Vivekanand Vaishya
Vivekanand Vaishya Jan 7, 2018

Guru Gobind Singh

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Harilal Prajapati Sep 27, 2020

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Neha Sharma Sep 27, 2020

*मैं तो कुछ भी नहीं आपके लिए 🌹आप तो सार हैं मेरी कहानी का 💞आप तो पूरे समुन्दर से भी बड़े हैं भगवन🌹मैं तो बस एक कतरा हूँ पानी का*🌷*जय श्री राधेमाधव*🙏*जय जय श्री राधेकृष्णा*🙏🙏🌹💞🍂🍂🍂🍂💞🌹🥀 *श्री बांके बिहारी "बांके" व "बिहारी" क्यों?* *बनठन कर रहने वाले व्यक्ति को हिन्दी में बांका कहा जाता है अर्थात बांका जो भी होगा वह सजीला भी होगा। कोई भी व्यक्ति या तो जन्मजात सुंदर होता है या बनाव-श्रृंगार से सजीला बनता है। जब सजीले, सलोनेपन की बात आती है तो कृष्ण की छवि ही मन में उभरती है। *कृष्ण जी का एक नाम बांके बिहारी है। श्रीकृष्ण प्रत्येक मुद्रा में बांके बिहारी नहीं कहे जाते बल्कि "होंठों पर बांसुरी लगाए", "कदम्ब के वृक्ष से कमर टिकाए" हुए,"एक पैर में दूसरे को फंसाए हुए", तीन कोण पर झुकी हुई मुद्रा में ही उन्हें बांके बिहारी कहा जाता है। भगवान तीन स्थानों से टेढ़े हैं - होंठ, कमर व पैर! इसलिए उन्हें त्रिभंगी भी कहा जाता है। *भगवान श्री कृष्ण तीन स्थानों से टेढ़े क्यों हैं? इसका सम्बन्ध उनकी जन्म कथा से है - *जब गोकुल में भगवान के जन्म का पता चला तो सारे ग्वाल-बाल नन्दबाबा के घर बधाईयाँ ले-ले कर आये। नन्द बाबा की दो बहनें थीं - नन्दा और सुनंदा, जो लाला के जन्म से पहले ही आई हुई थीं। जब बाल कृष्ण के जन्म को दो तीन घंटे हो गए तो सुनन्दा जी ने यशोदा जी से कहा - भाभी! लाला को जन्म लिए इतनी देर हो गई, अब तक लाला को आपने दुग्ध-पान नहीं कराया! *यशोदा जी ने कहा - हाँ बहिन! आप ठीक कह रही हो। *सुनन्दा जी बोली - भाभी! मैं बाहर खड़ी हो जाती हूँ। किसी को भी अन्दर नहीं आने दूँगी। आप लाला को दुग्धपान कराईए। *इतना कहकर सुनंदा जी बाहर खड़ी हो गईं। *अब यशोदा जी जैसे ही बाल कृष्ण को अपनी गोद में उठाने लगीं तो बाल कृष्ण इतने कोमल थे कि यशोदा जी की उगलियाँ भी उन्हें चुभ गयीं। यशोदा जी ने बहुत प्रयास किया पर उन्हें यही लगा कि लल्ला इतना कोमल है कि मै इसे गोद में उठाऊँगी तो इसे मेरी उगलियाँ चुभ जायेंगी। अब माता यशोदा जी ने लाला को तो पलंग पर ही लिटा दिया और स्वयं टेढ़ी होकर लाला को दुग्ध-पान कराने लगीं। *भगवान ने एक घूँट पिया, दो घूँट पिया जैसे ही तीसरा घूँट पीने लगे तो बाहर खड़ी सुनंदा जी ने सोचा बड़ी देर हो गई अब तो लाला ने दुग्ध-पान कर लिया होगा और जैसे ही उन्होंने खिडकी से अन्दर झाँका तो तुरंत बोल पड़ीं - भाभी! लाला को प्रथम बार टेढ़े होकर दुग्ध-पान मत कराओ, जितने घूँट ये पिएगा उतने स्थान से टेढ़ा हो जायेगा! *इतना सुनते ही यशोदा जी झट हट गई तब तक बाल कृष्ण ने तीसरा घूँट भी गटक लिया। तीन घूँट दुग्ध-पान के कारण कृष्ण तीन स्थान से टेढे हो गए अर्थात "बाँके"! *भगवान की जन्म कुंडली का नाम "बिहारी" था। इस प्रकार बाँके बिहारी, श्री कृष्ण जी का एक नाम बाँके बिहारी हुआ! *संस्कृत में भङ्ग अर्थ भी टेढ़, तिरछा, मोड़ा हुआ, सर्पिल, घुमावदार आदि ही होता है। ध्यान करें भंगिमा शब्द पर हाव-भाव के लिए नाटक या नृत्य में अक्सर भंगिमाएं बनाई जाती हैं। चेहरे पर विभिन्न हाव-भाव दर्शाने के लिए आंखों, होठों की वक्रगति से ही विभिन्न मुद्राएं बनाई जाती हैं जो भंगिमा कहलाती हैं। इसी में बांकी चितवन या तिरछी चितवन को याद किया जा सकता है, जिसका अर्थ ही चाहत भरी तिरछी नज़र होता है। *श्रीकृष्ण की बांकेबिहारी वाली मुद्रा को इसीलिए त्रिभंगी मुद्रा भी कहते हैं लेकिन हमारे बाँके बिहारी जी के कहने ही क्या हैं? इनकी तो प्रत्येक अदा टेढ़ी है "तेरा टेढा रे मुकुट, तेरी टेढ़ी रे अदा" हमें तेरा दीवाना बना दिया। इस बाँके का तो सब कुछ बांका है - *"बाँके है नंद बाबा और यशोमती, बांकी घड़ी जन्मे हैं बिहारी। बाँके कन्हैया के बाँके ही भ्रात लड़ाके बड़े हल-मूसलधारी। बांकी मिली दुल्हिन जगवन्दिनी और बाँके गोपाल के बाँके पुजारी। भक्तन दर्शन देन के कारण झाँकी झरोखा में बाँके बिहारी।" *नंदबाबा और यशोदा जी भी टेढ़ी हैं, बाल कृष्ण का जन्म भी हो गया उन्हें ज्ञात ही नहीं, जन्म भी श्री कृष्ण का हुआ तो रात को १२ बजे, उनके भाई बलदाऊ जी जरा-सी बात पर ही हल-मूसल उठा लेते हैं और दुल्हन यानि राधारानी वे भी बांकी हैं। दुनिया कृष्ण के चरण दबाती है पर हमारी राधारानी जी कृष्ण से ही चरण दबवाती हैं और उनके पुजारी भी बाँके हैं। वृंदावन में भक्त तो दर्शन करने जाते हैं और पुजारी जी बार-बार पर्दा लगा देते है तो हुआ न वो बाँके का सब कुछ बांका! 🌷*श्रीधाम वृंदावन बांके बिहारी लाल जी की जय*🌷 🌷*जय श्री राधेकृष्णा*🌷 🙏🌷🌷🙏

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seetal gupta Sep 27, 2020

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Anil Gupta Sep 27, 2020

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Gajrajg Sep 27, 2020

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आशुतोष Sep 27, 2020

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Mahesh Malhotra Sep 27, 2020

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dhruv wadhwani Sep 27, 2020

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Mahesh Malhotra Sep 27, 2020

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