Archana Singh
Archana Singh Feb 22, 2021

Jai Shree radhe Krishna ji subh ratri vandan ji 🙏🌷🌷🌷🌷🏵️🌷🌷🌷🌷🏵️🌷🌷🌷🏵️🙏

Jai Shree radhe Krishna ji subh ratri vandan ji 🙏🌷🌷🌷🌷🏵️🌷🌷🌷🌷🏵️🌷🌷🌷🏵️🙏

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कामेंट्स

Arvind Sharma Feb 22, 2021
जय श्री राम 🐕‍🦺🌊🌊🌊🌊🌊 🕉 ॐ नमो भगवते वासुदेवा नमः🕉 🎶 🎻फल कि इच्छा तो कमजोर व्यक्ति करता है साहसी तो केवल कर्म करता है🎻🎶 🔥जय मंगल नाथ 🔥 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

laltesh kumar sharma Feb 22, 2021
🍒🌟⭐🍒 Subh ratri vandan ji 🍒⭐🌟🍒 Om namah Shivay ji 🍒⭐🌟🍒🙏🙏

Rajesh Gupta Feb 22, 2021
@archanasingh14 🙏Om Namah Shivay🙏 🙏Har Har Mahadev🙏 Mata Bhawani aur Bhole bhandari apki jhholi khusiyo se bhari rakhe apki sari manokamna puri kare ap sadaiv khus and Muskurati rahe

Rajesh Gupta Feb 22, 2021
@archanasingh14 🙏🌹Shri Radhe Radhe Ji🌹🙏 Thanks you too for your best wishes and wish you the same always be happy and keep smiling as rose 🌹

Ranveer Soni Feb 22, 2021
🌹🌹जय श्री राधेकृष्णा🌹🌹

Archana Singh Mar 4, 2021

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वात रोग का उपचार 〰️〰️🔸🔸〰️〰️ वात, पित्त और कफ तीनों में से वात सबसे प्रमुख होता है क्योंकि पित्त और कफ भी वात के साथ सक्रिय होते हैं। शरीर में वायु का प्रमुख स्थान पक्वाशय में होता है और वायु का शरीर में फैल जाना ही वात रोग कहलाता है। हमारे शरीर में वात रोग 5 भागों में हो सकता है जो 5 नामों से जाना जाता है। वात के पांच भाग निम्नलिखित हैं- 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ • उदान वायु - यह कण्ठ में होती है। • अपान वायु - यह बड़ी आंत से मलाशय तक होती है। • प्राण वायु - यह हृदय या इससे ऊपरी भाग में होती है। • व्यान वायु - यह पूरे शरीर में होती है। • समान वायु - यह आमाशय और बड़ी आंत में होती है। वात रोग के प्रकार :- 〰️〰️〰️〰️〰️ आमवात के रोग में रोगी को बुखार होना शुरू हो जाता है तथा इसके साथ-साथ उसके जोड़ों में दर्द तथा सूजन भी हो जाती है। इस रोग से पीड़ित रोगियों की हडि्डयों के जोड़ों में पानी भर जाता है। जब रोगी व्यक्ति सुबह के समय में उठता है तो उसके हाथ-पैरों में अकड़न महसूस होती है और जोड़ों में तेज दर्द होने लगता है। जोड़ों के टेढ़े-मेढ़े होने से रोगी के शरीर के अंगों की आकृति बिगड़ जाती है। सन्धिवात :- 👉 जब आंतों में दूषित द्रव्य जमा हो जाता है तो शरीर की हडि्डयों के जोड़ों में दर्द तथा अकड़न होने लगती है। गाउट :-👉 गाउट रोग बहुत अधिक कष्टदायक होता है। यह रोग रक्त के यूरिक एसिड में वृद्धि होकर जोड़ों में जमा होने के कारण होता है। शरीर में यूरिया प्रोटीन से उत्पन्न होता है, लेकिन किसी कारण से जब यूरिया शरीर के अंदर जल नहीं पाता है तो वह जोड़ों में जमा होने लगता है और बाद में यह पथरी रोग का कारण बन जाता है। मांसपेशियों में दर्द:-👉 मांस रोग के कारण रोगी की गर्दन, कमर, आंख के पास की मांस-पेशियां, हृदय, बगल तथा शरीर के अन्य भागों की मांसपेशियां प्रभावित होती हैं जिसके कारण रोगी के शरीर के इन भागों में दर्द होने लगता है। जब इन भागों को दबाया जाता है तो इन भागों में तेज दर्द होने लगता है। गठिया :-👉 इस रोग के कारण हडि्डयों को जोड़ने वाली तथा जोड़ों को ढकने वाली लचीली हडि्डयां घिस जाती हैं तथा हडि्डयों के पास से ही एक नई हड्डी निकलनी शुरू हो जाती है। जांघों और घुटनों के जोड़ों पर इस रोग का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है और जिसके कारण इन भागों में बहुत तेज दर्द होता है। वात रोग के लक्षण :- 〰️〰️〰️〰️〰️ • वात रोग से पीड़ित रोगी के शरीर में खुश्की तथा रूखापन होने लगता है। • वात रोग से पीड़ित रोगी के शरीर की त्वचा का रंग मैला सा होने लगता है। • रोगी व्यक्ति को अपने शरीर में जकड़न तथा दर्द महसूस होता है। • वात रोग से पीड़ित रोगी के सिर में भारीपन होने लगता है तथा उसके सिर में दर्द होने लगता है। • रोगी व्यक्ति का पेट फूलने लगता है तथा उसका पेट भारी-भारी सा लगने लगता है। • रोगी व्यक्ति के शरीर में दर्द रहता है। • वात रोग से पीड़ित रोगी के जोड़ों में दर्द होने लगता है। • रोगी व्यक्ति का मुंह सूखने लगता है। • वात रोग से पीड़ित रोगी को डकारें या हिचकी आने लगती है। वात रोग होने का कारण :- 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ • वात रोग होने का सबसे प्रमुख कारण पक्वाशय, आमाशय तथा मलाशय में वायु का भर जाना है। • भोजन करने के बाद भोजन के ठीक तरह से न पचने के कारण भी वात रोग हो सकता है। • जब अपच के कारण अजीर्ण रोग हो जाता है और अजीर्ण के कारण कब्ज होता है तथा इन सबके कारण गैस बनती है तो वात रोग पैदा हो जाता है। • पेट में गैस बनना वात रोग होने का कारण होता है। • जिन व्यक्तियों को अधिक कब्ज की शिकायत होती है उन व्यक्तियों को वात रोग अधिक होता है। • जिन व्यक्तियों के खान-पान का तरीका गलत तथा सही समय पर नहीं होता है उन व्यक्तियों को वात रोग हो जाता है। • ठीक समय पर शौच तथा मूत्र त्याग न करने के कारण भी वात रोग हो सकता है। वात रोग होने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :- 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ • वात रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को अपने हडि्डयों के जोड़ में रक्त के संचालन को बढ़ाना चाहिए। इसके लिए रोगी व्यक्ति को एक टब में गरम पानी लेकर उसमें आधा चम्मच नमक डाल लेना चाहिए। इसके बाद जब टब का पानी गुनगुना हो जाए तब रोगी को टब के पास एक कुर्सी लगाकर बैठ जाना चाहिए। इसके बाद रोगी व्यक्ति को अपने पैरों को गरम पानी के टब में डालना चाहिए और सिर पर एक तौलिये को पानी में गीला करके रखना चाहिए। रोगी व्यक्ति को अपनी गर्दन के चारों ओर कंबल लपेटना चाहिए। इस प्रकार से इलाज करते समय रोगी व्यक्ति को बीच-बीच में पानी पीना चाहिए तथा सिर पर ठंडा पानी डालना चाहिए। इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने से रोगी को कम से कम 20 मिनट में ही शरीर से पसीना निकलने लगता है जिसके फलस्वरूप दूषित द्रव्य शरीर से बाहर निकल जाते हैं और वात रोग ठीक होने लगता है। • वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए 2 बर्तन लें। एक बर्तन में ठंडा पानी लें तथा दूसरे में गरम पानी लें और दोनों में 1-1 तौलिया डाल दें। 5 मिनट बाद तौलिये को निचोड़कर गर्म सिंकाई करें। इसके बाद ठंडे तौलिये से सिंकाई करें। इस उपचार क्रिया को कम से कम रोजाना 3 बार दोहराने से यह रोग ठीक होने लगता है। • वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को लगभग 4 दिनों तक फलों का रस (मौसमी, अंगूर, संतरा, नीबू) पीना चाहिए। इसके साथ-साथ रोगी को दिन में कम से कम 4 बार 1 चम्मच शहद चाटना चाहिए। इसके बाद रोगी को कुछ दिनों तक फलों को खाना चाहिए। • कैल्शियम तथा फास्फोरस की कमी के कारण रोगी की हडि्डयां कमजोर हो जाती हैं इसलिए रोगी को भोजन में पालक, दूध, टमाटर तथा गाजर का अधिक उपयोग करना चाहिए। • कच्चा लहसुन वात रोग को ठीक करने में रामबाण औषधि का काम करती है इसलिए वात रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन कच्चे लहसुन की 4-5 कलियां खानी चाहिए। • वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को भोजन में प्रतिदिन चोकर युक्त रोटी, अंकुरित हरे मूंग तथा सलाद का अधिक उपयोग करना चाहिए। • रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम आधा चम्मच मेथीदाना तथा थोड़ी सी अजवायन का सेवन करना चाहिए। इनका सेवन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है। • वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी को प्रतिदिन सुबह तथा शाम के समय में खुली हवा में गहरी सांस लेनी चाहिए। इससे रोगी को अधिक आक्सीजन मिलती है और उसका रोग ठीक होने लगता है। • शरीर पर प्रतिदिन तिल के तेलों से मालिश करने से वात रोग ठीक होने लगता है। • रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह के समय में धूप में बैठकर शरीर की मालिश करनी चाहिए। धूप वात रोग से पीड़ित रोगियों के लिए बहुत ही लाभदायक होती है। • वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए तिल के तेल में कम से कम 4-5 लहसुन तथा थोड़ी सी अजवाइन डालकर गर्म करना चाहिए तथा इसके बाद इसे ठंडा करके छान लेना चाहिए। फिर इसके बाद इस तेल से प्रतिदिन हडि्डयों के जोड़ पर मालिश करें। इससे वात रोग जल्दी ही ठीक हो जायेगा। *जय-जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️

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"दिखावटी से हकीकत की जमीन... आज फिर सुधा की दीदी मीना चमचमाती गाड़ी से आई थी.... जिसे देखकर सुधा की आँखे एकबारगी फिर से चुधिंया गई... अनेको गहनों से लदी दीदी उसे दुनिया की सबसे सौभाग्यशाली दुल्हन लग रही थी... मीना दीदी की शादी को दो साल हो चुके थे मगर जीजाजी अपनी आँखों से उन्हे एक पल के लिए भी दूर नहीं करते थे सबसे मिलवाकर साथ ही वापिस ले जाते थे.... सुधा की पढ़ाई अब खत्म हो चुकी थी उसने मां से कह दिया था कि उसे भी जीजाजी जैसा ही दूल्हा चाहिए.....अब यह कोई वस्तु तो थी नही जो मां बाजार से खरीदकर ला देती... ऐसे में जो भी रिश्ता आता सुधा को उनके सामने तुच्छ लगता.... मोहन कालेज से ही उसे पसंद करता था और उससे शादी करना चाहता था ....ये बात सुधा बखूबी जानती भी थी मगर वह उसे टरकाती जा रही थी... कयोंकि वह उनके जीजाजी जितना अमीर जो नही था... आज जब मोहन सुधा से मिलने घर आया तो मीनाक्षी दीदी की अनुभवी आंँखो से सुधा के प्रति उसका प्रेम छिप ना सका और ना ही सुधा का रूखापन.... वह तो अभी भी किसी अमीर शहजादे की इंतजार मे थी जो बड़ी सी गाड़ी में उसे ब्याहने आएगा... वह अब छब्बीसवे वर्ष की दहलीज पर थी... मां बाप की चिंता भी उसकी उम्र की तरह बढ़ने लगी थी... मोहन घर में सबको पसंद था...मां ने सुधा को मनाने की जिम्मेदारी मीना को सौंप दी... मोहन के जाते ही मीना दीदी सुधा को अकेले कमरे मे ले आई और समझाते हुए बोली... "सुधा ....जब मोहन इतना प्यार करता है, तो हां क्यो नही कर देती.... मीना दीदी .....सिर्फ़ प्यार के सहारे जिंदगी नही कटती... कहते हुए वह दीदी की सोने की चूड़ियो और कंगनों की चमक में खो सी गई फिर उनकी तरफ़ इशारा करते हुए अचानक वह पूछ बैठी... क्या मोहन मुझे यह सब दे पाएगा .... दीदी कांपती आवाज़ में बोली.... सुधा....जो ऊपर से दिखता है वह होता नही है... कहते-कहते अचानक दीदी ने चूड़ियां और कंगन ऊपर कर दिए.... कलाई पर सिगरेट से जले निशान उनकी साफ चुगली कर रहे थे.... उफ्फ...... ये कया है दीदी......उसकी फटी फटी आंँखो से अविश्वास के अश्रु भरभराकर बह चले..... तुम ....कभी कुछ बताती कयो नही दीदी.... पगली ....मे भी इस दौलत की चंकाचौध मे पागल थी ...मगर भूल गई थी सबसे बडी दौलत प्यार की होती है जो नसीबवालो को मिलता है.... तुझे मिल रहा है इसे मत खोना मेरी लाडो ...कहकर सुधा से लिपट गई .... तभी मीना के पति यानी सुधा के जीजाजी ने वापसी चलने के लिए आवाज लगाई ..... दीदी तो वापस जा रही थी मगर सुधा दिखावटी दुनिया से सच्चाई की जमीन पर वापस लौट चुकी थी उसने फैसला कर लिया था वो अब जीवन की सबसे अनमोल दौलत मोहन के प्यार को नही खोएगी .... अब वो मोहन से शादी को तैयार थी... *एक बहुत ही सुंदर रचना.....👍🌸 *जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸

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*जय श्री राधे कृष्णा* *शुभरात्रि वंदन* जय श्री कृष्णा " " "🌹बहूत सुंदर कथा🌹" " " एक राजा ने भगवान कृष्ण का एक मंदिर बनवाया और पूजा के लिए एक पुजारी को लगा दिया. पुजारी बड़े भाव से बिहारीजी की सेवा करने लगे. भगवान की पूजा-अर्चना और सेवा-टहल करते पुजारी की उम्र बीत गई. राजा रोज एक फूलों की माला सेवक के हाथ से भेजा करता था.पुजारी वह माला बिहारीजी को पहना देते थे. जब राजा दर्शन करने आता तो पुजारी वह माला बिहारीजी के गले से उतारकर राजा को पहना देते थे. यह रोज का नियम था. एक दिन राजा किसी वजह से मंदिर नहीं जा सका. उसने एक सेवक से कहा- माला लेकर मंदिर जाओ. पुजारी से कहना आज मैं नहीं आ पाउंगा. सेवक ने जाकर माला पुजारी को दे दी और बता दिया कि आज महाराज का इंतजार न करें. सेवक वापस आ गया. पुजारी ने माला बिहारीजी को पहना दी. फिर उन्हें विचार आया कि आज तक मैं अपने बिहारीजी की चढ़ी माला राजा को ही पहनाता रहा. कभी ये सौभाग्य मुझे नहीं मिला.जीवन का कोई भरोसा नहीं कब रूठ जाए. आज मेरे प्रभु ने मुझ पर बड़ी कृपा की है. राजा आज आएंगे नहीं, तो क्यों न माला मैं पहन लूं. यह सोचकर पुजारी ने बिहारीजी के गले से माला उतारकर स्वयं पहन ली. इतने में सेवक आया और उसने बताया कि राजा की सवारी बस मंदिर में पहुंचने ही वाली है.यह सुनकर पुजारी कांप गए. उन्होंने सोचा अगर राजा ने माला मेरे गले में देख ली तो मुझ पर क्रोधित होंगे. इस भय से उन्होंने अपने गले से माला उतारकर बिहारीजी को फिर से पहना दी. जैसे ही राजा दर्शन को आया तो पुजारी ने नियमनुसार फिर से वह माला उतार कर राजा के गले में पहना दी. माला पहना रहे थे तभी राजा को माला में एक सफ़ेद बाल दिखा.राजा को सारा माजरा समझ गया कि पुजारी ने माला स्वयं पहन ली थी और फिर निकालकर वापस डाल दी होगी. पुजारी ऐसाछल करता है, यह सोचकर राजा को बहुत गुस्सा आया. उसने पुजारी जी से पूछा- पुजारीजी यह सफ़ेद बाल किसका है.? पुजारी को लगा कि अगर सच बोलता हूं तो राजा दंड दे देंगे इसलिए जान छुड़ाने के लिए पुजारी ने कहा-महाराज यहसफ़ेद बाल तो बिहारीजी का है. अब तो राजा गुस्से से आग- बबूला हो गया कि ये पुजारी झूठ पर झूठ बोले जा रहा है.भला बिहारीजी के बाल भी कहीं सफ़ेद होते हैं. राजा ने कहा- पुजारी अगर यह सफेद बाल बिहारीजी का है तो सुबह शृंगार के समय मैं आउंगा और देखूंगा कि बिहारीजी के बाल सफ़ेद है या काले. अगर बिहारीजी के बाल काले निकले तो आपको फांसी हो जाएगी. राजा हुक्म सुनाकर चला गया. अब पुजारी रोकर बिहारीजी से विनती करने लगे- प्रभु मैं जानता हूं आपके सम्मुख मैंने झूठ बोलने का अपराध किया. अपने गले में डाली माला पुनः आपको पहना दी. आपकी सेवा करते-करते वृद्ध हो गया. यह लालसा ही रही कि कभी आपको चढ़ी माला पहनने का सौभाग्य मिले. इसी लोभ में यह सब अपराध हुआ. मेरे ठाकुरजी पहली बार यह लोभ हुआ और ऐसी विपत्ति आ पड़ी है. मेरे नाथ अब नहींहोगा ऐसा अपराध. अब आप ही बचाइए नहीं तो कल सुबह मुझे फाँसी पर चढा दिया जाएगा. पुजारी सारी रात रोते रहे. सुबह होते ही राजा मंदिर में आ गया. उसने कहा कि आज प्रभु का शृंगार वह स्वयं करेगा. इतना कहकर राजा ने जैसे ही मुकुट हटाया तो हैरान रह गया. बिहारीजी के सारे बाल सफ़ेद थे. राजा को लगा, पुजारी ने जान बचाने के लिए बिहारीजी के बाल रंग दिए होंगे. गुस्से से तमतमाते हुए उसने बाल की जांच करनी चाही. बाल असली हैं या नकली यब समझने के लिए उसने जैसे ही बिहारी जी के बाल तोडे, बिहारीजी के सिर से खून कीधार बहने लगी. राजा ने प्रभु के चरण पकड़ लिए और क्षमा मांगने लगा. बिहारीजी की मूर्ति से आवाज आई- राजा तुमने आज तक मुझे केवल मूर्ति ही समझा इसलिए आज से मैं तुम्हारे लिए मूर्ति ही हूँ. पुजारीजी मुझे साक्षात भगवान् समझते हैं. उनकी श्रद्धा की लाज रखने के लिए आज मुझे अपने बाल सफेद करने पड़े व रक्त की धार भी बहानी पड़ी तुझे समझाने के लिए. यह कहानी किसी पुराण से तो नहीं है लेकिन इसका मर्म किसी पुराण की कथा से कम भी नहीं है. कहते हैं- समझो तो देव नहीं तो पत्थर.श्रद्धा हो तो उन्हीं पत्थरों में भगवान सप्राण होकर भक्त से मिलने आ जाएंगे...... JAI Shri Krishna.......

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Archana Singh Mar 3, 2021

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