Manoj manu
Manoj manu Mar 11, 2021

🚩🙏ऊँ नमःशिवाय हर हर महादेव जी 🔔🌹🙏 🌹🌹आप सभी को पवित्र पावन पर्व महाशिवरात्री की अनेकानेक हार्दिक शुभकामनाएँ एवं मंगलमय बधाईयाँ, 🌹🌹जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई॥ 🌹🌹गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी॥ भावार्थ:-वेदों में विवाह की जैसी रीति कही गई है, महामुनियों ने वह सभी रीति करवाई। पर्वतराज हिमाचल ने हाथ में कुश लेकर तथा कन्या का हाथ पकड़कर उन्हें भवानी (शिवपत्नी) जानकर शिवजी को समर्पण किया॥ 🌹🌹पाणिग्रहण जब कीन्ह महेसा। हियँ हरषे तब सकल सुरेसा॥ 🌹🌹बेदमन्त्र मुनिबर उच्चरहीं। जय जय जय संकर सुर करहीं॥ भावार्थ:-जब महेश्वर (शिवजी) ने पार्वती का पाणिग्रहण किया, तब (इन्द्रादि) सब देवता हृदय में बड़े ही हर्षित हुए। श्रेष्ठ मुनिगण वेदमंत्रों का उच्चारण करने लगे और देवगण शिवजी का जय-जयकार करने लगे॥ 🌹🌹बाजहिं बाजन बिबिध बिधाना। सुमनबृष्टि नभ भै बिधि नाना॥ 🌹🌹हर गिरिजा कर भयउ बिबाहू। सकल भुवन भरि रहा उछाहू॥ भावार्थ:-अनेकों प्रकार के बाजे बजने लगे। आकाश से नाना प्रकार के फूलों की वर्षा हुई। शिव-पार्वती का विवाह हो गया। सारे ब्राह्माण्ड में आनंद भर गया॥ 🌹🌹 दासीं दास तुरग रथ नागा। धेनु बसन मनि बस्तु बिभागा॥ 🌹🌹अन्न कनकभाजन भरि जाना। दाइज दीन्ह न जाइ बखाना॥ भावार्थ:-दासी, दास, रथ, घोड़े, हाथी, गायें, वस्त्र और मणि आदि अनेक प्रकार की चीजें, अन्न तथा सोने के बर्तन गाड़ियों में लदवाकर दहेज में दिए, जिनका वर्णन नहीं हो सकता॥ छन्द : - 🌹🌹दाइज दियो बहु भाँति पुनि कर जोरि हिमभूधर कह्यो।का देउँ पूरनकाम संकर चरन पंकज गहि रह्यो॥ 🌹🌹सिवँ कृपासागर ससुर कर संतोषु सब भाँतिहिं कियो। पुनि गहे पद पाथोज मयनाँ प्रेम परिपूरन हियो॥ भावार्थ:-बहुत प्रकार का दहेज देकर, फिर हाथ जोड़कर हिमाचल ने कहा- हे शंकर! आप पूर्णकाम हैं, मैं आपको क्या दे सकता हूँ? (इतना कहकर) वे शिवजी के चरणकमल पकड़कर रह गए। तब कृपा के सागर शिवजी ने अपने ससुर का सभी प्रकार से समाधान किया। फिर प्रेम से परिपूर्ण हृदय मैनाजी ने शिवजी के चरण कमल पकड़े (और कहा-)। 🌹🌹नाथ उमा मम प्रान सम गृहकिंकरी करेहु। छमेहु सकल अपराध अब होइ प्रसन्न बरु देहु॥ भावार्थ:-हे नाथ! यह उमा मुझे मेरे प्राणों के समान (प्यारी) है। आप इसे अपने घर की टहलनी बनाइएगा और इसके सब अपराधों को क्षमा करते रहिएगा। अब प्रसन्न होकर मुझे यही वर दीजिए॥ 🌹🌹बहु बिधि संभु सासु समुझाई। गवनी भवन चरन सिरु नाई॥ जननीं उमा बोलि तब लीन्ही। लै उछंग सुंदर सिख दीन्ही॥ भावार्थ:-शिवजी ने बहुत तरह से अपनी सास को समझाया। तब वे शिवजी के चरणों में सिर नवाकर घर गईं। फिर माता ने पार्वती को बुला लिया और गोद में बिठाकर यह सुंदर सीख दी-॥ 🌹🌹करेहु सदा संकर पद पूजा। नारिधरमु पति देउ न दूजा॥ 🌹🌹बचन कहत भरे लोचन बारी। बहुरि लाइ उर लीन्हि कुमारी॥ भावार्थ:-हे पार्वती! तू सदाशिवजी के चरणों की पूजा करना, नारियों का यही धर्म है। उनके लिए पति ही देवता है और कोई देवता नहीं है। इस प्रकार की बातें कहते-कहते उनकी आँखों में आँसू भर आए और उन्होंने कन्या को छाती से चिपटा लिया॥ 🌹🌹पुनि पुनि मिलति परति गहि चरना। परम प्रेमु कछु जाइ न बरना॥ 🌹🌹सब नारिन्ह मिलि भेंटि भवानी। जाइ जननि उर पुनि लपटानी॥ भावार्थ:-मैना बार-बार मिलती हैं और (पार्वती के) चरणों को पकड़कर गिर पड़ती हैं। बड़ा ही प्रेम है, कुछ वर्णन नहीं किया जाता। भवानी सब स्त्रियों से मिल-भेंटकर फिर अपनी माता के हृदय से जा लिपटीं॥ छन्द : 🌹🌹जननिहि बहुरि मिलि चली उचित असीस सब काहूँ दईं। 🌹🌹फिरि फिरि बिलोकति मातु तन तब सखीं लै सिव पहिं गईं॥ जाचक सकल संतोषि संकरु उमा सहित भवन चले। सब अमर हरषे सुमन बरषि निसान नभ बाजे भले॥ भावार्थ:-पार्वतीजी माता से फिर मिलकर चलीं, सब किसी ने उन्हें योग्य आशीर्वाद दिए। पार्वतीजी फिर-फिरकर माता की ओर देखती जाती थीं। तब सखियाँ उन्हें शिवजी के पास ले गईं। महादेवजी सब याचकों को संतुष्ट कर पार्वती के साथ घर (कैलास) को चले। सब देवता प्रसन्न होकर फूलों की वर्षा करने लगे और आकाश में सुंदर नगाड़े बजाने लगे। 🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿देवाधिदेव महादेव जी माता पार्वती जी सभी का सदा कल्याण करें सदा मंगल प्रदान करें हर हर महादेव जी 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🙏

🚩🙏ऊँ नमःशिवाय हर हर महादेव जी 🔔🌹🙏
🌹🌹आप सभी को पवित्र पावन पर्व महाशिवरात्री की अनेकानेक हार्दिक शुभकामनाएँ एवं मंगलमय बधाईयाँ,
🌹🌹जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। 
                   महामुनिन्ह सो सब करवाई॥
🌹🌹गहि गिरीस कुस कन्या पानी। 
                 भवहि समरपीं जानि भवानी॥
भावार्थ:-वेदों में विवाह की जैसी रीति कही गई है, महामुनियों ने वह सभी रीति करवाई। पर्वतराज हिमाचल ने हाथ में कुश लेकर तथा कन्या का हाथ पकड़कर उन्हें भवानी (शिवपत्नी) जानकर शिवजी को समर्पण किया॥
🌹🌹पाणिग्रहण जब कीन्ह महेसा। 
               हियँ हरषे तब सकल सुरेसा॥
🌹🌹बेदमन्त्र मुनिबर उच्चरहीं।
          जय जय जय संकर सुर करहीं॥
भावार्थ:-जब महेश्वर (शिवजी) ने पार्वती का पाणिग्रहण किया, तब (इन्द्रादि) सब देवता हृदय में बड़े ही हर्षित हुए। श्रेष्ठ मुनिगण वेदमंत्रों का उच्चारण करने लगे और देवगण शिवजी का जय-जयकार करने लगे॥
🌹🌹बाजहिं बाजन बिबिध बिधाना। सुमनबृष्टि नभ भै बिधि नाना॥
🌹🌹हर गिरिजा कर भयउ बिबाहू। सकल भुवन भरि रहा उछाहू॥
भावार्थ:-अनेकों प्रकार के बाजे बजने लगे। आकाश से नाना प्रकार के फूलों की वर्षा हुई। शिव-पार्वती का विवाह हो गया। सारे ब्राह्माण्ड में आनंद भर गया॥
🌹🌹 दासीं दास तुरग रथ नागा। धेनु बसन मनि बस्तु बिभागा॥
🌹🌹अन्न कनकभाजन भरि जाना। दाइज दीन्ह न जाइ बखाना॥
भावार्थ:-दासी, दास, रथ, घोड़े, हाथी, गायें, वस्त्र और मणि आदि अनेक प्रकार की चीजें, अन्न तथा सोने के बर्तन गाड़ियों में लदवाकर दहेज में दिए, जिनका वर्णन नहीं हो सकता॥
छन्द : -
🌹🌹दाइज दियो बहु भाँति पुनि कर जोरि हिमभूधर कह्यो।का देउँ पूरनकाम संकर चरन पंकज गहि रह्यो॥
🌹🌹सिवँ कृपासागर ससुर कर संतोषु सब भाँतिहिं कियो। पुनि गहे पद पाथोज मयनाँ प्रेम परिपूरन हियो॥
भावार्थ:-बहुत प्रकार का दहेज देकर, फिर हाथ जोड़कर हिमाचल ने कहा- हे शंकर! आप पूर्णकाम हैं, मैं आपको क्या दे सकता हूँ? (इतना कहकर) वे शिवजी के चरणकमल पकड़कर रह गए। तब कृपा के सागर शिवजी ने अपने ससुर का सभी प्रकार से समाधान किया। फिर प्रेम से परिपूर्ण हृदय मैनाजी ने शिवजी के चरण कमल पकड़े (और कहा-)।
🌹🌹नाथ उमा मम प्रान सम गृहकिंकरी करेहु।
      छमेहु सकल अपराध अब होइ प्रसन्न बरु देहु॥
भावार्थ:-हे नाथ! यह उमा मुझे मेरे प्राणों के समान (प्यारी) है। आप इसे अपने घर की टहलनी बनाइएगा और इसके सब अपराधों को क्षमा करते रहिएगा। अब प्रसन्न होकर मुझे यही वर दीजिए॥
🌹🌹बहु बिधि संभु सासु समुझाई। 
              गवनी भवन चरन सिरु नाई॥
  जननीं उमा बोलि तब लीन्ही। 
           लै उछंग सुंदर सिख दीन्ही॥
भावार्थ:-शिवजी ने बहुत तरह से अपनी सास को समझाया। तब वे शिवजी के चरणों में सिर नवाकर घर गईं। फिर माता ने पार्वती को बुला लिया और गोद में बिठाकर यह सुंदर सीख दी-॥
🌹🌹करेहु सदा संकर पद पूजा। नारिधरमु पति देउ न दूजा॥
🌹🌹बचन कहत भरे लोचन बारी। बहुरि लाइ उर लीन्हि कुमारी॥
भावार्थ:-हे पार्वती! तू सदाशिवजी के चरणों की पूजा करना, नारियों का यही धर्म है। उनके लिए पति ही देवता है और कोई देवता नहीं है। इस प्रकार की बातें कहते-कहते उनकी आँखों में आँसू भर आए और उन्होंने कन्या को छाती से चिपटा लिया॥
🌹🌹पुनि पुनि मिलति परति गहि चरना। परम प्रेमु कछु जाइ न बरना॥
🌹🌹सब नारिन्ह मिलि भेंटि भवानी। जाइ जननि उर पुनि लपटानी॥
भावार्थ:-मैना बार-बार मिलती हैं और (पार्वती के) चरणों को पकड़कर गिर पड़ती हैं। बड़ा ही प्रेम है, कुछ वर्णन नहीं किया जाता। भवानी सब स्त्रियों से मिल-भेंटकर फिर अपनी माता के हृदय से जा लिपटीं॥
छन्द :
🌹🌹जननिहि बहुरि मिलि चली उचित असीस सब काहूँ दईं।
🌹🌹फिरि फिरि बिलोकति मातु तन तब सखीं लै सिव पहिं गईं॥
जाचक सकल संतोषि संकरु उमा सहित भवन चले।
सब अमर हरषे सुमन बरषि निसान नभ बाजे भले॥
भावार्थ:-पार्वतीजी माता से फिर मिलकर चलीं, सब किसी ने उन्हें योग्य आशीर्वाद दिए। पार्वतीजी फिर-फिरकर माता की ओर देखती जाती थीं। तब सखियाँ उन्हें शिवजी के पास ले गईं। महादेवजी सब याचकों को संतुष्ट कर पार्वती के साथ घर (कैलास) को चले। सब देवता प्रसन्न होकर फूलों की वर्षा करने लगे और आकाश में सुंदर नगाड़े बजाने लगे।
🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿देवाधिदेव महादेव जी माता पार्वती जी सभी का सदा कल्याण करें सदा मंगल प्रदान करें हर हर महादेव जी 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🙏

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कामेंट्स

sanjay choudhary Mar 14, 2021
🙏🙏 जय सुर्येदेव् 🙏🙏 ।।।।। शुभ प्रभातं जी। ।।। 🙏🙏🌹🌹🙏🙏 *"पहचान" से मिली हुई* *सेवा बहुत कम समय* *के लिए टिकती है।* *लेकिन "" सेवा ” से मिली* *"पहचान" उम्र भर तक* *कायम रहती है ।* *🙏सुप्रभात🙏* 🇮🇳 Bharat Mata ki Jai 🇮🇳

Neeta Trivedi Mar 14, 2021
ऊं सूर्य देवाय नमः शुभ प्रभात वंदन आदरणीय भाई जी आप का हर एक पल शुभ और मंगलमय हो 🙏🌹🙏

Sonu Pathak (Jai Mata Di) Mar 14, 2021
जय श्री राधे कृष्णा🌺🙏 🙏🌺जय माता रानी दी माता रानी की असीम कृपा दृष्टि आप व आपके परिवार पर सदैव बनी रहे आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो भैय्या जी 🌹 नमस्कार सुप्रभात वंदन आदरणीय 🌷🙏🌷

Ansouya M 🍁 Mar 14, 2021
ॐ घृणी सुर्याय नमः 🌹🙏 सस्नेह शुभ प्रभात भईया जी 🙏 आप का दिन शुभ और मंगलमय हो भैया जी 🙏 सुर्य देव जी की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बना रहे भाई जी 🙏 सदैव प्रसन्न रहिए । जो प्राप्त है पर्याप्त है । आप का हर पल शुभ सुन्दर सुखद एवं खुशियों से भरा रहे भाई जी 🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🙏

Brajesh Sharma Mar 14, 2021
ॐ सूर्य देवाय नमः ॐ नमः शिवाय.. हर हर महादेव जय जय श्री राधे कृष्णा जी

Harpal bhanot Mar 14, 2021
jai Shree radhe Krishna ji 🌷🌷🌷 Beautiful good afternonn ji brother

🔱🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕🔱 Mar 14, 2021
🌞🚩ॐ सूर्य देवाय नमः 🚩🌞 🎳🙏शुभसंध्या वंदन भाई🙏🎳 👏आप और आपके पूरे परिवार पर भगवान,सूर्यदेव का आशिर्वाद निरंतर बनी रहे 🏵️ 🎳अपका संध्या शुभ शांतिमय व मंगलमय व्यतीत हो 🎳

Shivsanker Shukla Mar 14, 2021
शुभ रात्रि भैया जी हर हर महादेव जय भोलेनाथ की

Harpal bhanot Mar 14, 2021
jai Shree radhe Krishna ji 🌷🌷🌷 Beautiful good Night ji brother

Sonu Pathak (Jai Mata Di) Mar 14, 2021
Radhe Radhe ji 🌹🌹 🌹🌹Jai Mata rani di Good night brother god bless u and your family 🌷🌷🙏🙏🌷🌷

💥Radha Sharma💥 Mar 14, 2021
जय श्री राधे कृष्णा आदरणीय भैया सादर प्रणाम जी 🙏🌷🙏शुभ रात्रि वंदन जी 🌷🙏

Hemant Kasta Mar 14, 2021
Jai Shree Radhe Krishna Ji Namah, Radhe Radhe Ji, Beautiful Post, Anmol Massage, Dhanywad Aadaraniy Brother Ji Namaskar, Ishwar Ki Asim Kripa Aap Aur Aapke Parivar par Sadaiv Bani Rahe, Aapka Har Pal Shubh Aur Mangalmay Ho, Shubh Ratri.

Renu Singh Mar 14, 2021
Shubh Ratri 🙏 Radhe Radhe Bhai Ji 🙏 Thakur Ji ki kripa Se Aàpka Har Pal Shubh V Mangalmay ho 🌹🙏🌹

Shanti Pathak Mar 14, 2021
🌷🙏जय श्री राधे कृष्णा जी🙏शुभ रात्रि वंदन भाई जी🌷आपका हर पल शुभ एवं मंगलमय हो🌷ईश्वर की असीम कृपा आप एवं आपके परिवार पर सदैव बनी रहे जी🌷आपका आनेवाला हर पल खुशियों से परिपूर्ण रहे भाई जी🌷🙏🌷

prem chand shami Mar 14, 2021
हर हर महादेव 🙏🏻🙏🏻 ओमः नमःशिवाय 🙏🏻🙏🏻 नमः पार्वती पति 🙏🏻🙏🏻 शुभ मंगलमय रात्रि की शुभकामनायें प्रणाम भाई जी 💐💐🙏🏻

पुरूषोत्तम : हर हर महादेव ! Mar 14, 2021
🙏🌸🌺🌺🌺🌺🌹🌺 🌳🌹हर हर महादेव 🌹 🌳🌳🌺ओम् नमः शिवाय ! 🌳 🙏🏻🌹🌸🌺🌷🌷🌺 🚩卐 ॐ गं गणपतये नमः 卐 🕉 गं गणपतये नमो नमः । वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा!!🙏 🌹ऊँ गण गणपतये नमो नमः 🌹श्री सिद्धिविनायक नमो नमः 🌹श्री अष्ट विनायक नमो नमः 🙏🌸🌷🌺🌹🌹🌹🌹 🌳जय श्री राम ! 🌳 🌴जय हनुमान !🌴 🙏🌸🌷🌺🌹🌹🌹🌹 🌹ओम् विष्णवे नमः🌹 🌷ओम् गोविंदाय नमः🌷 🌷ओम् माधवाय नमः🌷 🌹ओम् केशवाय नमः🌹 🌹ओम् अच्युताय नमः🌹 🌹ओम् परमात्मने नमः🌹 🌹ओम् नमो नारायनाय 🌹 🙏🌺🌸🌸🌸🌺🌷🌹 🌹ॐ घृणी सूर्याय नमः 🌹ॐ रवि भास्कराय नमः 🌹ॐ आदित्याय नमः 🙏🌹🌺🌷🌳🌸🌹 🌹ॐ महालक्ष्मी नमः 🌹 ॐ महाकाली नमः 🌹 ॐ महासरस्वती नमः 🌹 ॐ मां वैष्णो देव्याई नमः 🌹 ॐ मां दूर्गा देव्याई नमः 🌹 देवी अन्नपूर्णा देव्याई नमः🌹 देवी गायत्री देव्याई नमः 🙏🌳🌸🌺🌹🌷💐🌹 🌳हर हर महादेव !!!!!!🌳

Renu Singh Mar 15, 2021
🌿Har Har Mahadev 🌿 Good Morning Bhai Ji 🙏🌹 Mahadev Ji Ka Aashirwad Aap aur Aàpke Pariwar pr Sadaiv Bna rhe Aàpka Din Shubh ho Bhai Ji 🙏🌹

Poonam Aggarwal Apr 16, 2021

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*🚩"श्री गणेशाय नम:"🚩* *🥅।।दैनिक~पंचांग।। 🥅* *🥅 16 - 04 - 2021* *🥅 श्रीमाधोपुर~पंचांग* 🥅 तिथि चतुर्थी 18:07:38 🥅 नक्षत्र रोहिणी 23:40:27 🥅 करण विष्टि 18:07:38 🥅 पक्ष शुक्ल 🥅 योग सौभाग्य 18:22:31 🥅 वार शुक्रवार 🥅 सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ 🥅 सूर्योदय 06:02:52 🥅 चन्द्रोदय 08:35:00 🥅 चन्द्र राशि वृषभ 🥅 सूर्यास्त 18:52:38 🥅 चन्द्रास्त 22:41:00 🥅 ऋतु वसंत 🥅 हिन्दू मास एवं वर्ष 🥅 शक सम्वत 1943 प्लव 🥅 कलि सम्वत 5123 🥅 दिन काल 12:49:45 🥅 विक्रम सम्वत 2078 🥅 मास अमांत चैत्र 🥅 मास पूर्णिमांत चैत्र 🥅 शुभ और अशुभ समय 🥅 शुभ समय 🥅 अभिजित 12:02:05 - 12:53:24 🥅 अशुभ समय 🥅 दुष्टमुहूर्त : 08:36:49 - 09:28:08 12:53:24 - 13:44:43 🥅 कंटक 13:44:43 - 14:36:02 🥅 यमघण्ट 17:09:59 - 18:01:18 🥅 राहु काल 10:51:31 - 12:27:45 🥅 कुलिक 08:36:49 - 09:28:08 🥅 कालवेला या अर्द्धयाम 15:27:21 - 16:18:40 🥅 यमगण्ड 15:40:11 - 17:16:24 🥅 गुलिक काल 07:39:05 - 09:15:18 🥅 दिशा शूल 🥅 दिशा शूल पश्चिम 🥅 चन्द्रबल और ताराबल 🥅 ताराबल 🥅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद 🥅 चन्द्रबल 🥅 वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन []1️⃣6️⃣🔲0️⃣4️⃣🔲2️⃣1️⃣[] *[]🌷🔥जयश्रीकृष्णा🔥🌷[]* *सुरेन्द्र कुमार चेजारा व्याख्याता राउमावि होल्याकाबास निवास-श्रीमाधोपुर* 🥅🎆🥅🎆🥅🎆🥅🎆

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चतुर्थ दुर्गा: श्री कूष्मांडा   माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप का नाम कूष्माण्डा है। अपनी मन्द हंसी से अण्ड अर्थात ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारंण इन्हें कूष्माण्डा देवी के नाम से जाना जाता है। संस्कृत भाषा में कूष्माण्ड कूम्हडे को कहा जाता है, कूम्हडे की बलि इन्हें प्रिय है, इस कारण से भी इन्हें कूष्माण्डा के नाम से जाना जाता है। जब सृष्टि नहीं थी और चारों ओर अंधकार ही अंधकार था तब इन्होंने ईषत हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना की थी। यह सृष्टि की आदिस्वरूपा हैं और आदिशक्ति भी। इनका निवास सूर्य मंडल के भीतर के लोक में है। सूर्यलोक में निवास करने की क्षमता और शक्ति केवल इन्हीं में है। नवरात्रि के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की पूजा की जाती है। साधक इस दिन अनाहत चक्र में अवस्थित होता है। अतः इस दिन पवित्र मन से माँ के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजन करना चाहिए। माँ कूष्माण्डा देवी की पूजा से भक्त के सभी रोग नष्ट हो जाते हैं। माँ की भक्ति से आयु, यश, बल और स्वास्थ्य की वृद्धि होती है। इनकी आठ भुजायें हैं इसीलिए इन्हें अष्टभुजा कहा जाता है। इनके सात हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। कूष्माण्डा देवी अल्पसेवा और अल्पभक्ति से ही प्रसन्न हो जाती हैं। यदि साधक सच्चे मन से इनका शरणागत बन जाये तो उसे अत्यन्त सुगमता से परम पद की प्राप्ति हो जाती है।  मंत्र: या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। ध्यान: वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥  भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्। कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥  पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्। मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥  प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्। कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥  स्तोत्र:  दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्। जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥  जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्। चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥ त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहिदुःख शोक निवारिणीम्। परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाभ्यहम्॥ कवच: हंसरै में शिर पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्। हसलकरीं नेत्रेच, हसरौश्च ललाटकम्॥   कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा, पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम। दिगिव्दिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजं सर्वदावतु

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Anita Sharma Apr 15, 2021

एक राजा का नित्य का नियम था कि जब भी वह प्रात: भ्रमण पर निकलता तो दरवाजे पर खड़े पहले याचक की मुंहमांगी सहायता करता। एक दिन एक अजीब घटना घट गई। राजा जैसे ही ड्यौढ़ी से बाहर आया, उसे एक वीतरागी ब्राह्मण दिखाई दिया।नियम के अनुसार राजा ने ब्राह्मण से कहा, मैं आपकी क्या सेवा या सहायता करूं? ब्राह्मण ने कहा,जो आपकी इच्छा। नहीं नहीं, जो आप मांगेंगे, वही दूंगा, राजा ने कहा। ब्राह्मण ने राजा से कहा,आप भ्रमण से वापस आजाओ,तबतक मैं मांगने के लिए सोच लेता हूं। अब ब्राह्मण सोच में पड़ गया कि राजा से क्या मांगा जाए, ऐसा सोचते सोचते उसके मन में लोभ आ गया और राजा के वापस आने पर वीतरागी ब्राह्मण ने पूरा राज्य मांग लिया । राजा ने जैसे ही ब्राह्मण की मांग सुनी,वह तत्क्षण पूरा राज्य देने को तैयार हो गया और बोला-"विप्रवर! मैं तो बहुत दिनों से प्रतीक्षा में था कि इस राज्यभार से कब मुक्त हो जाऊं। मैं राज्यभार सौंपने का प्रबंध करता हूं,तबतक आप यहीं ठहरें , इतना कहकर राजा अंदर महल में गया कि वीतरागी ब्राह्मण चिंता में डूब गया।उसे भी आशा नहीं थी कि इतनी सरलता से राजा राजपाट सौंप देगा। ब्राह्मण ने सोचा-यह तो वास्तव में वीतरागी है, मैं तो कोरा दिखावा कर रहा था।यह तो वास्तव में निर्लिप्त है। सर्वस्व त्याग का आदर्श लेकर चलने वाले ब्राह्मण को इस घटना से वास्तविकता का बोध हुआ। पछताया कि वीतरागी कहलाने वाले ब्राह्मण का मन इतना लोलुप। जब तक राजा मंत्री को लेकर आया,तबतक ब्राह्मण का ब्राह्मणत्व जाग चुका था और वह वहां से जा चुका था।

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Guria Thakur Apr 15, 2021

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*🚩"श्री गणेशाय नम:"🚩* *🥅 ÷दैनिक~पंचांग÷ 🥅* *🥅 15 - 04 - 2021* *🥅 श्रीमाधोपुर~पंचांग* 🥅 तिथि तृतीया 15:28:59 🥅 नक्षत्र कृत्तिका 20:33:01 🥅 करण : गर 15:28:59 वणिज 28:49:05 🥅 पक्ष शुक्ल 🥅 योग आयुष्मान 17:18:44 🥅 वार गुरूवार 🥅 सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ 🥅 सूर्योदय 06:03:53 🥅 चन्द्रोदय 07:57:00 🥅 चन्द्र राशि वृषभ 🥅 सूर्यास्त 18:52:05 🥅 चन्द्रास्त 21:47:00 🥅 ऋतु वसंत 🥅 हिन्दू मास एवं वर्ष 🥅 शक सम्वत 1943 प्लव 🥅 कलि सम्वत 5123 🥅 दिन काल 12:48:12 🥅 विक्रम सम्वत 2078 🥅 मास अमांत चैत्र 🥅 मास पूर्णिमांत चैत्र 🥅 शुभ और अशुभ समय 🥅 शुभ समय 🥅 अभिजित 12:02:23 - 12:53:35 🥅 अशुभ समय 🥅 दुष्टमुहूर्त : 10:19:57 - 11:11:10 15:27:14 - 16:18:27 🥅 कंटक 15:27:14 - 16:18:27 🥅 यमघण्ट 06:55:05 - 07:46:18 🥅 राहु काल 14:04:01 - 15:40:02 🥅 कुलिक 10:19:57 - 11:11:10 🥅 कालवेला या अर्द्धयाम 17:09:40 - 18:00:53 🥅 यमगण्ड 06:03:53 - 07:39:54 🥅 गुलिक काल 09:15:56 - 10:51:57 🥅 दिशा शूल 🥅 दिशा शूल दक्षिण 🥅 चन्द्रबल और ताराबल 🥅 ताराबल 🥅 भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती 🥅 चन्द्रबल 🥅 वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन []1️⃣5️⃣🔲0️⃣4️⃣🔲2️⃣1️⃣[] *[]🔥🌷जयश्रीकृष्णा🌷🔥[]* *ज्योतिषशास्त्री-सुरेन्द्र कुमार चेजारा व्याख्याता राउमावि होल्याकाबास निवास-श्रीमाधोपुर* 🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆🎆

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हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष मत्स्य जयंती चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाई जाती है। मत्स्य पुराण के अनुसार, पुष्पभद्रा नदी के तट पर भगवान विष्णु ने अपना पहला अवतार मत्स्य के रूप में लिया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह कहा जाता है कि इस सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने मत्स्य का अवतार लिया था। उन्होंने एक विशाल नाव का निर्माण किया था और इसमें इस पृथ्वी पर मौजूद सभी जनजातियों को जगह दे कर सबकी जान बचाई थी। कहा जाता है कि जो भक्त मत्स्य जयंती पर भगवान विष्णु की पूजा करता है उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं तथा उस‌ इंसान को अपने किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है। मत्स्य जयंती 2021 मत्स्य जयंती की कथा द्रविड़ देश के राजर्षि सत्यव्रत एक दिन कृतमाला नदी में स्नान कर रहे थे। जलि में जल लेने पर उनके हाथ में एक छोटी सी मछली आ गई। राजा ने मछली को पुन: नदी के जल में छोड़ दिया। जैसे ही उन्होंने मछली को जल में पुनः छोड़ा तो उसने कहा कि हे राजन नदी के बड़े बड़े जीव छोटे जीवों को खा जाते हैं। मुझे भी कोई मारकर खा जाएगा। कृपया मेरे प्राणों की रक्षा करें। यह बात सुनकर मछली को अपने कमंडल में डाल दिया, लेकिन एक ही रात्रि में मछली का शरीर इतना बड़ गया कि कमंडल छोटा पड़ने लगा। तब राजा ने मछली को निकालकर मटके में डाल दिया। वहां भी मछली एक रात में बड़ी हो गई। तब राजा ने मछली को निकालकर अपने सरोवर में डाल दिया। अब वह निश्चिंत थे कि सरोवर में वह सुविधापूर्ण तरीके से रहेगी, लेकिन एक ही रात में मछली के लिए सवरोवर भी छोटा पड़ने लगा।  तब राजा समझ गए कि यह कोई साधारण मछली नहीं है। उन्होंने उस मछली के समक्ष हाथ जोड़कर कहा कि मैं जान गया हूं कि निश्चय ही आप कोई महान आत्मा हैं। यदि यह बात सत्य है, तो कृपा करके बताइए कि आपने मत्स्य का रूप क्यों धारण किया है? तब राजर्षि सत्यव्रत के समक्ष भगवान विष्णु अपने असली स्वरूप में प्रकट हुए और कहा कि हे राजन। हयग्रीव नामक दैत्य ने वेदों को चुरा लिया है। इस कारण जगत में चारों ओर अज्ञान और अधर्म का अंधकार फैला गया है। मैंने हयग्रीव का अंत करने के लिए ही मत्स्य का रूप धारण किया है। आज से सातवें दिन भूमि जल प्रलय में डूब जाएगी। तब तक तुम एक नौका बनवा लो और समस्त प्राणियों के सूक्ष्म शरीर तथा सब प्रकार के बीज लेकर सप्तर्षियों के साथ उस नौका पर चढ़ जाना। प्रचंड आंधी के कारण जब नाव डगमगाने लगेगी, तब मैं मत्स्य रूप में तुम सबको बचाऊंगा। तुम लोग नाव को मेरे सींग से बांध देना। प्रलय के अंत तक मैं तुम्हारी नाव खींचता रहूंगा। उस समय भगवान मत्स्य ने नौका को हिमालय की चोटी से बांध दिया। उसे चोटी को नौकाबंध कहा जाता है। प्रलय का प्रकोप शांत होने पर भगवान ने हयग्रीव का वध किया और वेदों को पुनः ब्रह्माजी को सौंप दिया। भगवान ने प्रलय समाप्त होने पर राजा सत्यव्रत को वेद का ज्ञान वापस दिया। राजा सत्यव्रत ज्ञान-विज्ञान से युक्त हो वैवस्वत मनु कहलाए। उक्त नौका में जो बच गए थे, उन्हीं से संसार में पुनः जीवन चला। मत्स्य जयंती का महत्व जो भक्त मत्स्य जयंती पर भगवान विष्णु के पहले अवतार मत्स्य की पूजा करता है उसे विशेष लाभ मिलता है। मत्स्य जयंती पर मत्स्य पुराण को सुनने और पढ़ने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस दिन जो इंसान मछलियों को आटे की गोली खिलाता है उसे पुण्य मिलता है। मत्स्य जयंती व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है तथा मछलियों को नदी या समुद्र में छोड़ने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं तथा अपनी कृपा बरसाते हैं। ॐ नमो नारायण ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जय श्री कृष्ण राधे राधे नमस्कार 🙏 शुभ रात्री वंदन 👣 🌹 👏 जय श्री राम जय श्री कृष्ण जय श्री हरी ॐ 🙏 🚩 आप का हर पल मस्त रहे स्वस्त रहे नमस्कार 🙏

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