Devang S Bhatt
Devang S Bhatt Aug 20, 2017

Amavasya K Upay

#सोमवती (21 अगस्त, 2017) #अमावस्या के उपाय
सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। कहते है सोमवती अमावस्या बड़े भाग्य से पड़ती है। पांडव तरसते रहे लेकिन उनके जीवन में सोमवती अमावस्या कभी पड़ी ही नहीं। सोमवार भगवान चन्द्र को समर्पित दिन है। भगवान चन्द्र को शास्त्रों में मन का कारक माना गया है। अत: इस दिन अमावस्या पड़ने का अर्थ है कि यह दिन मन सम्बन्धी दोषों के समाधान के लिये अति उत्तम है। चूंकि हमारे शास्त्रों में चन्द्रमा को ही समस्त दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों का कारक माना जाता है, अत: पूरे वर्ष में एक या दो बार पड़ने वाले इस दिन का बहुत विशेष महत्व है। विवाहित स्त्रियों द्वारा इस दिन अपने पतियों के दीर्घायु कामना के लिए व्रत का विधान है।
सोमवती अमावस्या कलियुग के कल्याणकारी पर्वो में से एक है, लेकिन सोमवती अमावस्या को अन्य अमावस्याओं से अधिक पुण्य कारक मानने के पीछे भी शास्त्रीय और पौराणिक कारण हैं। सोमवार को भगवान शिव और चंद्रमा का दिन कहा गया है। सोम यानि चंद्रमा। अमावस्या और पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का सोमांश यानि अमृतांश सीधे-सीधे पृथ्वी पर पड़ता है। शास्त्रों के अनुसार सोमवती अमावस्या पर चंद्रमा का अमृतांश पृथ्वी पर सबसे अधिक मात्रा में पड़ता है।
अमावस्या अमा और वस्या दो शब्दों से मिलकर बना है। शिव महापुराण में इस संधि विच्छेद को भगवान शिव ने माता पार्वती को समझाया था। क्योंकि सोम को अमृत भी कहा जाता है, अमा का अर्थ है एकत्र करना और वस्या वास को कहा गया है। यानि जिसमें सब एक साथ वास करते हों वह अमावस्या अति पवित्र सोमवती अमावस्या कहलाती है। यह भी माना जाता है की सोमवती अमावस्या में भक्तों को अमृत की प्राप्ति होती है।
निर्णय सिंधु व्यास के वचनानुसार इस दिन मौन रहकर स्नान-ध्यान करने से सहस्र गोदान का पुण्य फल प्राप्त होता है। हिन्दु धर्म शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गयी है। अश्वत्थ यानि पीपल वृक्ष। इस दिन पीपल कि सेवा,पूजा, परिक्रमा का अति विशेष महत्व है।
शास्त्रों के अनुसार में पीपल की छाया से, स्पर्श करने से और प्रदक्षिणा करने से समस्त पापों का नाश, अक्षय लक्ष्मी की प्राप्ति और आयु में वृद्धि होती है।
पीपल के पूजन में दूध, दही, मीठा,फल,फूल, जल,जनेऊ जोड़ा चढ़ाने और दीप दिखाने से भक्तों कि सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कहते है कि पीपल के मूल में भगवान विष्णु, तने में भगवान शिव जी तथा अग्रभाग में भगवान ब्रह्मा जी का निवास है। इसलिए सोमवार को यदि अमावस्या हो तो पीपल के पूजन से अक्षय पुण्य, लाभ तथा सौभाग्य की वृद्धि होती है।
इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा और वृक्ष के चारों ओर १०८ बार धागा लपेट कर परिक्रमा करने का विधान होता है।और प्रत्येक परिक्रमा में कोई भी एक मिठाई,फल या मेवा चढ़ाने से विशेष लाभ होता है । प्रदक्षिणा के समय 108 फल अलग रखकर समापन के समय वे सभी वस्तुएं ब्राह्मणों और निर्धनों को दान करें।इस प्रक्रिया को कम से कम तीन सोमवती अमावस्या तक करने से सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इस प्रक्रिया से पितृ दोष का भी निश्चित ही समधान होता है।
इस दिन जो स्त्री तुलसी व माता पार्वती पर सिन्दूर चढ़ाकर अपनी माँग में लगाती है वह अखण्ड सौभाग्यवती बनी रहती है । आज के दिन महिलाएँ कपड़ा, गहना, बरतन, अनाज अथवा कोई भी खाने की वस्तु वस्तुयें दान कर सकती है जिससे उनके जीवन में शुभता आती है,समाज में उनके परिवार का नाम होता है, यश मिलता है ।
जिन जातकों की जन्मपत्रिका में घातक कालसर्प दोष है, वे लोग यदि सोमवती अमवस्या पर चांदी के बने नाग-नागिन की विधिवत पूजा करके उन्हे नदीं में प्रवाहित कर दें, भगवान भोले भण्डारी पर कच्चा दूध चढ़ायें, पीपल पर मीठा जल चढ़ाकर उसकी परिक्रमा करें, धूप दीप जलाएं, ब्रह्मणो को यथा शक्ति दान दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद ग्रहण करें तो उन्हें निश्चित ही कालसर्प दोष से छुटकारा मिलेगा।
सोमवती अमावस्या को अत्यंत पुण्य तिथि माना जाता है । मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन किये गए किसी भी प्रकार के उपाय शीघ्र ही फलीभूत होते है । सोमवती अमावस्या के दिन उपाय करने से मनुष्यों को सभी तरह के शुभ फल प्राप्त होते है , अगर उनको कोई कष्ट है तो उसका शीघ्र ही निराकरण होता है और उस व्यक्ति तथा उसके परिवार पर आने वाले सभी तरह के संकट टल जाते है।
इस दिन जो मनुष्य व्यवसाय में परेशानियां से जूझ रहे हो, वे पीपल वृक्ष के नीचे तिल के तेल का दिया जलाकर और ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें तो उनकी व्यवसाय में आ रही समस्त रुकावट दूर हो जाएगी। सोमवती अमावस्या के पर्व पर अपने पितरों के निमित्त पीपल का वृक्ष लगाने से जातक को सुख-सौभाग्य, संतान, पुत्र, धन की प्राप्ति होती है और उसके समस्त पारिवारिक क्लेश समाप्त हो जाते हैं।
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व समझा जाता है। कहा जाता है कि महाभारत में भीष्म ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य निश्चय ही समृद्ध, स्वस्थ और सभी दुखों से मुक्त होगा. ऐसी मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पितरों कि आत्माओं को शांति मिलती है।
इस दिन पवित्र नदियों, तीर्थों में स्नान, ब्राह्मण भोजन, गौदान, अन्नदान, वस्त्र, स्वर्ण आदि दान का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन गंगा स्नान का भी विशिष्ट महत्त्व है। इस दिन यदि गंगा जी जाना संभव न हो तो प्रात:काल किसी नदी या सरोवर आदि में स्नान करके भगवान शंकर, पार्वती और तुलसी की भक्तिपूर्वक पूजा करें।
सोमवार भगवान शिव जी का दिन माना जाता है और सोमवती अमावस्या तो पूर्णरूपेण शिव जी को समर्पित होती है। इसलिए इस दिन भगवान शिव कि कृपा पाने के लिए शिव जी का अभिषेक करना चाहिए, या प्रभु भोले भंडारी पर बेलपत्र, कच्चा दूध ,मेवे,फल,मीठा,जनेऊ जोड़ा आदि चढ़ाकर ॐ नम: शिवाय का जाप करने से सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है।
मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन सुबह-सुबह नित्यकर्मों से निवृत्त होकर किसी भी शिव मंदिर में जाकर सवा किलो साफ चावल अर्पित करते हुए भगवान शिव का पूजन करें। पूजन के पश्चात यह चावल किसी ब्राह्मण अथवा जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें। शास्त्रों के अनुसार सोमवती अमवस्या पर शिवलिंग पर चावल चढ़ाकर उसका दान करने से अक्षय पुण्य मिलता है माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
शास्त्रों में वर्णित है कि सोमवती अमावस्या के दिन उगते हुए भगवान सूर्य नारायण को गायत्री मंत्र उच्चारण करते हुए अर्घ्य देने से गरीबी और दरिद्रता दूर होगी। यह क्रिया आपको अमोघ फल प्रदान करती है ।
सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी के पौधे की श्री हरि-श्री हरि अथवा ॐ नमो नारायण का जाप करते हुए परिक्रमा करें, इससे जीवन के सभी आर्थिक संकट निश्चय ही समाप्त हो जाते है।
जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर है, वह यदि गाय को दही और चावल खिलाएं तो उन्हें अवश्य ही मानसिक शांति प्राप्त होगी।
इसके अलावा मंत्र जाप, सिद्धि साधना एवं दान कर मौन व्रत को धारण करने से पुण्य प्राप्ति और भगवान का आशीर्वाद मिलता है।
इस दिन स्वास्थ्य, शिक्षा,कानूनी विवाद,आर्थिक परेशानियों और पति-पत्नी सम्बन्धी विवाद के समाधान हेतु किये गये उपाय अवश्य ही सफल होते है ।
इस दिन जो व्यक्ति धोबी,धोबन को भोजन कराता है,सम्मान करता है, दान दक्षिणा देता है, उसके बच्चो को कापी किताबे, फल, मिठाई,खिलौने आदि देता है उसके सभी मनोरथ अवश्य ही पूर्ण होते है ।
इस दिन ब्राह्मण, भांजा और ननद को फल, मिठाई या खाने की सामग्री का दान करना बहुत ही उत्तम फल प्रदान करता है।

Shastri Devang S Bhatt
09724304592

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Anju Rehalu Sep 28, 2020

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Arun Kumar Sharma Sep 28, 2020

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Dilip.M Sep 28, 2020

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Dilip.M Sep 28, 2020

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Ravi Kumar Taneja Sep 28, 2020

*👇मन ही मन भगवान से क्या बातें करें.... क्या मांगे👇* *1 - हे मेरे स्वामी ! मेरी इच्छा कभी पूर्ण न हो... सदैव आपकी ही इच्छा पूर्ण हो... क्योंकि मेरे लिए क्या सही है... ये मुझसे बेहतर आप जानते हैं ।*🌹🌹🌹 *2 - हे नाथ ! मेरे मन, कर्म और वचन से.. कभी किसी को भी थोड़ा सा भी दुःख न पहुँचे... यह कृपा बनाये रखें ।*🌷🌷🌷 *3 - हे नाथ ! मैं कभी न पाप करूँ.. न होता देखूं.. न सुनू.. और न ही कभी किसी के पाप का बखान करूँ ।*🌺🌺🌺 *4 - हे नाथ ! शरीर के सभी इन्द्रियों से आठो पहर... केवल आपके प्रेम भरी लीला का ही आस्वादन करता रहूँ ।*🌸🌸🌸 *5 - हे नाथ ! प्रतिकूल से प्रतिकूल परिस्थिति में भी... आपके मंगलमय विधान देख सदैव प्रसन्न रहूँ ।*🌼🌼🌼 *6 - हे नाथ ! अपने ऊपर महान से महान विपत्ति आने पर भी... दूसरों को सदैव सुख ही दिया करूँ ।*💮💮💮 *7 - हे प्रभु ! अगर कभी किसी कारणवश... मेरे वजह से किसी को दुःख पहुँचे... तो उसी समय उससे हाथ जोड़कर क्षमा माँग लूँ ।*👌👌👌 *8 - हे प्रभु ! आठो पहर रोम रोम से... केवल आपके नाम का ही जप होता रहे ।*💐💐💐 *9 - हे प्रभु ! मेरे आचरण श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीरामचरितमानस के अनुकूल हों ।*💐💐💐 *10 - हे मेरे प्रभु ! हर एक परिस्थिति में मुझे आपके ही दर्शन हों ।*🙏🙏🙏 *🙏🌸सर्वे भवन्तु सुखिनः🌸🙏* *ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ*

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Shivsanker Shukla Sep 28, 2020

शुभ सोमवार की शुभ संध्या में मंदिर परिवार के सभी आदरणीय भगवत प्रेमी भाई बहन आप सभी को संध्या की राम राम भगवान शिव के यदि आप कृपा पात्र बनना चाहते हैं तो मैं आप सब से निवेदन करूं सुबह शाम प्रभु के पावन दरबार में अपनी हाजिरी अवश्य लगाएं भले ही आप के अंदर भावना ना हो परंतु संकल्प होना चाहिए कि मंदिर जाएंगे मेरे भाई बहन भगवान शिव की कृपा प्राप्त होनी शुरू हो जाए बड़ी-बड़ी कतारें लगी थी लोग भीड़ में धक्का-मुक्की कर रहे थे एक सूरदास भी लाइन में लगे हुए थे लोगों ने उनसे कहा भैया आपको तो दिखता नहीं आप वहां क्या करेंगे उन्होंने बड़ा सुंदर जवाब दिया था कि मैं नहीं देखता तो क्या हुआ वह तो देखता है वह तो मुझे देखेगा तो मेरे भाई बहन इन्हीं भाव के साथ

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Dilip.M Sep 28, 2020

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arun bhai Sep 28, 2020

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