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जय भोलेनाथ की

जय भोलेनाथ की

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कामेंट्स

🌲राजकुमार राठोड🌲 Jun 11, 2019
🌷जय श्री राम 🌷 🙏जय अंजनेय 🙏 मारुत नंदन जी की कृपा से आपका हर पल शुभ एवं मंगलमय रहे

शामराव ठोंबरे पाटील Jul 3, 2019
जय श्री भोलेनाथ ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव नमस्कार शुभ प्रभात 🌅 👣 वंदन 🚩 नमस्कार 🙏 भाई साहब जय श्री राम 👏 🚩 🙏

शामराव ठोंबरे पाटील Jul 4, 2019
हर हर महादेव ॐ नमः शिवाय जय श्री भोलेनाथ नमस्कार 🙏 🌅 शुभ प्रभात 🙏 शुभ गुरुवार जय श्री गुरुदेव नमस्कार 🙏

Babita Sharma Jul 15, 2019
भगवान भोलेनाथ ,माँ पार्वती सहित समस्त देवी देवताओं की कृपा आप पर बरसे भाई गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाये ! राधे राधे 🙏

मंगल ji Jul 15, 2019
🙏🌺 जय श्री कृष्ण भैया जी शुभ रात्रि 🚩🦚

मंगल ji Jul 15, 2019
RADHE GOVIND "गुरु पर आस्था" "गुरु गूंगे, गुरू बावरे, गुरू के रहिये दास" एक बार की बात है नारद जी विष्णु भगवानजी से मिलने गए। भगवान ने उनका बहुत सम्मान किया। जब नारद जी वापिस गए तो विष्णुजी ने कहा- "हे लक्ष्मी ! जिस स्थान पर नारद जी बैठे थे उस स्थान को गाय के गोबर से लीप दो।" जब विष्णुजी यह बात कह रहे थे तब नारदजी बाहर ही खड़े थे उन्होंने सब सुन लिया और वापिस आ गए और विष्णु भगवान जी से पुछा- 'हे भगवन् ! जब मै आया तो आपने मेरा खूब सम्मान किया पर जब मैं जा रहा था तो आपने लक्ष्मी जी से यह क्यों कहा कि जिस स्थान पर नारद बैठा था उस स्थान को गोबर से लीप दो"? भगवान ने कहा- "हे नारद ! मैंने आपका सम्मान इसलिए किया क्योंकि आप देव ऋषि हैं और मैंने देवी लक्ष्मी से ऐसा इसलिए कहा क्योंकि आपका कोई गुरु नहीं है। आप निगुरे हैं, जिस स्थान पर कोई निगुरा बैठ जाता है वो स्थान गन्दा हो जाता है।" यह सुनकर नारद जी ने कहा- "हे भगवन् ! आपकी बात सत्य है पर मैं गुरु किसे बनाऊँ"? नारायण! बोले- "हे नारद ! धरती पर चले जाओ जो व्यक्ति सबसे पहले मिले उसे अपना गुरु मानलो। नारद जी ने प्रणाम किया और चले गए। जब नारद जी धरती पर आये तो उन्हें सबसे पहले एक मछली पकड़ने वाला एक मछुवारा मिला। नारद जी वापिस नारायण के पास चले गए और कहा महाराज वो मछुवारा तो कुछ भी नहीं जानता मै उसे गुरु कैसे मान सकता हूँ ? यह सुनकर भगवान ने कहा नारद जी अपना प्रण पूरा करो। नारद जी वापिस आये और उस मछुवारे से कहा मेरे गुरु बन जाओ। पहले तो मछुवारा नहीं माना बाद में बहुत मनाने से मान गया। मछुवारे को राजी करने के बाद नारद जी वापस भगवान के पास गए और कहा- "हे भगवान ! मेरे गुरूजी को तो कुछ भी नहीं आता वे मुझे क्या सिखायेगे"? यह सुनकर विष्णु जी को क्रोध आ गया और उन्होंने कहा- "हे नारद ! गुरु निंदा करते हो जाओ मैं आपको श्राप देता हूँ कि आपको ८४ लाख योनियों में घूमना पड़ेगा।" यह सुनकर नारद जी ने दोनों हाथ जोड़कर कहा- "हे भगवन् ! इस श्राप से बचने का उपाय भी बता दीजिये"? भगवान नारायण ने कहा इसका उपाय जाकर अपने गुरुदेव से पूछो। नारद जी ने सारी बात जाकर गुरुदेव को बताईं गुरूजी ने कहा ऐसा करना भगवान से कहना ८४ लाख योनियों की तस्वीरे धरती पर बना दें फिर उस पर लेट कर गोल घूम लेना और विष्णु जी से कहना ८४ लाख योनियों में घूम आया मुझे क्षमा कर दो आगे से गुरु निंदा नहीं करूँगा। नारद जी ने विष्णु जी के पास जाकर ऐसा ही किया उनसे कहा ८४ लाख योनिया धरती पर बना दो और फिर उन पर लेट कर घूम लिये, और कहा नारायण मुझे माफ़ कर दीजिये आगे से कभी गुरु निंदा नहीं करूँगा। यह सुनकर विष्णु जी ने कहा देखा जिस गुरु की निंदा कर रहे थे उसी ने मेरे श्राप से बचा लिया। नारदजी गुरु की महिमा अपरम्पार है। गुरु गूंगे, गुरु बाबरे, गुरु के रहिये दास, गुरु जो भेजे नरक को, स्वर्ग कि रखिये आस। गुरु चाहे गूंगा हो चाहे गुरु बाबरा हो (पागल हो) गुरु के हमेशा दास रहना चाहिए। गुरु यदि नरक को भेजे तब भी शिष्य को यह इच्छा रखनी चाहिए कि मुझे स्वर्ग प्राप्त होगा, अर्थात इसमें मेरा कल्याण ही होगा। यदि शिष्य को गुरु पर पूर्ण विश्वास हो तो उसका बुरा "स्वयं गुरु" भी नहीं कर सकते। एक प्रसंग है कि एक पण्डित ने धन्ना भगत को एक साधारण पत्थर देकर कहा इसे भोग लगाया करो एक दिन भगवान कृष्ण दर्शन देंगे। उस धन्ना भक्त के विश्वास से एक दिन उस पत्थर से भगवान प्रकट हो गए। गुरु पर तो वचन विश्वास रखने वाले का उद्धार निश्चित है। "जय जय श्री राधे" ***************************************

DR..SEEMA SONI Jul 15, 2019
ओम नमः शिवाय शुभ रात्रि मेरे भैया जी।

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sumitra Jul 15, 2019

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