सूर्य को प्रभावी बनाकर पाएं सुख-समृद्धि

सूर्य को प्रभावी बनाकर पाएं सुख-समृद्धि

आदित्य, भास्कर या भगवान सूर्य की महिमा का बखान शब्दों में करना बहुत मुश्किल है। मनुष्य के संपूर्ण विकास में सूर्य की रोशनी का कितना महत्व है, इसे साइंस भी मानता है। सूर्य सौरमंडल का मुख्य प्रतिनिधि तारा है इसलिए एस्ट्रोलॉजी में इसका माहात्म्य भी सबसे अधिक है। मनुष्य सहित सभी जीवों पर सूर्य की रश्मियां अपना गहरा असर छोड़ती हैं। इन किरण रश्मियों से मनुष्य का भाग्य बहुत ज्यादा प्रभावित होता है।

यदि किसी इंसान के जन्म समय पर सूर्य की स्थिति कमजोर होती है तो जीवनभर उसका भाग्य डांवाडोल ही रहता है। सूर्य की अशुभ भावों में मौज़ूदगी जातक से  पद-प्रतिष्ठा, वैभव, संपत्ति आदि छीन लेती है। ऐसे में उचित ज्योतिषीय उपायों का प्रयोग करना चाहिए ताकि सूर्य के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाकर जिंदगी में सफलता पाई जा सके।

इसके लिए ये जानना आवश्यक है कि सूर्य किन बातों का प्रतिनिधित्व करता है, किन-किन वस्तुओं का कारक है। ये तो सभी जानते हैं कि सूर्य एक तारा है जिसका स्वयं का प्रकाश है। अत्याधिक तप्त होने के कारण सूर्य का प्रभाव पृथ्वी पर सर्वाधिक पड़ता है। इसलिए मनुष्य के लिए इसकी उपयोगिता भी सबसे अधिक होती है।

सूर्य का कारकत्व उन सभी बातों पर प्रभाव डालता है जिसका प्राण और सूक्ष्म तत्व से संबध होता है। सूर्य यश-प्रतिष्ठा-वैभव का सर्वोत्तम प्रतीक है। सूर्य पिता का भी कारक है। यानि ऐसी बातें जो पोषण के लिए जिम्मेदार हैं, उनका भी कारक सूर्य है।

सूर्य की नकारात्मक ऊर्जा मनुष्य को हर क्षेत्र में पीछे धकेल देती है। इसलिए सूर्य के प्रभाव को बढ़ाने के लिए अग्रलिखित उपाय आवश्यक हैं:

1.  गुरुजनों, बुजुर्ग एवं माता-पिता की जितनी ही सेवा की जाएगी सूर्य का बल भी उतना ही अधिक बढ़ेगा।

2.  किसी योग्य रत्नविद द्वारा सुझाए भार का माणिक्य सोने की अंगूठी में बनवाकर अनामिका अंगुली में रविवार को धारण करें। इसके विकल्प के रूप में गार्नेट उपरत्न भी धारण कर सकते हैं।

3.  सूर्य को जल देते हुए प्रतिदिन 108 बार निम्नलिखित मंत्र का जप करें:

ॐ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात (रविवार से  शुरू करें)।

4.  गाय को गेहूं और गुड़ मिलाकर खिलाएं या हर रविवार को किसी ब्राह्मण को गेहूं का दान करें।

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कामेंट्स

Sandeep Chatterjee Nov 12, 2017
जय सूर्यदेव। ॐ सवित्रे नमः। ॐ नमो श्री सवितृ सूर्यनारायणाय। 🙏🙏🙏

Sudhir kumar Nov 13, 2017
sudhir kr🌅 ऊँ आदित्याय नम:🌅🌄

Pandit Jagannath946372065 Nov 13, 2017
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Kanchan Bhagat Nov 13, 2017
ऊँ सुर्याय नमः , ऊँ आदित्याय नमः

m.p.singh Nov 13, 2017
sufya.naryanki.puja.sadayw.kare.puja.karnese.manki.santi.santi.miltihai.thanks.

Ravi Pandey Nov 13, 2017
Om surya decay namah jai shree Radhe Krishna radhe Radhe radhe Radhe

Neha Sharma,Haryana Dec 14, 2019

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Neha Sharma,Haryana Dec 14, 2019

*जय श्री शनिदेव की जय वीर बजरंग बली की* 🌹🙏🌹*शुभ प्रभात् वंदन*🌹🙏🌹 🌹🙏🌹*शुभ शनिवार*🌹🙏🌹 *शास्त्रों में वर्णन है कि एक बार हनुमान जी को भी शनि का प्रकोप सहना पड़ा था। जब किसी को शनि की साढ़ेसाती लगती है या जन्म कुंडली में शनि देव प्रताडि़त करते हैं तो अक्सर ज्योतिषाचार्य उस व्यक्ति को हनुमान जी की शरण में जाने को कहते हैं ताकि वह उपाय द्वारा शनि का प्रकोप शांत कर सके, परन्तु एक बार संयोग से हनुमान जी शनि के काबू आ गए।* *भ्रमण करते शनि की हनुमान जी से भेंट हो गई। दोनों के मध्य भागवत चर्चा होने लगी। उस समय बात पाप-पुण्य की होने लगी। तब शनि देव हनुमान जी से कहने लगे, ‘‘मैं सब प्राणियों को उनके द्वारा किए गए कर्मों का शुभ-अशुभ फल तोल कर बराबर कर देता हूं। जीवन में प्रत्येक प्राणी पर कभी न कभी अपना प्रभाव अवश्य डालता हूं क्योंकि सृष्टि में प्राणी से कई बार जाने-अनजाने ही कुछ पाप हो जाते हैं जिसका उसे फल भोगना पड़ता है।’’* *शनि देव की यह बात सुनकर हनुमान जी कहने लगे, ‘‘शनिदेव कहीं अनजाने में मेरे द्वारा कोई पाप तो नहीं हो गया जिसके लिए मुझे उसका प्रायश्चित करना पड़े।’’* *शनि देव तुरन्त बोले, ‘‘अवश्य मारुति नंदन पवन पुत्र। मैं आपके पास इसी प्रयोजन से आया हूं क्योंकि मैं आपकी राशि में प्रवेश करने जा रहा हूं। आप सावधान रहें, मैं आपको शीघ्र ही पीड़ित करूंगा।’’* *शनि के ये वाक्य सुनकर हनुमान जी आश्चर्य में पड़ गए तथा बोले, ‘‘मैंने तो अपना सारा जीवन ब्रह्मचारी रहते हुए भगवान श्रीराम की सेवा में अर्पित कर दिया है। उनके भजन के अलावा कोई काम ही नहीं किया तो आप मेरी राशि में क्यों प्रवेश करना चाहते हैं। कृपया मेरे द्वारा किए गए बुरे कर्म या अपराध के बारे में अवश्य बतलाएं।’’* *तब शनि देव कहने लगे, ‘‘हनुमान जी आपने राम-रावण युद्ध में मेघनाद द्वारा किए जा रहे यज्ञ को भंग किया था, आपने धर्म कार्य किए हैं इसीलिए मैं आपकी राशि पर अढ़ाई या 7 वर्ष के लिए नहीं मात्र एक दिन के लिए आऊंगा।’’* *इतना सुनकर हनुमान जी ने शनि को एक दिन आने के लिए अनुमति दे दी तथा शनि को सावधान किया कि आपने आना ही है तो अपनी पूर्ण तैयारी करके आना।* *अगले दिन हनुमान जी ने अपने ईष्ट प्रभु भगवान श्री राम का स्मरण किया तथा विशाल पहाड़ उठा कर शनि के आने की प्रतीक्षा करने लगे तथा मन ही मन विचार करने लगे कि जब शनि देव आएंगे तो विशाल पहाड़ ही उन पर दे मारूंगा। पूरा दिन विशाल पहाड़ उठाकर हनुमान जी शनि की प्रतीक्षा करने लगे पर शाम तक शनि नहीं आए। शाम होने पर हनुमान जी ने विशाल पहाड़ को रख दिया तभी अचानक शनि देव प्रकट हुए। उन्हें देखकर हनुमान जी ने शनि से कहा, ‘‘सुबह से ही मैं आपकी प्रतीक्षा कर रहा था परन्तु आप आए नहीं।’’* *तभी शनि देव बोले, ‘‘हे पवन पुत्र रुद्रावतार हनुमान जी मैं तो सुबह ही आ गया था अब तो मैं लौट रहा हूं। मेरा प्रयोजन सफल रहा।’’* *तब हनुमान जी बोले, ‘‘आपके दर्शन तो अब हो रहे हैं शनि देव। आपके प्रकोप का क्या हुआ। तभी शनि देव मुस्करा कर बोले-मेरे प्रभाव के कारण ही तो आप सुबह से विशाल पहाड़ उठा कर खड़े रहे। मेरी वक्र दृष्टि के कारण ही आप आज सारा दिन पीड़ित रहे हैं। मैंने सुबह ही आपको विशाल पहाड़ उठवा दिया तथा शाम तक आपको दंडित किया इसलिए मेरा प्रयोजन सफल रहा। आप राम भक्त हैं, सदैव राम नाम का जाप करते हैं इसीलिए आपको दंड का कष्ट कम महसूस हुआ। आपको सुबह से शाम तक पहाड़ तो मेरे प्रकोप के कारण ही उठाना पड़ा है।’’* *शनि देव की ये बातें सुन कर हनुमान जी मुस्करा उठे। शनिदेव अपना कार्य समाप्त करके हनुमान जी से विदा लेकर शनि लोक रवाना हो गए। शनि के जन्म के समय पिता सूर्य को ग्रहण लगा था तभी उसकी शक्ति का सूर्य देव को ज्ञान हो गया था।*

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kamlesh sharma Dec 14, 2019

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Neha Sharma,Haryana Dec 14, 2019

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