Munnalal Sharma
Munnalal Sharma May 18, 2017

Munnalal sherma ने यह पोस्ट की।

#साईंबाबा

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saidas May 26, 2019

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Ramesh Pal May 25, 2019

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Narender Jain May 25, 2019

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paramjit May 27, 2019

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Manjeet Sobti May 25, 2019

०००००००००००००००००००००००००००००००० ॐ साईं राम जी 🙏🌹🌹🙏 श्री साई दूसरों को अपना बनाने और दूसरों का बनकर रहने की शिक्षा संसारियों को देते हैं । ---------------------------------- एक दिवाली ऐसी आई, प्रकाश का त्यौहार । तेल न कोई भीख दे, सभी करें इनकार ।। साई को अचरज हुआ,लौट आय चुपचाप । तेल बिना सूखी बाती, मन में था संताप ।। बाबा के टमरेल में,था जो थोड़ा तेल । साई पी जाते उसे, पानी माय उंडेल ।। तेल डालकर पेट में, ब्रम्हार्पण कर जायं । दिवलों में जल डालकर,उसमें बात भिगाय ।। फिर लीला ऐसी करें,दिये जलाते जायं । साई हाथों जल भरे,दीपक जलते जायं ।। दीपक जलते रात भर,बनिये देखें खेल । मन में पश्चाताप करें,मना किया क्यों तेल ।। मैल नहीं मन में रखें,साई कर दें माफ । पाठ पढ़ाते भक्तों को,सदा रहे दिल साफ ।। साई लीला का मतलब,चमत्कार ना होय । श्रद्धा ईश्वर में बढ़े , यही भावना होय ।। जो देवे उसका भला,साई करते होयं । ना देवे उसका बुरा,नहीं मानते होयं ।। साई मोहिद्दीन से, हारे होगा याद । अब हेमाड बतात हैं,क्या होता फिर बाद ।। पाँच बरस के बाद में,निकट राहता गाँव । चेलों संग पड़े वहाँ,जौहर अलि के पाँव ।। वीरभद्र मंदिर निकट,देख खुला मैदान । डाल दिया डेरा वहाँ,किस्मत का बलवान ।। गाँव राहता में रहे,भगू मराठा एक । जौहर का चेला बना,मित्रों संग अनेक ।। कुरान का विद्वान था, चेले बहु बन जाय । वीरभद्र मंदिर निकट,ईदगाह बनवाय ।। ईदगाह बनवाय वह, जनता होय मलाल । रहतावासी उग्र हुए, बाहर करें निकाल ।। गांव छोड साई संगे,मस्जिद करे निवास । मीठी बातों का रसिया,लुभाय सबको खास ।। साई से कहने लगा, चेला तुझे बनाय । साई संमति जताय दें,कृष्णनीति अपनाय ।। जौहर का चेला बने, साई लीला होय । मुदित गुरू साई को ले,रहता जाता होय ।। साई जैसा शिष्य मिले, जौहर ख़ुश हो जाय । दोनों मिलकर तय करें,राहता रहा जाय ।। जौहर गुरु जाने नहीं,चेला शक्तीमान । गुरु की सारी ख़ामियाँ, साई तो सब जान ।। गुरु की आज्ञा मानते, कितना ही दुख होय । जान बूझ कर चुप रहें, सच्चे चेला होयं ।। शिरडी छोड़े साइयाँ, समय बीतता जाय । साईभक्तों की बेचैनी, निश-दिन बढ़ती जाय ।। शिरडी वाले सोचते,जौहर योगी होय । योग शक्ति के ज़ोर पर,साई पर वश होय ।। साई को वापस लायें,सोच ' राहता' जायं । पर साई विपरीत ही, उनको यह समझाय ।। यह फ़क़ीर क्रोधी बहुत,इससे ना लो पंगा । ग़ुस्से में आ जाय तो, यहाँ करेगा दंगा ।। जौहर अलि आया वहाँ,गुस्सा बहुत दिखाय । आख़िर में माने कहे, हम सब शिरडी जायं ।। सच्चे साई के बंदे, बँधे प्रीत की डोर । साई जहाँ कहीं रहें, खिंचे आयं उस ओर ।। साई ईशस्वरूप तो,जौहर था जंजाल । देविदास विद्वान ने,तोड़ दिया भ्रमजाल ।। साई शिरडी आगमन, के पहले की बात । आगम देवीदास का,हेमड यूँ बतलात ।। लँगोटी बाँधे हुए,आयु महज दस साल । शिरडी हनुमत मंदिर में,उतरा था एक बाल ।। मंदिर आते-जाते लोग,बैठें उसके पास । काशीराम अप्पा भील,म्हालसपति थे ख़ास ।। अप्पा को विद्वान वह, बारहखडी सिखाय । देवीदास महाज्ञानी, सबको स्तोत्र पढ़ाय ।। कोतेजी पाटील उन्हें, अपना गुरू बनाय । शिरडी के नामी सुजन,सब चेले बन जायं ।। देवीदास के सामने,जौहरअली बुलाय । होवे वाद-विवाद तो, अली पराजय पाय ।। भरम अली का टूटता,पछताने लग जाय । उदार मन साई उसे,अपने गले लगाय ।। जौहर जैसे बड़बोले को, गुरू बनाते साई । बड़ा वही है जो रखे,विचार की गहराई ।। हेमाड पंत नाम दिया, जो साई ने होय । घटना एक विवाद की ,उसका कारण होय ।। शिरडी में पहले दिवस, झड़प हो गई एक । भाटे जी से बहस में, बात बढ़ी अतिरेक ।। गुरु काहे को चाहिये,अण्णा रखते बात । काम करो तो लगन से ,श्रम करियो दो हाथ ।। विपक्ष में भाटे कहें,कैसा भी विद्वान । गुरु की किरपा के बिना,रहे किताबी ज्ञान ।। कर्म बड़ा या भाग बड़ा ,आगे बढ़ती बात । अण्णा कहें बिना करम,क्या भाग की बिसात।। प्रतिपक्षी भाटे कहते,भाग न दे गर साथ । पुरुषारथ भी थक जाये,बने न कोई बात ।। विवाद तो चलता रहा,निकला नहीं निदान । हेमाडपंत नाम दिया, साई का यह दान ।। गुरु -प्रकाश माने नहीं ,अंधकार में होय । अहंकार अज्ञान का,गुरु बिन दूर न होय ।। भक्तों पर करुणा करें, दूर करें अज्ञान । साईबाबा सदगुरु, सहज दिलाते ज्ञान ।। भाव अनन्या भजे मुझे, सेवा करता होय । उसका योगक्षेम वहन,वचन हमारा होय ।। तम -गुन से पैदा करे,जड़ पदार्थ माया । रज -गुन ईश्वर गुन मिले,चेतन वह पाया ।। माया के गुन सत्व से,मन बुद्धी बन जाय । उसमें परमानन्द मिले,खेल ख़त्म हो जाय ।। भक्तों से साई कहें,फ़िक्र न करियो कोय । किसी बात की मैं कमी,ना होने दूँ तोय ।। भक्ती ना हो दिखावटी,अहंकार ना होय । सच्चे मन पूजा करो, तो फल मिलता होय ।। साई भजन बिना जिसे, आवत नाहीं चैन । इत-उत-जित देखे उसे, साई बसते नैन ।। साई साई ही रटन, नाम न दूजा भाय । दीवाना ऐसा भगत, साई के मन भाय ।। साई के दोहे पढ़े,दूजे को पढवाय । साई को प्यारा लगे, भक्ति शिखर चढ़ जाय ।। समाज के हर वर्ग में, साई भक्त दिखाय । जल में जस चंदा दिखे,साई की छवि पाय ।। द्वारिका माई मस्जिद का, सुधार तो हो जाय । अब आगे हेमाडजी,साई कथा बढ़ाय ।। साई के इक भक्त थे, नाम गुंड गोपाल । नाम सदा जपते रहत,साई कृपा दयाल ।। साई की किरपा हुई, पूत रतन पा जायं । पाय संतति गुंडजी, उलसित मन हो जाय ।। शिरडी में मेला भरे, विचार मन में आय । तात्या कोते माधवा,सब सम्मती जताय ।। ज़िला कचहरी जाय के, अरजी दई लगाय । कुलकर्णी अड़चन डाले,आज्ञा ना मिल पाय ।। साई इच्छा प्रगट करें, और देय आशीष । जतरा होगी गाँव में, माने जिल्लाधीश ।। पर्व रामनवमी आया,जतरा हो शुरुवात । ढोल और बाजे बजें,ख़ुशियों की बरसात ।। उन्निस बारह साल के, पहले उर्स भराय । जतरा नवमी राम की,अब उर्स ही कहाय ।। परब्रम्ह साक्षात हैं, अनादि परमेश्वर । जगती के कल्याण को, जनमे रामेश्वर ।। -सुमन्तानन्द- *ॐ साईं राम जी* *साईं बाबा सबका कल्याण करें* ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

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Sunil Thadani May 24, 2019

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saidas May 26, 2019

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saidas May 26, 2019

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