*नवदुर्गा: नौ रूपों में स्त्री जीवन का पूर्ण बिम्ब।

*नवदुर्गा: नौ रूपों में स्त्री जीवन का पूर्ण बिम्ब एक स्त्री के पूरे जीवनचक्र का बिम्ब है नवदुर्गा के नौ स्वरूप।*

1. जन्म ग्रहण करती हुई कन्या "शैलपुत्री" स्वरूप है।

2. कौमार्य अवस्था तक "ब्रह्मचारिणी" का रूप है।

3. विवाह से पूर्व तक चंद्रमा के समान निर्मल होने से
वह "चंद्रघंटा" समान है।

4. नए जीव को जन्म देने के लिए गर्भ धारण करने पर
वह "कूष्मांडा" स्वरूप में है।

5. संतान को जन्म देने के बाद वही स्त्री
"स्कन्दमाता" हो जाती है।

6. संयम व साधना को धारण करने वाली स्त्री
"कात्यायनी" रूप है।

7. अपने संकल्प से पति की अकाल मृत्यु को भी जीत
लेने से वह "कालरात्रि" जैसी है।

8. संसार (कुटुंब ही उसके लिए संसार है) का उपकार
करने से "महागौरी" हो जाती है।

9 धरती को छोड़कर स्वर्ग प्रयाण करने से पहले संसार
में अपनी संतान को सिद्धि(समस्त सुख-संपदा) का
आशीर्वाद देने वाली "सिद्धिदात्री" हो जाती है।

🥀🥀🥀🥀🥀जय_माता_दी 🥀🥀🥀🥀🥀

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कामेंट्स

shiv prakash soni Jan 25, 2020

गुप्त नवरात्र के अवसर पर बाधा निवारण के लिए आप दुर्गा मां की साधना कर सकते हैं सबसे अच्छा है आप यह यंत्र भोजपत्र पर बना ले केसर से बना लें या अष्टगंध से बना ले और सबसे अच्छा यंत्र बनता है काम्या सिंदूर से यह यंत्र बनाकर के प्राण प्रतिष्ठा कर ले इस यंत्र की चेतना के लिए दुर्गा जी का मंत्र जप कर ले एवं संकल्प लेकर के आपको जिस भी प्रकार की बाधा है उस प्रकार का संकल्प ले ले उस बाधा निवारण के लिए संकल्प लेकर आप दुर्गा कवच जोकि दुर्गा सप्तशती में संस्कृत और हिंदी में दिया हुआ होता है उसके 108 पाठ पूरे करें 9 दिन में 108 पाठ पूरे हो जाएं या आप रोज भी 108 पाठ कर सकते हैं जैसा आपके पास समय हो और जितना आप साधना में बैठ सकें ज्यादा से ज्यादा दुर्गा कवच आप पाठ कर सकते नित्य 2121 भी कर सकते हैं 5151 भी कर सकते हैं 108 पाठ भी नित्य कर सकते हैं दुर्गा कवच पाठ के प्रभाव से आपके बहुत सी बाधाएं स्वता ही आपसे दूर होंगी✍🏻

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