Narayan Giri
Narayan Giri Jan 3, 2018

सिद्धपीठ दूधेश्वर नाथ मंदिर नव वर्ष पर श्रृंगार दर्शन

सिद्धपीठ दूधेश्वर नाथ मंदिर नव वर्ष पर श्रृंगार दर्शन
सिद्धपीठ दूधेश्वर नाथ मंदिर नव वर्ष पर श्रृंगार दर्शन
सिद्धपीठ दूधेश्वर नाथ मंदिर नव वर्ष पर श्रृंगार दर्शन
सिद्धपीठ दूधेश्वर नाथ मंदिर नव वर्ष पर श्रृंगार दर्शन

।।नव-वर्ष का प्रथम सोमवार मे हजारों भक्तों ने किया भगवान दूधेश्वर का जलाभिषेक।।

गाजियाबाद। नव-वर्ष के प्रथम सोमवार को गाजियाबाद के प्रसिद्ध श्री दूधेश्वर नाथ महादेव मंदिर मे सभी शिवभक्तों अपनी सहनशीलता का परिचय देते हुए,अपने आराध्य बाबा भोले नाथ औढरदानी को जलाभिषेक के लिए रात्रि 12 बजे से ही लम्बी कतार मे खङे हो गये थे।साथ ही अपने आराध्य को खुश करने के लिए ॐ नमो शिवाय का जाप कर रहे थे,प्रातः काल मे लगभग 3 बजे श्री दुधेश्वर पीठाधीश्वर श्रीमहन्त नारायणगिरि जी महाराज जी ने वेदपाठी आचार्य द्वारा विधिविधान से पंचामृत द्वारा भगवान दुधेश्वर का अभिषेक किया।अंग्रेजी नववर्ष के बारे में बताते हुये श्री दूधेश्वर पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज ने बताया कि हमारे देश और परिवार के सभी भक्त स्वयंसेवकों को अंग्रेजी नववर्ष की की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।बहुत से लोग ये बोल रहें हैं कि यह हमारा नव वर्ष नहीं है,मैं इस बात को मानता हूं।परंतु जीवन में आज के समय में इतना टेंशन,तनाव है, ऐसे में जब कोई खुशी का पल प्राप्त होता है तो उसे आनंद में व्यतित करना चाहिए।हमारे धर्म शास्त्रों में कहा है कि हमे अपने धर्म में पूर्ण विश्वास होना चाहिए, तथा दूसरों के धर्म को सम्मान करना चाहिए।आगे महराज श्री ने मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष श्री धर्मपाल गर्ग जी के बारे में बताया कि आज मंदिर में जितना भी रौनक है उसमें श्री धर्मपाल गर्ग जी का सपरिवार पूर्ण योगदान है। इन्होंने मंदिर के विकास में चार चांद लगा दिए हैं। बाबा दूधेश्वर व विराजित सभी गुरु मूर्तियों का इनपर विशेष कृपा बनी रहे, ये दीर्घायु हो।आगे महराज श्री ने बताया कि सुबह का भव्य आरती श्रृगार श्री दुधेश्वर श्रृगार सेवादार के द्वारा किया गया ।एवं संध्या का भव्य स्वर्ण श्रृंगार अध्यक्ष श्री विजय मित्तल जी अध्यक्षता में श्री दूधेश्वर श्रृंगार सेवा समिति के द्वारा सम्पूर्ण हुआ।इस अवसर पर मंदिर विकास समिति अध्यक्ष श्री धर्मपाल गर्ग जी ने सभी नगर वासियों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुये कहा कि मैं बाबा दूधेश्वर नाथ से यही कामना करता हू सभी स्वास्थ रहें, किसी के भी जीवन मे कोई कष्ट न हो, सभी सुखी रहे।इस शुभ अवसर पर श्री विजय मित्तल जी ने बताया कि मंदिर विकास समिति अध्यक्ष श्री धर्मपाल गर्ग जी के सानिध्य व दूधेश्वर पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज के प्रेरणा से नववर्ष के इस पावन अवसर पर बाबा दूधेश्वर नाथ का भव्य स्वर्ण श्रृंगार हुआ। साथ साथ 56 भोगों से बाबा को भोग लगाया गया है, जो हर बार से अलग है।इस अवसर पर संजीव वर्मा, पुनीत पाहवा, दिवाकर भार्गव,साहब सिंह चौहान, सौरभ मित्तल, मनमोहन गोयल, संजय सिंह, नरेंद्र सिंह,आदि अनेक लोग मौजूद रहें।


निवेदक
धीरज कुमार
सह मीडिया प्रभारी
दूधेश्वर नाथ मन्दिर
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश

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PDJOSHI Oct 21, 2020

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Heeralal Prajapati Oct 20, 2020

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Kumarpal Shah Oct 20, 2020

🕉️ Namah shivay 🙏 @ *"हिन्दू"*शब्द की खोज* *'हिन्दू'* शब्द, करोड़ों वर्ष प्राचीन, संस्कृत शब्द है! अगर संस्कृत के इस शब्द का सन्धि विछेदन करें तो पायेंगे .... *हीन+दू* = हीन भावना + से दूर *अर्थात* जो हीन भावना या दुर्भावना से दूर रहे, ...मुक्त रहे ....वो हिन्दू है ! हमें बार-बार, हमेशा झूठ ही बतलाया जाता है कि ...हिन्दू शब्द मुगलों ने हमें दिया, जो.... *"सिंधु" से "हिन्दू"* हुआ, *हिन्दू शब्द की वेद से ही उत्पत्ति है !* जानिए, कहाँ से आया हिन्दू शब्द, और कैसे हुई इसकी उत्पत्ति! भारत में बहुत से लोग हिन्दू हैं, एवं वे हिन्दू धर्म का पालन करते हैं। अधिकतर लोग.... *"सनातन धर्म" को हिन्दू धर्म मानते हैं*। कुछ लोग यह कहते हैं कि *हिन्दू शब्द सिंधु से बना है*, औऱ यह फारसी शब्द है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं है! हमारे "वेदों" और "पुराणों" में *हिन्दू शब्द का उल्लेख* मिलता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि हमें हिन्दू शब्द कहाँ से मिला है! "ऋग्वेद" के *"ब्रहस्पति अग्यम"* में हिन्दू शब्द का उल्लेख इस प्रकार आया हैं:- *“हिमलयं समारभ्य* *यावत इन्दुसरोवरं ।* *तं देवनिर्मितं देशं* *हिन्दुस्थानं प्रचक्षते।* *अर्थात :* हिमालय से इंदु सरोवर तक, देव निर्मित देश को *हिंदुस्तान* कहते हैं! केवल *"वेद"* ही नहीं, बल्कि *"शैव" ग्रन्थ* में हिन्दू शब्द का उल्लेख इस प्रकार किया गया हैं:- *"हीनं च दूष्यतेव्* *हिन्दुरित्युच्च ते प्रिये।”* *अर्थात :-* जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं! इससे मिलता जुलता लगभग यही श्लोक *"कल्पद्रुम"* में भी दोहराया गया है : *"हीनं दुष्यति इति हिन्दूः।”* *अर्थात* जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं। *"पारिजात हरण"* में हिन्दू को कुछ इस प्रकार कहा गया है :- *”हिनस्ति तपसा पापां* *दैहिकां दुष्टं ।* *हेतिभिः श्त्रुवर्गं च* *स हिन्दुर्भिधियते।”* *अर्थात :* जो अपने तप से शत्रुओं का, दुष्टों का, और पाप का नाश कर देता है, वही हिन्दू है ! *"माधव दिग्विजय"* में भी हिन्दू शब्द को कुछ इस प्रकार उल्लेखित किया गया है :- *“ओंकारमन्त्रमूलाढ्य* *पुनर्जन्म द्रढ़ाश्य:।* *गौभक्तो भारत:* *गरुर्हिन्दुर्हिंसन दूषकः ।* *अर्थात :* वो जो *"ओमकार"* को ईश्वरीय धुन माने, कर्मों पर विश्वास करे, गौपालक रहे, तथा बुराइयों को दूर रखे, वो हिन्दू है! केवल इतना ही नहीं, हमारे *"ऋगवेद" (८:२:४१)* में *विवहिन्दू* नाम के बहुत ही पराक्रमी और दानी राजा का वर्णन मिलता है, जिन्होंने ४६,००० गौमाता दान में दी थी! और *"ऋग्वेद मंडल"* में भी उनका वर्णन मिलता है! *"ऋगवेद"* में एक ऋषि का उल्लेख मिलता है, जिनका नाम "सैन्धव" था, जो मध्यकाल में आगे चलकर *“हैन्दव/हिन्दव”* नाम से प्रचलित हुए! जिसका बाद में अपभ्रंश होकर हिन्दू बन गया। औरो को भी बतायें। *शिवओम मिश्र*

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Sumitra Soni Oct 19, 2020

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