Anjana Gupta
Anjana Gupta Apr 12, 2019

Jai Mata Di Ji 🌹🙏🌹

Jai Mata Di Ji 🌹🙏🌹

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कामेंट्स

Bindu singh Apr 12, 2019
Jai Mata di ji Radhe Radhe ji god bless u sister good night ji 🙏🌷

Jawaharlal Bhargava Apr 12, 2019
🚩🚩 Jai Maa KALRATRI KI MAA kalratri Sab Ki Manokamna Puri Karna🌷 Aap Ka har pal Shubh v Mangalmay ho 🌷 🙏🙏 Sister Ji

R S Tiwari. Apr 12, 2019
Jay. maa Kalratri God bless you nd your family Good Night ji nmskar ji

Cg Sahu Apr 12, 2019
nice good night radhey krishna ji God bless you mataji ki kripa bani 🙏🌹🙏

brijmohan kaseara Apr 12, 2019
जय माता दी 🌷🌷नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई सादर प्रणाम सादर नमस्कार जी जय श्री महाकाल जी सिस्टर जी ।माता की कृपा बनी रहे जीडी

Suraj Singh Rajput Apr 12, 2019
🌲🌹🥀maa. mahagauri ji ki kripa Aap Par aur aapke poore Pariwar par Hamesha Bani Rahe. Radhe Radhe jai shri Krishna Navratri ki shubhkamnaye ji 💐🌷🌴

brijmohan kaseara Apr 12, 2019
धन्यवाद दीदी जी ।नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई जी दी

Shivsanker Shukala Apr 13, 2019
जय माता दी सुप्रभात बहन आपका दिन शुभ हो मंगल पर

Sanjna Apr 13, 2019
Jai mata di sister shubh Prabhat mata rani ki kripa app or Aapki family pr Sada Bani rahe

किशना नागर Apr 13, 2019
जय माता दी प्रणाम दीदी आपका हर पल खुशियो से भरे यही प्रार्थना है

🌲💜राजकुमार राठोड💜🌲 Apr 13, 2019
।🙏जय श्री राम 🙏 🙏💙जय माता दी💙🙏 #Զเधे_Զเधे ..जी.🌹 ❇️ 🚩जय_श्री_कृष्णा🚩❇️ राम नवमी एवं दुर्गा अष्टमी की आपको अनंत शुभकामनाएं आपका हर पल शुभ एवं मंगलमय रहे 🅹

Mahesh Bhargava Apr 15, 2019
माय मंदिर टीम ने ब्लाक आॅप्शन ऐप मे ऐड किया है ब्लाक करने वाला आपको कमेंटस लाईक नही कर पायेगा आप अपना ऐप अपडेट करै

|| औरत ही मकान को घर बनाती है ; चाहे तो नाश कर दे या सर्वनाश ||📚🕉️ एक गांव में एक जमींदार था। उसके कई नौकरों में जग्गू भी था। गांव से लगी बस्ती में, बाकी मजदूरों के साथ जग्गू भी अपने पांच लड़कों के साथ रहता था। जग्गू की पत्नी बहुत पहले गुजर गई थी। एक झोंपड़े में वह बच्चों को पाल रहा था। बच्चे बड़े होते गये और जमींदार के घर नौकरी में लगते गये। सब मजदूरों को शाम को मजूरी मिलती। जग्गू और उसके लड़के चना और गुड़ लेते थे। चना भून कर गुड़ के साथ खा लेते थे। बस्ती वालों ने जग्गू को बड़े लड़के की शादी कर देने की सलाह दी।उसकी शादी हो गई और कुछ दिन बाद गौना भी आ गया। उस दिन जग्गू की झोंपड़ी के सामने बड़ी बमचक मची। बहुत लोग इकठ्ठा हुये नई बहू देखने को। फिर धीरे धीरे भीड़ छंटी। आदमी काम पर चले गये। औरतें अपने अपने घर। जाते जाते एक बुढ़िया बहू से कहती गई – पास ही घर है। किसी चीज की जरूरत हो तो संकोच मत करना, आ जाना लेने। सबके जाने के बाद बहू ने घूंघट उठा कर अपनी ससुराल को देखा तो उसका कलेजा मुंह को आ गया।जर्जर सी झोंपड़ी, खूंटी पर टंगी कुछ पोटलियां और झोंपड़ी के बाहर बने छः चूल्हे (जग्गू और उसके सभी बच्चे अलग अलग चना भूनते थे)। बहू का मन हुआ कि उठे और सरपट अपने गांव भाग चले। पर अचानक उसे सोच कर धचका लगा– वहां कौन से नूर गड़े हैं। मां है नहीं। भाई भौजाई के राज में नौकरानी जैसी जिंदगी ही तो गुजारनी होगी। यह सोचते हुये वह बुक्का फाड़ रोने लगी। रोते-रोते थक कर शान्त हुई। मन में कुछ सोचा। पड़ोसन के घर जा कर पूछा –अम्मां एक झाड़ू मिलेगा? बुढ़िया अम्मा ने झाड़ू, गोबर और मिट्टी दी।साथ मेंअपनी पोती को भेज दिया।वापस आ कर बहू ने एक चूल्हा छोड़ बाकी फोड़ दिये।सफाई कर गोबर-मिट्टी से झोंपड़ीऔर दुआर लीपा। फिर उसने सभी पोटलियों के चने एक साथ किये और अम्मा के घर जा कर चना पीसा।अम्मा ने उसे सागऔर चटनी भी दी। वापस आ कर बहू ने चने के आटे की रोटियां बनाई और इन्तजार करने लगी। जग्गू और उसके लड़के जब लौटे तो एक ही चूल्हा देख भड़क गये।चिल्लाने लगे कि इसने तो आते ही सत्यानाश कर दिया। अपने आदमी का छोड़ बाकी सब का चूल्हा फोड़ दिया। झगड़े की आवाज सुन बहू झोंपड़ी से निकली। बोली –आप लोग हाथ मुंह धो कर बैठिये, मैं खाना निकालती हूं। सब अचकचा गये! हाथ मुंह धो कर बैठे। बहू ने पत्तल पर खाना परोसा – रोटी, साग, चटनी। मुद्दत बाद उन्हें ऐसा खाना मिला था। खा कर अपनी अपनी कथरी ले वे सोने चले गये। सुबह काम पर जाते समय बहू ने उन्हें एक एक रोटी और गुड़ दिया।चलते समय जग्गू से उसने पूछा – बाबूजी, मालिक आप लोगों को चना और गुड़ ही देता है क्या ? जग्गू ने बताया कि मिलता तो सभी अन्न है पर वे चना-गुड़ ही लेते हैं।आसान रहता है खाने में। बहू ने समझाया कि सब अलग अलग प्रकार का अनाज लिया करें। देवर ने बताया कि उसका काम लकड़ी चीरना है। बहू ने उसे घर के ईंधन के लिये भी कुछ लकड़ी लाने को कहा।बहू सब की मजदूरी के अनाज से एक- एक मुठ्ठी अन्न अलग रखती। उससे बनिये की दुकान से बाकी जरूरत की चीजें लाती। जग्गू की गृहस्थी धड़ल्ले से चल पड़ी। एक दिन सभी भाइयों और बाप ने तालाब की मिट्टी से झोंपड़ी के आगे बाड़ बनाया। बहू के गुण गांव में चर्चित होने लगे।जमींदार तक यह बात पंहुची। वह कभी कभी बस्ती में आया करता था। आज वह जग्गू के घर उसकी बहू को आशीर्वाद देने आया। बहू ने पैर छू प्रणाम किया तो जमींदार ने उसे एक हार दिया। हार माथे से लगा बहू ने कहा कि मालिक यह हमारे किस काम आयेगा। इससे अच्छा होता कि मालिक हमें चार लाठी जमीन दिये होते झोंपड़ी के दायें - बायें,तो एक कोठरी बन जाती। बहू की चतुराई पर जमींदार हंस पड़ा। बोला –ठीक, जमीन तो जग्गू को मिलेगी ही। यह हार तो तुम्हारा हुआ। –औरत चाहे घर को स्वर्ग बना दे, चाहे नर्क! हमे लगता है कि देश, समाज, और घर को औरत ही गढ़ती है।📚🕉️

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Ashish shukla May 17, 2019

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Vikash Srivastava May 17, 2019

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Ritu Sen May 19, 2019

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Ritu Sen May 19, 2019

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Ritu Sen May 19, 2019

Good morning ji

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Vikas Kumar May 19, 2019

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