May 12, 2021

श्रील प्रभुपाद ( इस्कॉन फाउंडर आचार्य ) 🚩🌞 एक ऐसा भारतीय सन्यासी जो पाकिस्तान में 12 मंदिर बनवा दिए । एक ऐसा सन्यासी जो मात्र 12 वर्ष में 15 बार पूरी पृथ्वी का भ्रमण किया । एक ऐसा सन्यासी जो 70 वर्ष की उम्र में अमेरिका में जाकर दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक संस्था इस्कान की स्थापना की । एक ऐसा सन्यासी जिसके नाम दुनिया में सबसे ज्यादा भागवत गीता बांटने का रिकॉर्ड है । एक ऐसा सन्यासी जिसने दुनिया में सबसे ज्यादा विदेशियों को सनातन धर्म से जोड़ने का रिकॉर्ड बनाया । एक ऐसा सन्यासी जो मृत्यु के अंतिम क्षणों में भगवत गीता का श्लोक का इंग्लिश में ट्रांसलेट करते करते प्राण त्याग दिया । एक ऐसा सन्यासी जिसने दुनिया में सबसे पहले रथयात्रा निकालने की परंपरा शुरू की । एक ऐसा भारतीय सन्यासी जो सभी विदेशियों को शुद्ध शाकाहारी बना दिए और हरे कृष्ण महामंत्र ...जाप करने में लगा दिए। एक ऐसा सन्यासी जो चार नियम पालन करने को कह गए वो चार नियम पालन करके कोई भी श्रीला प्रभुपाद का शिष्य अभी भी बन सकता है ये प्रभुपाद खुद बोल कर गए हैं..... ये चार नियम ये हैं 👇👇👇 1* 16 माला नित्य हरि नाम जाप। (हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे) 👈 ये हरिनाम जपना नित्य 16 माला। 2* शुद्ध शाकाहारी रहना। लहसुन,प्याज ,मांस, मछली, अंडा, जीव हत्या बंद करो.. 3* पर पुरुष/ पर स्त्री गमन का त्याग। 4* जुवा न खेलना ...किसी भी प्रकार का नशा का त्याग, मदिरा, चाय, कॉफ़ी, गुटका, बीड़ी, सिगरेट जितना भी नशा है सब त्याग करो. ________________+______________ एक ऐसा सन्यासी जिसने करोड़ों अरबों कि धार्मिक संपत्ति बिबी बच्चों भाई के नाम न करके इस्कान के नाम कर दिया जिसको दुनिया के 12 अलग-अलग देशों के 12 दीक्षित सन्यासी फाउंडर बनकर चलाएंगे। हरे कृष्ण! हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।।

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Jayshree Shah May 12, 2021

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Soni Mishra May 12, 2021

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Dheeraj Shukla May 12, 2021

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Garima Gahlot Rajput May 12, 2021

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