*नवदुर्गा: नौ रूपों में स्त्री जीवन का पूर्ण बिम्ब।

*नवदुर्गा: नौ रूपों में स्त्री जीवन का पूर्ण बिम्ब एक स्त्री के पूरे जीवनचक्र का बिम्ब है नवदुर्गा के नौ स्वरूप।*

1. जन्म ग्रहण करती हुई कन्या "शैलपुत्री" स्वरूप है।

2. कौमार्य अवस्था तक "ब्रह्मचारिणी" का रूप है।

3. विवाह से पूर्व तक चंद्रमा के समान निर्मल होने से
वह "चंद्रघंटा" समान है।

4. नए जीव को जन्म देने के लिए गर्भ धारण करने पर
वह "कूष्मांडा" स्वरूप में है।

5. संतान को जन्म देने के बाद वही स्त्री
"स्कन्दमाता" हो जाती है।

6. संयम व साधना को धारण करने वाली स्त्री
"कात्यायनी" रूप है।

7. अपने संकल्प से पति की अकाल मृत्यु को भी जीत
लेने से वह "कालरात्रि" जैसी है।

8. संसार (कुटुंब ही उसके लिए संसार है) का उपकार
करने से "महागौरी" हो जाती है।

9 धरती को छोड़कर स्वर्ग प्रयाण करने से पहले संसार
में अपनी संतान को सिद्धि(समस्त सुख-संपदा) का
आशीर्वाद देने वाली "सिद्धिदात्री" हो जाती है।

🥀🥀🥀🥀🥀जय_माता_दी 🥀🥀🥀🥀🥀

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Anju Rastogi Nov 29, 2020

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nirmal Nov 29, 2020

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🙏🌹जय जय श्रीराधे🌹🙏 हे सर्वह्रदयप्रिय सर्वेश्वर मधुरेश्वर सर्वशक्तिमान सर्वएश्वर्यपति सर्वश्रेष्ठ सदासनातन सर्वव्यापी अच्युत परममनोहर परमपवित्र त्रिगुणातीत योगयोगेश्वर दयानिधान परमकरुणाकरण दयासिन्धु प्रेमस्वरूप भगवन् श्रीमन् श्रीनिधिपति श्रीनाथ श्रीराधावरकुंजबिहारी श्रीमद्नित्यनिकुंजबिहारीजी आपको नवदिवस का हृदय और मन की सर्वोच्च सुचितायुक्त पूर्णकृतज्ञता लिए प्रथम नमस्कार है..प्रथम वंदन है..आपको कृतज्ञ हृदयों का धन्यवाद है ..हे मधुरेश्वर भगवन् स्वीकारे..हमारा नमस्कार.. वंदन..अभिनंदन.🙏🌹श्रीराधे🌹🙏नव दिवस का 🌹श्रीगणेश🌹 है.🙏🌹🙏श्री अनंत दुबे 🌺🌺🌺🌺🌺💦🥀💦🥀💦🥀💦🥀💦🥀💦🥀💦 जब भी दो पुरुष लड़ते हैं तो हैरानी की बात है। लड़ते पुरुष हैं मगर गालियाँ स्त्रियों को देते हैं। कोई उसकी माँ से रिश्ता जोड़ रहा है, कोई उसकी बहन से रिश्ता जोड़ रहा है, कोई उसकी बेटी से रिश्ता जोड़ रहा है। यह भी थोड़ी सोचने जैसी बात है कि समाज बातें तो करता है स्त्री समादर की, मगर क्या यही समादर है ? बातें तो यूँ की जाती हैं कि जहाँ---जहाँ नारी की पूजा होती है वहाँ---वहाँ देवता रमण करते हैं। पर स्त्री की पूजा के नाम पर हो क्या रहा है ? और सदियों से क्या हो रहा है ? सिवाय अपमान और अनादर के कुछ भी नहीं। अगर दो आदमी आपस में लड़ रहे हैं तो एक---दूसरे से निपटो, इसमें स्त्रियों को बीच में लाने की क्या ज़रूरत है ? इसमें किसी की माँ ने आपका क्या बिगाड़ा है किसी की पत्नी ने आपका क्या बिगाड़ा है किसी की बेटी ने आपका क्या बिगाड़ा है ? लेकिन गाली तो स्त्रियों को ही दी जायेगी। लड़े कोई, अपमान तो स्त्री का ही होगा.. ✍ 💦🥀💦🥀💦🥀💦🥀💦🥀💦🥀💦🍅✴☀❣जय मां अंबे भवानी ❣☀✴🍅❣ 🍂🐚 गंगा गीता गायत्री 🍂🐚 (¯`•.•´¯) *`•.¸(¯`•.•´¯)¸.•´ `•.¸.•´ ჱܓ*“ 🍅✴☀✴☀✴☀✴☀✴☀✴☀✴🍅 ☆*´¨`☽  ¸.★* ´¸.★*´¸.★*´☽ (  ☆** Ψ त्रिवेणी घाट हरिद्वार .Ψ `★.¸¸¸. ★• ° 🙏 सेवक भरत व्यास बांगा हिसार हरिद्वार 🌺🌺*शरीरं सुरूपं नवीनं कलत्रं* *धनं मेरुतुल्यं यशश्चारु चित्रम्*। *हरेरङ्घ्रिपद्मे मनश्चेन्न लग्नं* *तत: किं तत: किं तत: किं तत: किम्*॥ *शरीर चाहे कितना भी सुन्दर हो , पत्नी चाहे कितनी भी मनमोहिनी हो , धन चाहे कितना भी सुमेरु पर्वत की भांति असीम हो और सारे संसार में चाहे कितना भी नाम रोशन हो चुका हो लेकिन जब तक जिन्दगी देने वाले श्रीहरि के चरणकमलों में मन नहीं लगा हुआ है तब तक क्या हासिल किया ? क्या पाया ? अर्थात् सब व्यर्थ है

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Komal dagar Nov 29, 2020

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Ajay singh Nov 29, 2020

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Jitendra Kumar Nov 29, 2020

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Mrs Anju Sharma Nov 29, 2020

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