Jay Sri Ram Jay Sri Krishna

Jay Sri Krishna Jay Sri Ram

+429 प्रतिक्रिया 89 कॉमेंट्स • 684 शेयर

कामेंट्स

raadhe krishna Mar 1, 2021

+184 प्रतिक्रिया 27 कॉमेंट्स • 171 शेयर

+25 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 4 शेयर
Anil kumar Mar 2, 2021

+8 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

क्या "राधे राधे" बोलना गलत है? अरे ये किसने कहा आप से "राधे राधे" बोलना गलत है,राधे राधे बोलने के तो इतने फायदे है की आप पढ़ कर आज से ही राधे राधे जपने लग जाएंगे… १. राधे राधे बोलने से व्यक्ति की नेगेटिव सोच दूर हो जाती है २. राधे राधे बोलने से व्यक्ति प्रसन्नता का अनुभव करता है ३. राधे राधे बोलने से व्यक्ति सभी धर्मों का आदर करने लगता है व भूखे को भोजन प्यासे को पानी देने के लिए प्रेरित होता है ४.राधे राधे बोलने से व्यक्ति अध्यात्मिक शक्ति व सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करता है ५. राधे राधे बोलने से आत्मा नारायण से व कान्हा जी से संबंध और मजबूत होता है ६. राधे राधे बोलने से व्यक्ति में दूसरों का बुरा करने की इच्छा जागृत नहीं होता ७. राधे राधे बोलने से व्यक्ति अहिंसक बनता है और उसमें क्रूर स्वभाव नष्ट हो जाता है तो अभी तो मुझे इतने ही फायदे पता हैं पर और भी बहुत फायदे है तो अब जब भी किसी से भेंट हो या मुलाकात हो शुरुआत राधे राधे बोल कर करे खुद को अच्छा लगेगा और दूसरे को भी ....!! "रा" कहत रोग सब नाशे "धा" कहत मिटे भाव बाधा जपिए निरन्तर "श्री राधा श्री राधा श्री राधा".... 🙏जय श्री राधे राधे🙏 र देवनागरी वर्णमाला में अंत:स्थ वर्ग का दूसरा व्यंजन है। भाषाविज्ञान की दृष्टि से यह वर्त्स्य, लुंठित, घोष और अल्पप्राण है। इसका महाप्राण रूप 'र्+ह' मानक हिंदी में नहीं है परंतु कुछ बोलियों में मिलता है (जैसे- कर्+हानो=कराहना, अर्+हा=अरहर)। 'र' के उच्चारण में जीभ की नोक को कुछ लुंठित करके (लपेटकर), वर्त्स (अर्थात् ऊपर के मुड़ने को) स्पर्श किया जाता है। अत: प्रयत्न की दृष्टि से 'र' को लुंठित ध्वनि कहा जाता है। विशेष- 'र' में प्राय: सभी मात्राएँ और चिह्न सामान्य रूप से जुड़ते हैं। परंतु 'र्' में 'ऋ' की मात्रा नहीं लगती तथा 'उ' और 'ऊ' मिलने पर क्रमश: विशेष रूप 'रु' और 'रू' बनते हैं (रुपया, रूप, रुष्ट, रूठा)। 'र', 'रा' इत्यादि के अनुनासिक रूपों में 'चंद्रबिंदु' के स्थान पर बिंदु लगाने की रीति सुविधार्थ प्रचलित है परंतु तभी तब शिरोरेखा के ऊपर कोई मात्रा हो (रिँ-रिं, रीँ-रीं, रेँ-रें)। व्यंजन-गुच्छों में जब 'र्' पहले आकर अन्य व्यंजनों से मिलता है, तब वह शिरोरेखा के ऊपर एक विशेष चिन्ह के रूप में लगता है और उसे 'रेफ' कहते हैं। जैसे- तर्क, शर्त, दर्द, सर्प, वर्ष। इन रूपों में 'र' पर लगी रेफ़ भी होती है (फर्र, बर्र)। पहले आकर 'र' से मिलने वाले व्यंजनों में से अनेक की खड़ी रेखा में तिरछी छोटी रेखा के रूप में 'र' जुड़ जाता है (वक्र, फ़ख्र, अग्र, द्राक्षा, विप्र, उम्र, तीव्र)। 'र' से पहले आकर जुड़ने वाले व्यंजनों में से छ, ट, ठ्, ड्, ढ्, का 'र' से मिला रूप इन व्यंजनों के नीचे लगे एक विशेष चिन्ह से युक्त होता है- छ्र, ट्र, ठ्र, ड्र, ढ्र (राष्ट्र, उड्र)। जब 'त', श् या स् पहले आकर मिलते हैं, तब क्रमश: 'त्र', 'श्र', स्र रूप बनते हैं। जैसे- त्रय, त्रास, श्रम, श्री, सहस्र, स्राव। जब 'ह' पहले आकर 'र' से मिलता है, तब उसका विशेष रूप 'ह्र' ध्यान देने योग्य है (ह्रास, ह्री)। ऐसे शब्दों को हर्‌न्त रूप में लिखना भी प्रचलित है (ह्‌रास, ह्‌री)। रेफ वाले अनेक विदेशी शब्द अनेक रूप से 'र' के रूप में भी बोले और तदनुसार लिखे जाते हैं- ख़्रर्च / ख़रच, शर्म / शरम, पर्दा / परदा, बर्बादी / बरबादी। 'कर्म', 'धर्म', 'उम्र' इत्यादि अनेक तत्सम शब्दों के तद्भव रूप 'करम', 'धरम', 'उमर' इत्यादि हिंदी में बोलचाल में तो प्रयुक्त होते हैं परंतु उन्हें मानक हिंदी में स्थान नहीं मिला है। कुछ लोग भ्रमवश 'नरक' को तद्भव समझकर 'नर्क' लिखते हैं जो अशुद्ध है। 'ल' का 'र' में और 'र' का 'ल' में परिवर्तन भाषा वैज्ञानिक कारणों से प्राय: हो जाता है। जैसे- कवल > कौर, दीवार > दीवाल। 'र' और 'ड़' का भी परस्पर परिवर्तन भाषा वैज्ञानिक कारणों से प्राय: हो जाता है। जैसे- घबराना- घबड़ाना। [ संस्कृत (धातु) रा + ड ] पुल्लिंग- अग्नि, ताप, गर्मी, प्रेम, वेग, गीत, सुवर्ण, वर्ण, शब्द। 'र' 'रगण' नामक वर्णिक गण का संक्षिप्त रूप या संकेताक्षर भी होता है।[1] राम राम जी राधे राधे 🕉️🌸🏵️✍️💐🔥🙏🌱🚩🌼🌻🌴🌹🌿🥀

+1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+18 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 39 शेयर
jyotipandey94 Mar 2, 2021

+18 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 28 शेयर
Rani Kasturi Mar 2, 2021

+9 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 1 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB