मायमंदिर फ़्री कुंडली
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🙏🌹🥀💕💕🥀🌹💕💕🥀🌹🙏 🙏🎉🎉जय श्री राधे कृष्णा 🎉🎉🙏 यह मैसेज जनसाधारण के लिए है और बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसे कृपया अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य और खासकर बच्चों को अवश्य पढ़ाएं और समझाएं:- कई वर्ष पहले जे0 पी0 होटल वसंत विहार नई दिल्ली में आग की दुर्घटना हुई, जिसमें बहुत सारे भारतीय मारे गए लेकिन जापानी और अमेरिकन नहीं। जानते हैं क्यों? मैं आपको बताता हूँ:- 1. सभी अमेरिकन और जापानी लोगों ने अपने कमरों के दरवाज़ों के नीचे खाली जगहों में गीले तौलिये लगा दिए और खाली जगहों को सील कर दिया, जिससे धुआं उनके कमरों तक नहीं पहुंच सका। या बहुत कम मात्रा में पहुंचा। 2. इन सभी विदेशी मेहमानों ने अपनी नाक पर गीले रुमाल बांध लिए, जिससे उनके फेफड़ों में धुआं प्रवेश न कर सके। 3. सभी विदेशी मेहमान अपने अपने कमरों के फर्श पर औंधे लेट गए। (क्योंकि धुआं हमेशा ऊपर की ओर उठता है) इस प्रकार जब तक अग्निशमन विभाग के कर्मचारी आये, तब तक वे अपने आपको जीवित रख पाने में सफल रहे। जबकि होटल के भारतीय मेहमानों को इन सुरक्षा उपायों के बारे में पता ही नहीं था इसलिए वे इधर से उधर भागने लगे और उनके फेफड़ों में धुआं भर गया और कुछ समय में ही उनकी मौत हो गई। अभी हाल ही में (24.05.2019) को सूरत (गुजरात) के एक कोचिंग सेंटर में आग की दुर्घटना हुई जिसमें कई बच्चों की जान इस अज्ञानता और भगदड़ के कारण हो गई। यदि उन्हें इन सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी होती तो शायद इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की जान न जाती। याद रखें, आग लगने की स्थिति में ज़्यादातर मौतें शरीर में धुआं जाने से होती हैं, जबकि आग के कारण कम होती हैं। क्योंकि आग की स्थिति में हम लोग धैर्य से काम नहीं लेते हैं और इधर से उधर भागने लगते हैं। भागने से हमारी सांसें तेज़ हो जाती हैं जिसके कारण बहुत सारा धुआं हमारे फेफड़ों में प्रवेश कर जाता है और हम बेहोश हो जाते हैं और ज़मीन पर गिर जाते हैं तथा फिर आग की लपटों से घिर जाते हैं। इसलिए आग लगने की स्थिति में ये सुरक्षा उपाय अपनाएं:- 1. भगदड़ न मचाएं और अपने होश कायम रखें ताकि आप दूसरों की मदद कर सकें। 2. अपने नाक पर गीला रुमाल या गीला लेकिन घना कपड़ा बांधें। तथा फर्श पर लेट जाएं। 3. यदि आप किसी कमरे में बंद हों तो उसके खिड़की दरवाज़े बंद कर दें तथा उनके नीचे या ऊपर या कहीं से भी धुआं आने की संभावना हो तो उस जगह को भी गीले कपड़े से सील कर दें। 4 अपने आसपास के लोगों से भी ऐसा ही करने को कहें। 5. अग्निशमन की सहायता की प्रतीक्षा करें। याद रखें, अग्निशमन वाले प्रत्येक कमरे की जांच करते हैं और वे फंसे हुए व्यक्तियों को ढूंढ लेंगे। 6. यदि आपका मोबाइल काम कर रहा हो तो आप लगातार 100, 101 या 102 पर मदद के लिए कॉल करते रहें। उन्हें आप अपने स्थान की जानकारी भी दें। वे आप तक सबसे पहले पहुंचेंगे। आप इस मैसेज को अपने प्रियजनों तक कुछ सेकंड में पहुंचा सकते हैं। दुर्घटना में कोई भी फंस सकता है। इसलिए सुरक्षा उपायों की जानकारी सबको अवश्य होनी चाहिए। मेरी सलाह है, आपके हर प्रियजनों तक पहुंचना चाहिए। 🙏🙏🙏🙏🙏 शुभरात्रि वंदन जी🙏🌹🌹

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कामेंट्स

Sandhya Nagar Jun 12, 2019
जय श्री राधे कृष्णा जय श्री वृंदावन धाम 💗श्री भगवान् का ऐश्वर्य लीला 💗 ब्रज में एक बार सब ग्वाल बाल जिद पे अड़ गए,और श्री भगवान से उनका ईश्वरिय रूप दिखाने की जिद करने लगे। बोलने लगे.... अरे कृष्णा मेरे बाबा बोलते है की तू भगवान है। क्या तू सच में भगवान ह? अगर है तो अपना भगवान वाला रूप दिखा, दूसरा गोप बालक बोला हा ये भगवान है मेरी मइया बोलती है जब ये पैदा हुआ था तो जेल के दरवाजे अपने आप खुल गए थे और देवी दुर्गा दुष्ट कंस को चेतावनी देते हुए बोली थी की रे मुर्ख कंस त्रिभुवन पति का जन्म हो चूका है तू उनसे नहीं बच सकता वो समस्त देवताओ के भी स्वामी है और वो ही तेरा संहार करेंगे। एक और ग्वाल बाल बोला मेरे बाबा बोलते है ना जब ये पैदा हुआ था तो भगवान शिव इसके दर्शन को आये थे। इसको गोद में लेकर खूब प्रेम कर रहे थे प्रेम वश महादेव की आँखों से अश्रु प्रवाहित हो रहे थे। और बार बार बोल रहे थे कि ये ही समस्त सृष्टि के ईश्वर है जो आज बाल रूप में मेरे गोद में है,मैं हमेशा समाधि लगाकर इनका ध्यान करता हूं,इनके ही नाम का सैदव जाप करता रहता हुँ । तो इसका मतलब हमारा कान्हा सच में भगवान हैं। एक गोप बालक बोला नहीं मेरी मैया बोलती है कि कान्हा तो हम लोग जिनको भगवान समझते है ये उनका भी भगवान है। शिव जी ,ब्रम्हा जी ,देवी जी,समस्त देवताओं ने इसके ऊपर पुष्प वर्षा की थी इसके जन्मोत्सव के अवसर पर .......और ये जन्म लेते ही असुरो को मारने लगा था। ये हमारा कान्हा ही सच्चा भगवान है। फिर तो सब गोप बालक मिल कर बोले.... सुन कान्हा आज अपना भगवान वाला रूप दिखा हम सबको। सब सुन लो भाई अगर आज कृष्णा ने हमको,अपना भगवान वाला रूप नहीं दिखाया तो इसको अपने साथ गेंद नहीं खेलने देंगे। और आगे से भी इसके साथ कोई नहीं खेलेगा। भक्तवत्सल श्री भगवान ग्वाल बालकों की जिद मान गए और अगले ही पल गोपवृन्द बैकुंठ धाम में पहुच गये। वहाँ का ऐश्वर्य भला कौन वर्णन कर सकता है। हजारों जन्मो की तपस्या से भी जिस धाम में जाना असम्भव है। योगी,मुनि ॐ जप कर लाख जतन करते हैं बैकुंठ दर्शन करने को,.... धन्य है वो गोप बालक जो अपने कृष्ण से इतना प्रेम करते है की स्वमं भगवान उनके संग खेल रहे है और प्रेमवश अपने बैकुंठ धाम का दर्शन भी करा रहे है। ये है जीव का ईश्वर से परम प्रेम जो पूर्ण पुरुषोत्तम भी अपने अधीन कर लेता है। ग्वाल बालक देखते है की बैकुंठ में कान्हा महाराजा के जैसे एक रत्नजड़ित ऊँचे सिंहासन पे विराजित है और और समस्त देवी देवता उनका उत्तम स्तोत्रों से स्तुति कर रहें हैं। गोप बालक सबसे पीछे है वो अपने कान्हा की स्तुति होते हुए देख रहें हैं।काफी समय हो गया श्री भगवान की स्तुति तो बंद ही नहीं हो रही समस्त देवगण उनकी स्तुति सेवा में लगे ही हैं। सेवा,आरती ,स्तुति ,पूजा चलती ही जा रही रही है....... अब तो बहुत समय हो गया, गोप बालकों से रहा नहीं गया किसी तरह से हिम्मत जुटा कर एक गोप बालक ने पीछे से आवाज दे ही दिया ........ये कान्हा गइया कब चऱायेगा ? गोधन बेला हो गई बालक के इतना बोलते ही श्री भगवान की स्तुति में लगें देवगण भी पीछे मुड़कर देखने लगें गोप बालक तो डर गए किन्तु देवगण सोचने लगे धन्य हैं ब्रज के ये सब बालक, ना जाने कितने जन्मों के उनके पुण्य है जो ब्रज में जन्म लिए और समस्त चराचर पति हम देवताओं के स्वामी उनसे इतना स्नेह करते है। मनुष्य रूप में उनके संग बाल लीला करते है। ब्रज के ग्वालबालों की जय हो। अगले ही पल श्री भगवान ने अपने ऐश्वर्य लीला का समापन कर दिया सभी गोपवृन्द वापस ब्रज में अपने सखा कृष्ण के साथ खेल खेलने में व्यस्त हो गए। वो अपने कृष्ण को भगवान नहीं अपना सखा मानते है। उनका कान्हा अब उनके साथ है,वो सब मिलकर गइया चऱायंगे, खेल खेलेंगे ,कान्हा उनके साथ भोजन करेंगे। समस्त ऐशवर्य कि देवी श्रीमती लक्ष्मी देवी भगवान के कोमल चरणकमलो की सेवा में सदा लगी रहती है। सारे देवगण श्री भगवान की सेवा में सदा लगे रहते है। भगवान कृष्ण समस्त जीवो के रचयिता है सबसे प्रेम करते है हम सबको भी उनसे प्रेम करना चाहिए। श्री भगवान अपने भक्तों के प्रेम के भूखे है। माधव भक्तवत्सल करुणासागर है। हम कृष्ण से थोड़ा सा भी प्रेम करे तो बदले में वो हमसे कई गुना ज्यादा प्रेम करते है ये उनकी दयालुता है। भगवान श्री कृष्ण की जय हो।

Savita Jun 12, 2019
Jai Shri krishna 🌸 🌸 radhe radha 🌺 🍀 kanha g ka ashirvad ap par sada bana rahe 🌷 perbbu apki har manokamna puri kare 🌺

yogendra sharma भारद्वाज Jun 12, 2019
जय श्री राधे जय श्री कृष्णा जी ऊँ श्री गणेशाय नमः जय माँ गंगा हर हर महादेव आपके लिए ढेर सारी शुभकामनाएं शुभाशिष आपका मंगल हो जय श्री राम

अजित सिंह Jun 12, 2019
मेरे स्वीट अंनु जी शुभसंध्यावंदनजी र।धेकृष्ण बहेन। जी

Sanjay Sharma Jun 12, 2019
जय श्री राधे कृष्णा जय श्री श्याम जय श्री गणेश ओम् गण गणपतए नमः शुभ संध्या जी मेरी बहन आप कैसे हैं बहन आप सदा खुश रहिए और सदा तरक्की की राह पर अग्रसर रहे ईश्वर मेरी बहन के जीवन में सदैव खुशियों का भंडार भरा रहे

ವೆಂಕಟೇಶ (venkatesh) Jun 12, 2019
🙏🙏🙏🌺🌹🌷 Jai Sri Radha Krishna Sri Ganesh ki krupa dristi aap aur aapki parivar sada bani rahe subha Sandhya vandan ji 🌷🌷

ओम .. Jun 12, 2019
👍👍👍👌👌👌👌 very nice post Anu Thanks for this post Anu

Sangeeta Lal Jun 12, 2019
Jay shree Radhe Krishna ji shubh ratri ji aap aur aapke parivar hamesha khush rahe ji 🙏🙏

SUNIL KUMAR SHARMA Jun 12, 2019
Good Night Sister, Every moment of your coming is auspicious and good, the grace of Lord Ganesha will always be maintained on you and your family.God bless you. 🙏🙏🙏🙏🙏

umesh sharma Jun 15, 2019
🍀🌹🌹Radhe Radhe..🌹🌹🍀have a beautiful evening.🍃🌷🌷🌿🌹Jai shrikrishna..🌿🌹

umesh sharma Jun 18, 2019
🍀🌹Radhe Radhe🌹🍀 good morning.v nice bhajan..god bless you..🌷🌷

🙏🌹🌹🌹❤️❤️❤️🌹🌹🌹🙏 🙏🌹🌹जय श्री राधे कृष्णा🌹🌹🙏 🙏कृष्ण जी का नाम लड्डू गोपाल कैसे पड़ा ? भगवान श्रीकृष्ण के कई नाम हैं, श्याम, मोहन, बंसीधर, कान्हा और न जाने कितने, लेकिन इनमें से एक प्रसिद्ध नाम है लड्डू गोपाल। क्या आपको पता है भगवान कृष्ण का नाम लड्डू गोपाल क्यों पड़ा। ब्रज भूमि में बहुत समय पहले श्रीकृष्ण के परम भक्त रहते थे.. कुम्भनदास जी । उनका एक पुत्र था रघुनंदन । कुंम्भनदास जी के पास बाँसुरी बजाते हुए श्रीकृष्ण जी का एक विग्रह था, वे हर समय प्रभु भक्ति में लीन रहते और पूरे नियम से श्रीकृष्ण की सेवा करते। वे उन्हें छोड़ कर कहीं नहीं जाते थे, जिससे उनकी सेवा में कोई विघ्न ना हो। एक दिन वृन्दावन से उनके लिए भागवत कथा करने का न्योता आया। पहले तो उन्होंने मना किया, परन्तु लोगों के ज़ोर देने पर वे जाने के लिए तैयार हो गए कि भगवान की सेवा की तैयारी करके वे कथा करके रोज वापिस लौट आया करेंगे व भगवान का सेवा नियम भी नहीं छूटेगा। अपने पुत्र को उन्होंने समझा दिया कि भोग मैंने बना दिया है, तुम ठाकुर जी को समय पर भोग लगा देना और वे चले गए। रघुनंदन ने भोजन की थाली ठाकुर जी के सामने रखी और सरल मन से आग्रह किया कि ठाकुर जी आओ भोग लगाओ । उसके बाल मन में यह छवि थी कि वे आकर अपने हाथों से भोजन करेगें जैसे हम खाते हैं। उसने बार-बार आग्रह किया, लेकिन भोजन तो वैसे ही रखा था.. अब उदास हो गया और रोते हुए पुकारा की ठाकुरजी आओ भोग लगाओ। ठाकुरजी ने बालक का रूप धारण किया और भोजन करने बैठ गए और रघुनंदन भी प्रसन्न हो गया। रात को कुंम्भनदास जी ने लौट कर पूछा कि भोग लगाया था बेटा, तो रघुनंदन ने कहा हाँ। उन्होंने प्रसाद मांगा तो पुत्र ने कहा कि ठाकुरजी ने सारा भोजन खा लिया। उन्होंने सोचा बच्चे को भूख लगी होगी तो उसने ही खुद खा लिया होगा। अब तो ये रोज का नियम हो गया कि कुंम्भनदास जी भोजन की थाली लगाकर जाते और रघुनंदन ठाकुरजी को भोग लगाते। जब प्रसाद मांगते तो एक ही जवाब मिलता कि सारा भोजन उन्होंने खा लिया। कुंम्भनदास जी को अब लगने लगा कि पुत्र झूठ बोलने लगा है, लेकिन क्यों.. ?? उन्होंने उस दिन लड्डू बनाकर थाली में सजा दिये और छुप कर देखने लगे कि बच्चा क्या करता है। रघुनंदन ने रोज की तरह ही ठाकुरजी को पुकारा तो ठाकुरजी बालक के रूप में प्रकट हो कर लड्डू खाने लगे। यह देख कर कुंम्भनदास जी दौड़ते हुए आये और प्रभु के चरणों में गिरकर विनती करने लगे। उस समय ठाकुरजी के एक हाथ मे लड्डू और दूसरे हाथ का लड्डू मुख में जाने को ही था कि वे जड़ हो गये । उसके बाद से उनकी इसी रूप में पूजा की जाती है और वे ‘लड्डू गोपाल’ कहलाये जाने लगे..!! 🙏🌹🌹बोलिये लड्डू गोपाल की जय हो...🌹🌹🙏

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P.B Jun 25, 2019

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🙏🌹🌹🌹जय श्री श्याम्🌹🌹🌹🙏 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳 🥭 *सही उपयोग।* 🥭 🥭 बहुत समय पहले की बात हैं एक गरीब वृद्ध पिता के पास अपने अंतिम समय में दो बेटों को देने के लिए मात्र एक आम था। पिताजी आशीर्वाद स्वरूप दोनों को वही देना चाहते थे। किंतु बड़े भाई ने आम हठपूर्वक ले लिया। रस चूस लिया छिल्का अपनी गाय को खिला दिया। गुठली छोटे भाई के आँगन में फेंकते हुए कहा – “लो, ये पिताजी का तुम्हारे लिए आशीर्वाद है।” 🥭 छोटे भाई ने ब़ड़ी श्रद्धापूर्वक गुठली को अपनी आँखों व सिर से लगाकर गमले में गाढ़ दिया। छोटी बहू पूजा के बाद बचा हुआ जल गमले में डालने लगी। कुछ समय बाद आम का पौधा उग आया, जो देखते ही देखते बढ़ने लगा। 🥭 छोटे भाई ने उसे गमले से निकालकर अपने आँगन में लगा दिया। कुछ वर्षों बाद उसने वृक्ष का रूप ले लिया। वृक्ष के कारण घर की धूप से रक्षा होने लगी, साथ ही प्राणवायु भी मिलने लगी। बसंत में कोयल की मधुर कूक की आवाज सुनाई देने लगी। बच्चे पेड़ की छाँव में किलकारियाँ भरकर खेलने लगे। 🥭 पेड़ की शाख से झूला बाँधकर झूलने लगे। पेड़ की छोटी – छोटी लकडीयाँ हवन करने एवं बड़ी लकड़ियाँ घर के दरवाजे-खिड़कियों में भी काम आने लगीं। आम के पत्ते त्योहारों पर तोरण बाँधने के काम में आने लगे। 🥭 धीरे-धीरे वृक्ष में कैरियाँ लग गईं। कैरियों से अचार व मुरब्बा डाल दिया गया। आम के रस से घर-परिवार के सदस्य रस-विभोर हो गए तो बाजार में आम के अच्छे दाम मिलने से आर्थिक स्थिति मजबूत हो गई। 🥭 रस से पाप़ड़ भी बनाए गए, जो पूरे साल मेहमानों व घर वालों को आम रस की याद दिलाते रहते। 🥭 ब़ड़े बेटे को आम फल का सुख क्षणिक ही मिला तो छोटे बेटे को पिता का “आशीर्वाद’ दीर्घकालिक व सुख- समृद्धिदायक मिला।” 🧚‍♂ *दोस्तों, आज के सभी मनुष्यों का यही हाल है। परमात्मा हमे सब कुछ देता है, सही उपयोग हम करते नही हैं और सदैव ही दोष परमात्मा और किस्मत को देते रहते हैं।* 🙏🌹🌹🌹आप का दिन शुभ रहे जी🌹🌹🌹🙏 🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳

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shrikant mundra Jun 25, 2019

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Suresh Khurana Jun 25, 2019

+80 प्रतिक्रिया 21 कॉमेंट्स • 9 शेयर
Vinod Keshav lonkar Jun 25, 2019

+10 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 10 शेयर

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