vinod
vinod May 4, 2021

Gd Evg❤❤❤🙏🙏🙏

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कामेंट्स

🌹🍒 preeti Jain 🍒🌹✍️ May 4, 2021
ram ram ji jai shree veer hanuman ji ka kirpa sada aap aur aap ke parivar pe bani rahe aap ka har pal Shubh aur mangalmay ho good evening ji om shanti 🌹🙏

Ragni Dhiwar May 4, 2021
🥀जय श्री कृष्ण 🙏शुभ रात्रि स्नेह वंदन जी 🥀आपका हरपल मंगलमय हो 🥀 राधे-राधे जी 🥀

S kr May 4, 2021
ശുഭ രാത്രി bro🌹🌹🌹

Seema Sharma. Himachal (chd) May 4, 2021
हमें किसी भी ख़ास समय के लिए इन्तजार नहीं करना चाहिए बल्कि अपने हर समय को ख़ास बनाने की पूरी तरह से कोशिश करनी चाहिए।” शुभ रात्रि जी 😊🙏 बहुत बहुत धन्यवाद जी 😊🙏

RAJ RATHOD May 5, 2021
🌹🌹 शुभ दोपहर वंदन जी 🙏🙏🌺💐🌿🌹 🌹🌹 भगवान श्री गणेश जी की कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे 🙏🙏🌺💐🌿🌹💐💐🌺🌿🌿🌹💐🌹🌹 🌹🌹 आपका हर पल शुभ एवं मंगलमय हो 🌹🌹

Rani.R May 6, 2021
subhadinam dr stay safe dr

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ठाकुर जी एक कटोरे में मिट्टी लेकर उससे खेल रहे थे। राधा रानी ने पूछा :- गोपाल जी ये क्या कर रहे हो ? ठाकुर जी कहने लगे :- मूर्ति बना रहा हूँ। राधा ने पूछा :- किसकी ? उन्होंने मुस्कुराते हुए उनकी ओर देखा। और कहने लगे :- एक अपनी और एक तुम्हारी। राधा भी देखने के उद्देश्य से उनके पास बैठ गयी । अब ठाकुर जी ने कुछ ही पल में दोनों मूर्तियाँ तैयार कर दी।और राधा रानी से पूछने लगे :- बताओं कैसी बनी है ? मूर्ति इतनी सुंदर मानों अभी बोल पड़ेंगी।परन्तु राधा ने कहा:- मजा नहीं आया।इन्हें तोड़ कर दुबारा बनाओ। अब ठाकुर जी अचरज भरी निगाहों से राधा की ओर देखने लगें।और सोचने लगे कि मेरे बनाए में इसे दोष दिखाई दे रहा हैं। परन्तु उन्होंने कुछ नहीं कहा।और दोबारा उन मूर्तियों को तोड़कर उस कटोरे में डाल दिया।और उस मिट्टी को गुथने लगें। अब उन्होंने फिर से मूर्तियाँ बनानी शुरू की।और हुबहू पहले जैसी मूर्तियाँ तैयार की। अबकी बार प्रश्न चिन्ह वाली दृष्टि से राधे की ओर देखा ? राधा ने कहा:- ये वाली पहले वाली से अधिक सुंदर है। ठाकुर जी बोले :- तुम्हें कोई कला की समझ वमझ हैं भी के नहीं।इसमें और पहले वाली में मैंने रति भर भी फर्क नहीं किया।फिर ये पहले वाली से सुंदर कैसे हैं ? राधा ने कहा :- "प्यारे" यहाँ मूर्ति की सुंदरता को कौन देख रहा है।मुझे तो केवल तेरे हाथों से खुद को तुझमें मिलवाना था। ठाकुर जी :- अर्थात ????? अब राधा रानी ठाकुर जी को समझा रही थी :- देखों मोहन, तुमनें पहले दो मूर्ति बनाई।एक अपनी और एक हमारी। ठाकुर जी :- हाँ बनाई । राधा :- फिर तुमनें इन्हें तोड़कर वापस कटोरे में डालकर गुथ दिया। ठाकुर जी :- हाँ तो ? राधा रानी :- बस इस गुथने की परिक्रिया मे ही मेरा मनोरथ पूरा हो गया। मैं और तुम मिलकर एक हो गए। ठाकुर जी बैठे-बैठे राधा जी को देखते हुए मुस्कुरा रहे थे।। . 🙏राधे कृष्णा🙏राधे कृष्णा🙏

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Shanti Pathak May 7, 2021

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GOVIND CHOUHAN May 7, 2021

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sanjay Awasthi May 7, 2021

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Ajay Kumar May 7, 2021

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