dalipjotwani
dalipjotwani Dec 5, 2021

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dalipjotwani Jan 19, 2022

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myjbjvala Jan 18, 2022

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dalipjotwani Jan 17, 2022

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dalipjotwani Jan 17, 2022

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Gopal Das Bahrani Jan 19, 2022

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shiv Charan Bhulwana Jan 19, 2022

ॐ आध्यात्मिक ज्ञान ॐ श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13 ॐ प्रकृतिं पुरुषं चैव विद्धयनादी उभावपि! विकारांश्च गुणांश्चैव विद्धि प्रकृतिसम्भवान्!! 19 !! प्रकृति और पुरुष- इन दोनों को ही तू अनादि जान और राग - द्वेषादि विकारों को तथा त्रिगुणात्मक सम्पूर्ण पदार्थों को भी प्रकृति से ही उत्पन्न जान!! 19 !! साथियों क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का यहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने और रहस्य से पर्दा उठाया है कैसे कि प्रकृति और पुरुष के रूप में जिन्हें वो अनादि बता रहे हैं तथा यहाँ प्रकृति ही क्षेत्र है जाने और पुरुष ही क्षेत्रज्ञ है जिसमें राग- द्वेषादि विकार और सत, रज, तमात्मिक जो सम्पूर्ण पदार्थ हैं वो सभी प्रकृति से ही उत्पन्न हैं एसा जान!! धन्यवाद जी शिवचरण परमार भुलवाना श्रीराधे जय श्री राधे राधे जी

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