Manoj manu
Manoj manu Mar 11, 2021

🚩🙏ऊँ नमःशिवाय हर हर महादेव जी 🔔🌹🙏 🌹🌹आप सभी को पवित्र पावन पर्व महाशिवरात्री की अनेकानेक हार्दिक शुभकामनाएँ एवं मंगलमय बधाईयाँ, 🌹🌹जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई॥ 🌹🌹गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी॥ भावार्थ:-वेदों में विवाह की जैसी रीति कही गई है, महामुनियों ने वह सभी रीति करवाई। पर्वतराज हिमाचल ने हाथ में कुश लेकर तथा कन्या का हाथ पकड़कर उन्हें भवानी (शिवपत्नी) जानकर शिवजी को समर्पण किया॥ 🌹🌹पाणिग्रहण जब कीन्ह महेसा। हियँ हरषे तब सकल सुरेसा॥ 🌹🌹बेदमन्त्र मुनिबर उच्चरहीं। जय जय जय संकर सुर करहीं॥ भावार्थ:-जब महेश्वर (शिवजी) ने पार्वती का पाणिग्रहण किया, तब (इन्द्रादि) सब देवता हृदय में बड़े ही हर्षित हुए। श्रेष्ठ मुनिगण वेदमंत्रों का उच्चारण करने लगे और देवगण शिवजी का जय-जयकार करने लगे॥ 🌹🌹बाजहिं बाजन बिबिध बिधाना। सुमनबृष्टि नभ भै बिधि नाना॥ 🌹🌹हर गिरिजा कर भयउ बिबाहू। सकल भुवन भरि रहा उछाहू॥ भावार्थ:-अनेकों प्रकार के बाजे बजने लगे। आकाश से नाना प्रकार के फूलों की वर्षा हुई। शिव-पार्वती का विवाह हो गया। सारे ब्राह्माण्ड में आनंद भर गया॥ 🌹🌹 दासीं दास तुरग रथ नागा। धेनु बसन मनि बस्तु बिभागा॥ 🌹🌹अन्न कनकभाजन भरि जाना। दाइज दीन्ह न जाइ बखाना॥ भावार्थ:-दासी, दास, रथ, घोड़े, हाथी, गायें, वस्त्र और मणि आदि अनेक प्रकार की चीजें, अन्न तथा सोने के बर्तन गाड़ियों में लदवाकर दहेज में दिए, जिनका वर्णन नहीं हो सकता॥ छन्द : - 🌹🌹दाइज दियो बहु भाँति पुनि कर जोरि हिमभूधर कह्यो।का देउँ पूरनकाम संकर चरन पंकज गहि रह्यो॥ 🌹🌹सिवँ कृपासागर ससुर कर संतोषु सब भाँतिहिं कियो। पुनि गहे पद पाथोज मयनाँ प्रेम परिपूरन हियो॥ भावार्थ:-बहुत प्रकार का दहेज देकर, फिर हाथ जोड़कर हिमाचल ने कहा- हे शंकर! आप पूर्णकाम हैं, मैं आपको क्या दे सकता हूँ? (इतना कहकर) वे शिवजी के चरणकमल पकड़कर रह गए। तब कृपा के सागर शिवजी ने अपने ससुर का सभी प्रकार से समाधान किया। फिर प्रेम से परिपूर्ण हृदय मैनाजी ने शिवजी के चरण कमल पकड़े (और कहा-)। 🌹🌹नाथ उमा मम प्रान सम गृहकिंकरी करेहु। छमेहु सकल अपराध अब होइ प्रसन्न बरु देहु॥ भावार्थ:-हे नाथ! यह उमा मुझे मेरे प्राणों के समान (प्यारी) है। आप इसे अपने घर की टहलनी बनाइएगा और इसके सब अपराधों को क्षमा करते रहिएगा। अब प्रसन्न होकर मुझे यही वर दीजिए॥ 🌹🌹बहु बिधि संभु सासु समुझाई। गवनी भवन चरन सिरु नाई॥ जननीं उमा बोलि तब लीन्ही। लै उछंग सुंदर सिख दीन्ही॥ भावार्थ:-शिवजी ने बहुत तरह से अपनी सास को समझाया। तब वे शिवजी के चरणों में सिर नवाकर घर गईं। फिर माता ने पार्वती को बुला लिया और गोद में बिठाकर यह सुंदर सीख दी-॥ 🌹🌹करेहु सदा संकर पद पूजा। नारिधरमु पति देउ न दूजा॥ 🌹🌹बचन कहत भरे लोचन बारी। बहुरि लाइ उर लीन्हि कुमारी॥ भावार्थ:-हे पार्वती! तू सदाशिवजी के चरणों की पूजा करना, नारियों का यही धर्म है। उनके लिए पति ही देवता है और कोई देवता नहीं है। इस प्रकार की बातें कहते-कहते उनकी आँखों में आँसू भर आए और उन्होंने कन्या को छाती से चिपटा लिया॥ 🌹🌹पुनि पुनि मिलति परति गहि चरना। परम प्रेमु कछु जाइ न बरना॥ 🌹🌹सब नारिन्ह मिलि भेंटि भवानी। जाइ जननि उर पुनि लपटानी॥ भावार्थ:-मैना बार-बार मिलती हैं और (पार्वती के) चरणों को पकड़कर गिर पड़ती हैं। बड़ा ही प्रेम है, कुछ वर्णन नहीं किया जाता। भवानी सब स्त्रियों से मिल-भेंटकर फिर अपनी माता के हृदय से जा लिपटीं॥ छन्द : 🌹🌹जननिहि बहुरि मिलि चली उचित असीस सब काहूँ दईं। 🌹🌹फिरि फिरि बिलोकति मातु तन तब सखीं लै सिव पहिं गईं॥ जाचक सकल संतोषि संकरु उमा सहित भवन चले। सब अमर हरषे सुमन बरषि निसान नभ बाजे भले॥ भावार्थ:-पार्वतीजी माता से फिर मिलकर चलीं, सब किसी ने उन्हें योग्य आशीर्वाद दिए। पार्वतीजी फिर-फिरकर माता की ओर देखती जाती थीं। तब सखियाँ उन्हें शिवजी के पास ले गईं। महादेवजी सब याचकों को संतुष्ट कर पार्वती के साथ घर (कैलास) को चले। सब देवता प्रसन्न होकर फूलों की वर्षा करने लगे और आकाश में सुंदर नगाड़े बजाने लगे। 🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿देवाधिदेव महादेव जी माता पार्वती जी सभी का सदा कल्याण करें सदा मंगल प्रदान करें हर हर महादेव जी 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🙏

🚩🙏ऊँ नमःशिवाय हर हर महादेव जी 🔔🌹🙏
🌹🌹आप सभी को पवित्र पावन पर्व महाशिवरात्री की अनेकानेक हार्दिक शुभकामनाएँ एवं मंगलमय बधाईयाँ,
🌹🌹जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। 
                   महामुनिन्ह सो सब करवाई॥
🌹🌹गहि गिरीस कुस कन्या पानी। 
                 भवहि समरपीं जानि भवानी॥
भावार्थ:-वेदों में विवाह की जैसी रीति कही गई है, महामुनियों ने वह सभी रीति करवाई। पर्वतराज हिमाचल ने हाथ में कुश लेकर तथा कन्या का हाथ पकड़कर उन्हें भवानी (शिवपत्नी) जानकर शिवजी को समर्पण किया॥
🌹🌹पाणिग्रहण जब कीन्ह महेसा। 
               हियँ हरषे तब सकल सुरेसा॥
🌹🌹बेदमन्त्र मुनिबर उच्चरहीं।
          जय जय जय संकर सुर करहीं॥
भावार्थ:-जब महेश्वर (शिवजी) ने पार्वती का पाणिग्रहण किया, तब (इन्द्रादि) सब देवता हृदय में बड़े ही हर्षित हुए। श्रेष्ठ मुनिगण वेदमंत्रों का उच्चारण करने लगे और देवगण शिवजी का जय-जयकार करने लगे॥
🌹🌹बाजहिं बाजन बिबिध बिधाना। सुमनबृष्टि नभ भै बिधि नाना॥
🌹🌹हर गिरिजा कर भयउ बिबाहू। सकल भुवन भरि रहा उछाहू॥
भावार्थ:-अनेकों प्रकार के बाजे बजने लगे। आकाश से नाना प्रकार के फूलों की वर्षा हुई। शिव-पार्वती का विवाह हो गया। सारे ब्राह्माण्ड में आनंद भर गया॥
🌹🌹 दासीं दास तुरग रथ नागा। धेनु बसन मनि बस्तु बिभागा॥
🌹🌹अन्न कनकभाजन भरि जाना। दाइज दीन्ह न जाइ बखाना॥
भावार्थ:-दासी, दास, रथ, घोड़े, हाथी, गायें, वस्त्र और मणि आदि अनेक प्रकार की चीजें, अन्न तथा सोने के बर्तन गाड़ियों में लदवाकर दहेज में दिए, जिनका वर्णन नहीं हो सकता॥
छन्द : -
🌹🌹दाइज दियो बहु भाँति पुनि कर जोरि हिमभूधर कह्यो।का देउँ पूरनकाम संकर चरन पंकज गहि रह्यो॥
🌹🌹सिवँ कृपासागर ससुर कर संतोषु सब भाँतिहिं कियो। पुनि गहे पद पाथोज मयनाँ प्रेम परिपूरन हियो॥
भावार्थ:-बहुत प्रकार का दहेज देकर, फिर हाथ जोड़कर हिमाचल ने कहा- हे शंकर! आप पूर्णकाम हैं, मैं आपको क्या दे सकता हूँ? (इतना कहकर) वे शिवजी के चरणकमल पकड़कर रह गए। तब कृपा के सागर शिवजी ने अपने ससुर का सभी प्रकार से समाधान किया। फिर प्रेम से परिपूर्ण हृदय मैनाजी ने शिवजी के चरण कमल पकड़े (और कहा-)।
🌹🌹नाथ उमा मम प्रान सम गृहकिंकरी करेहु।
      छमेहु सकल अपराध अब होइ प्रसन्न बरु देहु॥
भावार्थ:-हे नाथ! यह उमा मुझे मेरे प्राणों के समान (प्यारी) है। आप इसे अपने घर की टहलनी बनाइएगा और इसके सब अपराधों को क्षमा करते रहिएगा। अब प्रसन्न होकर मुझे यही वर दीजिए॥
🌹🌹बहु बिधि संभु सासु समुझाई। 
              गवनी भवन चरन सिरु नाई॥
  जननीं उमा बोलि तब लीन्ही। 
           लै उछंग सुंदर सिख दीन्ही॥
भावार्थ:-शिवजी ने बहुत तरह से अपनी सास को समझाया। तब वे शिवजी के चरणों में सिर नवाकर घर गईं। फिर माता ने पार्वती को बुला लिया और गोद में बिठाकर यह सुंदर सीख दी-॥
🌹🌹करेहु सदा संकर पद पूजा। नारिधरमु पति देउ न दूजा॥
🌹🌹बचन कहत भरे लोचन बारी। बहुरि लाइ उर लीन्हि कुमारी॥
भावार्थ:-हे पार्वती! तू सदाशिवजी के चरणों की पूजा करना, नारियों का यही धर्म है। उनके लिए पति ही देवता है और कोई देवता नहीं है। इस प्रकार की बातें कहते-कहते उनकी आँखों में आँसू भर आए और उन्होंने कन्या को छाती से चिपटा लिया॥
🌹🌹पुनि पुनि मिलति परति गहि चरना। परम प्रेमु कछु जाइ न बरना॥
🌹🌹सब नारिन्ह मिलि भेंटि भवानी। जाइ जननि उर पुनि लपटानी॥
भावार्थ:-मैना बार-बार मिलती हैं और (पार्वती के) चरणों को पकड़कर गिर पड़ती हैं। बड़ा ही प्रेम है, कुछ वर्णन नहीं किया जाता। भवानी सब स्त्रियों से मिल-भेंटकर फिर अपनी माता के हृदय से जा लिपटीं॥
छन्द :
🌹🌹जननिहि बहुरि मिलि चली उचित असीस सब काहूँ दईं।
🌹🌹फिरि फिरि बिलोकति मातु तन तब सखीं लै सिव पहिं गईं॥
जाचक सकल संतोषि संकरु उमा सहित भवन चले।
सब अमर हरषे सुमन बरषि निसान नभ बाजे भले॥
भावार्थ:-पार्वतीजी माता से फिर मिलकर चलीं, सब किसी ने उन्हें योग्य आशीर्वाद दिए। पार्वतीजी फिर-फिरकर माता की ओर देखती जाती थीं। तब सखियाँ उन्हें शिवजी के पास ले गईं। महादेवजी सब याचकों को संतुष्ट कर पार्वती के साथ घर (कैलास) को चले। सब देवता प्रसन्न होकर फूलों की वर्षा करने लगे और आकाश में सुंदर नगाड़े बजाने लगे।
🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿देवाधिदेव महादेव जी माता पार्वती जी सभी का सदा कल्याण करें सदा मंगल प्रदान करें हर हर महादेव जी 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🙏

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कामेंट्स

sanjay choudhary Mar 14, 2021
🙏🙏 जय सुर्येदेव् 🙏🙏 ।।।।। शुभ प्रभातं जी। ।।। 🙏🙏🌹🌹🙏🙏 *"पहचान" से मिली हुई* *सेवा बहुत कम समय* *के लिए टिकती है।* *लेकिन "" सेवा ” से मिली* *"पहचान" उम्र भर तक* *कायम रहती है ।* *🙏सुप्रभात🙏* 🇮🇳 Bharat Mata ki Jai 🇮🇳

Neeta Trivedi Mar 14, 2021
ऊं सूर्य देवाय नमः शुभ प्रभात वंदन आदरणीय भाई जी आप का हर एक पल शुभ और मंगलमय हो 🙏🌹🙏

Sonu Pathak (Jai Mata Di) Mar 14, 2021
जय श्री राधे कृष्णा🌺🙏 🙏🌺जय माता रानी दी माता रानी की असीम कृपा दृष्टि आप व आपके परिवार पर सदैव बनी रहे आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो भैय्या जी 🌹 नमस्कार सुप्रभात वंदन आदरणीय 🌷🙏🌷

Ansouya M 🍁 Mar 14, 2021
ॐ घृणी सुर्याय नमः 🌹🙏 सस्नेह शुभ प्रभात भईया जी 🙏 आप का दिन शुभ और मंगलमय हो भैया जी 🙏 सुर्य देव जी की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बना रहे भाई जी 🙏 सदैव प्रसन्न रहिए । जो प्राप्त है पर्याप्त है । आप का हर पल शुभ सुन्दर सुखद एवं खुशियों से भरा रहे भाई जी 🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🙏

Brajesh Sharma Mar 14, 2021
ॐ सूर्य देवाय नमः ॐ नमः शिवाय.. हर हर महादेव जय जय श्री राधे कृष्णा जी

🔱🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕🔱 Mar 14, 2021
🌞🚩ॐ सूर्य देवाय नमः 🚩🌞 🎳🙏शुभसंध्या वंदन भाई🙏🎳 👏आप और आपके पूरे परिवार पर भगवान,सूर्यदेव का आशिर्वाद निरंतर बनी रहे 🏵️ 🎳अपका संध्या शुभ शांतिमय व मंगलमय व्यतीत हो 🎳

Shivsanker Shukla Mar 14, 2021
शुभ रात्रि भैया जी हर हर महादेव जय भोलेनाथ की

Sonu Pathak (Jai Mata Di) Mar 14, 2021
Radhe Radhe ji 🌹🌹 🌹🌹Jai Mata rani di Good night brother god bless u and your family 🌷🌷🙏🙏🌷🌷

💥Radha Sharma💥 Mar 14, 2021
जय श्री राधे कृष्णा आदरणीय भैया सादर प्रणाम जी 🙏🌷🙏शुभ रात्रि वंदन जी 🌷🙏

Hemant Kasta Mar 14, 2021
Jai Shree Radhe Krishna Ji Namah, Radhe Radhe Ji, Beautiful Post, Anmol Massage, Dhanywad Aadaraniy Brother Ji Namaskar, Ishwar Ki Asim Kripa Aap Aur Aapke Parivar par Sadaiv Bani Rahe, Aapka Har Pal Shubh Aur Mangalmay Ho, Shubh Ratri.

Renu Singh Mar 14, 2021
Shubh Ratri 🙏 Radhe Radhe Bhai Ji 🙏 Thakur Ji ki kripa Se Aàpka Har Pal Shubh V Mangalmay ho 🌹🙏🌹

Shanti pathak Mar 14, 2021
🌷🙏जय श्री राधे कृष्णा जी🙏शुभ रात्रि वंदन भाई जी🌷आपका हर पल शुभ एवं मंगलमय हो🌷ईश्वर की असीम कृपा आप एवं आपके परिवार पर सदैव बनी रहे जी🌷आपका आनेवाला हर पल खुशियों से परिपूर्ण रहे भाई जी🌷🙏🌷

prem chand shami Mar 14, 2021
हर हर महादेव 🙏🏻🙏🏻 ओमः नमःशिवाय 🙏🏻🙏🏻 नमः पार्वती पति 🙏🏻🙏🏻 शुभ मंगलमय रात्रि की शुभकामनायें प्रणाम भाई जी 💐💐🙏🏻

पुरूषोत्तम : हर हर महादेव ! Mar 14, 2021
🙏🌸🌺🌺🌺🌺🌹🌺 🌳🌹हर हर महादेव 🌹 🌳🌳🌺ओम् नमः शिवाय ! 🌳 🙏🏻🌹🌸🌺🌷🌷🌺 🚩卐 ॐ गं गणपतये नमः 卐 🕉 गं गणपतये नमो नमः । वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा!!🙏 🌹ऊँ गण गणपतये नमो नमः 🌹श्री सिद्धिविनायक नमो नमः 🌹श्री अष्ट विनायक नमो नमः 🙏🌸🌷🌺🌹🌹🌹🌹 🌳जय श्री राम ! 🌳 🌴जय हनुमान !🌴 🙏🌸🌷🌺🌹🌹🌹🌹 🌹ओम् विष्णवे नमः🌹 🌷ओम् गोविंदाय नमः🌷 🌷ओम् माधवाय नमः🌷 🌹ओम् केशवाय नमः🌹 🌹ओम् अच्युताय नमः🌹 🌹ओम् परमात्मने नमः🌹 🌹ओम् नमो नारायनाय 🌹 🙏🌺🌸🌸🌸🌺🌷🌹 🌹ॐ घृणी सूर्याय नमः 🌹ॐ रवि भास्कराय नमः 🌹ॐ आदित्याय नमः 🙏🌹🌺🌷🌳🌸🌹 🌹ॐ महालक्ष्मी नमः 🌹 ॐ महाकाली नमः 🌹 ॐ महासरस्वती नमः 🌹 ॐ मां वैष्णो देव्याई नमः 🌹 ॐ मां दूर्गा देव्याई नमः 🌹 देवी अन्नपूर्णा देव्याई नमः🌹 देवी गायत्री देव्याई नमः 🙏🌳🌸🌺🌹🌷💐🌹 🌳हर हर महादेव !!!!!!🌳

Renu Singh Mar 15, 2021
🌿Har Har Mahadev 🌿 Good Morning Bhai Ji 🙏🌹 Mahadev Ji Ka Aashirwad Aap aur Aàpke Pariwar pr Sadaiv Bna rhe Aàpka Din Shubh ho Bhai Ji 🙏🌹

Soni Mishra May 15, 2021

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🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰 भगवान शनि देव के कई चमत्कारिक पीठ 🌹👏🚩 देश के अलग-अलग कोनों में स्थिति हैं। हर वर्ष यहां दूर-दूर से भक्त आते हैं और शनि देव की पूजा करते हैं। मान्यता है कि महाराष्ट्र के शिंगणापुर में शनि देव का जन्म हुआ था और इस गांव में शनि देव का भव्य मंदिर बनाया गया है। इसके अलावा हमारे गांव खरडगाव ता शेवगाव जिला अहमदनगर में भी एक शनि देव महाराज का मंदिर हैं जो महाराष्ट्रीय राजा पेशवा ने बनवाया था इतिहास में जो मुंगी नाम से एक तह हुआ था जो युद्ध के समय पेशवा ने शनि देव महाराज से मन्नत मांगी थी इच्छा पूरी होने के बाद यहा मंदिर बनवाया था पेशवे कालिन मंदिर हैं पेशवे राजा राक्षस भुवन ता गेवराई जिला बीड के शनि देव महाराज के भक्त थे युद्ध में जय मिलने के बाद यहा खरडगाव में मंदिर बनवाया गया राक्षस भुवन के मंदिर का इतिहास बहोत पूराणा महाभारत कालिन हैं इसका उल्लेख हैं उत्तर प्रदेश के कोशी में सिद्ध शनि देव का मंदिर है, जो कि कोशी से छह किलोमीटर दूर कौकिला वन में स्थित है। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में भी शनि देव का प्रसिद्ध मंदिर है। जिसे शनिश्चरा मन्दिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर से रामायण काल की कथा जुड़ी हुई है। जो कि इस प्रकार है। शनिश्चरा मंदिर से जुड़ी कथा के अनुसार त्रेतायुग में यहां हनुमान जी के द्वारा लंका से फेंका हुआ अलौकिक शनि देव का पिण्ड है। जिसकी पूजा की जाती है। मान्यता है कि शनि सिद्धपीठ पर जाकर जो लोग शनि की पूजा करते हैं। शनि देव उनको दण्ड से बचाते हैं। कहा जाता है श्री शनिदेव को रावण ने कैद कर लिया था और उल्टा लटका दिया था। हनुमान जी जब लंका पहुंचे तो उन्हें पता चला कि शनिदेव की उपस्थिति के कारण रावण की हानि नहीं हो पा रही है। जिसके चलते उन्होंने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त करा दिया। लेकिन घायल होने के कारण शनिदेव अपनी कक्षा में स्थापित नहीं हो सकते थे। तब शनिदेव ने श्री हनुमानजी से आग्रह किया कि वो किसी ऐसे स्थान पर उन्हें स्थापित कर दें। जहां से लंका दिखाई देती हो। ताकि वो अपनी दृष्टि उसपर डाल सकें। तब हनुमानजी ने शनि देव को इस पहाड़ी पर स्थापित किया। यहां से शनिदेव ने रावण पर दृष्टि डाली और हनुमान ने लंका में आग लगा दी। कहा जाता है कि शनिदेव तभी से यहीं विराजमान हैं। शनिश्चरा स्थित श्री शनि देव मंदिर का निर्माण राजा विक्रमादित्य ने शुरू करवाया था। जबकि सिंधिया शासकों द्वारा इसका जीर्णोद्धार कराया गया। लगाया जाता है शनिदेव को गले जिन लोगों की कुंडली में शनि देव का बुरा प्रभाव है। वो लोग भी यहां आकर पूजा करते हैं। यहां पर दान पुण्य, पूजा-पाठ व हवन यज्ञ व भंडारा करके पुण्य की प्राप्ति होती है और शनि देव के प्रकोप से रक्षा होती है। कहा जाता है कि जो भी लोग शनिदेव की पीड़ा से ग्रस्त होते हैं वो यहां आकर तेल चढ़ाते हैं। उसके बाद उनसे गले मिलते है। साथ में ही अपने पहने हुए कपड़े, चप्पल, जूते आदि यहीं छोड़कर घर चले जाते हैं। ऐसा करने से पाप और दरिद्रता से छुटकारा मिल जाता है। साथ ही शनिदेव से रक्षा होती है। लगता है मेला शनिशचरी अमावस्या के दिन इस मंदिर में मेला लगता है और इस दौरान लाखों श्रद्धालु यहां पर आते हैं। ग्वालियर में स्थित इस मंदिर में भिण्ड, मुरैना, दतिया, झांसी, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर सहित मध्यप्रदेश के कोने-कोने से भक्त आते हैं और शनिदेव का पूजन करते हैं। कैसे जाएं शनिश्चरा मंदिर पूरे भारत वर्ष में प्रसिद्ध है। ये मुरैना जिले में स्थित है। जो कि ग्वालियर से मात्र 18 किलोमीटर दूरी है। ऐंती पर्वत पर स्थित ये मंदिर प्राचीन काल के समय से बना हुआ है। यहां जाने के लिए आपको ग्वालियर से बस व कार आसानी से मिल जाएगी। वहीं मंदिर के पास ही धर्मशाला भी बनाई गई हैं। जहां पर आप रुक सकते हैं। हालांकि शनिवार के दिन यहां पर खास भीड़ होती है। जय श्री राम जय श्री हनुमान जी जय श्री शनि देव महाराज 👑 👏 🙏 शुभ रात्री वंदन 👣 🌹 👏 जय हो 🌹 👏 आपको सादर प्रणाम 🌹 👏 आपको भगवान श्री शनि देव महाराज की कृपा सदैव बनी रहे नमस्कार 🙏 🚩 आप का हर पल शुभ रहे मस्त रहे सदा सुखी रहे धन्यवाद 🙏 🌷 🎪🎪🎪🎪🎪🎪🎪🎪🎪🎪🎪

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M.S.Chauhan May 15, 2021

*शुभ संध्या वंदन* *जय गायत्री माता की* 👩‍👧‍👦परिवार दिवस पर भाव👨‍👦‍👦 ☀☀☀☀☀☀☀☀ भावना हो शुद्ध दिल में प्रीति हो । कामना हो श्रेष्ठ मन में नीति हो ।। सोच कर मन शब्द दिल से तोलिये । प्रेम की भाषा सदा ही बोलिये ।। आदमी को कर्म करना चाहिए । जिन्दगी का मर्म पढ़ना चाहिए ।। कार्य का आधार मन में लाइये । धर्म का सत्कार दिल से गाइये ।। लोभ मन को नित लुभाता जानिये । क्रोध तन-मन को सुखाता मानिये ।। प्रेम हम को मोहता है पागिये । धर्म सब को जोड़ता है धारिये ।। चेतना से भान कर के ही बढ़ें । साधना से ध्यान धर के ही बढ़ें ।। योजना से लक्ष्य को चुनते चलें । हौसलों से मंजिलें गढ़ते चलें ।। 🌷💖👩‍👧‍👦🙏👩‍👧‍👦💖🌷

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Dheeraj Shukla May 15, 2021

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Ramesh Agrawal May 15, 2021

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Manoj manu May 14, 2021

🚩🔔जय माता दी - जय श्री परशुराम जी 🌹🙏 🌹🌹आप सभी को पवित्र पावन पर्व अक्षय तृतीया एवं भगवान श्री परशुराम प्रकाट्टोस्व की अनेकानेक हार्दिक शुभकामनाएँ। एवं मंगलमय बधाईयाँ,🌹🌿🌹 श्लोक : 'अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः॥' अर्थात् : अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम ये सभी चिरंजीवी हैं। भगवान श्री विष्णु जी के छठवें अवतार सप्त चिरंजीवी श्री परशुराम जी का जन्म अक्षय तृतीया को परशुराम जयंती के रूप में मनाया जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन किये गए पुण्य का प्रभाव कभी खत्म नहीं होता, हमेशा अक्षय रहता है। अक्षय तृतीया से त्रेता युग का आरंभ माना जाता है. इस दिन का विशेष महत्व है. परशुराम सप्तऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के सबसे छोटे पुत्र थे. अपने पूर्वजों कि तरह ऋषि जमदग्नि भी युद्ध कला में कुशल योद्धा थे. जमदग्नि के पांचों पुत्रों वासू, विस्वा वासू, ब्रिहुध्यनु, बृत्वकन्व तथा परशुराम में परशुराम ही सबसे कुशल एवं निपुण योद्धा हैं एवं सभी प्रकार से युद्धकला में दक्ष थे. परशुराम भारद्वाज एवं कश्यप गोत्र के कुलगुरु भी माने जाते हैं.🌺🌿🌺श्री परशुराम जी सभी का सदा कल्याण करें सदा मंगल प्रदान करें 🌺🌿🌺🌿🌺🙏

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