सूर्य साधना

सूर्य साधना

सूर्य देव की सरल साधना
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सूर्य एक ऐसा ग्रह है जो की जीवन में नाम, शक्ति, सकारात्मक ओरा , ज्ञान आदि के लिए जिम्मेदार है. सूरज की शक्ति के बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते है. सूर्य को सूरज, भास्कर आदि के नमो से भी जानते है. अंग्रेजी में इसे Sun कहते है.
सूर्य को ग्रहों के राजा के रूप में भी जानते है. सारे ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते रहते है. जब कुंडली में सूर्य ख़राब होता है या कमजोर होता है तो विभिन्न प्रकार के समस्याओं से व्यक्ति परेशान होता है. सूर्य के कारण पितृ दोष भी उत्पन्न होता है.
सूर्य एक ऐसा ग्रह है जिसको हम रोज अपनी खुल्ली आँखों से देख सकते है. ये ग्रह हमे, प्रकाश, ऊर्जा और गर्मी देता है.
सभी जीव सूर्य से उर्जा प्राप्त करते है अतः ये सभी के लिए महत्वपूर्ण है.
सूर्य साधना का महत्तव:

अगर कोई रचनात्मकता, ज्ञान, सम्मान, अच्छा स्वास्थ्य, अध्यात्मिक शक्ति चाहता है तो उसे सूर्य पूजा या सूर्य साधना जरुर करनी चाहिए. हमारे पुरानो में रोज उगते सूर्य को अर्ध्य देने को कहा गया है , इसका कारण ये है की उस समय सूर्य से निकलने वाली किरने अत्यंत लाभकारी होती है.
सूर्य में रोग को ठीक करने की अद्भूत शक्ति है इसी कारण सूर्य योग के नाम से पूरा एक अलग साधना का उल्लेख भी बहुत जगह मिलता है जिसमे साधक सिर्फ सूर्य पूजा और धयान साधना द्वारा शक्तियां अर्जित करते है.
सूर्योदय के समय मंत्र जप,ध्यान, प्राणायाम बहुत लाभकारी होता है. सूर्य की किरणें जब शारीर पर पड़ती है तो विटामिन डी बनता है जिससे शारीर मजबूत होता है, इसी कारण योग में भी सूर्य स्नान का जिक्र मिलता है.
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान् सूर्य हनुमानजी के गुरु है और उनसे ही हनुमानजी ने विभिन्न प्रकार के ज्ञान अर्जित किया है. अतः सूर्य देव का हमारे जीवन में बहुत अधिक महत्व है.

सूर्य साधना का सबसे आसान तरीका लिख रही हूँ जिसका प्रयोग मैंने किया है, इस तरीके का प्रयोग कोई भी कर सकता है और एक स्वस्थ जीवन जी सकता है. कुछ ही दिनों के साधना के बाद साधक बहुत अच्छा बदलाव महसूस कर सकता है. !

इस साधना के लिए सिर्फ एक ऊनी आसन लाल या पीले रंग का चाहिए.

सूर्य साधना का आसान तरीका
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1.सबसे पहले एक ऐसा स्वच्छ स्थान ढूंढे जहाँ पर सुबह सुभ सूर्य की किरने आती हो.

2.अब स्थान को साफ़ करके अपना आसन वहां पर बिछाए.

3.अब करीब 5 मिनट तक गहरी सांस लीजिये और छोड़िये.

4.अब धीरे से अपनी आँखे बंद करके सूर्य पर ध्यान करिए. ऐसा भावना कीजिये की सुर्य की शक्ति आपके शारीर के प्रत्येक अंग में प्रवेश कर रही है और आपको स्वस्थ कर रही है. आपका शारीर उर्जावान हो रहा है. सभी दिशाओं से सफलता आपके पास आ रही है.

5.रोज अपने ध्यान का समय बढ़ाते जाइए.

6.अगर आप मंत्र जप करना चाहते है तो “ॐ सूर्याय नमः” का जप कर सकते है.

सूर्य को अर्घ्य देने से समस्याए दूर होती है
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सनातन काल से ही भारतीय ऋषि-मुनि सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म बेला में या ठीक सूर्योदय के समय नदी में स्नान करते थे और स्नान के उपरान्त सूर्य देव को जल अपने दोनों हाथो से अथवा ताम्बे के जल पात्र से देते थे।

सूर्य सभी ग्रहों के राजा हैं। ज्योतिष में जिस प्रकार माता और मन के कारक चन्द्रमा है उसी प्रकार पिता और आत्मा का कारक सूर्य हैं। रोज स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देने का अर्थ है जीवन में संतुलन को आमांत्रित करना।
ज्योतिषशास्त्र में कुण्डली में सूर्य कमज़ोर व नीच के राशि तुला में है तो अशुभ फल से बचने के लिए प्रतिदिन सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। वही यदि सूर्य किसी अशुभ भाव का स्वामी होकर सुबह स्थान में बैठा है तो सूर्योपासना करनी चाहिए।

साथ ही जिनकी कुंडली में सूर्यदेव अशुभ ग्रहो यथा शनि, राहु-केतु, के प्रभाव में है तो वैसे व्यक्ति को अवश्य ही प्रतिदिन नियमपूर्वक सूर्य को जल अर्पण करना चाहिए।
सूर्य देव को जल अर्पण करने से सूर्यदेव की असीम कृपा की प्राप्ति होती है सूर्य भगवान प्रसन्न होकर आपको दीर्घायु , उत्तम स्वास्थ्य, धन, उत्कृष्ट संतान, मित्र, मान-सम्मान, यश, सौभाग्य और विद्या प्रदान करते हैं।

जल चिकित्सा और आयुर्वेद के अनुसार प्रातःकालीन सूर्य को सिर के ऊपर पानी का बर्तन ले जाकर जल अर्पित करना चाहिए। ऐसा करते समय अपनी दृष्टि जलधारा के बीच में रखें ताकि जल से छनकर सूर्य की किरणें दोनों आंखों के मध्य में पड़ें। इससे आंखों की रौशनी और बौद्धिक क्षमता बढ़ती है।

सूर्योदय के प्रथम किरण में अर्घ्य देना सबसे उत्तम माना गया है।

सर्वप्रथम प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व नित्य-क्रिया से निवृत्त्य होकर स्नान करें।

उसके बाद उगते हुए सूर्य के सामने आसन लगाए।

पुनः आसन पर खड़े होकर तांबे के पात्र में पवित्र जल लें।
रक्तचंदन आदि से युक्त लाल पुष्प, चावल आदि तांबे के पात्र में रखे जल या हाथ की अंजुलि से तीन बार जल में ही मंत्र पढ़ते हुए जल अर्पण करना चाहिए।

जैसे ही पूर्व दिशा में सूर्योदय दिखाई दे आप दोनों हाथों से तांबे के पात्र को पकड़कर इस तरह जल अर्पण करे की सूर्य तथा सूर्य की किरण जल की धार से दिखाई दें।

ध्यान रखें जल अर्पण करते समय जो जल सूर्यदेव को अर्पण कर रहें है वह जल पैरों को स्पर्श न करे।

सम्भव हो तो आप एक पात्र रख लीजिये ताकि जो जल आप अर्पण कर रहे है उसका स्पर्श आपके पैर से न हो पात्र में जमा जल को पुनः किसी पौधे में डाल दे।
यदि सूर्य भगवान दिखाई नहीं दे रहे है तो कोई बात नहीं आप प्रतीक रूप में पूर्वाभिमुख होकर किसी ऐसे स्थान पर ही जल दे जो स्थान शुद्ध और पवित्र हो।

जो रास्ता आने जाने का हो भूलकर भी वैसे स्थान पर अर्घ्य (जल अर्पण) नहीं करना चाहिए।

पुनः उसके बाद दोनों हाथो से जल और भूमि को स्पर्श करे और ललाट, आँख कान तथा गला छुकर भगवान सूर्य देव को एकबार प्रणाम करें।

सूर्योपासना के समय किस मन्त्र का जप करना चाहिए

अर्घ्य देते समय सूर्य देव के मन्त्र का अवश्य ही जप करना चाहिए। आप जल अर्पण करते समय स्वयं ही या अपने गुरु के आदेशानुसार मन्त्र का चयन कर सकते है। सूर्यदेव के लिए निम्न मन्त्र है —

सामान्यतः जल अर्पण के समय निम्न मंत्रो का जप करना चाहिए।

‘ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते। अनुकंपये माम भक्त्या गृहणार्घ्यं दिवाकर:।।

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय। मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा :।।

ऊँ सूर्याय नमः।

ऊँ घृणि सूर्याय नमः।

‘ऊं भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात।

इसके बाद सीधे हाथ की अँजूरी में जल लेकर अपने चारों ओर छिड़कना चाहिए। पुनः अपने स्थान पर ही तीन बार घुमकर परिक्रमा करना चाहिए ततपश्चात आसन उठाकर उस स्थान को नमन करें।
सूर्य देव के अन्य मन्त्र निम्न प्रकार से है।

सूर्य मंत्र – ऊँ सूर्याय नमः ।

तंत्रोक्त मंत्र – ऊँ ह्यं हृीं हृौं सः सूर्याय नमः । ऊँ जुं सः सूर्याय नमः ।

सूर्य का पौराणिक मंत्र –

जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम ।

तमोडरि सर्वपापघ्नं प्रणतोडस्मि दिवाकरम् ।
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कामेंट्स

Atul Dec 17, 2017
OM Suryay Namah

Ajnabi Dec 17, 2017
jay shree Radhe krishna

Yogesh Kumar Sharna Dec 18, 2017
हर हर महादेव ओम् नमः शिवायः शुभ प्रभातम्

Ashish shukla Oct 21, 2018

Pranam Flower Jyot +292 प्रतिक्रिया 116 कॉमेंट्स • 1406 शेयर
M.निशा. Oct 21, 2018

!! शुभ रविवार के शुभ संदेश !!

सच्चे दिल से की हुई दुवा कभी खाली नही जाती


!! ,, दुवा,, दवाई से भी ताकतवर है,, !!

Jyot Flower Like +298 प्रतिक्रिया 154 कॉमेंट्स • 873 शेयर
pratibha Oct 21, 2018

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Narinder Galhotra Oct 21, 2018

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Ritika Oct 21, 2018

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Ashish shukla Oct 21, 2018

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Dr. Ratan Singh Oct 21, 2018

🌳🌹मैं वृक्षों मैं पीपल हूँ🌹🌳
🎎🌷 गीता 🌷🎎
🎡पीपल को जानिए🎡
पीपल (वानस्पति नाम:फ़ाइकस रेलीजियोसा (Ficus religiosa) भारत, नेपाल, श्रीलंका, चीन और इंडोनेशिया में पाया जाने वाला बरगद की जाति का एक विशालकाय वृक्ष है,

जिसे भारतीय संस्कृति में ...

(पूरा पढ़ें)
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Harshita Malhotra Oct 21, 2018

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