Kamu Rajpurohit 73
Kamu Rajpurohit 73 Dec 18, 2017

जय रूपनारायण जी की

जय रूपनारायण जी की

आज के शुभ दर्शन भगवान श्री रूपनारायण जी गांव सेवन्त्री राजसमंद।।
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किसी ने भगवान् से पूछा

" सवेरा तो रोज ही होता है परन्तु शुभप्रभात क्या होता है"

भगवान् ने बहुत ही सुन्दर जबाब दिया
" जीवन में जिस दिन आप अपने अंदर के बुराईयो को समाप्त कर उच्च विचार तथा अपनी आत्मा को शुद्ध करके दिन की शुरुआत करते हो वही शुभप्रभात होता है ....🌸🌸
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Rakesh nema Mar 9, 2021

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Master ji Mar 8, 2021

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Ramashankar Tiwari Mar 8, 2021

विजया एकादशी 9 मार्च, 2021 (मंगलवार) हिन्दू धर्म में एकादशी को महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है, इसलिए विजया एकादशी का भी धार्मिक रूप से बड़ा महत्व है। विजया एकादशी के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इस दिन जो भी मनुष्य सच्चे मन से और पूरी विधि विधान के साथ व्रत करते है तो उनको अपने जीवन में सफलता प्राप्त होती है। इसीलिए हम आपके लिए लेकर आए है इस व्रत की पूजा विधि, व्रत कथा और संपूर्ण जानकारी। विजया एकादशी पारणा मुहूर्त - 06:37:14 से 08:59:03 तक अवधि - 2 घंटे 21 मिनट विजया एकादशी व्रत एवं पूजा विधि ● एकादशी से एक दिन पूर्व एक वेदी बनाकर उस पर सप्त धान्य रखें। ● सोने, चांदी, तांबे अथवा मिट्टी का कलश उस पर स्थापित करें। ● एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें। ● पंचपल्लव कलश में रखकर भगवान विष्णु की मूर्ति की स्थापना करें। ● धूप, दीप, चंदन, फल, फूल व तुलसी आदि से श्री हरि की पूजा करें। ● उपवास के साथ-साथ भगवन कथा का पाठ व श्रवण करें। ● रात्रि में श्री हरि के नाम का ही भजन कीर्तन करते हुए जगराता करें। ● द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन आदि करवाएं व कलश को दान कर दें। ● तत्पश्चात व्रत का पारण करें। व्रत से पूर्व सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस प्रकार विधि पूर्वक उपवास रखने से उपासक को कठिन से कठिन हालातों पर भी विजय प्राप्त होती है। विजया एकादशी का महत्व सभी व्रतों में एकादशी का व्रत सबसे प्राचीन माना जाता है। पद्म पुराण के अनुसार स्वयं महादेव ने नारद जी को उपदेश देते हुए कहा था कि, ’एकादशी महान पुण्य देने वाली होती है’। कहा जाता है कि जो मनुष्य विजया एकादशी का व्रत रखता है उसके पितृ और पूर्वज कुयोनि को त्याग स्वर्ग लोक जाते हैं। साथ ही व्रती को हर कार्य में सफलता प्राप्त होती ही है और उसे पूर्व जन्म से लेकर इस जन्म के पापों से मुक्ति मिलती है। विजया एकादशी व्रत कथा बहुत समय पहले की बात है द्वापर युग में धर्मराज युद्धिष्ठिर को फाल्गुन एकादशी के महत्व के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। उन्होने अपनी शंका भगवान श्री कृष्ण के सामने प्रकट की। तब श्री कृष्ण ने युद्धिष्ठिर को यह कथा सुनाई। श्री भगवान बोले हे राजन् - फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम विजया एकादशी है। इसके व्रत के प्रभाव से मनुष्‍य को विजय प्राप्त‍ होती है। यह सब व्रतों से उत्तम व्रत है। इस विजया एकादशी के महात्म्य के श्रवण व पठन से समस्त पाप नाश को प्राप्त हो जाते हैं। एक समय देवर्षि नारदजी ने जगत् पिता ब्रह्माजी से कहा महाराज! आप मुझसे फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी विधान कहिए। ब्रह्माजी कहने लगे कि हे नारद! विजया एकादशी का व्रत पुराने तथा नए पापों को नाश करने वाला है। इस विजया एकादशी की विधि मैंने आज तक किसी से भी नहीं कही। यह समस्त मनुष्यों को विजय प्रदान करती है। त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्रजी को जब चौदह वर्ष का वनवास हो गया, तब वे श्री लक्ष्मण तथा सीताजी ‍सहित पंचवटी में निवास करने लगे। वहाँ पर दुष्ट रावण ने जब सीताजी का हरण ‍किया तब इस समाचार से श्री रामचंद्रजी तथा लक्ष्मण अत्यंत व्याकुल हुए और सीताजी की खोज में चल दिए। घूमते-घूमते जब वे मरणासन्न जटायु के पास पहुँचे तो जटायु उन्हें सीताजी का वृत्तांत सुनाकर स्वर्गलोक चला गया। कुछ आगे जाकर उनकी सुग्रीव से मित्रता हुई और बाली का वध किया। हनुमानजी ने लंका में जाकर सीताजी का पता लगाया और उनसे श्री रामचंद्रजी और सुग्रीव की‍ मित्रता का वर्णन किया। वहाँ से लौटकर हनुमानजी ने भगवान राम के पास आकर सब समाचार कहे। श्री रामचंद्रजी ने वानर सेना सहित सुग्रीव की सम्पत्ति से लंका को प्रस्थान किया। जब श्री रामचंद्रजी समुद्र से किनारे पहुँचे तब उन्होंने मगरमच्छ आदि से युक्त उस अगाध समुद्र को देखकर लक्ष्मणजी से कहा कि इस समुद्र को हम किस प्रकार से पार करेंगे। श्री लक्ष्मण ने कहा हे पुराण पुरुषोत्तम, आप आदिपुरुष हैं, सब कुछ जानते हैं। यहाँ से आधा योजन दूर पर कुमारी द्वीप में वकदालभ्य नाम के मुनि रहते हैं। उन्होंने अनेक ब्रह्मा देखे हैं, आप उनके पास जाकर इसका उपाय पूछिए। लक्ष्मणजी के इस प्रकार के वचन सुनकर श्री रामचंद्रजी वकदालभ्य ऋषि के पास गए और उनको प्रमाण करके बैठ गए। मुनि ने भी उनको मनुष्य रूप धारण किए हुए पुराण पुरुषोत्तम समझकर उनसे पूछा कि हे राम! आपका आना कैसे हुआ? रामचंद्रजी कहने लगे कि हे ऋषे! मैं अपनी सेना ‍सहित यहाँ आया हूँ और राक्षसों को जीतने के लिए लंका जा रहा हूँ। आप कृपा करके समुद्र पार करने का कोई उपाय बतलाइए। मैं इसी कारण आपके पास आया हूँ। वकदालभ्य ऋषि बोले कि हे राम! फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का उत्तम व्रत करने से निश्चय ही आपकी विजय होगी, साथ ही आप समुद्र भी अवश्य पार कर लेंगे। इस व्रत की विधि यह है कि दशमी के दिन स्वर्ण, चाँदी, ताँबा या मिट्‍टी का एक घड़ा बनाएँ। उस घड़े को जल से भरकर तथा पाँच पल्लव रख वेदिका पर स्थापित करें। उस घड़े के नीचे सतनजा और ऊपर जौ रखें। उस पर श्रीनारायण भगवान की स्वर्ण की मूर्ति स्थापित करें। एका‍दशी के दिन स्नानादि से निवृत्त होकर धूप, दीप, नैवेद्य, नारियल आदि से भगवान की पूजा करें। तत्पश्चात घड़े के सामने बैठकर दिन व्यतीत करें ‍और रात्रि को भी उसी प्रकार बैठे रहकर जागरण करें। द्वादशी के दिन नित्य नियम से निवृत्त होकर उस घड़े को ब्राह्मण को दे दें। हे राम! यदि तुम भी इस व्रत को सेनापतियों सहित करोगे तो तुम्हारी विजय अवश्य होगी। श्री रामचंद्रजी ने ऋषि के कथनानुसार इस व्रत को किया और इसके प्रभाव से दैत्यों पर विजय पाई। अत: हे राजन्! जो कोई मनुष्य विधिपूर्वक इस व्रत को करेगा, दोनों लोकों में उसकी अवश्य विजय होगी। श्री ब्रह्माजी ने नारदजी से कहा था कि हे पुत्र! जो कोई इस व्रत के महात्म्य को पढ़ता या सुनता है, उसको वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है।

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अगर आप #भगवान के प्रति थोड़ी- सी भी आस्था रखते हो तो इस पोस्ट को पूरा पढ़ें और विचार करें 👇👇 वेदों में लिखा हुआ है कि परमात्मा हमारी आयु भी बढ़ा सकता है, सभी रोगों से मुक्त कर सकता है तथा दुख कष्ट संकटो को काट सकता है... फिर हमारी अकाल मृत्यु क्यों होती है ?? वह पूर्ण परमात्मा कौन है? क्या नाम है? कहां रहता है? किसने देखा है? किस-किस को मिले हैं? अब वर्तमान में किस-किस ने सतलोक और पूर्ण परमात्मा को आंखों देखकर आए हैं? उसकी पूजा की विधि क्या है? सृष्टि की रचना कैसे हुई है? ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी काल जाल में जन्म मृत्यु में 84 लाख योनियों के चक्र में महा कष्ट झेलते हैं | ब्रह्मा, विष्णु, महेश, की स्थिति क्या है? तथा पूर्ण मोक्ष कैसे मिलेगा ? पूर्ण परमात्मा हमें इस काल के लोक से निकाल कर अपने लोक (सतलोक) में ले जाने के लिए चारों युगों में आते हैं और सद् भक्ति प्रदान करके सतलोक में ले जाते हैं, जहां पर जाने के बाद हमारी कभी मृत्यु नहीं होती, वृद्धावस्था (बुढ़ापा) नहीं आता, हमेशा युवा बने रहते हैं , वहां पर भी ऐसी ही सृष्टि है वहां हमारा आलीशान मकान परमात्मा द्वारा उपलब्ध है ऐसे ही परिवार बनेगा , वहां पर बाग-बगीचे, सेब-संतरे, काजू-किशमिश और दूधों की नदियां बहती है, स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ उपलब्ध है, वहां पर हमें परमात्मा की भक्ति व सुमिरन के अलावा कोई काम नहीं करना पड़ता, परमात्मा द्वारा सब निशुल्क उपलब्ध होता है। जानिए पूरी जानकारी आध्यात्मिक पुस्तक "ज्ञान गंगा".....बिल्कुल निशुल्क मंगाने के लिए अपना नाम :- ........ पूरा पता :- ........ फोन नम्बर :- …....... Comment box में दे! यह पुस्तक सभी धर्मों के #शास्त्रों 📚 पर आधारित है। पुस्तक #ज्ञान_गंगा 100% निशुल्क है, होम डिलीवरी भी निशुल्क है। 30 दिन के अंदर #पुस्तक आपके घर पहुंच जाएगी। #संत_रामपाल_जी_महाराज की इस पुस्तक को पढ़िए कोई चार्ज नहीं है, बिल्कुल फ्री पुस्तक प्राप्त करें फ्री फ्री फ्री फ्री फ्री फ्री फ्री फ्री

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