Prabhakar Behera
Prabhakar Behera Jan 8, 2017

Jamshedpur bhalubasa ...bajrang vijay Mandir

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sunita Sharma Apr 2, 2020

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☘️🌹🙏*जय मां सिद्धिदात्री जय श्री राम*🙏🌹☘️ *अयोध्या के वासी राम,रघु कुल के कहलाए राम* *पुरुषो में हैं उत्तम राम,सदा जपो श्री राम का नाम* ☘️💨🙏*शुभ प्रभात् नमन*🙏💨☘️ *आपको सपरिवार *श्री राम नवमी* की हार्दिक शुभकामनाएं! *आप सभी भाई-बहनों का हर पल शुभ व मंगलमय हो* 🙏🥀☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️🥀🙏 *🙏🏻🌼🙏🏻 *जय श्री राम*🙏🏻🌼🙏🏻* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* 🙏🏻🌼🙏🏻🌼🙏🏻🌼🙏🏻🌼🙏🏻🌼 *🙏🏻रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य🙏🏻* *1:~लंका में राम जी = 111 दिन रहे* *2:~लंका में सीताजी = 435 दिन रहीं* *3:~मानस में श्लोक संख्या = 27 है* *4:~मानस में चोपाई संख्या = 4608 है* *5:~मानस में दोहा संख्या = 1074 है* *6:~मानस में सोरठा संख्या = 207 है* *7:~मानस में छन्द संख्या = 86 है* *8:~सुग्रीव में बल था = 10000 हाथियों का* *9:~सीता रानी बनीं = 33वर्ष की उम्र मे* *10:~मानस रचना के समय तुलसीदास की उम्र = 77 वर्ष थी* *11:~पुष्पक विमान की चाल = 400 मील/घण्टा थी* *12:~रामादल व रावण दल का युद्ध = 87 दिन चला* *13:~राम रावण युद्ध = 32 दिन चला* *14:~सेतु निर्माण = 5 दिन में हुआ* *15:~नलनील के पिता = विश्वकर्मा जी है* *16:~त्रिजटा के पिता = विभीषण हैं* *17:~विश्वामित्र राम को ले गए =10 दिन के लिए* *18:~राम ने रावण को सबसे पहले मारा था = 6 वर्ष की उम्र में* *19:~रावण को जिन्दा किया = सुखेन बेद ने नाभि में अमृत रखकर* *श्री राम के दादा परदादा का नाम क्या था?* *नहीं तो जानिये* *1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए*, *2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,* *3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,* *4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,* *5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की* *6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,* *7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,* *8 - विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,* *9 - बाण के पुत्र अनरण्य हुए,* *10- अनरण्य से पृथु हुए,* *11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,* *12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,* *13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,* *14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,* *15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,* *16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,* *17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,* *18- भरत के पुत्र असित हुए,* *19- असित के पुत्र सगर हुए,* *20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,* *21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,* *22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,* *23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भागीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था.भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे* *24- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है* *25- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,* *26- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,* *27- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए,* *28- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,* *29- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,* *30- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,* *31- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,* *32- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,* *33- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,* *34- नहुष के पुत्र ययाति हुए,* *35- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,* *36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,* *37- अज के पुत्र दशरथ हुए,* *38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए* *इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी* *(39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ !!*. *सभी भक्त प्रेम से बोलो* 🕉👣🕉👣🕉👣🕉👣🕉👣 *👣🙏🏻🌼श्री राम चन्द्र जी🌼🙏🏻🕉* 🕉👣🕉👣🕉👣🕉👣🕉👣 *卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐* *🙏🏻🌼🙏🏻*जय श्री राधेकृष्णा*🙏🏻🌼🙏🏻* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* 🙏🏻🌼🙏🏻🌼🙏🏻🌼🙏🏻🌼🙏🏻🌼 *इच्छा मृत्यु* *जब रावण ने जटायु के दोनों पंख काट डाले, तो..* *काल आया और जैसे ही काल आया, मौत आई तो..* *गीधराज जटायु ने कहा -- खबरदार ! ऐ मौत !* *आगे बढ़ने की कोशिश मत करना। मैं मौत को स्वीकार तो करूँगा; लेकिन तू मुझे तब तक नहीं छू सकती,जब तक मैं सीता जी की सुधि प्रभु श्री राम को नहीं सुना देता।* *ईमानदारी से बतायें, इच्छा मृत्यु हुई कि नहीं?* *मरना चाहते हैं जटायु जी कि नहीं, जो..* *मौत को ललकार रहे हैं और मौत छू नहीं पा रही है ।* *काँप रही है खड़ी हो कर।* *गीधराज जटायु ने कहा --* *मैं मौत से डरता नहीं हूँ । तुझे मैं स्वीकार करूँगा; लेकिन मुझे तब तक स्पर्श नहीं करना, जब तक मेरे प्रभु श्री राम न आ जायँ और मैं उन्हें सीताहरण की गाथा न सुना दूँ ।* *मौत तब तक खड़ी रही, काँपती रही;* *लेकिनआपको पता होना चाहिए, इच्छा मृत्यु का वरदान तो मैं मानता हूँ कि गीधराज जटायु को मिला।किन्तु..* *महाभारत के भीष्म पितामह जो महान तपस्वी थे,नैष्ठिक ब्रह्मचारी थे, 6 महीने तक बाणों की शय्या पर लेट करके मौत का इंतजार करते रहे । आँखों से आँसू गिरते थे। भगवान कृष्ण जब जाते थे तो मन ही मन हँसते थे;* *क्योंकि सामाजिक मर्यादा के कारण वहिरंग दृष्टि से उचित नहीं था; लेकिन जब जाते थे तो भीष्म के कर्म को देखकर मन ही मन मुसकराते थे और भीष्म पितामह भगवान कृष्ण को देखकर दहाड़ मारकर रोते थे।* *कन्हैया! मैं कौन से पाप का परिणाम देख रहा हूँ कि आज बाणों की शय्या पर लेटा हूँ ।* *भगवान कृष्ण मन ही मन हँसते थे, वहिरंग दृष्टि से समझा देते थे भीष्म पितामह को; लेकिन याद रखना वह दृश्य महाभारत का है, जब भगवान श्री कृष्ण खड़े हुए हैं,* *भीष्मपितामह बाणों की शय्या पर लेटे हैं, आँखों में आँसू हैं भीष्म के, रो रहे हैं । भगवान मन ही मन मुसकरा रहे हैं ।* *रामायण का यह दृश्य है कि गीधराज जटायु भगवान की गोद रूपी शय्या पर लेटे हैं, भगवान रो रहे हैं और जटायु हँस रहे हैं । बोलो भाई, वहाँ महाभारत में भीष्म पितामह रो रहे हैं और भगवान कृष्ण हँस रहे हैं और रामायण में जटायु जी हँस रहे हैं और भगवान राम रो रहे हैं ।* *बोलो, भिन्नता प्रतीत हो रही है कि नहीं?* *अंत समय में जटायु को भगवान श्री राम की गोद की शय्या मिली; लेकिन भीषण पितामह को मरते समय बाण की शय्या मिली। जटायु अपने कर्म के बल पर अंत समय में भगवान की गोद रूपी शय्या में प्राण त्याग रहा है, राम जी की शरण में, राम जी की गोद में और बाणों पर लेटे लेटे भीष्म पितामह रो रहे हैं । ऐसा अंतर क्यों?* *ऐसा अंतर इसलिए है कि भरे दरबार में भीष्म पितामह ने द्रौपदी की इज्जत को लुटते हुए देखा था, विरोध नहीं कर पाये थे । दुःशासन को ललकार देते, दुर्योधन को ललकार देते; लेकिन द्रौपदी रोती रही, बिलखती रही, चीखती रही, चिल्लाती रही; लेकिन भीष्म पितामह सिर झुकाये बैठे रहे।* *नारी की रक्षा नहीं कर पाये, नारी का अपमान सहते रहे* *उसका परिणाम यह निकला कि इच्छा मृत्यु का वरदान पाने पर भी बाणों की शय्या मिली और गीधराज जटायु ने नारी का सम्मान किया, अपने प्राणों की आहुति दे दी.. तो मरते समय भगवान श्री राम की गोद की शय्या मिली।* *यही अंतर है, इसीलिए भीष्म 6 महीने तक रोते रहे, तड़पते रहे; क्योंकि कर्म ऐसा किया था कि नारी का अपमान देखते रहे और जटायु ने ऐसा सत्कर्म किया कि नारी का अपमान नहीं सह पाये,* *नारी के सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।इसलिए* *जल भरि नयन कहत रघुराई।* *तात करम ते निज गति पाई।।* *आज भगवान ने जटायु को अपना धाम दे दिया । तो.. जटायु को भगवान का धाम मिला, भगवान का रूप मिला और वे भगवानमय बन गये। इस प्रकार जटायु चतुर्भुज रूप धारण करके भगवान के धाम को प्राप्त हुए ।* *बोलिए भक्त और उनके भगवान की जय।* *जो दूसरों के साथ गलत होते देखकर भी आंखें मूंद लेते हैं उनकी गति भीष्म जैसी होती है और जो अपना परिणाम जानते हुए भी औरों के लिए संघर्ष करता है उसका माहात्म्य जटायु जैसा कीर्तिवान होता है* 👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣 *👣🙏🏻🌼*जय मां सिद्धिदात्री*🌼🙏🏻👣* 👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣 ☘️🌹🙏*जय श्री राम*🙏🌹☘️ *अयोध्या के वासी राम, *रघु कुल के कहलाए राम, *पुरुषो में हैं उत्तम राम, *सदा जपो श्री राम का नाम ! ☘️💨🙏*प्रातः वंदन*🙏💨☘️ आपको सपरिवार *श्री राम नवमी* की हार्दिक शुभकामनाएं! *आप सभी भाई-बहनों का हर पल शुभ व मंगलमय हो* ☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️💨☘️

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devendra tiwari Apr 2, 2020

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pramod kumar Apr 2, 2020

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monika Apr 2, 2020

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Lalan Singh Apr 2, 2020

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