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white beauty Apr 18, 2021

प्राचीन शारदा पीठ मंदिर नीलम घाटी आजाद काश्मीर

प्राचीन शारदा पीठ मंदिर
नीलम घाटी आजाद काश्मीर

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M.S.Chauhan May 12, 2021

श्रील प्रभुपाद ( इस्कॉन फाउंडर आचार्य ) 🚩🌞 एक ऐसा भारतीय सन्यासी जो पाकिस्तान में 12 मंदिर बनवा दिए । एक ऐसा सन्यासी जो मात्र 12 वर्ष में 15 बार पूरी पृथ्वी का भ्रमण किया । एक ऐसा सन्यासी जो 70 वर्ष की उम्र में अमेरिका में जाकर दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक संस्था इस्कान की स्थापना की । एक ऐसा सन्यासी जिसके नाम दुनिया में सबसे ज्यादा भागवत गीता बांटने का रिकॉर्ड है । एक ऐसा सन्यासी जिसने दुनिया में सबसे ज्यादा विदेशियों को सनातन धर्म से जोड़ने का रिकॉर्ड बनाया । एक ऐसा सन्यासी जो मृत्यु के अंतिम क्षणों में भगवत गीता का श्लोक का इंग्लिश में ट्रांसलेट करते करते प्राण त्याग दिया । एक ऐसा सन्यासी जिसने दुनिया में सबसे पहले रथयात्रा निकालने की परंपरा शुरू की । एक ऐसा भारतीय सन्यासी जो सभी विदेशियों को शुद्ध शाकाहारी बना दिए और हरे कृष्ण महामंत्र ...जाप करने में लगा दिए। एक ऐसा सन्यासी जो चार नियम पालन करने को कह गए वो चार नियम पालन करके कोई भी श्रीला प्रभुपाद का शिष्य अभी भी बन सकता है ये प्रभुपाद खुद बोल कर गए हैं..... ये चार नियम ये हैं 👇👇👇 1* 16 माला नित्य हरि नाम जाप। (हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे) 👈 ये हरिनाम जपना नित्य 16 माला। 2* शुद्ध शाकाहारी रहना। लहसुन,प्याज ,मांस, मछली, अंडा, जीव हत्या बंद करो.. 3* पर पुरुष/ पर स्त्री गमन का त्याग। 4* जुवा न खेलना ...किसी भी प्रकार का नशा का त्याग, मदिरा, चाय, कॉफ़ी, गुटका, बीड़ी, सिगरेट जितना भी नशा है सब त्याग करो. ________________+______________ एक ऐसा सन्यासी जिसने करोड़ों अरबों कि धार्मिक संपत्ति बिबी बच्चों भाई के नाम न करके इस्कान के नाम कर दिया जिसको दुनिया के 12 अलग-अलग देशों के 12 दीक्षित सन्यासी फाउंडर बनकर चलाएंगे। हरे कृष्ण! हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।।

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Anita Sharma May 12, 2021

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Pritam Chhabariy May 12, 2021

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bhumika May 12, 2021

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Anita Sharma May 10, 2021

. "इन्द्र और तोते की कथा" देवराज इन्द्र और धर्मात्मा तोते की यह कथा महाभारत से है। कहानी कहती है, अगर किसी के साथ ने अच्छा वक्त दिखाया है तो बुरे वक्त में उसका साथ छोड़ देना ठीक नहीं। एक शिकारी ने शिकार पर तीर चलाया। तीर पर सबसे खतरनाक जहर लगा हुआ था। पर निशाना चूक गया। तीर हिरण की जगह एक फले-फूले पेड़ में जा लगा। पेड़ में जहर फैला। वह सूखने लगा। उस पर रहने वाले सभी पक्षी एक-एक कर उसे छोड़ गए। पेड़ के कोटर में एक धर्मात्मा तोता बहुत बरसों से रहा करता था। तोता पेड़ छोड़ कर नहीं गया, बल्कि अब तो वह ज्यादातर समय पेड़ पर ही रहता। दाना-पानी न मिलने से तोता भी सूख कर काँटा हुआ जा रहा था। बात देवराज इन्द्र तक पहुँची। मरते वृक्ष के लिए अपने प्राण दे रहे तोते को देखने के लिए इन्द्र स्वयं वहाँ आए। धर्मात्मा तोते ने उन्हें पहली नजर में ही पहचान लिया। इन्द्र ने कहा, "देखो भाई इस पेड़ पर न पत्ते हैं, न फूल, न फल। अब इसके दोबारा हरे होने की कौन कहे, बचने की भी कोई उम्मीद नहीं है। जंगल में कई ऐसे पेड़ हैं, जिनके बड़े-बड़े कोटर पत्तों से ढके हैं। पेड़ फल-फूल से भी लदे हैं। वहाँ से सरोवर भी पास है। तुम इस पेड़ पर क्या कर रहे हो, वहाँ क्यों नहीं चले जाते ?" तोते ने जवाब दिया, 'देवराज, मैं इसी पर जन्मा, इसी पर बढ़ा, इसके मीठे फल खाए। इसने मुझे दुश्मनों से कई बार बचाया। इसके साथ मैंने सुख भोगे हैं। आज इस पर बुरा वक्त आया तो मैं अपने सुख के लिए इसे त्याग दूँ। जिसके साथ सुख भोगे, दुख भी उसके साथ भोगूँगा, मुझे इसमें आनन्द है। आप देवता होकर भी मुझे ऐसी बुरी सलाह क्यों दे रहे हैं ?' यह कह कर तोते ने तो जैसे इन्द्र की बोलती ही बन्द कर दी। तोते की दो-टूक सुन कर इन्द्र प्रसन्न हुए, बोल, 'मैं तुमसे प्रसन्न हूँ। कोई वर मांग लो।' तोता बोला, 'मेरे इस प्यारे पेड़ को पहले की तरह ही हरा-भरा कर दीजिए।' देवराज ने पेड़ को न सिर्फ अमृत से सींच दिया, बल्कि उस पर अमृत बरसाया भी। पेड़ में नई कोपलें फूटीं। वह पहले की तरह हरा हो गया, उसमें खूब फल भी लग गए। तोता उस पर बहुत दिनों तक रहा, मरने के बाद देवलोक को चला गया। युधिष्ठिर को यह कथा सुना कर भीष्म बोले, 'अपने आश्रयदाता के दुख को जो अपना दुख समझता है, उसके कष्ट मिटाने स्वयं ईश्वर आते हैं। बुरे वक्त में व्यक्ति भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाता है। जो उस समय उसका साथ देता है, उसके लिए वह अपने प्राणों की बाजी लगा देता है। किसी के सुख के साथी बनो न बनो, दुख के साथी जरूर बनो। यही धर्मनीति है और कूटनीति भी।

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Anita Sharma May 10, 2021

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priyanka thakur May 11, 2021

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priyanka thakur May 11, 2021

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Raj May 10, 2021

तैरने वाले पत्थरों से बना #रहस्यमयी_मंदिर (रामप्पा मंदिर,तेलंगाना) यह तेलंगाना का रामप्पा मंदिर है,यह मंदिर भीषण आपदाओं को झेलने के बाद भी आज तक सुरक्षित है।छह फीट ऊंचे प्लैटफॉर्म पर बने इस मंदिर की दीवारों पर महाभारत और रामायण के दृश्य उकेरे हुए हैं। मंदिर में भगवान शिव के वाहन नंदी की भी एक मूर्ति है,जिसकी ऊंचाई नौ फीट है। यह रामायण और महाभारत के दृश्य एक ही पत्थर पर उकेरे गए है, वह भी छीनी हथोड़े से, आप बनाते समय की कल्पना कीजिये,एक हथौड़ा गलत पड़ा, और महीनों-वर्षों का श्रम नष्ट .... आज तक इस मंदिर में कोई क्षति नही हुई है, मंदिर के न टूटने की बात जब पुरातत्व विज्ञानियों को पता चली, तो उन्होंने मंदिर की जांच की। पुरातत्व विज्ञानी अपनी जांच के दौरान काफी प्रयत्नों के बाद भी मंदिर के इस रहस्य का पता लगाने में सफल नहीं हुए। बाद में जब पुरातत्व विज्ञानियों ने मंदिर के पत्थर को काटा, तब पता चला कि यह पत्थर वजन में काफी हल्के हैं। उन्होंने पत्थर के टुकड़े को पानी में डाला, तब वह टुकड़ा पानी में तैरने लगा। पानी में तैरते पत्थर को देखकर मंदिर के रहस्य पता चला। सबसे बड़ा रहस्य यह है कि इस मंदिर में जो पत्थर मिले है, वह पत्थर विश्व के किसी कोने में नही मिले है, यह पत्थर कहाँ से लाये गए, आज तक इसका पता नही चल पाया है ।। एक निवेदन -- हम सबको मिलकर हमारे भारत की इन अमूल्य धरोहरों का प्रचार जन-जन तक करना चाहिए, इसका इतना प्रचार हो, की पूरे संसार की की दृष्टि इन पर पड़े और वह भारत की महान संस्कृति पर गर्व करें।

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