अनुशासन हमारे चरित्र और व्यक्तित्व के निर्माण में सबसे अहम भूमिका निभाता है जी। शुभ रात्रि वंदन जी। जय श्री राधे राधे जी।

अनुशासन हमारे चरित्र और व्यक्तित्व के निर्माण में सबसे अहम भूमिका निभाता है जी। शुभ रात्रि वंदन जी। जय श्री राधे राधे जी।

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कामेंट्स

🙋🅰NJALI 😊ⓂISHRA 🙏 Feb 24, 2021
🌺।।ॐ गं गणपतये नमः।। शुभ रात्रि नमस्कार भाई जी💐🙏भगवान श्री गणेश आपके जीवन में सुख ,शांति समृद्धि , सदैव बनाए रखें...माँ गौरी पुत्र गणेश आप की मंगल मनोकामना 👌पूरी करें आपका हर दिन शुभ हो मंगलमय हो...मेरे आदरणीय भाई जी 👏🌺जय श्री राधे राधे जी 🌺🙏🌾🌴🌾🌴🌾🌴🎋 🌾🙏🔱*शिव हर हर महादेव*🙏

Archana Singh Feb 24, 2021
jai Shree radhe Krishna ji 🙏🌹subh ratri vandan ji🙏🙏 kanha ji ki kripa se Aapka har pal mangalmay ho 🙏🌹🌹🙏

Ramesh Kumar Shiwani Feb 24, 2021
GOOD NIGHT SWEET DREAMS ALL FRIENDS BROTHER JI SHREE RADHE KRISHNA JI 🙏🌹🙏 SHREE GOOD NIGHT ALL'SISTER JI PRANAM JI 🙏🌹🙏

Brajesh Sharma Feb 24, 2021
जय मोर मुकुट बंसी वाले की जय जय जय श्री राधे कृष्णा जी.. ॐ नमः शिवाय.. हर हर महादेव

Anju Mishra Feb 24, 2021
जय श्री राधे कृष्णा

Ragni Dhiwar Feb 24, 2021
🥀शुभ रात्रि वंदन जी 🙏आप सदैव प्रसन्न रहें 🥀आपका हरपल सुंदर व मंगलमय हो 🥀राधे राधे जी🥀

Vanita kale Feb 24, 2021
*┈┉━❀꧁राधे❤ राधे꧂❀━┅┈*🙏🏻 *┈┉━❀꧁हरे कृष्ण꧂❀━┅┈* 🙏🏻!!शुभ रात्रि!!🙏 वंदन मेरे आदरणीय भाईजी ठाकुरजी आपकी और आपके परिवार की हर मनोकामना पूरी करें ...🙏आप का आने वाला पल ढेर सारी खुशियाे लेकर आए.. नमस्कार 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Radhe Krishna Feb 24, 2021
जय श्री राधे राधे कृष्णा🌹🌹 शुभ रात्रि वंदन🌹🌹

saumya sharma Feb 24, 2021
Good night bhai g🌙🌹😊May lord Ganesha bless you with all the happiness and make your dreams true 🙏always be happy😊

Mamta Chauhan Feb 24, 2021
Radhe radhe ji🌷🙏Shubh ratri vandan bhai ji aapka har pal khushion bhra ho aapki sbhi manokamna puri ho 🌷🌷🙏🙏

dhruv wadhwani Feb 24, 2021
जय श्री राधे कृष्णा शुभ रात्रि जी

Sonu Pathak (Jai Mata Di) Feb 25, 2021
🌹ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः🌹 जय माता रानी दी 🌹🙏प्रभु श्री हरि की कृपा से आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो 🌹आप स्वस्थ रहे सुखी रहे 🙏 नमस्कार मंगलमय सुप्रभात व॔दन जी 🌷🌷🙏🙏🌷🌷

Ansouya M Feb 25, 2021
🕉जय श्री राधे कृष्ण 🙏🌹 शुभ प्रभात वनदन भइया जी 🙏 आप का दिन शुभ और मंगलमय हो हरि जी और माता लक्ष्मी जी की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बना रहे भाई जी 🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🙏

Brajesh Sharma Feb 25, 2021
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जय जय श्री राधे कृष्णा जी ॐ नमः शिवाय.. हर हर महादेव ईश्वर आपकी समस्त कामनाओं की पूर्ति करें, आपका सदा कल्याण करें..

🌹 champalal🌹🌹M🌹 Kadela🌹 Feb 25, 2021
Om Namho bhagvate vashudevay Namah Jii Bhagwan Vishnu Jii Or Sai Baba ka Ashirwad Aap aur Aapke pariwar pr hamesha bana Rahe Jii Aapka pal pal Khoshiyo bhara Rahe Jii shubh prabhat Shubh Kamnayein Jii

🌹•°🍁°•🥀•°🌻°•🍂•°🎋°•🌻 🔔°•🔔•°🔔°•🔔°•🔔°•🔔•°🔔 जय श्री महाकालेश्वर विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय कर्णामृताय शशिशेखर धारणाय कर्पूरकान्ति धवलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय गौरीप्रियाय रजनीश कलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिप कङ्कणाय गङ्गाधराय गजराज विमर्धनाय दारिद्र्यदुःख दहनाय नम:शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः । ॐ श्रां श्रीं श्रीं सः चन्द्राय नमः । सुप्रभातम् ॐ श्रीगणेशाय नमः अथ् पंचांगम् दिनाँक 12-04-2021 सोमवार अक्षांश- 30°:36", रेखांश 76°:80" अम्बाला शहर हरियाणा, पिन कोड- 134 007 ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ ॐ शिवाय नम:,ॐ सर्वात्मने नम: ॐ त्रिनेत्राय नम:,ॐ हराय नम: ॐ इन्द्र्मुखाय नम:ॐ श्रीकंठाय नम: ॐ स द्योजाताय नम:,ॐ वामदेवाय नम: ॐ अघोरह्र्द्याय नम:,ॐ तत्पुरुषाय नम: ॐ ईशानाय नम:,ॐ अनंतधर्माय नम: ॐ ज्ञानभूताय नम:, ॐ अनंतवैराग्यसिंघायनम:, ॐ प्रधानाय नम: ॐ व्योमात्मने नम:, ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम: ॐ महेश्वराए नमः, ॐ शूलपानायाय नमः, ॐ पिनाकपनाये नमः, ॐ पशुपति नमः । 🙏🙏🙏🙏🙏 🍁🍁•°🌹°•🍂•°🌷°•💐•°🥀 --------------समाप्तिकाल----------------- 📒 तिथि अमावस्या 08:02:25 ☄️ नक्षत्र रेवती 11:29:59 🏵️ करण : 🏵️ नाग 08:02:25 🏵️ किन्स्तुघ्ना 21:08:18 🔒 पक्ष कृष्ण 🏵️ योग वैधृति 14:26:24 🗝️ वार सोमवार 🌄 सूर्योदय 05:59:52 🌃 चन्द्रोदय 06:15:59 🌙 चन्द्र 🐬 मीन - 11:29:59 तक 🌌 सूर्यास्त 18:48:15 🌑 चन्द्रास्त 19:04:59 🏵️ ऋतु वसंत 🌈 🏵️ शक सम्वत 1942 शार्वरी 🏵️ कलि सम्वत 5122 🏵️ दिन काल 12:48:21 🏵️ विक्रम सम्वत 2077 🏵️ मास अमांत फाल्गुन 🏵️ मास पूर्णिमांत चैत्र 📯 शुभ समय 🎊 अभिजित 11:58:27 - 12:49:40 🕳️ दुष्टमुहूर्त : 🕳️ 12:49:40 - 13:40:54 🕳️ 15:23:21 - 16:14:34 🕳️ कंटक 08:33:33 - 09:24:46 🕳️ यमघण्ट 11:58:27 - 12:49:40 😈 राहु काल 07:35:55 - 09:11:58 🕳️ कुलिक 15:23:21 - 16:14:34 🕳️ कालवेला 10:16:00 - 11:07:13 🕳️ यमगण्ड 10:48:01 - 12:24:03 🕳️ गुलिक 14:00:06 - 15:36:09 🏵️ दिशा शूल पूर्व 🚩🚩 होरा 🏵️चन्द्रमा 05:59:52 - 07:03:54 🏵️शनि 07:03:54 - 08:07:56 🏵️बृहस्पति 08:07:56 - 09:11:58 🏵️मंगल 09:11:58 - 10:16:00 🏵️सूर्य 10:16:00 - 11:20:02 🏵️शुक्र 11:20:02 - 12:24:04 🏵️बुध 12:24:04 - 13:28:05 🏵️चन्द्रमा 13:28:05 - 14:32:07 🏵️शनि 14:32:07 - 15:36:09 🏵️बृहस्पति 15:36:09 - 16:40:11 🏵️मंगल 16:40:11 - 17:44:13 🏵️सूर्य 17:44:13 - 18:48:15 🏵️शुक्र 18:48:15 - 19:44:07 🏵️बुध 19:44:07 - 20:39:59 🏵️चन्द्रमा 20:39:59 - 21:35:52 🚩🚩 चोघडिया ⛩️अमृत 05:59:52 - 07:35:55 😈काल 07:35:55 - 09:11:58 ⛩️शुभ 09:11:58 - 10:48:01 ☘️रोग 10:48:01 - 12:24:03 🕳️उद्वेग 12:24:03 - 14:00:06 🛑चल 14:00:06 - 15:36:09 ⛩️लाभ 15:36:09 - 17:12:12 ⛩️अमृत 17:12:12 - 18:48:14 🛑चल 18:48:15 - 20:12:03 ☘️रोग 20:12:03 - 21:35:52 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 🍁 ग्रह गोचर 🍁 🌞 सूर्य - मीन 🐬 🌙 चन्द्र मीन 🐋 11:29:59 तक 🥏 मंगल - वृष 🐂 🥏 बुध - मीन 🐬 🥏 बृहस्पति - कुम्भ ⚱️ 🥏 शुक्र - मेष 🦌 🥏 शनि - मकर 🐊 🥏 राहु - वृष 🐂 🥏 केतु - वृश्चिक 🦞 --------------------------------------------- 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 व्रत त्यौहार मास 09-15 अप्रैल तक ☘️🌾🌸💐🥀☘️💐🌸 🛑शुक्र -9 अप्रैल भद्रा 2828 से, प्रदोष व्रत। 🛑शनि - 10 अप्रैल भद्रा तारा 16:17 तक, शुक्र अश्विन 1 मेष 🦌 में 6:28, मेला पृथूद्क (पिहोवा तीर्थ )हरियाणा, मासिक शिवरात्रि व्रत। 🛑 रवि- 11 अप्रैल पितृ कार्येषु अमावस, गंड मूल 8:58 से। 🛑 चंद्र- 12 अप्रैल चैत्र (सोमवती) अमावस-- चैत्र सोमवती अमावस को हरिद्वार आदि तीर्थ स्थान पर कुंभ स्नान, दान जप भगवान शिव व विष्णु पूजन तथा पीपल (अश्वत्थ) वृक्ष की पुष्पाक्षत चावल फल धूप दीप आदि सहित पूजन परिक्रमा करने से अनेक पापों से मुक्ति मिलती है । पंचक समाप्त 11:29, द्वितीय शाही स्नान - कुंभ महापर्व हरिद्वार, प्रयागराज आदि तीर्थ स्थान महात्म्य, विक्रमी संवत 2077 पूर्ण । 🛑 13 अप्रैल, मंगलवार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, भरणी ☄️नक्षत्र कालीन अर्धरात्रि के बाद 2:33,( 26/33) पर 🐊मकर लग्न में प्रवेश करेगी। 15 मुहूर्ति इस सक्रांति के स्नान दान आदि का पुण्य काल आगामी दिन 14 अप्रैल, बुधवार को प्रातः 8:57 तक होगा। वार अनुसार महोदरी तथा नक्षत्र अनुसार घोरा नाम की यह सक्रांति नेताओं/ बुरों के लिए लाभप्रद होगी। कुंभ महापर्व हरिद्वार का मुख्य शाही स्नान इसी दिन होगा । राशिफल- यह सक्रांति मेष कर्क कन्या तुला मकर कुंभ मीन राशि वालों के लिए शुभ फलदायक होगी । लोग भविष्य -- मासारम्भ 🌞सूर्य पर शनि की 👁️दृष्टि तथा मंगल राहु योग के कारण प्रतिकूल ⛈️वर्षा से खड़ी फसलों को हानि पहुंचेगी। सक्रांति कुंडली में मंगल शनि के मध्य षडाष्टक योग बना हुआ है। राजनैतिक वातावरण अशांत तथा असमंजस पूर्ण रहेगा । सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के नेताओं में परस्पर टकराव हुआ खींचातानी बढ़ेगी। परस्पर तालमेल की कमी रहेगी। सोना-चांदी और धातुओं सरसों क्रूड आयल में विशेष📈 तेजी बनेगी। 🛑 मंगल - 13 अप्रैल '"राक्षस"'नाम विक्रमी संवत 2078 प्रारंभ - 13 अप्रैल मंगलवार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शिवविंशति का राक्षस नामक विक्रमी संवत 2078 आरंभ होगा। आगामी संवत् में व्रत अनुष्ठान संकल्प दान आदि शुभ कार्यों में राक्षसों संवत्सर का ही प्रयोग होगा। नए संवत् का राजा मंगल तथा मंत्री भी मंगल है। जब राजा और मंत्री के पद एक ही ग्रह के पास हों (वह भी क्रूर ग्रह के पास ) तो समाज में आवेश एवं क्रोध के कारण हिंसक एवं उपद्रव की घटनाएं अधिक होंगी। रोग अग्निकांड वाहन दुर्घटनाएं अधिक हों- *स्वयं राजा स्वयं मंत्री जनेषु रोगपीड़ा चोराग्नि, शंका विग्रह भयं च नृपाणाम् ।* इस दिन नए संवत् आदि के फल किसी श्रेष्ठ ब्राह्मण या गुरु मुख से श्रद्धा पूर्वक संवत्सर के पूजन उपरांत श्रवण करना चाहिए। तारीख 13 को ही चैत्र *(वसंत )* नवरात्र प्रारंभ होंगे। इसी दिन प्रातः काल श्री दुर्गाजी की मूर्ति एवं घट स्थापन करके श्रीमूर्ति के सम्मुख प्रतिपदा से नवमी तक नित्य प्रति घी की ज्योति जला कर श्रीदुर्गा पूजा एवं श्रीदुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। अंतिम नवरात्र ( या दशमी ) के दिन हरी दूर्वा को पूजा अर्चन के पश्चात नदी /नहर में विसर्जन करने की परंपरा है। चैत्र (वासंत) नवरात्र प्रारंभ । चैत्र शुक्ल पक्ष प्रारंभ, चंद्र दर्शन मु 15, घट स्थापन,🌞 सूर्य ☄️अश्विन 1 मेष🦌 में, 26:33, वैशाख सक्रांति, मु.15, पुण्य काल सक्रांति अगले दिन प्रातः 8:57 तक, वैशाखी पर्व (पंजाब), मंगल मिथुन👬🏼 में 25:13, संवत्सर फल श्रवण, ध्वजारोहण, तेलाभ्यंग, श्रीदुर्गा- पूजा, गुड़ी पड़वा। 🛑 बुध - 14 अप्रैल - कुंभ महापर्व (हरिद्वार) प्रमुख (तृतीय) शाही स्नान, रमजान मुस्लिम मास प्रारंभ। 🛑 गुरु - 15 अप्रैल भद्रा 28:47 से, गणगौरी तृतीया, श्रीमत्स्य - जयंती । 🥀🌾💐🌸🥀🌾💐 बाजार मंदा📉 तेजी📈 16 अप्रैल तक 🛑🛑 🌸2 अप्रैल को मंगल मृगशिर तथा बुध उत्तराभाद्रपद ☄️नक्षत्र में आने से तेल चांदी शहद गुड़ में तेजी शेयर बाजार तथा अन्य व्यापारिक वस्तुओं में कुछ मंदी रहेगी। 🌸 5 अप्रैल को गुरु कुंभ ⚱️राशि में आने से रुई चांदी में तेजी 📈दिखकर शीघ्र ही मंदी 📉का रुख बन जायगा। सोना तांबा पीतल कांसा लोहा शीशा वस्त्रों क्रूड आयल में 1- 2 मास तक मंदी📉 का रुझान रहकर फिर तेजी📈 का रुख बनेगा है। 🌸 6 अप्रैल को बुध पूर्व में अस्त 🌌होने से अनाज घी मूंग आदि में मंदी📉 रूई सोने में घटा बढ़ी के बाद तेजी📈 बनेगी। 🌸 10 अप्रैल को बुध रेवती नक्षत्र☄️ में आकर सूर्य 🌞के साथ मेल🔗 करेगा तथा शुक्र इसी समय मेष 🦌राशि में आएगा। गेहूं चना अनादि भी सोना चांदी में विशेष तेजी📈 का रुख रहेगा। गुड़ शक्कर बारदाना केसर मजीठ चंदन लाल मिर्च आदि में भी घटा बढ़ी के बाद तेजी📈 बनेगी। 🌸13 अप्रैल को सूर्य 🌞अश्विनी नक्षत्र☄️ तथा मेष 🦌राशि में आकर शुक्र के साथ मेल 🔗करेगा। इसी दिन मंगल मिथुन👬🏼 राशि में आकर शनि के साथ षडाष्टक संबंध बनाएगा। दोनों योग तेजी कारक हैं ।रुई कपास सूत घीे तेल सरसों नारियल सुपारी बादाम गुड़ खांड शक्कर सोना चांदी उड़द क्रूड ऑयल लोहा सोयाबीन ऑयल में तेजी 📈बनेगी। चावल अरहर चना मूंग आदि कुछ वस्तुओं में भी मंदी📉 रहेगी। 🌸 16 अप्रैल को बुध भी मेष🦌 राशि में आकर सूर्य 🌞एवं शुक्र के साथ मेल🔗 करेगा। अकेला बुध यद्यपि यहां मंदी कारक होता है। परंतु ग्रह योग से यहां मंदी📉 की जगह तेजी📈 बनेगी। सोना चांदी आदि धातुओं गेहूं चना जौं आदि अन्न तेल सरसों रुई कपास घी गुड़ खांड में घटा बढ़ी के बाद तेजी📈 बनेगी। आज का राशिफल 🏵️🏵️🏵️ मेष🦌 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) आज दिन के आरंभिक भाग को छोड़ आप तन-मन से खुश और प्रफुल्लित रहेंगे। कुटुंबीजनों और मित्रों के साथ उत्तम भोजन प्रवास या मिलन- मुलाकात का अवसर आएगा। जीवनसाथी के साथ गाढ़ी आत्मीयता रहने से भविष्य की चिंता नही करेंगे। कार्य क्षेत्र पर दिन के आरंभ से मध्याह्न तक मेहनत ज्यादा करनी पड़ेगी इसके बदले संध्या के आसपास आशानुकूल आर्थिक लाभ होगा। किसी शुभ कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिये बाहर जाना पड़ सकता है। मित्र परिचितों से आनंददायक समाचार प्राप्त होगा। वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) आज के दिन आप कुछ नया करने का प्रयास करेंगे लेकिन कार्य के आरंभ में ही नकारात्मक विचार हताशा पैदा करेंगे। धन लाभ बहुत कम होगा। प्रातः से मध्याह्न तक शारीरिक और मानसिक रूप से अस्वस्थता अनुभव करेंगे। माता- पिता के साथ मतभेद होगा अथवा उनका स्वास्थ्य खराब होगा। जमीन, मकान तथा वाहन आदि दस्तावेज करने में सावधानी रखें धोखा होने की संभावना है। जलाशय अथवा ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने से बचें। भावनात्मकता के प्रवाह में न बहें। मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा) आज का दिन आपके लिये बेहतर रहने वाला है आज सामाजिक क्षेत्र हो अथवा नौकरी- धंधा या अन्य क्षेत्रों में आज के दिन से कुछ न कुछ लाभ अवश्य उठाएंगे, मित्रों, सगे- सम्बंधियों के साथ किसी मनोहर स्थान पर जाने से मानसिक तनाव में कमी आएगी। किसी परिचित के मागंलिक प्रसंगों में उपस्थित हो सकते है। स्त्री मित्रों तथा पत्नी और पुत्र से लाभ अथवा शुभ समाचार प्राप्त होगा। विवाहोत्सुक युवक- युवतियों की वैवाहिक समस्या कुछ हद तक हल होगी। सेहत का ख्याल रखे चोटादि से कष्ट होने के योग भी है। धन लाभ आशाजनक हो जाएगा। कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) आज आपके कुछ दिनों से रुके अधूरे कार्य पूरे होंगे तथा कार्य में सफलता और यश की प्राप्ति होगी। घर में शांति और आनंद का वातावरण आपके मन को प्रसन्न रखेगा। मित्र रिश्तेदारों से भी आज मधुर संबंध रहेंगे। स्वास्थ्य बना रहेगा। कार्य व्यवसाय में आपकी युक्ति काम आएगी। आर्थिक लाभ आशा से कम लेकिन अवश्य होगा। ऑफिस में संघर्ष या मनमुटाव के अवसर आ सकते हैं। इससे सावधान रहना आवश्यक है। कही सुनी बातो पर यकीन ना करें। सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) आज आप सांसारिक विषय में कम रुचि रखकर आध्यात्मिकता की तरफ मुड़ेंगे। गूढ़ रहस्यमय विद्याओं की तरफ विशेष आकर्षण रहेगा। गहरे चिंतन- मनन आपको अलौकिक अनुभूति कराएंगे। लेकिन आज आपके अंदर अहम भावना भी रहेगी किसी की मामूली बात को भी सहन नही कर पाएंगे। आज वाणी पर संयम रखने से बहुत-सी गलतफहमियों से बच सकेंगे। कार्य क्षेत्र अथवा अन्य साधनों से अचानक धन लाभ होगा। नए कार्यों का प्रारंभ आज न करें। सेहत उत्तम रहेगी। कन्या👩🏻‍🦱 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) आज का आधा भाग दिन आपके लिए थोड़ा कष्टदायक रहेगा पूर्व में बरती लापरवाही अथवा वाहन चलाने में असावधानी के चलते शारीरिक कष्ट हो सकता है। बार बार प्रयास करने के बाद भी कार्य न बनने के कारण मानसिक रूप से भी आप परेशान रहेंगे। क्रोध पर अंकुश रखना पड़ेगा। अधिक खर्च होने से पैसे की तंगी रहेगी।दोपहर के बाद स्थित में काफी बदलाव आएगा धन की आमद किसी न किसी रूप में होगी लेकिन शारीरिक-पारिवारिक समस्या के चलते आज प्रसन्नता के अवसर मुश्किल से ही मिलेंगे। तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) आज कोई भी अविचारी कदम उठाने से बचे। हालांकि आज जिस भी कार्य को करेंगे देर-अबेर उसमें सफलता तो आपको मिलेगी ही। प्रतिस्पर्धियों को भी आप परास्त कर सकेंगे। भाई बंधुओं और पड़ोसियों के साथ खूब अच्छे सम्बंध रहेंगे लेकिन ज्यादा स्नेह भी आज कलह का कारण बन सकता है इसका ध्यान रखें। कार्य क्षेत्र से आर्थिक लाभ भी होंगे। परिवार जनों का सहयोग कम मिलेगा लेकिन आज सार्वजनिक मान-सम्मान मिलेगा। चित्त में प्रसन्नता रहेगी। सेहत में थोडी नरमी रहने पर भी परवाह नही करेंगे। वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) आजके दिन आपको जिद्दी व्यवहार छोड़कर समाधानपूर्ण व्यवहार रखने की जरूरत है। आज आप जिस भी बात को पकड़ लेंगे उसे मनवाकर ही छोड़ेंगे चाहे उससे घर अथवा बाहर वालो को समस्या ही क्यों ना हो साथ मे आपकी अनियंत्रित वाणी किसी से भी मनमुटाव करा सकती है। कार्य क्षेत्र पर दुविधा में फंसा मन आपको कोई ठोस निर्णय पर नहीं आने देगा। जिसके परिणाम स्वरूप लाभ होते होते हाथ से निकल सकता है। महत्त्वपूर्ण निर्णय आज न ले। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे) आज दिन के आरम्भ से ही नकारात्मक विचार मन पर हावी न हो जाएं इसका ख्याल रखने की आवश्यकता है।मानसिक अस्वस्थता आपको परेशान करेंगे। स्वास्थ्य के सम्बंध में भी कुछ न कुछ शिकायत रहेगी। नौकरी में उच्च अधिकारियों के साथ सावधानीपूर्वक कार्य करें अन्यथा भविष्य में मिलने वाले लाभों से वंचित भी रह सकते है। संतानों की समस्याएँ आपको चिंतित करेंगे। प्रतिस्पर्धी अपनी चाल में सफल होंगे। आज महत्त्वपूर्ण निर्णय न ले। धन की आमद और खर्च बराबर रहेंगे। मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी) दिन का आरंभ चिंता और उद्वेग के साथ होगा। साथ-साथ स्वास्थ्य की शिकायत भी रहेगी सर अथवा बदन दर्द से शुरुआत होकर पूरे शरीर को शिथिल करेगी। नए कार्य शुरू करने के लिए दिन अच्छा नहीं है। आकस्मिक धन खर्च होगा। अत्यधिक कामुकता आपके मानभंग का कारण न बने इसका ध्यान रखें। छोटी मोटी यात्रा- प्रवास के योग है लेकिन इसमें कठिनाई आएगी। आज किसी के बहकावे में ना आये अपना विवेक लगाए। घरेलू वातावरण आपकी आशा के विपरीत रहेगा। कुंभ⚱️ (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा) आज के दिन आपके अधिकांश कार्य निर्विघ्न पूरे होंगे, जिससे आप खुश रहेंगे। नौकरी- व्यवसायिक स्थल पर परिस्थिति आपके अनुकूल रहेगी सोचे समझे कार्य में सफलता मिलेगी। बुजुर्गों और उच्च पदाधिकारियों की कृपादृष्टि रहने के कारण आप मानसिक रूप से किसी भी प्रकार के बोझ से मुक्त होंगे। गृहस्थ जीवन में आनंद रहेगा। धन प्राप्ति और पदोन्नति का योग है। संध्या का समय तनाव और थकान वाला रहेगा मनोरंजन के साधन तलाशेंगे। आज भावनाओ में बहकर किसी से भी मन की बात ना बताये अन्यथा आगे के लिये परेशानी खड़ी हो सकती है। मीन🐬 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) आप गृहस्थ जीवन और दांपत्यजीवन में सुख- शांति का अनुभव करेंगे। पारिवारिक सदस्यों और निकटस्थ दोस्तों के साथ उत्तम स्थान की यात्रा स्वादिष्ट भोजन करने का अवसर मिलेगा। एकाध छोटे से प्रवास का आयोजन भी होने की संभावना है। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। नये पुराने कार्य से धन लाभ होगा। दूर बसने वाले स्नेहीजनों का समाचार आपको खुश करेगा। भागीदारी में लाभ तथा सार्वजनिक जीवन में आपको मान- सम्मान की प्राप्ति होगी। सेहत मध्यान के आस पास नरम हो सकती है। ACHARYA ANIL PARASHAR, VADIC,KP ASTROLOGER. 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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sukhadev awari Apr 12, 2021

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. "जन्मों का कर्ज" एक सेठ जी बहुत ही दयालु थे। धर्म-कर्म में यकीन करते थे। उनके पास जो भी व्यक्ति उधार माँगने आता वे उसे मना नहीं करते थे। सेठ जी मुनीम को बुलाते और जो उधार माँगने वाला व्यक्ति होता उससे पूछते कि "भाई ! तुम उधार कब लौटाओगे ? इस जन्म में या फिर अगले जन्म में ?" जो लोग ईमानदार होते वो कहते - "सेठ जी ! हम तो इसी जन्म में आपका कर्ज़ चुकता कर देंगे।" और कुछ लोग जो ज्यादा चालक व बेईमान होते वे कहते - "सेठ जी ! हम आपका कर्ज़ अगले जन्म में उतारेंगे।" और अपनी चालाकी पर वे मन ही मन खुश होते कि "क्या मूर्ख सेठ है ! अगले जन्म में उधार वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है।" ऐसे लोग मुनीम से पहले ही कह देते कि वो अपना कर्ज़ अगले जन्म में लौटाएंगे और मुनीम भी कभी किसी से कुछ पूछता नहीं था। जो जैसा कह देता मुनीम वैसा ही बही में लिख लेता। एक दिन एक चोर भी सेठ जी के पास उधार माँगने पहुँचा। उसे भी मालूम था कि सेठ अगले जन्म तक के लिए रकम उधार दे देता है। हालांकि उसका मकसद उधार लेने से अधिक सेठ की तिजोरी को देखना था। चोर ने सेठ से कुछ रुपये उधार माँगे, सेठ ने मुनीम को बुलाकर उधार देने को कहा। मुनीम ने चोर से पूछा- "भाई ! इस जन्म में लौटाओगे या अगले जन्म में ?" चोर ने कहा - "मुनीम जी ! मैं यह रकम अगले जन्म में लौटाऊँगा।" मुनीम ने तिजोरी खोलकर पैसे उसे दे दिए। चोर ने भी तिजोरी देख ली और तय कर लिया कि इस मूर्ख सेठ की तिजोरी आज रात में उड़ा दूँगा। रात में ही सेठ के घर पहुँच गया और वहीं भैंसों के तबेले में छिपकर सेठ के सोने का इन्तजार करने लगा। अचानक चोर ने सुना कि भैंसे आपस में बातें कर रही हैं और वह चोर भैंसों की भाषा ठीक से समझ पा रहा है। एक भैंस ने दूसरी से पूछा- "तुम तो आज ही आई हो न, बहन !" उस भैंस ने जवाब दिया- “हाँ, आज ही सेठ के तबेले में आई हूँ, सेठ जी का पिछले जन्म का कर्ज़ उतारना है और तुम कब से यहाँ हो ?” उस भैंस ने पलटकर पूछा तो पहले वाली भैंस ने बताया- "मुझे तो तीन साल हो गए हैं, बहन ! मैंने सेठ जी से कर्ज़ लिया था यह कहकर कि अगले जन्म में लौटाऊँगी। सेठ से उधार लेने के बाद जब मेरी मृत्यु हो गई तो मैं भैंस बन गई और सेठ के तबेले में चली आयी। अब दूध देकर उसका कर्ज़ उतार रही हूँ। जब तक कर्ज़ की रकम पूरी नहीं हो जाती तब तक यहीं रहना होगा।” चोर ने जब उन भैंसों की बातें सुनी तो होश उड़ गए और वहाँ बंधी भैंसों की ओर देखने लगा। वो समझ गया कि उधार चुकाना ही पड़ता है, चाहे इस जन्म में या फिर अगले जन्म में उसे चुकाना ही होगा। वह उल्टे पाँव सेठ के घर की ओर भागा और जो कर्ज़ उसने लिया था उसे फटाफट मुनीम को लौटाकर रजिस्टर से अपना नाम कटवा लिया। हम सब इस दुनिया में इसलिए आते हैं, क्योंकि हमें किसी से लेना होता है तो किसी का देना होता है। इस तरह से प्रत्येक को कुछ न कुछ लेने देने के हिसाब चुकाने होते हैं। इस कर्ज़ का हिसाब चुकता करने के लिए इस दुनिया में कोई बेटा बनकर आता है तो कोई बेटी बनकर आती है, कोई पिता बनकर आता है, तो कोई माँ बनकर आती है, कोई पति बनकर आता है, तो कोई पत्नी बनकर आती है, कोई प्रेमी बनकर आता है, तो कोई प्रेमिका बनकर आती है, कोई मित्र बनकर आता है, तो कोई शत्रु बनकर आता है, कोई पङोसी बनकर आता है तो कोई रिश्तेदार बनकर आता है। चाहे दुःख हो या सुख हिसाब तो सबको देना ही पड़ता हैं। यही प्रकृति का नियम है। ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधे" "कुमार रौनक कश्यप " ********************************************

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. श्री श्रीचैतन्य चरित्रावली पोस्ट - 148 श्री रघुनाथदास जी का गृह त्याग गुरुर्न स स्यात् स्वजनो न स स्यात् पिता न स स्याज्जननी न सा स्यात्। दैवं न तत् स्यान्न पतिश्च स स्यान्न मोचयेद्य: समुपेतमृत्युम्॥ सप्तग्राम के भूम्यधिकारी श्री गोवर्धनदास मजूमदार के पुत्र श्री रघुनाथदास जी को पाठक भूले न होंगे। शान्तिपुर में अद्वैताचार्य जी के घर पर ठहरे हुए प्रभु के उन्होंने दर्शन किये थे और प्रभु ने उन्हें मर्कट वैराग्य त्याग कर घर में ही रहते हुए भगवत-भजन करने का उपदेश दिया था और उनके गृहत्याग के अत्यन्त आग्रह करने पर प्रभु ने कह दिया था- 'अच्छा देखा जायगा। अब तो तुम घर चले आओ, हम शीघ्र ही वृन्दावन को जायँगे, यहाँ से लौटकर जब हम आ जायँ, तब जैसा उचित हो वैसा करना।' अब जब रघुनाथ जी ने सुना की प्रभु व्रजमण्डल की यात्रा करके पुरी लौट आये हैं, तब तो वे चैतन्य चरणों के दर्शनों के लिये अत्यन्त ही लालायित हो उठे। उनका मन-मधुप प्रभु के पादप का मकरन्द पान करने के निमित्त पागल-सा हो गया, वे गौरांग का चिन्तन करते हुए ही समय को व्यतीत लगे। ऊपर से तो सभी संसारी कामों को करते रहते, किन्तु भीतर उनके हृदय में चैतन्य विरहजनित अग्नि जलती रहती। वे उसी समय सब कुछ छोड़-छाड़कर चैतन्य चरणों का आश्रय ग्रहण कर लेते, किन्तु उस समय उनके परिवार में एक विचित्र घटना हो गयी! सप्तग्राम का ठेका पहले एक मुसलमान भूम्यधिकारी पर था। वही उस मण्डल का चौधरी था, उस पर से ही इन्हें इस इलाके का अधिकार प्राप्त हुआ था। वह प्रतिवर्ष आमदनी का चतुर्थांश अपने पास रखकर तीन अंश बादशाह के दरबार में जमा करता था। उस मण्डल की समस्त आमदनी बीस लाख रूपये सालना की थी। हिसाब से इन मजूमदार भाइयों को पंद्रह लाख राजदरबार में जमा करने चाहिये और पांच लाख अपने पास रखने चाहिये, किन्तु ये अपने कायस्थप ने के बुद्धि कौशल से बारह ही लाख जमा करते और आठ लाख स्वयं रख लेते। चिरकाल से ठेका इन्हीं पर रहने से इन्हें भूम्यधिकारी होने का स्थायी अधिकार प्राप्त हो जाना चाहिये था, क्योंकि बारह वर्ष में ठेका स्थायी हो जाता है, इस बात से उस पुराने चौधरी को चिढ़ हुई। उसने राजदरबार में अपना अधिकार दिखाते हुए इन दोनों भाइयों पर अभियोग चलाया और राजमन्त्री को अपनी ओर मिला लिया। इसीलिये इन्हें पकड़ने के लिये राजकर्मचारी आये। अपनी गिरफ्तारी समाचार सुनकर हिरण्यदास और गोवर्धनदास- दोनों भाई घर छोड़कर भाग गये। घर पर अकेले रघुनाथदास जी ही रह गये, चौधरी ने इन्हें ही गिरफ्तार करा लिया और कारावास में भेज दिया। यहाँ इन्हें इस बात के लिये रोज डराया और धमकाया जाता था कि ये अपने ताऊ (पिता के बड़े भाई) और पिता का पता बता दें, किन्तु इन्हें उनका क्या पता था, इसलिये वे कुछ भी नहीं बता सकते थे। इससे क्रुद्ध होकर चौधरी इन्हें भाँति-भाँति की यातनाएँ देने की चेष्टा करता, बुद्धिमान और प्रत्युत्पन्नमति रघुनाथदास जी ने सोचा- 'ऐसे काम नहीं चलेगा। किसी-न-किसी प्रकार इस चौधरी को ही वश में करना चाहिये।' ऐसा निश्चय करके वे मन-ही-मन उपाय सोचने लगे। एक दिन जब चौधरी इन्हें बहुत तंग करना चाहता था, तब इन्होंने स्वाभाविक स्नेह दर्शाते हुए अत्यन्त ही कोमल स्वर से कहा- 'चौधरी जी! आप मुझे क्यों तंग करते हैं? मेरे ताऊ, पिता और आप-तीनों भाई-भाई हैं। मैं अब तक तो आप तीनों को भाई ही समझता हूँ। आप तीनों भाई आपस में चाहे लड़ें या प्रेम से रहें, मुझे बीचे में क्यों तंग करते है? आप तो आज लड़ रहे हैं, कल फिर सभी भाई एक हो जायंगे। मैं तो जैसा उनका लड़का वैसा ही आपका लड़का। मैं तो आपको भी अपना बड़ा ताऊ ही समझता हूँ। आप कोई अनपढ़ तो हैं ही नहीं, सभी बातें जानते हैं। मेरे साथ ऐसा बर्ताव आपको शोभा नहीं देता।' गुलाब के समान खिले हुए मुख से स्नेह और सरलता के ऐसे शब्द सुनकर चौधरी का कठोर हृदय भी पसीज गया। उसने अपनी मोटी-मोटी भुजाओं से रघुनाथदास जी को छाती से लगाया और आँखों में आंसू भरकर गद्गद कण्ठ से कहने लगा- 'बेटा ! सचमुच धन के लोभ से मैंने बड़ा पाप किया। तुम तो मरे सगे पुत्र के समान हो, आज से तुम मेरे पुत्र हुए। मैं अभी राजमन्त्री से कहकर तुम्हें छुड़वाये देता हूँ। तुम्हारे ताऊ और पिता जहाँ भी हों उन्हें खबर कर देना कि अब डर करने का कोई काम नहीं है। वे खुशी से अपने घर आकर रहें। 'यह कहकर उन्होंने राजमन्त्री से रघुनाथदास जी को मुक्त करा दिया। वे अपने घर आकर रहने लगे। अब तो उन्हें इस संसार का यथार्थ रूप मालूम पड़ गया। अब तक वे समझते थे कि इस संसार में सम्भवतया थोड़ा-बहुत सुख भी हो, किन्तु इस घटना से उन्हें पता चल गया कि संसार दु:ख और कलह का घर है। कहीं तो दीनता के दु:ख से दु:खी होकर लोग मर रहे हैं, कामपीड़ित हुए कामीजन कामिनियों के पीछे कुत्तों की भाँति घूम रहे हैं। कहीं कोई भाई से लड़ रहा है, तो किसी जगह पिता-पुत्र से कलह हो रहा है। कहीं किसी को दस-बीस गांवों की ज़मींदारी मिल गयी है या कोई अच्छी राजनौकरी या राजपदवी प्राप्त हो गयी है तो वह उसी के मद में चूर हुआ लोगों को तुच्छ समझ रहा है। किसी की कविता की कलाकोविदों ने प्रशंसा कर दी है, तो वह अपने को ही उशना और वेदव्यास समझता है। कोई विद्या के मद में, कोई धन के मद में, कोई सम्पत्ति, अधिकार और प्रतिष्ठा के मद में चूर है। किसी का पुत्र मूर्ख है तो वह उसी की चिन्ता में सदा दु:खी बना रहता है। इसके विपरीत किसी का सर्वगुण सम्पन्न पुत्र है, तो उसे थोड़ा भी रोग होने से पिता का हृदय धड़कने लग जाता है, यदि कहीं वह मर गया तो फिर प्राणान्त के ही समान दु:ख होता है। ऐसे संसार में सुख कहाँ, शान्ति कहाँ, आनन्द तथा उल्लास कहाँ? यहाँ तो चारों ओर घोर विषण्णता, भयंकर दु:ख और भाँति-भाँति की चिन्ताओं का साम्राज्य है। सच्चा सुख तो शरीरधारी श्री गुरु के चरणों में ही है। उन्हीं के चरणों में जाकर परमशान्ति प्राप्त हो सकती है। जो प्रतिष्ठा नहीं चाहते, नेतृत्व नहीं चाहते, मान, सम्मान, बड़ाई और गुरुपने की जिनकी कामना नहीं है, जो इस संसार में नामी पुरुष बनने की वासना को एकदम छोड़ चुके हैं, उनके लिये गुरु चरणों के अतिरिक्त कोई दूसरा सुखकर, शान्तिकर, आनन्दकर तथा शीतलता प्रदान करने वाला स्थान नहीं है। इसलिये अब मैं संसारी भोगों से पूर्ण इस घर में नहीं रहूँगा। अब मैं श्रीचैतन्य चरणों का ही आश्रय ग्रहण करूँगा, उन्हीं की शान्तिदायिनी सुखमयी क्रोड में बालक की भाँति क्रीड़ा करूंगा। उनके अरुण रंगवाले सुन्दर तलुओं को अपनी जिह्वा से चाटूँगा और उसी अमृतोपम माधुरी से मेरी तृप्ति हो सकेगी। चैतन्यचरणाम्बुजों की पावन पराग के सिवा सुख का कोई भी दूसरा साधन नहीं। यह सोचकर वे कई बार पुरी की ओर भगे भी, किन्तु धनी पिता ने अपने सुचतुर कर्मचारियों द्वारा इन्हें फिर से पकड़वा मंगवाया और सदा इनकी देख-रेख रखने के निमित्त दस-पांच पहरेदार इनके ऊपर बिठा दिये। अब ये बन्दी की तरह पहरों के भीतर रहने लगे। लोगों की आँख बचाकर ये क्षण भर को भी कहीं अकेले नहीं जा सकते। इससे इनकी विरह-व्यथा और भी अधिक बढ़ गयी। ये 'हा गौर! हा प्राणवल्लभ! 'कह-कहकर जोरों से रुदन करने लगते। कभी-कभी जोरों से रुदन करते हुए कहने लगते- 'हे हृदयरमण! इस वेदनापूर्ण सागर से कब उबारोगे? कब अपने चरणों की शरण दोगे? कब इस अधम को अपनाओगे? कब इसे अपने पास बुलाओगे ? किस समय अपनी मधुमयी अमृतवाणी से भक्ति-तत्त्व के सुधासिक्त वचनों इस हृदय की दहकती हुई ज्वाला को बुझाओगे। हे मेरे जीवनसर्वस्व! हे मेरी बिना डाँड़की नौका के पतवार! मेरी जीर्ण-शीर्ण तरीके कैवर्तक प्रभो! मुझे इस अन्धकूप से बाँह पकड़कर बाहर निकालो।' इनके ऐसे बे-सिर-पैर के प्रलाप को सुनकर प्रेममयी माता को इनके लिये अपार दु:ख होने लगा। उन्होंने अपने पति, इनके पिता गोवर्धनदास मजूमदार से कहा- 'हमारे कुल का एकमात्र सहारा एक रघु पागल हो गया है। इसे बांधकर रखिये, ऐसा न हो यह कहीं भाग जाय।' पिता ने मार्मिक स्वर में आह भरते हुए कहा- 'रघु को दूसरे प्रकार का पागलपन है। वह संसारी बन्धन को छिन्न-भिन्न करना चाहता है। रस्सी से बाँधने से यह नहीं रुकने का। जिसे कुबेर के समान अतुल सम्पत्ति, राजा के समान अपार सुख, अप्सरा के समान सुन्दर स्त्री और भाग्यहीनों को कभी प्राप्त न होने वाला अतुलनीय ऐश्वर्य ही जब घर में बांध ने को समर्थ नहीं है, उसे बेचारी रस्सी कितने दिनों बांधकर रख सकती है?' माता अपने पति के उत्तर से और पुत्र के पागलपन से अत्यन्त ही दु:खी हुई। पिता भलीभाँति रघुनाथ पर दृष्टि रखने लगे। उन्हीं दिनों श्रीपाद नित्यानन्द जी ग्रामों में घूम-घूमकर संकीर्तन की धूम मचा रहे थे। वे चैतन्य प्रेम में पागल बने अपने सैकड़ों भक्तों को साथ लिये इधर-उधर घूम रहे थे। उनके उद्दण्ड नृत्य को देखकर लोग आश्चर्यचकित हो जाते, चारों ओर उनके यश और कीर्ति की धूम मच गयी। हजारों, लाखों मनुष्य नित्यानन्द प्रभु के दर्शनों के लिये आने लगे। उन दिनों गौड़ देश में 'निताई' के नाम की धूम थी। अच्छे-अच्छे सेठ-साहूकार और भूम्यधिपति इनके चरणों में आकर लोटते और ये उनके मस्तकों पर निर्भय होकर अपना चरण रखते, वे कृतकृत्य होकर लौट जाते। लाखों रूपये भेंट में आने लगे। नित्यानन्द जी खूब उदारतापूर्वक उन्हें भक्तों में बांटने लगे और सत्कर्मों में द्रव्य को व्यय करने लगे। पानीहाटी संकीर्तन का प्रधान केन्द्र बना हुआ था। वहाँ के राघव पण्डित महाप्रभु तथा नित्यानन्द जी के अनन्य भक्त थे। नित्यानन्द जी उन्हीं के यहाँ अधिक ठहरते थे। रघुनाथ जी जब नित्यानन्द जी का समाचार सुना तो वे पिता की अनुमति लेकर बीसों सेवकों के साथ पानीहाटी में उनके दर्शनों के लिये चल पड़े। उन्होंने दूर से ही गंगा जी के किनारे बहुत-से भक्तों से घिरे हुए देवराज इन्द्र के समान देदीप्यमान उच्चासन पर बैठे हुए नित्यानन्द जी को देखा। उन्हें देखते ही इन्होंने भूमि पर लोटकर साष्टांग प्रणाम किया। किसी भक्त ने कहा- श्रीपाद! हिरण्य मजूमदार के कुँवर शाह रघुनाथदास जी आये हैं, वे प्रणाम कर रहे हैं।' 'खिलखिलाते हुए नित्यानन्द जी ने कहा- 'अहा! रघु आया है? आज यह चोर जेल में से कैसे निकल भागा? इसे यहाँ आने की आज्ञा कैसे मिल गयी? फिर रघुनाथदास जी की ओर देखकर कहने लगे- 'रघु! आ, यहाँ आकर मेरे पास बैठ।' हाथ जोड़े हुए अत्यन्त ही विनीत भाव से डरते-से सिकुड़े हुए रघुनाथदास जी सभी भक्तों के पीछे जूतियों में बैठ गये। नित्यानन्द जी ने अब रघुनाथदास जी पर अपनी कृपा की। महापुरुष धनिकों को यदि किसी काम के करने की आज्ञा दें, तो उसे उनकी परम कृपा ही समझनी चाहिये। क्योंकि धन अनित्य पदार्थ है और फिर यह एक के पास सदा स्थायी भी नहीं रहता। महापुरुष ऐसी अस्थिर वस्तु को अपनी अमोघ आज्ञा प्रदान कर स्थिर और सार्थक बना देते हैं। धन का सर्वश्रेष्ठ उपयोग ही यह है कि उसका व्यय महापुरुषों की इच्छा से हो, किन्तु सुयोग सभी के भाग्य में नहीं होता। किसी भाग्यशाली को ऐसा अमूल्य और दुर्लभ अवसर प्राप्त हो सकता है। नित्यानन्द जी के कहने से रघुनाथदास जी ने दो-चार हजार रूपये ही खर्च किये होंगे, किन्तु इतने ही खर्च से उनका वह काम अमर हो गया और आज भी प्रतिवर्ष पानीहाटी में 'चूराउत्सव उनके इस काम की स्मृति दिला रहा है। लाखों मनुष्य उन दिनों रघुनाथदास जी के चिउरों का स्मरण करके उनकी उदारता और त्यागवृत्ति को स्मरण करके गद्गद कण्ठ से अश्रु बहाते हुए प्रेम में विभोर होकर नृत्य करते हैं। महामहिम रघुनाथदास जी सौभाग्यशाली थे, तभी तो नित्यानन्द जी ने कहा- 'रघु! आज तो तुम बुरे फंसे, अब यहाँ से सहज में ही नहीं निकल सकते। मेरे सभी साथी भक्तों को आज दही-चिउरा खिलाना होगा। 'बंगाल तथा बिहार में चिउरा को सर्वश्रेष्ठ भोजन समझते हैं! पता नहीं, वहाँ के लोगों को उनमें क्या स्वाद आता है? चिउरा कच्चे धानों को कूटकर बनाये जाते हैं और उन्हें दही में भिगोकर खाते हैं। बहुत-से लोग दूध में भी चिउरा खाते हैं। दही-चिउरा ही सर्वश्रेष्ठ भोजन है। इसके दो भेद हैं- दही-चिउरा और 'चिउरा-दही'। जिसमें चिउरा के साथ यथेष्ट दही-चीनी दी जाय उसे तो 'दही-चिउरा' कहते हैं और जहाँ दही-चीनी का संकोच हो और चिउरा अधिक होने के कारण पानी में भिगोकर दही-चीनी में मिलाये जायँ वहाँ उन्हें 'चिउरा-दही' कहते हैं। बहुत-से लोग तो पहले चिउरों को दूध में भिगो लेते हैं, फिर उन्हें दही-चीनी से खाते हैं। अजीब स्वाद है। भिन्न-भिन्न प्रान्तों के भिन्न-भिन्न पदार्थों के साथ स्वाद भी भिन्न-भिन्न हैं। एक बात और। चिउरों में छूत-छात नहीं। जो ब्राह्मण किसी के हाथ की बनी पूड़ी तो क्या फलाहारी मिठाई तक नहीं खाते वे भी 'दही-चिउरा, अथवा' चिउरा-दही' को मजे में खा लेते हैं। नित्यानन्द जी की आज्ञा पाते ही रघुनाथदास जी ने फौरन आदमियों को इधर-उधर भेजा। बोरियों में भरकर मनों बढिया चिउरा आने लगे। इधर-उधर से दूध-दही के सैकड़ों घड़ों को सिर पर रखे हुए सेवक आ पहुँचे। जो भी सुनता वही चिउरा-उत्सव देखने के लिये दौड़ा आता। इस प्रकार थोड़ी ही देर में वहाँ एक बड़ा भारी मेला-सा लग गया। चारों ओर मनुष्यों के सिर-ही-सिर दीखते थे। सामने सैकड़ों घड़ों में दूध-दही भरा हुआ रखा था। हजारों बड़े-बड़े मिट्टी के कुल्हड़ दही-चिउरा खाने के लिये रखे थे। दूध और दही के अलग-अलग चिउरा भिगोये गये। दही में कपूर, केसर आदि सुगन्धित द्रव्य मिलाये गये; केला, सन्देश, नारिकेल आदि भी बहुत-से मंगाये गये। जो भी वहाँ आया सभी को दो-दो कुल्हड़ दिये गये। नित्यानंद ने महाप्रभु का आह्वान किया किया। नित्यानंद जी ऐसा प्रतीत हुआ, मानो प्रत्यक्ष श्रीचैतन्य चिउरा-उत्सव देखने के लिए आये हैं। उन्होंने उनके के लिए अलग पात्रों में चिउरा परोसे और 'हरि-हरि' ध्वनि के साथ सभी को प्रसाद पाने की आज्ञा दी। पचासों आदमी परोस रहे थे। जिसे जहाँ जगह मिली, वह वहीं बैठकर प्रसाद पाने लगा, सभी को उस दिन के चिउरों में एक प्रकार के दिव्य स्वाद का अनुभव हुआ, सभी ने खूब तृप्त हो कर प्रसाद पाया। शाम तक जो भी आता रहा, उसे ही प्रसाद देते रहे। रघुनाथदास जी को नित्यानंद जी का उच्छिष्ट प्रसाद मिला। उस दिन राघव पण्डित के यहाँ नित्यानंद जी का भोजन बना था। उसे सभी भक्तों ने मिलकर शाम को पाया। रघुनाथदास उस दिन वहीं राघव पण्डित के घर रहे। दूसरे दिन उन्होंने नित्यानंदजी के चरणों मे प्रणाम करके उनसे आज्ञा माँगी। नित्यानन्द जी ने 'चैतन्यचरणप्राप्ति' का आशीर्वाद दिया। इस आशीर्वाद को पाकर रघुनाथदास जी को परम प्रसन्नता हुई। उन्होंने राघव पण्डित को बुलाया और भक्तों को कुछ भेंट करने की इच्छा प्रकट की। राघव पण्डित ने उन्हें सहर्ष सम्मति दे दी। तब रघुनाथ जी ने नित्यानंद जी के भण्डारी को बुलाकर सौ रुपये और सात तौला सोना नित्यानन्द जी के लिए दे दिया और उसे कहे दिया कि हम चले जायँ, तब प्रभु यह बात प्रकट हो। फिर सभी भक्तों को बुलाकर यथायोग्य उन्हें दस, पाँच, बीस या पचास रुपये भेंट दे-देकर सभी की चरणवंदना की। चलते समय राघव पण्डित को भी वे सौ रुपये और दो तौला सोना दे गये। इस प्रकार यथायोग्य पूजा करके रघुनाथदास जी अपने घर लौट आये। वे शरीर से तो लौट आये, किंतु उनका मन नीलाचल में प्रभु के पास पहुँच गया। अब उन्हें नीलाचल के सिवा कुछ सुझता ही नही था। जब उन्होंने सुना कि गौड़ देश के सैकड़ों भक्त सदा की भाँति रथ यात्रा के उपलक्ष्य से श्रीचैतन्य-चरणों में चार महीने निवास करने के निमित्त नीलाचल जा रहे हैं, तब तो उनकी उत्सुकता परिधि को पार कर गयी, किंतु वे सबके साथ प्रकटरूप से नीलाचल जा ही कैसे सकते थे? इसलिये वे किसी दिन एकान्त में छिपकर घर से भागने का उद्योग करने लगे। समय आने पर प्रारब्ध सभी सुरोगों को स्वयं ही लाकर उपस्थित कर देता है। एक दिन अरुणोदय के समय रघुनाथ जी के गुरु तथा आचार्य यदुनंदन जी उनके पास आये। प्रभु ने हंसकर कहा-'कहीं अपने दुष्कर्म का फल भोग रहा होगा।' तब उन्होंने उस वैष्णव के मुख से जो बात सुनी थी, वह कह सुनायी। इसके पूर्व ही भक्तों को हरिदास जी की आवाज एकान्त में प्रभु के समीप सुनायी दी थी, मानो वे सूक्ष्म-श्रीर से प्रभु को गायन सुना रहे हों। तब बहुतों ने यही अनुमान किया था कि हरिदास ने विष खाकर या और किसी भाँति आत्मघात कर लिया है और उसी के परिणामस्वरूप उसे प्रेतयोनि प्राप्त हुई है या ब्रह्मराक्षस हुआ है, उसी शरीर से वह प्रभु को गायन सुनाता है। किन्तु कई भक्तों ने कहा- 'जो इतने दिन प्रभु की सेवा में रहा हो और नित्य श्री कृष्ण कीर्तन करता रहा हो, उसकी ऐसी दुर्गति होना सम्भव नहीं। अवश्य ही वह गन्धर्व बनकर अलक्षित भाव से प्रभु को गायन सुना रहा है। 'आज श्रीवास पण्डित से निश्चित रूप से हरिदास जी की मृत्यु का समाचार सुनकर सभी को परम आश्चर्य हुआ और सभी उनके गुणों का बखान करने लगे। प्रभु ने दृढ़ता युक्त प्रसन्नता के स्वर में कहा-'साधु होकर स्त्रियों से संसर्ग रखने वालों को ऐसा ही प्रायश्चित ठीक भी हो सकता है। हरिदास ने अपने पाप के उपयुक्त ही प्रायश्चित किया।' नित्यानन्द ने महाप्रभु का आह्मन किया! नित्यानन्द जी को ऐसा प्रतीत हुआ, मानो प्रत्यक्ष श्री चैतन्य चिउरा-उत्सव देखने के लिये आये हैं। उन्होंने उनके लिये अलग पात्रों में चिउरा परोसे और 'हरि-हरि' ध्वनि के साथ सभी को प्रसाद पाने की आज्ञा दी। पचासों आदमी परोस रहे थे। जिसे जहाँ जगह मिली, वही वहीं बैठकर प्रसाद पाने लगा, सभी को उस दिन के चिउरों में एक प्रकार के दिव्य स्वाद का अनुभव हुआ, सभी ने खूब तृप्त होकर प्रसार पाया। शाम तक जो भी आता रहा, उसे ही प्रसाद देते रहे। रघुनाथदास जी को नित्यानन्द जी का उच्छिष्ट प्रसार मिला। उस दिन राघव पण्डित के यहाँ नित्यानन्द जी का भोजन बना था। उसे सभी भक्तों ने मिलकर शाम को पाया। रघुनाथदास उस दिन वहीं राघव पण्डित के घर रहे। दूसरे दिन उन्होंने नित्यानन्द जी के चरणों में प्रणाम करके उनसे आज्ञा मांगी। नित्यानन्द जी ने 'चैतन्यचरणप्राप्ति' का आशीर्वाद दिया। इन आशीर्वाद को पाकर रघुनाथदास जी को परम प्रसन्नता हुई। उन्होंने राघव पण्डित को बुलाया और भक्तों को कुछ भेंट करने की इच्छा प्रकट की। राघव पण्डित उन्हें सहर्ष सम्मति दे दी। तब रघुनाथदास जी ने नित्यानन्द के भण्डारी को बुलाकर सौ रूपये और सात तोला सोना नित्यानन्द जी के लिये दिया और उससे कह दिया कि हम चले जाये, तब प्रभु पर यह बात प्रकट हो। फिर सभी भक्तों को बुलाकर यथायोग्य उन्हें दस, पांच, बीस या पचास रूपये भेंट दे-देकर सभी की चरणवन्दना की। चलते समय राघव पण्डित को भी वे सौ रूपये और दो तोला सोना दे गये। इस प्रकार सभी की यथायोग्य पूजा करके रघुनाथदास जी अपने घर लौट आये। वे शरीर से तो लौटा आये, किन्तु उनका मन नीलाचल में प्रभु के पास पहुँच गया। अब उन्हें नीलाचल के सिवा कुछ सूझता नहीं था। जब उन्होंने सुना कि गौड़ देश के सैकड़ों भक्त सदा की भाँति रथ यात्रा के उपलक्ष्य से श्रीचैतन्य-चरणों में चार महीने निवास करने के निमित्त नीलाचल जा रहे हैं, तब तो उनकी उत्सुकता परिधि को पार कर गयी, किन्तु वे सबके साथ प्रकट रूप से नीलाचल जा ही कैसे सकते थे? इसलिये वे किसी दिन एकान्त में छिपकर घर से भागने का उद्योग करने लगे। समय आने पर प्रारब्ध सभी सुयोगों को स्वयं ही लाकर उपस्थित कर देता है। एक दिन अरुणोदय के समय रघुनाथ जी के गुरु तथा आचार्य यदुनन्दन जी उनके पास आये। उन्हें देखते ही रघुनाथदास जी ने उन्हें भक्ति भाव से प्रणाम किया। आचार्य ने स्नेह के साथ इनके कन्धे पर हाथ रखकर कहा- 'भैया रघु! तुम उस पुजारी को क्यों नही समझाते? वह चार-पांच दिन से हमारे यहाँ पूजा करने आया ही नहीं। यदि वह नहीं कर सकता तो किसी दूसरे ही आदमी को नियुक्त कर दो' धीरे-धीरे रघुनाथदास जी ने कहा- 'नहीं, मैं उसे समझा दूंगा।' यह कहकर वे धीरे-धीरे आचार्य के साथ चलने लगे। उनके साथ-ही-साथ वे बड़े फाटक से बाहर आ गये। प्रात:काल समझकर रात्रि जगे हुए पहरेदार सो गये थे। रघुनाथदास जी को बाहर जाते हुए किसी ने नहीं देखा। जब वे बातें करते-करते यदुनन्दनाचार्य जी के घर के समीप पहुँच गये तब उन्होंने धीरे से कहा- 'अच्छा, तो मैं अब जाऊं?' कुछ सम्भ्रम के साथ आचार्य ने कहा- 'हाँ, हाँ, तुम जाओ। लो, मुझे पता भी नहीं, तुम बातों-ही-बातों में यहाँ तक चले आये! तुम अब जाकर जो करने योग्य कार्य हों, उन्हें करो। 'बस, इसे ही वे गुरु-आज्ञा समझकर और अपने आचार्य महाराज की चरणवन्दना करके रास्ते को बचाते हुए एक जंगल की ओर हो लिये। जो शरीर पर पहने थे, वही एक वस्त्र था। पास में न पानी पीने को पात्र था और न मार्गव्यय के लिये एक पैसा। बस, चैतन्यचरणों का आश्रय ही उनका पावन पाथेय था। उसे ही कल्पतरु समझकर वे निश्चिन्त भाव से पगडण्डी के रास्ते से चल पड़े। धूप-छांह की कुल भी परवा न करते हुए वे बिना खाये-पीये 'गौर-गौर' कहकर रुदन करते हुए जा रहे थे। जो घर के पास के बगीचे में भी पालकी से ही जाते थे, जिन्होंने कभी कोस भर भी मार्ग पैदल तय नहीं किया था, वे ही गोवर्धनदास मजूमदार के इकलौते लाड़िले लड़ैते लड़के कुवँर रघुनाथदास आज पंद्रह कोस- 30 मील शाम तक चले और शाम को एक ग्वाले के घर में पड़ रहे। भूख-प्यास का इन्हें ध्यान नहीं था। ग्वाले ने थोड़ा-सा दूध लाकर इन्हें दे दिया, उसे ही पीकर ये सो गये और प्रात:काल बहुत ही सवेरे फिर चल पड़े। वे सोचते थे, यदि पुरी जाने वाले वैष्णवों ने भी हमें देख लिया तो फिर हम पकड़े जायँगे। इसीलिये वे गांवों में न होकर पगडण्डी के रास्ते से जा रहे थे। इधर प्रात:काल होते ही रघुनाथदास जी खोज होने लगी। रघुनाथ यहाँ, रघुनाथ वहाँ, यही आवाज चारों ओर सुनायी देने लगी। किन्तु रघुनाथ यहाँ वहाँ कहाँ? वह तो जहाँ का था वहाँ ही पहुँच गया। अब झींखते रहो। माता छटपटाने लगी, स्त्री सिर पीटने लगी, पिता आँखें मलने लगे, ताऊ बेहोश होकर भूमि पर गिर पड़े। उसी समय गोवर्धनदास मजूमदार ने पांच घुड़सवारों को बुलाकर उनके हाथों शिवानन्द सेन के पास एक पत्री पठायी कि 'रघु घर से भागकर तुम्हारे साथ पुरी जा रहा है। उसे फौरन इन लोगों के साथ लौटा दो।' घुड़सवार पत्री लेकर पुरी जाने वाले वैष्णवों के पास रास्ते में पहुँचे। पत्र पढ़कर सेन महाशय ने उत्तर लिख दिया- रघुनाथदास जी हमारे साथ नहीं आये हैं, न हमसे उनका साक्षात्कार ही हुआ। यदि वे हमें पुरी मिलेंगे तो हम आपको सूचित करेंगे।' उत्तर लेकर नौकर लौट आये। पत्र को पढ़कर रघुनाथदास जी के सभी परिवार के प्राणी शोकसागर में निमग्न हो गये। इधर रघुनाथदास जी मार्ग की कठिनाईयों की कुछ परवा न करते हुए भूख-प्यास और सर्दी-गर्मी से उदासीन होते हुए पचीस-तीन दिन के मार्ग को केवल बारह दिनों में ही तय करके प्रभुसेवित श्री नीलाचंलपुरी में जा पहुँचे। उस समय महाप्रभु श्री स्वरूपादि भक्तों के सहित बैठे हुए कृष्ण कथा कर रहे थे। उसी समय दूर से ही भूमि पर लेटकर रघुनाथदास जी ने प्रभु के चरणों में साष्टांग प्रणाम किया। सभी भक्त सम्भ्रम के सहित उनकी ओर देखने लगे। किसी ने उन्हें पहचाना ही नहीं। रास्ते की थकान और सर्दी-गर्मी के कारण उनका चेहरा एकदम बदल गया था। मुकुन्द ने पहचाकर जल्दी से कहा- प्रभो! रघुनाथदास जी हैं।' प्रभु ने अत्यन्त ही उल्लास के साथ कहा-'हां, रघु आ गया? बड़े आनन्द की बात है।' यह कहरक प्रभु ने उठकर रघुनाथदास जी का आलिंगन किया। प्रभु का प्रेमालिंगन पाते ही रघुनाथदास जी की सभी रास्ते की थकान एकदम मिट गयी। वे प्रेम में विभोर होकर रुदन करने लगे, प्रभु अपने कोमल करों से उनके अश्रु पोंछते हुए धीरे-धीरे उनके सिर पर हाथ फेरने लगे। प्रभु के सुखद स्पर्श से सन्तुष्ट होकर रघुनाथदास जी ने उपस्थित सभी भक्तों के चरणों में श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया और सभी ने उनका आलिंगन किया। रघुनाथदास जी के उतरे हुए चेहरे को देखकर प्रभु ने स्वरूप दामोदर जी से कहा-'स्वरूप! देखते हो न, रघुनाथ कितने कष्ट से यहाँ आया है। इसे पैदल चलने का अभ्यास नहीं है। बेचारे को क्या काम पड़ा होगा? इनके पिता और ताऊ को तो तुम जानते ही हो। चक्रवर्ती जी (प्रभु के पूर्वाश्रम के नाना श्री नीलाम्बर चक्रवर्ती)-के साथ उन दोनों का भ्रातृभाव का व्यवहार था, इसी सम्बन्ध से ये दोनों भी हमें अपना देवता करके ही मानते हैं। घोर संसारी हैं। वैसे साधु-वैष्णवों की श्रद्धा के साथ सेवा भी करते हैं, किन्तु उनके लिये धन-सम्पत्ति ही सर्वश्रेष्ठ वस्तु है। वे परमार्थ से बहुत दूर हैं। रघुनाथ के ऊपर भगवान ने परम कृपा की, जो इसे उस अन्धकूप से निकालकर यहाँ ले आये। रघुनाथदास जी ने धीरे-धीरे कहा- 'मैं तो इसे श्रीचरणों की ही कृपा समझता हूँ, मेरे लिये तो ये ही युगलचरण सर्वस्व हैं।' महाप्रभु ने स्नेह के स्वर में स्वरूप गोस्वामी से कहा-'रघुनाथ को आज से मैं तुम्हें ही सौंपता हूँ। तुम्हीं आज से इनके पिता, माता, भाई, गुरु और सखा सब कुछ हो। आज से मैं इस 'स्वरूप का रघु' कहा करूंगा।' यह कहकर प्रभु ने रघुनाथदास जी का हाथ पकड़कर स्वरूप के हाथ में दे दिया। रघुनाथदास जी ने फिर से स्वरूप दामोदर जी के चरणों में प्रणाम किया और स्वरूप गोस्वामी ने भी उन्हें आलिंगन किया। उसी समय गोविन्द ने धीरे से रघुनाथ को बुलाकर कहा-'रास्ते में न जाने कहाँ पर कब खाने को मिला होगा, थोड़ा प्रसाद पा लो।' रघुनाथ जी ने कहा,'समुद्रस्नान और श्री जगन्नाथ जी के दर्शनों के अनन्तर प्रसाद पाऊंगा।' यह कहकर वे समुद्रस्नान करने चले गये और वहीं से श्री जगन्नाथ जी के दर्शन करते हुए प्रभु के वासस्थान पर लौटा आये। महाप्रभु के भिक्षा कर लेने पर गोविन्द प्रभु का उच्छिष्ट महाप्रसाद रघुनाथदास जी को दिया। प्रभु का प्रसादी महाप्रसाद पाकर रघुनाथ जी वहीं निवास करने लगे। गोविन्द उन्हें नित्य महाप्रसाद दे देता था और ये उसे भक्ति-भाव से पा लेते थे। इस प्रकार ये घर छोड़कर विरक्त-जीवन बिताने लगे। श्रीकृष्ण! गोविन्द! हरे मुरारे! हे नाथ! नारायण! वासुदेव! ----------:::×:::---------- - प्रभुदत्त ब्रह्मचारी श्री श्रीचैतन्य चरित्रावली (123) गीताप्रेस (गोरखपुर) "जय जय श्री राधे" "कुमार रौनक कश्यप " *******************************************

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. "जब नारद जी को राधा रानी ने दर्शन दिये" एक समय नारद जी यह जानकर की, भगवान् श्री कृष्ण ब्रज में प्रकट हुए हैं वीणा बजाते हुए गोकुल पहुँचे। वहाँ जाकर उन्होंने नंदजी के गृह में बालक का स्वांग बनाए हुए महा योगीश्वर दिव्य दर्शन भगवान् अच्युत के दर्शन किये। वे स्वर्ण के पलंग पर जिस पर कोमल श्वेत वस्त्र बिछे थे सो रहे थे और प्रसन्नता के साथ प्रेम विह्वल हुई गोप बालिकाएँ उन्हें निहार रही थीं। उनका शरीर सुकुमार था। जैसे वे स्वयं भोले थे वैसी ही उनकी चितवन भी बड़ी भोली-भाली थी। काली-काली घुँघराली अलकें भूमि को छू रही थीं। वे बीच-बीच में थोडा-सा हंस देते थे, जिससे दो एक दांत झलक पड़ते थे। उन्हें नग्न बालक रूप में देखकर नारद जी को बड़ा हर्ष हुआ। इसके बाद महाभागवत नारद जी यह विचारने लगे - भगवान् की कान्ता लक्ष्मी देवी भी अपने पति नारायण के अवतीर्ण होने पर उनके विहारार्थ गोपी रूप धारण करके कहींं अवश्य ही अवतीर्ण हुई होंगी इसमें संदेह नहीं है। अतः ब्रज वासियों के घरों में उन्हें खोजना चाहिये। ऐसा विचार कर मुनिवर ब्रज वासियों के घरों पर अतिथि रूप में जा जाकर उनके द्वारा विष्णु बुद्धि से पूजित होने लगे। उन्होंने भी गोपों का नंदनंदन में उत्कृष्ट प्रेम देखकर मन ही मन सबको प्रणाम किया। ----------:::×:::---------- "नारद जी का वृषभान जी के घर जाना" तदन्तर वे नन्द के मित्र महात्मा वृषभानु के घर पर गए। उन्होंने उनकी विधिवत पूजा की। तब महामना नारदजी ने उनसे पूछा, साधो ! तुम अपनी धार्मिकता के कारण विख्यात हो। क्या तुम्हें कोई सुयोग्य पुत्र अथवा सुलाक्ष्ना कन्या है जिससे तुम्हारी कीर्ति समस्त लोकों को व्याप्त कर सके।" मुनिवर के ऐसा कहने पर वृषभानु ने पहले तो अपने महान तेजस्वी पुत्र को लाकर उससे नारदजी को प्रणाम कराया। तदन्तर अपनी कन्या को दिखाने के लिए नारदजी को घर के अन्दर ले गए। गृह में प्रवेश कर उन्होंने पृथ्वी पर लोटती हुई नन्हीं सी दिव्य बालिका को गोद में उठा लिया। उस समय उनका चित्त स्नेह से विह्वल हो रहा था। कन्या के अदृष्ट तथा अश्रुतपूर्व अधभुत स्वरुप को देखकर नारदजी मुग्ध हो गए तथा दो मुहूर्त तक एक टक निहारते रहे और महान आश्चर्य में पड गए। फिर मुनि ने मन में इस प्रकार विचारा, कि मैंने स्वछंद्कारी होकर समस्त लोकों में भ्रमण किया पर ऐसी अलोकिक कन्या कहींं भी नहीं देखी। जिसके रूप से चराचर जगत मोहित हो जाता है उस महामाया भगवती गिरिराज कुमारी को भी मैंने देखा है। वह भी इसकी शोभा को नहीं पा सकती। लक्ष्मी सरस्वती कान्ति और विद्या आदि देवियाँ इसकी छाया को भी स्पर्श नहीं कर सकतीं। अतः इसके तत्व को जानने की शक्ति मुझमें किसी तरह नहीं है। अन्य जन भी प्रायः इस हरी वल्लभा को नहीं जानते। इसके दर्शन मात्र से गोविन्द के चरण कमलों में मेरे प्रेम की जैसी बुद्धि हुई है वैसी इसके पहले कभी नही हुई थी। ऐसा विचार कर मुनि ने गोप प्रवर वृषभानु को कहींं अन्यत्र भेज दिया, और एकांत स्थान में वे उस दिव्य रूपिणी कन्या की स्तुति करने लगे। स्तुति करने के बाद नेत्रों से अश्रु बहाते हुए बड़े ही विनय युक्त स्वर में बोले, "हे हरिवल्लभे ! तुम्हारे इस पूजनीय दिव्य स्वरुप को देखना चाहता हूँ जिससे नन्दनंदन श्रीकृष्ण मुग्ध हो जायेंगे। माहेश्वरी तुम शरणागत तथा प्रणत भक्त के लिए दया करके तुम अपना स्वरुप प्रकट कर दो।" यों निवेदन करके नारदजी ने तदर्पित चित्त से उस महानन्दमई परमेश्वरी को नमस्कार किया और भगवान् गोविन्द की स्तुति करते हुए वे उस देवी की ओर ही देखते रहे। जिस समय वे श्रीकृष्ण नाम कीर्तन कर रहे थे उसी समय भानु सुता ने चतुर्दश वर्षीय परम लावण्यमय अत्यंत मनोहार दिव्यरूप धारण कर लिया। तत्काल ही अन्य ब्रज बालाओं ने जो उसी के समान अवस्था की थीं तथा दिव्यभूषण एवं सुन्दर हार धारण किये हुए थी, बाला को चारों ओर से आवृत कर लिया। उस समय बालिका की सखियाँ उसके चरणोदक की बूंदों से मुनि को सींचकर, कृपा पूर्वक बोलीं, "महाभाग मुनिवर ! वस्तुतः आपने ही भक्ति के साथ भगवान् की आराधना की है क्योंकि इस रूप के दर्शन तो ब्रह्मा आदि देवताओं को भी दुर्लभ हैं उसी अद्भुत रूप के उन विश्वमोहिनी हरिप्रिया ने किसी पुण्य के फलस्वरूप आपको दर्शन मिले हैं। ब्रह्म ऋषि उठो ! उठो ! शीघ्र ही धैर्य धारण कर इसकी परकरमापरिक्रमा तथा बार-बार इसे नमस्कार करो क्या तुम नहीं देखते की इसी क्षण ये अंतर्धान हो जायेंगी फिर इनके साथ किसी तरह तुम्हारा संभाषण नहीं हो सकेगा।" उन प्रेम विह्वल सखियों के वचन सुनकर नारदजी ने दो मुहूर्त तक उस सुंदरी बाला की परदक्षिणा करके साष्टांग प्रणाम किया। उसके बाद वृषभानु को बुलाकर कहा, "तुम्हारी पुत्री का प्रभाव बहुत बड़ा है। देवता भी इसका महत्त्व नहीं जान सकते। जिस घर में इनका चरण चिन्ह है वहाँ साक्षात् भगवान् नारायण निवास करते हैं और समस्त सिद्धियों सहित लक्ष्मी भी वहाँ रहती हैं। आज से सम्पूर्ण आभुषणों से भूषित इस सुन्दर कन्या की महादेवी के समान यतन पूर्वक घर में रक्षा करो।" ऐसा कह कर नारदजी हरी गुण गाते हुए चले गए। ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधे" "कुमार रौनक कश्यप " *******************************************

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sukhadev awari Apr 11, 2021

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❤Dev❤ Apr 10, 2021

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🔔°•🔔••🔔°•🔔•°🔔°•🔔•°🔔 🍁°•🍁•°🍁°•🍁•°🍁°•🍁•°🍁 ॐ सूर्याय नम:, ॐ मित्राय नम:,ॐ रवये नम:,ॐ भानवे नम:, ॐ खगाय नम:,ॐ पूष्णे नम:, ॐ हिरण्यगर्भाय नम:,ॐ मारीचाय नम:, ॐ आदित्याय नम:, ॐ सावित्रे नम:, ॐ अर्काय नम:,ॐ भास्कराय नमः सुप्रभातम् ॐ श्रीगणेशाय नमः अथ् पंचांगम् दिनाँक 11-04-2021 रविवार, अक्षांश- 30°:36", रेखांश 76°:80" अम्बाला शहर, हरियाणा, पिन कोड 134 007 🍂🥀🌹🌾🌷🍁🌹🍂 🙏°•🙏•°🙏•°🙏 समाप्तिकाल °••°°•°•°°•°°•°•°•°°••°°••°°••°°••°•°°• 🏵️📒तिथि चतुर्दशी 06:05:18 🏵️☄️ नक्षत्र उत्तराभाद्रपद 08:58:03 🏵️ करण : 🏵️ शकुन 06:05:18 🏵️चतुष्पाद 19:01:17 🔒 पक्ष कृष्ण 🏵️ योग एन्द्र 13:51:46 🗝️ वार रविवार 🌄 सूर्योदय 06:01:02 🌙चन्द्र राशि मीन 🐬 🌌 सूर्यास्त 18:47:37 🌑 चन्द्रास्त 18:11:00 🏵️ ऋतु वसंत 🌈 🏵️शक सम्वत 1942 शार्वरी 🏵️ कलि सम्वत 5122 🏵️ दिन काल 12:46:34 🏵️ विक्रम सम्वत 2077 🏵️ मास अमांत फाल्गुन 🏵️ मास पूर्णिमांत चैत्र 📯 शुभ समय 🎊 अभिजित 11:58:46 - 12:49:52 🕳️ दुष्टमुहूर्त 17:05:24 - 17:56:30 🕳️ कंटक 10:16:33 - 11:07:39 🕳️ यमघण्ट 13:40:58 - 14:32:05 😈 राहु काल 17:11:47 - 18:47:37 🕳️ कुलिक 17:05:24 - 17:56:30 🕳️ कालवेला 11:58:46 - 12:49:52 🕳️ यमगण्ड 12:24:19 - 14:00:08 🕳️गुलिक 15:35:58 - 17:11:47 🛑 दिशा शूल पश्चिम 🚩🚩 होरा 🏵️सूर्य 06:01:02 - 07:04:54 🏵️शुक्र 07:04:54 - 08:08:47 🏵️बुध 08:08:47 - 09:12:40 🏵️चन्द्रमा 09:12:40 - 10:16:33 🏵️शनि 10:16:33 - 11:20:26 🏵️बृहस्पति 11:20:26 - 12:24:19 🏵️मंगल 12:24:19 - 13:28:12 🏵️सूर्य 13:28:12 - 14:32:05 🏵️शुक्र 14:32:05 - 15:35:58 🏵️बुध 15:35:58 - 16:39:51 🏵️चन्द्रमा 16:39:51 - 17:43:44 🏵️शनि 17:43:44 - 18:47:37 🏵️बृहस्पति 18:47:37 - 19:43:38 🏵️मंगल 19:43:38 - 20:39:39 🏵️सूर्य 20:39:39 - 21:35:40 🚩🚩 चोघडिया 🕳️उद्वेग 06:01:02 - 07:36:51 🛑चल 07:36:51 - 09:12:40 ⛩️लाभ 09:12:40 - 10:48:30 ⛩️अमृत 10:48:30 - 12:24:19 🕳️काल 12:24:19 - 14:00:08 ⛩️शुभ 14:00:08 - 15:35:58 ☘️रोग 15:35:58 - 17:11:47 😈उद्वेग 17:11:47 - 18:47:37 ⛩️शुभ 18:47:37 - 20:11:39 ⛩️अमृत 20:11:39 - 21:35:41 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 🍁 ग्रह गोचर 🍁 🌞 सूर्य - मीन 🐬 🌙 चन्द्र - मीन 🐋 🥏 मंगल - वृष 🐂 🥏 बुध - मीन 🐬 🥏 बृहस्पति - कुम्भ ⚱️ 🥏 शुक्र - मेष 🦌 🥏 शनि - मकर 🐊 🥏 राहु - वृष 🐂 🥏 केतु - वृश्चिक 🦞 --------------------------------------------- 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 व्रत त्यौहार मास 09-15 अप्रैल तक ☘️🌾🌸💐🥀☘️💐🌸 🛑शुक्र -9 अप्रैल भद्रा 2828 से, प्रदोष व्रत। 🛑शनि - 10 अप्रैल भद्रा तारा 16:17 तक, शुक्र अश्विन 1 मेष 🦌 में 6:28, मेला पृथूद्क (पिहोवा तीर्थ )हरियाणा, मासिक शिवरात्रि व्रत। 🛑 रवि- 11 अप्रैल पितृ कार्येषु अमावस, गंड मूल 8:58 से। 🛑 चंद्र- 12 अप्रैल चैत्र (सोमवती) अमावस-- चैत्र सोमवती अमावस को हरिद्वार आदि तीर्थ स्थान पर कुंभ स्नान, दान जप भगवान शिव व विष्णु पूजन तथा पीपल (अश्वत्थ) वृक्ष की पुष्पाक्षत चावल फल धूप दीप आदि सहित पूजन परिक्रमा करने से अनेक पापों से मुक्ति मिलती है । पंचक समाप्त 11:29, द्वितीय शाही स्नान - कुंभ महापर्व हरिद्वार, प्रयागराज आदि तीर्थ स्थान महात्म्य, विक्रमी संवत 2077 पूर्ण । 🛑 13 अप्रैल, मंगलवार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, भरणी ☄️नक्षत्र कालीन अर्धरात्रि के बाद 2:33,( 26/33) पर 🐊मकर लग्न में प्रवेश करेगी। 15 मुहूर्ति इस सक्रांति के स्नान दान आदि का पुण्य काल आगामी दिन 14 अप्रैल, बुधवार को प्रातः 8:57 तक होगा। वार अनुसार महोदरी तथा नक्षत्र अनुसार घोरा नाम की यह सक्रांति नेताओं/ बुरों के लिए लाभप्रद होगी। कुंभ महापर्व हरिद्वार का मुख्य शाही स्नान इसी दिन होगा । राशिफल- यह सक्रांति मेष कर्क कन्या तुला मकर कुंभ मीन राशि वालों के लिए शुभ फलदायक होगी । लोग भविष्य -- मासारम्भ 🌞सूर्य पर शनि की 👁️दृष्टि तथा मंगल राहु योग के कारण प्रतिकूल ⛈️वर्षा से खड़ी फसलों को हानि पहुंचेगी। सक्रांति कुंडली में मंगल शनि के मध्य षडाष्टक योग बना हुआ है। राजनैतिक वातावरण अशांत तथा असमंजस पूर्ण रहेगा । सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के नेताओं में परस्पर टकराव हुआ खींचातानी बढ़ेगी। परस्पर तालमेल की कमी रहेगी। सोना-चांदी और धातुओं सरसों क्रूड आयल में विशेष📈 तेजी बनेगी। 🛑 मंगल - 13 अप्रैल '"राक्षस"'नाम विक्रमी संवत 2078 प्रारंभ - 13 अप्रैल मंगलवार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शिवविंशति का राक्षस नामक विक्रमी संवत 2078 आरंभ होगा। आगामी संवत् में व्रत अनुष्ठान संकल्प दान आदि शुभ कार्यों में राक्षसों संवत्सर का ही प्रयोग होगा। नए संवत् का राजा मंगल तथा मंत्री भी मंगल है। जब राजा और मंत्री के पद एक ही ग्रह के पास हों (वह भी क्रूर ग्रह के पास ) तो समाज में आवेश एवं क्रोध के कारण हिंसक एवं उपद्रव की घटनाएं अधिक होंगी। रोग अग्निकांड वाहन दुर्घटनाएं अधिक हों- *स्वयं राजा स्वयं मंत्री जनेषु रोगपीड़ा चोराग्नि, शंका विग्रह भयं च नृपाणाम् ।* इस दिन नए संवत् आदि के फल किसी श्रेष्ठ ब्राह्मण या गुरु मुख से श्रद्धा पूर्वक संवत्सर के पूजन उपरांत श्रवण करना चाहिए। तारीख 13 को ही चैत्र *(वसंत )* नवरात्र प्रारंभ होंगे। इसी दिन प्रातः काल श्री दुर्गाजी की मूर्ति एवं घट स्थापन करके श्रीमूर्ति के सम्मुख प्रतिपदा से नवमी तक नित्य प्रति घी की ज्योति जला कर श्रीदुर्गा पूजा एवं श्रीदुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। अंतिम नवरात्र ( या दशमी ) के दिन हरी दूर्वा को पूजा अर्चन के पश्चात नदी /नहर में विसर्जन करने की परंपरा है। चैत्र (वासंत) नवरात्र प्रारंभ । चैत्र शुक्ल पक्ष प्रारंभ, चंद्र दर्शन मु 15, घट स्थापन,🌞 सूर्य ☄️अश्विन 1 मेष🦌 में, 26:33, वैशाख सक्रांति, मु.15, पुण्य काल सक्रांति अगले दिन प्रातः 8:57 तक, वैशाखी पर्व (पंजाब), मंगल मिथुन👬🏼 में 25:13, संवत्सर फल श्रवण, ध्वजारोहण, तेलाभ्यंग, श्रीदुर्गा- पूजा, गुड़ी पड़वा। 🛑 बुध - 14 अप्रैल - कुंभ महापर्व (हरिद्वार) प्रमुख (तृतीय) शाही स्नान, रमजान मुस्लिम मास प्रारंभ। 🛑 गुरु - 15 अप्रैल भद्रा 28:47 से, गणगौरी तृतीया, श्रीमत्स्य - जयंती । 🥀🌾💐🌸🥀🌾💐 बाजार मंदा📉 तेजी📈 16 अप्रैल तक 🛑🛑 🌸2 अप्रैल को मंगल मृगशिर तथा बुध उत्तराभाद्रपद ☄️नक्षत्र में आने से तेल चांदी शहद गुड़ में तेजी शेयर बाजार तथा अन्य व्यापारिक वस्तुओं में कुछ मंदी रहेगी। 🌸 5 अप्रैल को गुरु कुंभ ⚱️राशि में आने से रुई चांदी में तेजी 📈दिखकर शीघ्र ही मंदी 📉का रुख बन जायगा। सोना तांबा पीतल कांसा लोहा शीशा वस्त्रों क्रूड आयल में 1- 2 मास तक मंदी📉 का रुझान रहकर फिर तेजी📈 का रुख बनेगा है। 🌸 6 अप्रैल को बुध पूर्व में अस्त 🌌होने से अनाज घी मूंग आदि में मंदी📉 रूई सोने में घटा बढ़ी के बाद तेजी📈 बनेगी। 🌸 10 अप्रैल को बुध रेवती नक्षत्र☄️ में आकर सूर्य 🌞के साथ मेल🔗 करेगा तथा शुक्र इसी समय मेष 🦌राशि में आएगा। गेहूं चना अनादि भी सोना चांदी में विशेष तेजी📈 का रुख रहेगा। गुड़ शक्कर बारदाना केसर मजीठ चंदन लाल मिर्च आदि में भी घटा बढ़ी के बाद तेजी📈 बनेगी। 🌸13 अप्रैल को सूर्य 🌞अश्विनी नक्षत्र☄️ तथा मेष 🦌राशि में आकर शुक्र के साथ मेल 🔗करेगा। इसी दिन मंगल मिथुन👬🏼 राशि में आकर शनि के साथ षडाष्टक संबंध बनाएगा। दोनों योग तेजी कारक हैं ।रुई कपास सूत घीे तेल सरसों नारियल सुपारी बादाम गुड़ खांड शक्कर सोना चांदी उड़द क्रूड ऑयल लोहा सोयाबीन ऑयल में तेजी 📈बनेगी। चावल अरहर चना मूंग आदि कुछ वस्तुओं में भी मंदी📉 रहेगी। 🌸 16 अप्रैल को बुध भी मेष🦌 राशि में आकर सूर्य 🌞एवं शुक्र के साथ मेल🔗 करेगा। अकेला बुध यद्यपि यहां मंदी कारक होता है। परंतु ग्रह योग से यहां मंदी📉 की जगह तेजी📈 बनेगी। सोना चांदी आदि धातुओं गेहूं चना जौं आदि अन्न तेल सरसों रुई कपास घी गुड़ खांड में घटा बढ़ी के बाद तेजी📈 बनेगी। 🏵️आज का राशिफल🏵️ मेष🦌 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) आज का दिन विपरीत फलदायक है स्वभाव की मनमानी आज किसी न किसी रूप में हानि कराएगी। आज भी आपका मन अनैतिक कर्मो में अधिक रहेगा किसी के टोकने पर अभद्र व्यवहार करने से भी नही शर्माएंगे। मौज शौक के पीछे संचित धन भी खर्च कर सकते है बाद में आर्थिक संकट में फसेंगे। कार्य व्यवसाय की स्थिति आज दयनीय रहेगी सहयोगी एवं समय की कमी के कारण बड़े लाभ से वंचित रह जाएंगे। मध्यान बाद थोड़ी बहुत आय होगी लेकिन आकस्मिक नुकसान भी होने से भरपाई नही कर पाएंगे। किसी से उधार लेने की नौबत आ सकती है आज वह भी मिलना मुश्किल है। घर मे माता से कलह के बाद अनैतिक लाभ उठाएंगे किसी न किसी से तकरार लगी रहेगी। किसी भी प्रकार के जोखिम से बचे दुर्घटना की सम्भवना है सेहत में उतारचढ़ाव लगा रहेगा। वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) आज का दिन आपके लिये मिश्रित फलदायक रहेगा। पूर्व में किसी गलती को लेकर मन मे ग्लानि होगी लेकिन सुधार करने की जगह दोबारा वही गलती करने पर किसी से अनबन के साथ शत्रुओ में वृद्धि भी होगी। आज घरेलू एवं व्यक्तिगत सुख सुविधा जुटाने के चक्कर मे अनैतिक कार्यो करने से परहेज नही करेंगे इससे बचे अन्यथा सरकारी उलझनों में फंसने की संभावना है। कार्य व्यवसाय में स्थिरता नही रहेगी धन अन्य लोगो की नजर में आपका व्यवसाय उत्तम रहेगा लेकिन होगा इसके विपरीत ही पूर्व में किये किसी सौदे को छोड़ अन्य किसी मार्ग से धन की आमद रुकेगी। स्त्री वर्ग बोल चाल में सावधानी बरतें छोटी सी बात पर कलह हो सकती है। सेहत कुछ समय के लिये नरम रहेगी। मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा) आज का दिन साधारण रहेगा दिन के पूर्वार्ध में स्वास्थ्य ठीक रहने पर भी आलस्य के कारण कार्यो में विलंब होगा घरेलू कार्य भी धीमी गति से चलेंगे बाद में हड़बड़ी करने पर नुकसान होने की संभावना है। कार्य क्षेत्र पर लाभ पाने के लिये विविध युक्तियां लगाएंगे लेकिन आज अधिकांश में असफलता ही मिलेगी धन लाभ अवश्य होगा पर पुराने उधार एवं दैनिक खर्च के आगे कम ही रहेगा। धर्म कर्म में आस्था रहने पर भी आज भाग्य का साथ कम ही मिलेगा नौकरी वालो को आज पुराना अधूरा कार्य मुसीबत लगेगा। विरोधी पक्ष पर ढील न बरतें अन्यथा बाद में परेशानी में डालेंगे। घर मे खर्चो को लेकर आपसी मतभेद उभरेंगे। मौसमी बीमारी का प्रकोप सेहत पर देखने को मिलेगा। कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) आज का दिन शुभफलदायक रहेगा। भागदौड़ आज किसी न किसी काम से लगी रहेगी लेकिन इसका सफल परिणाम दिन भर उत्साहित रखेगा। दिन के आरंभ में पेट अथवा मासपेशियो मे थोड़ी बहुत तकलीफ होगी लेकिन मध्यान तक स्वतः ही सही हो जाएगी। काम-धंधे को लेकर आज गंभीर रहेंगे अन्य आवश्यक कार्य भी इसके लिये निरस्त करेंगे धन लाभ भाग्य का साथ मिलने से अवश्य होगा लेकिन तुरंत कही न कही खर्च भी हो जाएगा आज खर्च दिखावे के ऊपर भी करने पड़ेंगे। घर का वातावरण मध्यान तक शांत रहेगा इसके बाद इसके बाद व्यवसाय अथवा अन्य घरेलू कारणों से किसी से खींचतान होने की संभावना है वाणी का प्रयाग संभालकर करें अन्यथा संबंधों में लंबे समय के लिये कड़वाहट बन सकती है। सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) आज का दिन सेहत को लेकर परेशान रहेंगे। घर मे मौसमी बीमारियों के कारण सर्दी जुखाम से कोई ना कोई परेशान रहेगा दैनिक कार्य भी विलंब से होंगे जिससे अन्य कार्यो में भी विलंब होता जाएगा। कार्य व्यवसाय से आज लाभ की आशा ना रखे उल्टे किसी से धन अथवा अन्य कारणों से विवाद होने पर भविष्य के लाभ से भी हाथ धो बैठेंगे। संध्या के आस पास किसी के सहयोग से धन संबंधित कोई काम बनने से कुछ राहत मिलेगी। लेकिन आज पैतृक धन अथवा संपत्ति में हास होने के योग भी है। घरेलू एवं व्यावसायिक खर्चो को लेकर विशेष चिंता रहेगी। धर्म कर्म में आज निष्ठा तो रहेगी फिर भी रुचि नही दिखाएंगे। परिजनों को अधिक समय दे गलतफहमियां दूर होंगी। कन्या👩🏻‍🦱 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) आज के दिन आपके मन मे उधेड़ बुन लगी रहेगी जो करना चाहेंगे उसे नही कर पाएंगे उल्टे जिस का को करने से चिढ़ते है मजबूरी में वही करना पड़ेगा। मध्यान तक का समय फिर भी मानसिक एवं पारिवारिक रूप से शांतिदायक रहेगा घर मे पूजा पाठ दानपुण्य होने से वातावरण ऊर्जावान रहेगा। मध्यान बाद का समय विविध उलझनों वाला रहेगा। कार्य व्यवसाय में भी आज मंदी का सामना करना पड़ेगा भागदौड़ करने पर भी खर्च निकलने लायक आय मुश्किल से ही मिल पाएगी। सहकर्मी अपना काम आपके सर थोपेंगे व्यवहारिकता में मना भी नही कर पाएंगे। लघु यात्रा के योग है सम्भव हो तो टाले खर्च के अलावा कुछ नही मिलेगा। तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) आज के दिन भागदौड़ लगी रहेगी दिन के आरंभ से ही आकस्मिक यात्रा की योजना बनेगी इसके अंत समय पर टलने की संभावना भी है। आज आप जो भी कामना करेंगे परिस्थिति स्वतः ही उसके अनुकूल बनने लगेगी कार्य व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा रहने पर भी आपके कार्यो में बाधा नही पहुचेगी पूर्व में बनाई योजना आज फलीभूत होगी धन लाभ भी आवश्यकता पड़ने पर हो जाएगा लेकिन अतिरिक्त खर्च आने से हाथ मे रुकेगा नही। घर के सदस्यों से जबरदस्ती बात मनवाएँगे फिर भी परिजनों से भावनात्मक संबंध बने रहेंगे। संध्या बाद का समय अत्यधिक थकान वाला रहेगा फिर भी बेमन से सामाजिक व्यवहारों के कारण आराम करने का मौका चाह कर भी नही मिलेगा। सेहत में विकार आने की संभावना है सतर्क रहें। वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) आज आप प्रत्येक कार्य बुद्धि विवेक से करेंगे लेकिन पूर्व में बरती अनियमितता के कारण आज शत्रु पक्ष प्रबल रहेंगे घर के सदस्यों का व्यवहार भी आज विपरीत रहेगा फिर भी आपको सबकी कमजोरी पता होने का फायदा मिलेगा लोग पीठ पीछे ही आलोचना करेंगे सामने कोई नही आएगा। व्यवसाय की गति आज अन्य दिनों को तुलना में धीमी रहेगी किसी कार्य से लाभ होते होते अंत समय मे लटक सकता है फिर भी खर्च निकालने लायक आय किसी पुराने अनुबंध द्वारा सहज हो जाएगी। भागीदारी के कार्य मे आज निवेश से बचे नाही किसी वस्तु का संग्रह करें आगे धन फंस सकता है। घर मे आवश्यकता के समय ही बोले शांति बनी रहेगी। सेहत में कुछ न कुछ विकार लगा रहेगा। धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे) आज का दिन आपके लिये प्रतिकूल रहेगा दिन के आरंभ से ही किसी से कहासुनी की संभावना रहेगी इसके लिये ज्यादा इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा संतान अथवा किसी अन्य परिजन का उद्दंड व्यवहार कलह करवाएगा फिर भी आप धैर्य से काम लें अन्यथा एक बार मानसिक अशान्ति बनी तो संध्या तक परेशान करेगी। कार्य क्षेत्र से आज ज्यादा संभावना नही रहेगी फिर भी किसी न किसी माध्यम से आकस्मिक लाभ संचित कोष में वृद्धि करेगा। आज वाणी एवं व्यवहार पर अधिक संयम रखने की आवश्यकता है अन्यथा कई दिनों में बनी गरिमा धूमिल होने में वक्त नही लगेगा। संध्या के समय थकान अधिक होगी लेकिन स्वास्थ्य सामान्य बना रहेगा। मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी) आज का दिन लाभदायक रहेगा लेकिन ध्यान रहे आपका व्यवहार होने वाले लाभ को कम या अधिक करने में महत्तवपूर्ण भूमिका रखेगा। वैसे तो आज काम निकालने के लिये मीठा व्यवहार ही करेंगे लेकिन जिससे ख़ट पट हुई उसकी शक्ल भी देखना पसंद नही करेंगे चाहे हानि ही क्यो ना हो। कार्य व्यवसाय के साथ अन्य मार्ग से धन की आमद अवश्य होगी माता का व्यवहार आज कुछ अटपटा रहने के बाद भी इनके सहयोग अथवा अचल संपत्ति से भी लाभ की संभावना है। पति-पत्नी में किसी बात को लेकर ठनेगी फिर भी मामला ज्यादा गंभीर नही होने देंगे। व्यावसायिक यात्रा से धन मिल सकता है। विदेश जाने के इच्छुक आज प्रयास अवश्य करें सफल होने की संभावना अधिक है। सेहत छोटी मोटी समस्या को छोड़ ठीक रहेगी। कुंभ⚱️ (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा) आज के दिन आपको उतार चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा आपका स्वभाव आज संतोषी ही रहेगा फिर भी आकस्मिक आने वाले क्रोध पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। आज आपका स्वभाव शंकालु रहेगा हर कार्य को करने से पहके हानि लाभ की परख करेंगे लेकिन किसी के दबाव अथवा बहकावे में आकर गलत निर्णय लेंगे बाद में इससे पछतावा हो इससे बेहतर आज ज्यादा झमेले वाले कार्यो से दूर ही रहे। भाई बंधुओ से संबंध ईर्ष्या युक्त होने पर भी कार्य क्षेत्र पर सहयोग अथवा मार्गदर्शन मिलने से आवश्यकता अनुसार धन सहज ही मिल जाएगा। घर मे पति-अथवा पत्नी की किसी गुप्त कामना को पूर्ण ना कर पाने पर खटास आ सकती है। धर्म कर्म में केवल व्यवहारिकता मात्र ही रहेगी। आरोग्य बना रहेगा। मीन🐬 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) मन मे चंचलता बढ़ने के कारण आज आपका स्वभाव पल पल में बदलेगा किसी भी कार्य मे अनिर्णय की स्थिति बाधा डालेगी जिससे कार्यो में विलंब होगा। स्वभाव में आडंबर रहने पर सार्वजनिक क्षेत्र पर आपकी पहचान धनवानों जैसी बनेगी इसको बनाये रखने पर भी व्यर्थ खर्च करेंगे। कार्य व्यवसाय से आज कामना पूर्ति करना सम्भव नही माथापच्ची के बाद आय अवश्य होगी लेकिन नियमित ना होकर अंतराल पर होने से अधिक चौकन्ना रहना पड़ेगा। छाती अथवा छाती से ऊपरी भाग में कोई न कोई समस्या बनेगी समय से उपचार ले गंभीर भी हो सकती है। भावुकता अधिक रहेगी विपरीत लिंगीय के प्रति आकर्षित होंगे लेकिन मन ना मिलने पर दुख भी होगा। ACHARYA ANIL PARASHAR, VADIC,KP ASTROLOGER. 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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