shrimad Bhagwat Katha

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Manoj manu Oct 23, 2020

🚩🔱🌺जय माता दी शुभ नवरात्रि 🔔🌺🙏 नवदुर्गा मंत्र विशेष -जो सभी नौं देवियों नव गृहों एवं सभी प्रकार के सुख शाँति एवं समृद्धि के लिए है :- नवार्ण मंत्र नौ अक्षरों वाला मंत्र है:- "'ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' है। " नौ अक्षरों वाले इस नवार्ण मंत्र के एक-एक अक्षर का संबंध दुर्गा की एक-एक शक्ति से है और उस एक-एक शक्ति का संबंध एक-एक ग्रह से है। नवार्ण मंत्र सबसे प्रशस्त मंत्र माना गया है। सभी कामनाएं इसी से पूर्ण हो जाती हैं तथा देवी की कृपा तथा आशीर्वाद इसी से मिलता है। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।। ' ऐं' श्री महासरस्वती का बीज मंत्र है। वाणी, ऐश्वर्य, बुद्धि तथा ज्ञान देने वाला है। ' ह्रीं' श्री महालक्ष्मी का बीज मंत्र है। ऐश्वर्य, धन देने वाला है। ' क्लीं' शत्रुनाशक महाकाली का बीज मंत्र है। ॐ ह्रीं ऐं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।। नवार्ण मंत्र का पहला अक्षर है ऐं। यह सूर्य ग्रह को नियंत्रित करता है। दूसरा अक्षर है ह्रीं। यह चंद्र ग्रह को नियंत्रित करता है। तीसरा अक्षर है क्लीं। यह मंगल को नियंत्रित करता है। चौथा अक्षर है चा। यह बुध को नियंत्रित करता है। पांचवा अक्षर है मुं। यह बृहस्पति को अनुकूल बनाता है। छठा अक्षर है डा। यह शुक्र ग्रह को नियंत्रित करके उसकी पीड़ा को शांत करता है। सातवां अक्षर है यै। यह शनि ग्रह को नियंत्रित करता है। आठवां अक्षर है वि। यह राहु ग्रह को अपने आधिपत्य में रखता है। नवां अक्षर है च्चे। यह केतु ग्रह को नियंत्रित करके उसकी पीड़ा से मुक्ति दिलाता है। 🌺मंत्र जाप के लाभ :-- मन शांत करता है मंत्रों का उच्चारण करके लोग काफी सालों से अपनी मनोकामना पूरी करते आ रहे हैं। ... नकारात्मक ऊर्जा में कमी आती है ... आपके दुश्मनों को दोस्त बना देता है ... आनंदपूर्ण स्वभाव ... शैक्षणिक योग्यताओं में सुधार ... औषधीय लाभ ... आत्मविश्वास बढ़ाता है ... बुराई से बचाता है। 🌿🌺🌺माँ भगवती सभी का सदा कल्याण करें सदा मंगल प्रदान करें जय माता दी जय माँ महाकाली राधे राधे जी मंत्र जाप में अपनी सात्विकता और सुचिता का विशेष ध्यान रखें 🌿🌺🌿🙏🙏

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simran Oct 23, 2020

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Babita Sharma Oct 23, 2020

हे माँ तू शोक दुःख निवारिनी, सर्व मंगल कारिनी, चंड-मुंड विधारिनी, तू ही शुंभ-निशुंभ सिधारिनी…जय माता दी 🚩 जगत जननी मां आदिशक्ति के सप्तम स्वरूप मां कालरात्रि को बारंबार प्रणाम 🙏🙏 शुभ नवरात्रि दुर्गा पूजा का सातवां दिन – आश्विन शुक्ल सप्तमी – कालरात्रि पूजा🚩🚩 “एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा। वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥“ श्री दुर्गा का सप्तम रूप श्री कालरात्रि हैं। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के सप्तम दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) में स्थिर कर साधना करनी चाहिए। संसार में कालों का नाश करने वाली देवी ‘कालरात्री’ ही हैं। भक्तों द्वारा इनकी पूजा के उपरांत उसके सभी दु:ख, संताप भगवती हर लेती है। दुश्मनों का नाश करती है तथा मनोवांछित फल प्रदान कर उपासक को संतुष्ट करती हैं। मां दुर्गा के सातवें स्वरूप या शक्ति को कालरात्रि कहा जाता है, दुर्गा-पूजा के सातवें दिन माँ काल रात्रि की उपासना का विधान है. मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, इनका वर्ण अंधकार की भाँतिकाला है, केश बिखरे हुए हैं, कंठ में विद्युत की चमक वाली माला है, माँ कालरात्रि के तीन नेत्र ब्रह्माण्ड की तरह विशाल व गोल हैं, जिनमें से बिजली की भाँति किरणें निकलती रहती हैं, इनकी नासिका से श्वास तथा निःश्वाससे अग्नि की भयंकर ज्वालायें निकलती रहती हैं. माँ का यह भय उत्पन्न करने वाला स्वरूप केवल पापियों का नाश करने के लिए है। माँ कालरात्रि अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करने वाली होती हैं इस कारण इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है. दुर्गा पूजा के सप्तम दिन साधक का मन ‘सहस्रार’ चक्र में अवस्थित होता है. कालरात्रिमर्हारात्रिर्मोहरात्रिश्र्च दारूणा. त्वं श्रीस्त्वमीश्र्वरी त्वं ह्रीस्त्वं बुद्धिर्बोधलक्षणा. मधु कैटभ नामक महापराक्रमी असुर से जीवन की रक्षा हेतु भगवान विष्णु को निंद्रा से जगाने के लिए ब्रह्मा जी ने इसी मंत्र से मां की स्तुति की थी. यह देवी काल रात्रि ही महामाया हैं और भगवान विष्णु की योगनिद्रा हैं. इन्होंने ही सृष्टि को एक दूसरे से जोड़ रखा है.देवी काल-रात्रि का वर्ण काजल के समान काले रंग का है जो अमावस की रात्रि से भी अधिक काला है. मां कालरात्रि के तीन बड़े बड़े उभरे हुए नेत्र हैं जिनसे मां अपने भक्तों पर अनुकम्पा की दृष्टि रखती हैं. देवी की चार भुजाएं हैं दायीं ओर की उपरी भुजा से महामाया भक्तों को वरदान दे रही हैं और नीचे की भुजा से अभय का आशीर्वाद प्रदान कर रही हैं.बायीं भुजा में क्रमश: तलवार और खड्ग धारण किया है. देवी कालरात्रि के बाल खुले हुए हैं और हवाओं में लहरा रहे हैं. देवी काल रात्रि गर्दभ पर सवार हैं. मां का वर्ण काला होने पर भी कांतिमय और अद्भुत दिखाई देता है. देवी कालरात्रि का यह विचित्र रूप भक्तों के लिए अत्यंत शुभ है अत: देवी को शुभंकरी भी कहा गया है. सप्तमी दिन – कालरात्रि की पूजा विधि : देवी का यह रूप ऋद्धि सिद्धि प्रदान करने वाला है. दुर्गा पूजा का सातवां दिन तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले भक्तों के लिए अति महत्वपूर्ण होता है। सप्तमी पूजा के दिन तंत्र साधना करने वाले साधक मध्य रात्रि में देवी की तांत्रिक विधि से पूजा करते हैं. इस दिन मां की आंखें खुलती हैं. षष्ठी पूजा के दिन जिस विल्व को आमंत्रित किया जाता है उसे आज तोड़कर लाया जाता है और उससे मां की आँखें बनती हैं. दुर्गा पूजा में सप्तमी तिथि का काफी महत्व बताया गया है. इस दिन से भक्त जनों के लिए देवी मां का दरवाज़ा खुल जाता है और भक्तगण पूजा स्थलों पर देवी के दर्शन हेतु पूजा स्थल पर जुटने लगते हैं. सप्तमी की पूजा सुबह में अन्य दिनों की तरह ही होती परंतु रात्रि में विशेष विधान के साथ देवी की पूजा की जाती है. इस दिन अनेक प्रकार के मिष्टान एवं कहीं कहीं तांत्रिक विधि से पूजा होने पर मदिरा भी देवी को अर्पित कि जाती है. सप्तमी की रात्रि ‘सिद्धियों’ की रात भी कही जाती है. कुण्डलिनी जागरण हेतु जो साधक साधना में लगे होते हैं आज सहस्त्रसार चक्र का भेदन करते हैं.पूजा विधान में शास्त्रों में जैसा वर्णित हैं उसके अनुसार पहलेकलश की पूजा करनी चाहिए फिर नवग्रह, दशदिक्पाल, देवी के परिवार में उपस्थित देवी देवता की पूजा करनी चाहिए फिर मां कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए. देवी की पूजा से पहले उनका ध्यान करना चाहिए ” देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्तया, निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां, भक्त नता: स्म विदाधातु शुभानि सा न:.. देवी कालरात्रि के मंत्र : 1- या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। 2- एक वेधी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकणी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।। वामपदोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।। मां कालरात्रि अपने सभी भक्तों का कल्याण करें 🙏🙏🌹🌹🌹🌹

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