Mamta Chauhan
Mamta Chauhan Feb 23, 2021

Shub Ratri Vandan Radhey Radhey 🌿 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌿🌿🌿

Shub Ratri Vandan Radhey Radhey 🌿 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌿🌿🌿

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कामेंट्स

madan pal 🌷🙏🏼 Feb 23, 2021
जय श्री राधे राधे कृष्णा ज़ी शूभ रात्रि वंदन ज़ी आपका हर पल शूभ मंगल हों ज़ी 🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷

Hemat Feb 23, 2021
Jai Shree Radhe Krishna Ji Namah, Radhe Radhe Ji, Beautiful Post, Anmol Massage, Dhanyawad Vandaniy Bahena Ji Pranam, Apno Ke Liye Aap Anmol Hai, Hamesha Apna Dhyan Rakhe, Sukhad Avam Mangalmayi Ratri ki Shubh Kamnao... Shubh Ratri

✨Shuchi Singhal✨ Feb 23, 2021
Jai Shri Krishna Radhe Radhe Shub Ratri dear sister ji Ram ji Ki kirpa aapki family pe bni rhe pyari Bhena ji🙏🍁🙏🍁

RAJ RATHOD Feb 23, 2021
🍁🌷🌻💐🙏जय श्री हरि 🙏जय श्री हनुमान जी 🙏🌷🍁🌻💐🌿

Madhuben patel Feb 23, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जी शुभरात्रि की मंगल कामनाएं प्यारी बहना जी आपका हर दिन शुभ हो

ललन कुमार-8696612797 Feb 23, 2021
जिसका मिलना तय होता है किस्मत किसी न किसी बहाने उन्हें मिला ही देता है।शुभ रात्रि वंदन जी।जय श्री राधे राधे जी।

raadhe krishna Feb 23, 2021
जय श्री राधे राधे कृष्णा🌹🌹 शुभ रात्रि वंदन🌹🌹

🌀SOM DUTT SHARMA🌀 Feb 23, 2021
🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 Sri Radhey 🙏 Radhey g good night ji sweet dreams ji nice 👍🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀

laltesh kumar sharma Feb 23, 2021
🍒🌟⭐🍒 jai shree ram ji 🍒⭐🌟🍒 jai shree hanuman ji 🍒⭐🌟🍒🙏🙏

Sagar ji🙏 Feb 23, 2021
जय श्री राधे कृष्णा🌻🙏 शुभ रात्रि वंदन राधे राधे दीदी जी🌻🙏ईश्वर की कृपा से सदा स्वस्थ एवं खुशहाल रहे🙏🌹

🌷JK🌷 Feb 23, 2021
🌷🌷Radhe Radhe🌷🌷 Good Night ji🙏

Brajesh Sharma Feb 23, 2021
जय गोविंदा जय गोपाला जय जय श्री राधे कृष्णा जी

Dhananjay Khanna Feb 24, 2021
Jai Sri Ganesha ji 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 Aap Ka din shubh ho aur aap har pal Khush rahein 🙏🙏Jai Mata Di 🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

. "क्यों लिया श्रीहरि विष्णु ने रामावतार ?" तीन पौराणिक प्रसंग हैं जो भगवान विष्णु के श्री राम के रूप में अवतार लेने से सम्बंधित है। "पहला प्रसंग" एक बार सनकादि मुनि भगवान विष्णु के दर्शन करने वैकुंठ आए। उस समय वैकुंठ के द्वार पर जय-विजय नाम के दो द्वारपाल पहरा दे रहे थे। जब सनकादि मुनि द्वार से होकर जाने लगे तो जय-विजय ने हंसी उड़ाते हुए उन्हें बेंत अड़ाकर रोक लिया। क्रोधित होकर सनकादि मुनि ने उन्हें तीन जन्मों तक राक्षस योनी में जन्म लेने का श्राप दे दिया। क्षमा मांगने पर सनकादि मुनि ने कहा कि तीनों ही जन्म में तुम्हारा अंत स्वयं भगवान श्रीहरि करेंगे। इस प्रकार तीन जन्मों के बाद तुम्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी। पहले जन्म में जय-विजय ने हिरण्यकशिपु व हिरण्याक्ष के रूप में जन्म लिया। भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का तथा नृसिंह अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का वध कर दिया। दूसरे जन्म में जय-विजय ने रावण व कुंभकर्ण के रूप में जन्म लिया। इनका वध करने के लिए भगवान विष्णु को राम अवतार लेना पड़ा। तीसरे जन्म में जय-विजय शिशुपाल और दंतवक्र के रूप में जन्मे। इस जन्म में भगवान श्रीकृष्ण ने इनका वध किया। "दूसरा प्रसंग" मनु और उनकी पत्नी शतरूपा से ही मनुष्य जाति की उत्पत्ति हुई। इन दोनों पति-पत्नी के धर्म और आचरण बहुत ही पवित्र थे। वृद्ध होने पर मनु अपने पुत्र को राज-पाठ देकर वन में चले गए। वहां जाकर मनु और शतरूपा ने कई हजार साल तक भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की। प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और वर मांगने के लिए कहा। मनु और शतरूपा ने श्रीहरि से कहा कि हमें आपके समान ही पुत्र की अभिलाषा है। उनकी इच्छा सुनकर श्रीहरि ने कहा कि संसार में मेरे समान कोई और नहीं है। इसलिए तुम्हारी अभिलाषा पूरी करने के लिए मैं स्वयं तुम्हारे पुत्र के रूप में जन्म लूंगा। कुछ समय बाद आप अयोध्या के राजा दशरथ के रूप में जन्म लेंगे, उसी समय मैं आपका पुत्र बनकर आपकी इच्छा पूरी करूंगा। इस प्रकार मनु और शतरूपा को दिए वरदान के कारण भगवान विष्णु को राम अवतार लेना पड़ा। "तीसरा प्रसंग" देवर्षि नारद को एक बार इस बात का घमंड हो गया कि कामदेव भी उनकी तपस्या और ब्रह्मचर्य को भंग नहीं कर सके। नारदजी ने यह बात शिवजी को बताई। देवर्षि के शब्दों में अहंकार भर चुका था। शिवजी यह समझ चुके थे कि नारद अभिमानी हो गए हैं। भोलेनाथ ने नारद से कहा कि भगवान श्रीहरि के सामने अपना अभिमान इस प्रकार प्रदर्शित मत करना। इसके बाद नारद भगवान विष्णु के पास गए और शिवजी के समझाने के बाद भी उन्होंने श्रीहरि को पूरा प्रसंग सुना दिया। नारद भगवान विष्णु के सामने भी अपना घमंड प्रदर्शित कर रहे थे। तब भगवान ने सोचा कि नारद का घमंड तोड़ना होगा, यह शुभ लक्षण नहीं है। जब नारद कहीं जा रहे थे, तब रास्ते में उन्हें एक बहुत ही सुंदर नगर दिखाई दिया, जहां किसी राजकुमारी के स्वयंवर का आयोजन किया जा रहा था। नारद भी वहां पहुंच गए और राजकुमारी को देखते ही मोहित हो गए। यह सब भगवान श्रीहरि की माया ही थी। राजकुमारी का रूप और सौंदर्य नारद के तप को भंग कर चुका था। इस कारण उन्होंने राजकुमारी के स्वयंवर में हिस्सा लेने का मन बनाया। नारद भगवान विष्णु के पास गए और कहा कि आप अपना सुंदर रूप मुझे दे दीजिए, जिससे कि वह राजकुमारी स्वयंवर में मुझे ही पति रूप में चुने। भगवान ने ऐसा ही किया, लेकिन जब नारद मुनि स्वयंवर में गए तो उनका मुख वानर के समान हो गया। उस स्वयंवर में भगवान शिव के दो गण भी थे, वे यह सभी बातें जानते थे और ब्राह्मण का वेष बनाकर यह सब देख रहे थे। जब राजकुमारी स्वयंवर में आई तो बंदर के मुख वाले नारदजी को देखकर बहुत क्रोधित हुई। उसी समय भगवान विष्णु एक राजा के रूप में वहां आए। सुंदर रूप देखकर राजकुमारी ने उन्हें अपने पति के रूप में चुना लिया। यह देखकर शिवगण नारदजी की हंसी उड़ाने लगे और कहा कि पहले अपना मुख दर्पण में देखिए। जब नारदजी ने अपने चेहरा वानर के समान देखा तो उन्हें बहुत गुस्सा आया। नारद मुनि ने उन शिवगणों को राक्षस योनी में जन्म लेने का श्राप दे दिया। शिवगणों को श्राप देने के बाद नारदजी भगवान विष्णु के पास गए और क्रोधित होकर उन्हें बहुत भला-बुरा कहने लगे। माया से मोहित होकर नारद मुनि ने श्रीहरि को श्राप दिया कि- जिस तरह आज मैं स्त्री के लिए व्याकुल हो रहा हूं, उसी प्रकार मनुष्य जन्म लेकर आपको भी स्त्री वियोग सहना पड़ेगा। उस समय वानर ही तुम्हारी सहायता करेंगे। भगवान विष्णु ने कहा-ऐसा ही हो और नारद मुनि को माया से मुक्त कर दिया। तब नारद मुनि को अपने कटु वचन और व्यवहार पर बहुत ग्लानि हुई और उन्होंने भगवान श्रीहरि से क्षमा मांगी। भगवान श्रीहरि ने कहा कि- ये सब मेरी ही इच्छा से हुआ है अत: तुम शोक न करो। उसी समय वहां भगवान शिव के गण आए, जिन्हें नारद मुनि ने श्राप दिया था। उन्होंने नारद मुनि ने क्षमा मांगी। तब नारद मुनि ने कहा कि- तुम दोनों राक्षस योनी में जन्म लेकर सारे विश्व को जीत लोगे, तब भगवान विष्णु मनुष्य रूप में तुम्हारा वध करेंगे और तुम्हारा कल्याण होगा। नारद मुनि के इन्हीं श्रापों के कारण उन शिव गणों ने रावण व कुंभकर्ण के रूप में जन्म लिया और श्रीराम के रूप में अवतार लेकर भगवान विष्णु को स्त्री वियोग सहना पड़ा। ----------:::×:::---------- "जय श्रीराम" ******************************************

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Renu Singh Feb 23, 2021

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🍁💎💓🍁💎💓🍁💎💓🍁 ♦️♦️ *रात्रि कहानी* ♦️♦️ *💥ईश्वर बहुत ही दयालु है😇☝🏻* ✍एक राजा का एक विशाल फलों का बगीचा था। उसमें तरह-तरह के फल लगते थे। उस बगीचे की सारी देख-रेख एक किसान‌‌ अपने परिवार के साथ करता था। और वो किसान हर दिन बगीचे के ताजे फल लेकर राजा‌ के राजमहल में जाता था। एक दिन किसान ने पेड़ों पर देखा, कि नारियल, अनार, अमरूद और अंगूर आदि पक कर‌‌ तैयार हो रहे हैं। फिर वो किसान सोचने लगा- कि आज कौन सा फल‌ राजा को अर्पित करूं? और उसे लगा कि आज राजा को अंगूर अर्पित करने चाहिएं, क्योंकि वो बिल्कुल पक कर तैयार हैं। फिर उसने अंगूरों की टोकरी भर ली और राजा को देने चल पड़ा। किसान जब राजमहल में पहुंचा, तो राजा किसी दूसरे ख्याल में खोया हुआ था और थोड़ी सा नाराज भी लग रहा था। किसान ने रोज की तरह मीठे रसीले अंगूरों की टोकरी राजा के सामने रख दी, और थोड़ी दूरी पर बैठ गया। अब राजा उसी ख्यालों में टोकरी में से अंगूर उठाता, एक खाता और एक खींचकर किसान के माथे पर निशाना साधकर फेंक देता। राजा का अंगूर जब भी किसान के माथे या शरीर पर लगता था, तो किसान कहता- ईश्वर बड़ा ही दयालु है। राजा फिर और जोर से अंगूर फेंकता था, और किसान फिर वही कहता- ईश्वर बड़ा ही दयालु है। थोड़ी देर बाद जब राजा को एहसास हुआ, कि वो क्या कर रहा है और प्रत्युत्तर क्या आ रहा है, तो वो संभलकर बैठ गया और फिर किसान से कहा- मैं तुम्हें बार-बार अंगूर मार रहा हूं, और ये अंगूर तुम्हें लग भी रहे हैं, पर फिर भी तुम बार-बार यही क्यों कह रहे हो- ईश्वर बड़ा ही दयालु है। किसान बड़ी ही नम्रता से बोला- राजा जी! बागान में आज नारियल, अनार, अमरुद और अंगूर आदि फल तैयार थे, पर मुझे भान हुआ कि क्यों न मैं आज आपके लिए अंगूर ले चलूं। अब लाने को तो मैं नारियल, अनार और अमरुद भी ला सकता था, पर मैं अंगूर लाया। यदि अंगूर की जगह नारियल, अनार या अमरुद रखे होते, तो आज मेरा हाल क्या होता? इसीलिए मैं कह रहा था- ईश्वर बड़ा ही दयालु है। तात्पर्य------ इसी प्रकार ईश्वर भी हमारी कई मुसीबतों को बहुत ही हल्का करके हमें उबार लेता है। पर ये तो हम ही नाशुकरे हैं जो शुक्र न करते हुए, उल्टा उसे ही गुनहगार ठहरा देते हैं। मेरे साथ ही ऐसा क्यूं हुआ? मेरा क्या कसूर था ? *नित याद करो मन से शिव को💥* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

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✨Shuchi Singhal✨ Feb 23, 2021

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दो अक्षर की "मौत" और तीन अक्षर के "जीवन" में ढाई अक्षर का "दोस्त" हमेंशा बाज़ी मार जाता हैं.. क्या खुब लिखा है किसी ने ... "बक्श देता है 'खुदा' उनको, ... ! जिनकी 'किस्मत' ख़राब होती है ... !! वो हरगिज नहीं 'बक्शे' जाते है, ... ! जिनकी 'नियत' खराब होती है... !!" न मेरा 'एक' होगा, न तेरा 'लाख' होगा, ... ! न 'तारिफ' तेरी होगी, न 'मजाक' मेरा होगा ... !! गुरुर न कर "शाह-ए-शरीर" का, ... ! मेरा भी 'खाक' होगा, तेरा भी 'खाक' होगा ... !! जिन्दगी भर 'ब्रांडेड-ब्रांडेड' करने वालों ... ! याद रखना 'कफ़न' का कोई ब्रांड नहीं होता ... !! कोई रो कर 'दिल बहलाता' है ... ! और कोई हँस कर 'दर्द' छुपाता है ... !! क्या करामात है 'कुदरत' की, ... ! 'ज़िंदा इंसान' पानी में डूब जाता है और 'मुर्दा' तैर के दिखाता है ... !! 'मौत' को देखा तो नहीं, पर शायद 'वो' बहुत "खूबसूरत" होगी, ... ! "कम्बख़त" जो भी 'उस' से मिलता है, "जीना छोड़ देता है" ... !! 'ग़ज़ब' की 'एकता' देखी "लोगों की ज़माने में" ... ! 'ज़िन्दों' को "गिराने में" और 'मुर्दों' को "उठाने में" ... !! 'ज़िन्दगी' में ना ज़ाने कौनसी बात "आख़री" होगी, ... ! ना ज़ाने कौनसी रात "आख़री" होगी । मिलते, जुलते, बातें करते रहो यार एक दूसरे से ना जाने कौनसी "मुलाक़ात" "आख़री होगी" ... !

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Archana Singh Feb 23, 2021

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ANITA Feb 23, 2021

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