पुरी जगन्नाथ मंदिर - Puri Sri Jagannath Temple - English & हिन्दी Versions The Jagannath Temple is l

पुरी जगन्नाथ मंदिर - Puri Sri Jagannath Temple - English & हिन्दी Versions The Jagannath Temple is l
पुरी जगन्नाथ मंदिर - Puri Sri Jagannath Temple - English & हिन्दी Versions The Jagannath Temple is l

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पुरी जगन्नाथ मंदिर - Puri Sri Jagannath Temple - English & हिन्दी Versions

The Jagannath Temple is located in the coastal town of Puri in the state of Odissa.The temple is about 60 kms from Bhubaneshwar.

For all the Hindu, the Puri Jagannath temple is considered to be a sacred and divine sthal and almost all doesn't miss to visit this sthal. It is said that Badrinath originated during Sathya yug, Dwaraka originated in Dwapara yug and this great kshetra Puri originated in Kali yug. This kshetra is also called as “Purushothama Mukthi Kshetra”.
   
The speciality of this sthal is that, the deities are found in Viruksha (tree) roopam. They are made up of wood and not of any stone.

This temple is said to have the largest kitchen, in the world and feeds thousands of devotees every day and food for more than 1,00,000 people on a festival day and for 25,000 on a normal day can be prepared.

Because of the temple's intense religious importance and traditions, entrance is forbidden to non-Hindus.

The Deities : The Main deity in this sthal is Sri Jagannatha. He is along with Krishna, Balabhadra (brother of Sri Krishna), and Subhadra (sister of Sri Krishna) in standing posture facing towards east direction.

Sthalapuran: It is said that, this Puri sthal was previously surrounded by a mountain named “Nilachal”. This part is ruled by a king named “Indrathyumna” and he thought of building a great temple for Sriman Narayan.

Once in his dream, the Bhagwan appeared and said that, a sacred tree would be seen on the shore of Bay of Bengal and using that tree, the deities needs to be made.

The king sent all of his soldiers towards the sea and there they found the sacred tree what the Bhagwan had said. The soldiers took the tree along with them towards the palace. To make the vigraha(idol), the king searched for a great Silpi (person who does idol). But he could not find anyone who could do the Idol.

Finally, Vishwakarma, the devaloka silpi came there as a silpi and said that, he will make the Idol and placed a request to the king that, he should be left alone with the tree inside the temple, no one should open it unless he himself opens the door after finishing the Idols.

The king agreed for it and the tree and Vishwakarma was let inside the temple. For more than a month, there was no sound of the Idol being made nor the silpi came out. The doubtful king without resistance, opened the doors of the temple and the silpi disappeared leaving the Idols half – done.

The Idols of Sri Jagannatha, Subhadra, Balabhadra were half – done and their hands were not fully completed. Even though the king ordered for various other silpis to make other Idols for the temple, it all ended in waste only and finally the king installed the incomplete Idols inside the temple and even today, the poojas are done for these Idols only.

जानिए जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़े 13 रोचक तथ्य

हिन्दुओं की आस्था का एक केन्द्र भगवान जगन्नाथ की जगन्नाथ पुरी है। 10वीं शताब्दी में निर्मित यह प्राचीन मन्दिर सप्त पुरियों में से एक है। आज इस लेख में हम आपको जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़े रोचक और अद्भुत तथ्यों के बारे में बता रहे है।

1. पुरी की सबसे खास बात तो स्वयं भगवान जगन्नाथ हैं ज‌िनका अनोखा रूप कहीं अन्य स्‍थान पर देखने को नहीं म‌िलता है। नीम की लकड़ी से बना इनका व‌िग्रह अपने आप में अद्भुत है ज‌िसके बारे में कहा जाता है क‌ि यह एक खोल मात्र है। इसके अंदर स्वयं भगवान श्री कृष्‍ण मौजूद होते हैं। (यह भी पढ़े – जगन्नाथ की मूर्ति के भीतर दफ़्न है श्रीकृष्ण की मौत से जुड़ा एक राज).

2. जगन्‍नाथ मंदिर के शिखर पर लहराता झंडा हमेशा हवा के विपरीत दिशा में रहता है।

3. तीर्थ में आप कहीं भी हों, मंदिर के ऊपर लगे सुदर्शन चक्र हमेशा सामने ही दिखाई देगा।

4. यह है जगन्‍नाथ जी का महाप्रसाद। मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए सात बर्तन एक दूसरे पर रखा जाते हैं। और प्रसाद लकड़ी जलाकर पकाया जाता है। इस प्रक्रिया में लेकिन सबसे ऊपर के बर्तन का प्रसाद पहले पकता है।

5. समुद्र तट पर दिन में हवा जमीन की तरफ आती है, और शाम के समय इसके विपरीत, लेकिन पुरी में हवा दिन में समुद्र की ओर और रात को मंदिर की ओर बहती है।

6. मुख्य गुंबद की छाया किसी भी समय जमीन पर नहीं पड़ती।

7. मंदिर में कुछ हजार लोगों से लेकर 20 लाख लोग भोजन करते हैं। फिर भी अन्न की कमी नहीं पड़ती है। हर समय पूरे वर्ष के लिए भंडार भरपूर रहता है।

8. हमने ज्यादातर मंदिरों के शिखर पर पक्षी बैठे और उड़ते देखे हैं. जगन्नाथ मंदिर की यह बात आपको चौंका देगी कि इसके ऊपर से कोई पक्षी नहीं गुजरता ।

9. सिंहद्वार में प्रवेश करने पर आप सागर की लहरों की आवाज को नहीं सुन सकते। लेकिन कदम भर बाहर आते ही लहरों का संगीत कानों में पड़ने लगता है।

10. एक पुजारी मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर स्थित झंडे को रोज बदलता है। ऐसी मान्यता है कि अगर एक दिन भी झंडा नहीं बदला गया तो मंदिर 18 वर्षों के लिए बंद हो जाएगा।

11. मन्दिर का रसोई घर दुनिया का सबसे बड़ा रसोइ घर है।  विशाल रसोई घर में भगवान जगन्नाथ को चढ़ाने वाले महाप्रसाद को बनाने 500 रसोईये एवं 300 उनके सहयोगी काम करते है।

12. कुछ इतिहासकार यह सोचते हैं, कि इस मंदिर के स्थान पर पूर्व में एक बौद्ध स्तूप होता था। उस स्तूप में गौतम बुद्ध का एक दांत रखा था। बाद में इसे इसकी वर्तमान स्थिति, कैंडी, श्रीलंका पहुंचा दिया गया।इस काल में बौद्ध धर्म को वैष्णव सम्प्रदाय ने आत्मसात कर लिया था, जब जगन्नाथ अर्चना ने लोकप्रियता हासिल की। यह दसवीं शताब्दी के लगभग हुआ, जब उड़ीसा में सोमवंशी राज्य चल रहा था।

13. महाराजा रणजीत सिंह, महान सिख सम्राट ने इस मंदिर को प्रचुर मात्रा में स्वर्ण दान किया था, जो कि उनके द्वारा स्वर्ण मंदिर, अमृतसर को दिये गये स्वर्ण से कहीं अधिक था। उन्होंने अपने अंतिम दिनों में यह वसीयत भी की थी, कि विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा, जो कि विश्व में अबतक भी सबसे मूल्यवान और सर्वाधिक बड़ा हीरा है, को इस मंदिर को दान कर दिया जाये। लेकिन यह सम्भव ना हो सका, क्योकि उस समय तक, ब्रिटिश ने पंजाब पर अपना अधिकार करके , उनकी सभी शाही सम्पत्ति जब्त कर ली थी। वर्ना कोहिनूर हीरा, भगवान जगन्नाथ के मुकुट की शान होता।

Jai Jagannath. जय जगन्नाथ ।

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Amar Singh Nov 25, 2020

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Gajrajg Nov 25, 2020

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Harilal Prajapati Nov 25, 2020

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Ravindra Kumar sahu Nov 25, 2020

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suresh soni Nov 25, 2020

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