मैंने सुना है एक हंस जा रहा था उड़ा हुआ अपनी हंसनी के साथ कि रात थक गया था एक वृक्ष पर बसेरा किया। कौवे का दिल आ गया उसकी हंसनी पर। स्वाभाविक सोचा होगा कौवे ने हेमामालिनी को कहां उड़ाए ले जा रहे हैं बच्चू अब बचकर निकल न सकोगे कौओं का ही डेरा था उस वृक्ष पर। उसने बाकी कौओं को भी कहा कि इसको निकलने न देंगे ऐसी प्यारी चीज कहां लिए जा रहा है। सुबह हुई जब हंस उड़ने लगा तो कौवे ने कहा ठहरो भाई वह जो कौआ नेता था कौओं का उसने कहा मेरी पत्नी को कहां लिए जा रहे हो? हंस ने कहा तुम्हारी पत्नी होश से बात करो यह हंसनी है तुम कौवे हो कौवे ने कहा होश से तू बात कर क्या काले आदमी की गोरी पत्नी नहीं होती? और यह रंगभेद नहीं चलेगा। यह वर्णभेद नहीं चलेगा। किस जमाने की बातें कर रहा है? कोई मनु महाराज के जमाने की बातें कर रहा है? माना कि गोरी है मगर पत्नी मेरी है और न हो तो पंचायत बुला ली जाए। तब जरा हंस डरा क्योंकि पंचायत तो वे ही कौवे ही थे वहां तो कोई और हंस तो था नहीं। पंचायत तो तय कर दे। कौओं की पंचायत जुड़ी। और कौओं की पंचायत ने तय कर दिया कि पत्नी कौवे की है। हंस जार-जार रो रहा है मगर करे क्या? भीड़-भाड़ कौओं की तुम्हारे चारों तरफ भी कौओं की भीड़-भाड़ है। उनका सारा उपाय तुम्हें विस्मरण करा देने का है। वे खुद भी भूले हैं वे तुम्हें भी भूला रहे हैं। भीड़ से जागना पड़ता है। और जो भीड़ से जाग जाए वही संन्यासी है। और भीड़ के बड़े सम्मोहन हैं। और भीड़ के पास बड़ी ताकत है। बना तो नहीं सकती भीड़ तुम्हें लेकिन मिटा सकती है। वही उसकी ताकत है। भीड़ बचपन से ही हर बच्चे को पकड़ लेती है और उसको कौआ बनाने में लग जाती है। लीपो पोतो संस्कार दे दो कोई हिंदू कौआ कोई मुसलमान कोई ईसाई कोई जैन कोई बौद्ध सबको बना दो अलग-अलग ढंग के कौवे। कौन तुम्हें याद दिलाए कि तुम हंस हो और तुम्हारे ऊपर इतना रंग पोता इतनी कालिख पोती जाती है कि तुम अगर दर्पण के सामने भी पड़ जाओ तो भी तुम यही सोचोगे कि कौआ ही हूं यह कोई हंस के ढंग हैं! तुम्हारे सारे संस्कार अज्ञानियों के द्वारा दिए गए हैं। इसीलिए तो दरिया जैसे व्यक्ति जब तुम्हें पुकारते हैं तब भी तुम्हें याद नहीं आती। बुद्ध तुम्हें पुकारते हैं और याद नहीं आती। तुम्हारे द्वार पर ढोल बजाए जाते हैं और तुम्हें सुनायी नहीं पड़ते। नहीं कि सुनायी नहीं पड़ते सुनायी भी पड़ जाते हैं तो भी भरोसा नहीं आता कि मैं और हंस मैं और मानसरोवर का यात्रि नहीं-नहीं यह बात किसी और के लिए कही जा रही होगी। यह मेरे लिए सच नहीं हो सकती। मैं तो अपनी कालिख जानता हूं। मैं भी तुमसे कहता हूं कि तुम्हारी कालिख झूठी है। जरा ध्यान में नहाओ बह जाएगी। तुम्हारे भीतर का हंस निखर आएगा।🙏 ओशो✍️

मैंने सुना है एक हंस जा रहा था उड़ा हुआ अपनी हंसनी के साथ कि रात थक गया था एक वृक्ष पर बसेरा किया। कौवे का दिल आ गया उसकी हंसनी पर। स्वाभाविक सोचा होगा कौवे ने हेमामालिनी को कहां उड़ाए ले जा रहे हैं बच्चू अब बचकर निकल न सकोगे कौओं का ही डेरा था उस वृक्ष पर। उसने बाकी कौओं को भी कहा कि इसको निकलने न देंगे ऐसी प्यारी चीज कहां लिए जा रहा है।

सुबह हुई जब हंस उड़ने लगा तो कौवे ने कहा ठहरो भाई वह जो कौआ नेता था कौओं का उसने कहा मेरी पत्नी को कहां लिए जा रहे हो? हंस ने कहा तुम्हारी पत्नी होश से बात करो यह हंसनी है तुम कौवे हो कौवे ने कहा होश से तू बात कर क्या काले आदमी की गोरी पत्नी नहीं होती? और यह रंगभेद नहीं चलेगा। यह वर्णभेद नहीं चलेगा। किस जमाने की बातें कर रहा है? कोई मनु महाराज के जमाने की बातें कर रहा है? माना कि गोरी है मगर पत्नी मेरी है और न हो तो पंचायत बुला ली जाए।

तब जरा हंस डरा क्योंकि पंचायत तो वे ही कौवे ही थे वहां तो कोई और हंस तो था नहीं। पंचायत तो तय कर दे। कौओं की पंचायत जुड़ी। और कौओं की पंचायत ने तय कर  दिया कि पत्नी कौवे की है। हंस जार-जार रो रहा है मगर करे क्या? भीड़-भाड़ कौओं की

तुम्हारे चारों तरफ भी कौओं की भीड़-भाड़ है। उनका सारा उपाय तुम्हें विस्मरण करा देने का है। वे खुद भी भूले हैं वे तुम्हें भी भूला रहे हैं। भीड़ से जागना पड़ता है। और जो भीड़ से जाग जाए वही संन्यासी है। और भीड़ के बड़े सम्मोहन हैं। और भीड़ के पास बड़ी ताकत है। बना तो नहीं सकती भीड़ तुम्हें लेकिन मिटा सकती है। वही उसकी ताकत है।

भीड़ बचपन से ही हर बच्चे को पकड़ लेती है और उसको कौआ बनाने में लग जाती है। लीपो पोतो संस्कार दे दो कोई हिंदू कौआ कोई मुसलमान कोई ईसाई कोई जैन कोई बौद्ध सबको बना दो अलग-अलग ढंग के कौवे। कौन तुम्हें याद दिलाए कि तुम हंस हो और तुम्हारे ऊपर इतना रंग पोता इतनी कालिख पोती जाती है कि तुम अगर दर्पण के सामने भी पड़ जाओ तो भी तुम यही सोचोगे कि कौआ ही हूं यह कोई हंस के ढंग हैं!

तुम्हारे सारे संस्कार अज्ञानियों के द्वारा दिए गए हैं। इसीलिए तो दरिया जैसे व्यक्ति जब तुम्हें पुकारते हैं तब भी तुम्हें याद नहीं आती। बुद्ध तुम्हें पुकारते हैं और याद नहीं आती। तुम्हारे द्वार पर ढोल बजाए जाते हैं और तुम्हें सुनायी नहीं पड़ते। नहीं कि सुनायी नहीं पड़ते सुनायी भी पड़ जाते हैं तो भी भरोसा नहीं आता कि मैं और हंस मैं और मानसरोवर का यात्रि नहीं-नहीं यह बात किसी और के लिए कही जा रही होगी। यह मेरे लिए सच नहीं हो सकती। मैं तो अपनी कालिख जानता हूं।

मैं भी तुमसे कहता हूं कि तुम्हारी कालिख झूठी है। जरा ध्यान में नहाओ बह जाएगी। तुम्हारे भीतर का हंस निखर आएगा।🙏

ओशो✍️

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कामेंट्स

Sanjay parashar Feb 23, 2021
Radhe Radhe 🌹💐🌹💐🌹💐🌹💐🌹💐🌹💐🌹💐🌹💐🌹 good morning my lovely sister 👌👋👋

GOVIND CHOUHAN Feb 23, 2021
JAI MATA DI 🌹 JAI MAA AADHYASHAKTHI NAV DURGA DEVI MATA 🌹 JAI MAA JAGAT JANANI MATA 🌹 SUPRABHAT VANDAN 🙏MAA KA AASHIRWAD HAMESHA AAP V AAPKE SAMPURN PARIVAAR PR BNA RHE JIII 🙏🙏

RAJ RATHOD Feb 23, 2021
🙏जय श्री हरि 🙏जय श्री हनुमान जी 🙏

B K Patel Feb 23, 2021
जय श्री राम राम जी शुभ प्रभात स्नेह वंदन धन्यवाद 🌹🙏🙏👌👌👍👍🕉️

N. K. M. Feb 23, 2021
vahi to preernaa deti kaam kaa ji jai mehandee pur baala ji jai dukh hartaa sukh kartaa shree hanumantaa jai shree Ram ram sita ram jai su prabhat vandan ji 🌹🌹🙏🌹🙏

sanjay choudhary Feb 23, 2021
🙏🙏 जय श्री राम 🙏🙏 ।। जय बजरंग बली ।।। ।।।।। शुभ प्र्भात् जी।।।। *🙏🌸प्रातः!!🌼!!अभिनंदन🌸🙏* *✍️...मन की सच्चाई और अच्छाई कभी* *व्यर्थ नहीं जाती,* *ये वो पूजा है* *जिसकी खोज ईश्वर खुद करते है...✍️*                        *🌼आज का दिन शुभ हो🌼*                         *🙏सुप्रभात🌼!!राधेराधे!!🙏* 🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃

Mira nigam 7007454854 Feb 23, 2021
बहुत सुंदर बहुत सुंदर जय जय श्री राधे कृष्णा की जय जय श्री राम जय हनुमान जी भगवान की जय

Sunil Kumar Saini Feb 23, 2021
।। ☀️ सुप्रभात ☀️ ।। नमन 🙏 वंदन बहन जी 🙏 🌺 राधे राधे जी 🙏 ।। 🌹

Shuchi arora Feb 23, 2021
Radhe radhe ji suprabhat vandan ji 🙏🙏🙏🌷🌷🌷

Rajpal singh Feb 23, 2021
jai shree krishna Radhey Radhey ji good morning ji 🙏🙏

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*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐ध्यान के पंख💐💐* बहुत समय पहले की बात है,एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये,वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे,राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया। कुछ समय पश्चात राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे,और अब पहले से भी शानदार लग रहे हैं,राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे, आदमी से कहा, मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ, तुम इन्हें उड़ने का इशारा करो, आदमी ने ऐसा ही किया, इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था वहीँ दूसरा, कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ गया जिससे वो उड़ा था ,ये देख राजा को कुछ अजीब लगा, क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा..? राजा ने सवाल किया, सेवक बोला, जी हुजूर, इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है, वो इस डाल को छोड़ता ही नहीं, राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे, और वो दूसरे बाज को भी उसी तरह उड़ता देखना चाहते थे, अगले दिन पूरे राज्य में ऐलान करा दिया गया, कि जो व्यक्ति इस बाज को ऊँचा उड़ाने में कामयाब होगा उसे ढेरों इनाम दिया जाएगा, फिर क्या था, एक से एक विद्वान् आये और बाज को उड़ाने का प्रयास करने लगे, पर हफ़्तों बीत जाने के बाद भी बाज का वही हाल था, वो थोडा सा उड़ता और वापस डाल पर आकर बैठ जाता, फिर एक दिन कुछ अनोखा हुआ,राजा ने देखा कि उसके दोनों बाज आसमान में उड़ रहे हैं, उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ और उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति का पता लगाने को कहा जिसने ये कारनामा कर दिखाया था, वह व्यक्ति एक किसान था, अगले दिन वह दरबार में हाजिर हुआ, उसे इनाम में स्वर्ण मुद्राएं भेंट करने के बाद राजा ने कहा, मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ, बस तुम इतना बताओ कि जो काम बड़े-बड़े विद्वान् नहीं कर पाये वो तुमने कैसे कर दिखाया, मालिक..! मैं तो एक साधारण सा किसान हूँ , मैं ज्ञान की ज्यादा बातें नहीं जानता , मैंने तो बस वो डाल काट दी,जिस पर बैठने का आदि हो चुका था, और जब वो डाल ही नहीं रही तो वो भी अपने साथी के साथ ऊपर उड़ने लगा । *हम सभी ऊँची उड़ान भरने के लिए ही बने हैं,लेकिन कई बार हम जो कर रहे होते है, उसके इतने आदि हो जाते हैं कि अपनी ऊँची उड़ान भरने की क्षमता को भूल जाते हैं,जन्म जन्म से हम वासनाओं की डाल पर बैठते आए हैं और अज्ञानवश ये भी हमें ज्ञात नहीं कि जो हम आज कर रहे हैं,वहीं हमने जन्मों जन्मों में किया है,और ये हम भूल ही गए हैं कि हम उड़ान भर सकते हैं,अतृप्त वासनाओं की डाल पर बैठे बैठे हमें विस्मृत हो गया है,कि ध्यानरूपी पंख भी हैं, हमारे पास जिससे हम उड़ान भर सकते हैं,पदार्थ से परमात्मा तक की, व्यर्थ से सार्थक की...* *सदैव प्रसन्न रहिये।* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।* 🙏🙏🙏🙏🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

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*💐💐जहाँ त्याग वहीँ होता है प्रेम*💐💐 शादी की वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर पति-पत्नी साथ में बैठे चाय की चुस्कियां ले रहे थे। संसार की दृष्टि में वो एक आदर्श युगल था। प्रेम भी बहुत था, दोनों में। लेकिन कुछ समय से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि संबंधों पर समय की धूल जम रही है। शिकायतें धीरे-धीरे बढ़ रही थीं। बातें करते-करते अचानक पत्नी ने एक प्रस्ताव रखा कि मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना होता है लेकिन हमारे पास समय ही नहीं होता एक-दूसरे के लिए। इसलिए मैं दो डायरियाँ ले आती हूँ और हमारी जो भी शिकायत हो हम पूरा साल अपनी-अपनी डायरी में लिखेंगे। अगले साल इसी दिन हम एक-दूसरे की डायरी पढ़ेंगे ताकि हमें पता चल सके कि हममें कौन सी कमियां हैं जिससे कि उसका पुनरावर्तन ना हो सके। पति भी सहमत हो गया कि विचार तो अच्छा है। डायरियाँ आ गईं और देखते ही देखते साल बीत गया। अगले साल फिर विवाह की वर्षगांठ की पूर्वसंध्या पर दोनों साथ बैठे। एक-दूसरे की डायरियाँ लीं। पहले आप, पहले आप की मनुहार हुई। आखिर में महिला प्रथम की परिपाटी के आधार पर पत्नी की लिखी डायरी पति ने पढ़नी शुरू की। पहला पन्ना...... दूसरा पन्ना........ तीसरा पन्ना ..... आज शादी की वर्षगांठ पर मुझे ढंग का तोहफा नहीं दिया। .......आज होटल में खाना खिलाने का वादा करके भी नहीं ले गए। .......आज मेरे फेवरेट हीरो की पिक्चर दिखाने के लिए कहा तो जवाब मिला बहुत थक गया हूँ। ........ आज मेरे मायके वाले आए तो उनसे ढंग से बात नहीं की .......... आज बरसों बाद मेरे लिए साड़ी लाए भी तो पुराने डिजाइन की। ऐसी अनेक रोज़ की छोटी-छोटी फरियादें लिखी हुई थीं। पढ़कर पति की आँखों में आँसू आ गए। पूरा पढ़कर पति ने कहा कि मुझे पता ही नहीं था मेरी गल्तियों का। मैं ध्यान रखूँगा कि आगे से इनकी पुनरावृत्ति ना हो। अब पत्नी ने पति की डायरी खोली ... ये क्या ! पहला पन्ना……… कोरा दूसरा पन्ना……… कोरा तीसरा पन्ना ……… कोरा अब दो-चार पन्ने साथ में पलटे वो भी कोरे। फिर 50-100 पन्ने साथ में पलटे तो वो भी कोरे। पत्नी ने कहा कि मुझे पता था कि तुम मेरी इतनी सी इच्छा भी पूरी नहीं कर सकोगे। मैंने पूरा साल इतनी मेहनत से तुम्हारी सारी कमियां लिखीं ताकि तुम उन्हें सुधार सको और तुमसे इतना भी नहीं हुआ। पति मुस्कुराया और कहा मैंने सब कुछ अंतिम पृष्ठ पर लिख दिया है। पत्नी ने उत्सुकता से अंतिम पृष्ठ खोला। उसमें लिखा था :- मैं तुम्हारे मुँह पर तुम्हारी जितनी भी शिकायत कर लूँ लेकिन तुमने जो मेरे और मेरे परिवार के लिए त्याग किए हैं और इतने वर्षों में जो असीमित प्रेम दिया है उसके सामने मैं इस डायरी में लिख सकूँ ऐसी कोई कमी मुझे तुममें दिखाई ही नहीं दी। ऐसा नहीं है कि तुममें कोई कमी नहीं है लेकिन तुम्हारा प्रेम, तुम्हारा समर्पण, तुम्हारा त्याग उन सब कमियों से ऊपर है। मेरी अनगिनत अक्षम्य भूलों के बाद भी तुमने जीवन के प्रत्येक चरण में छाया बनकर मेरा साथ निभाया है। अब अपनी ही छाया में कोई दोष कैसे दिखाई दे मुझे। अब रोने की बारी पत्नी की थी। उसने पति के हाथ से अपनी डायरी लेकर दोनों डायरियाँ अग्नि में स्वाहा कर दीं और साथ में सारे गिले-शिकवे भी। फिर से उनका जीवन एक नवपरिणीत युगल की भाँति प्रेम से महक उठा । जब जवानी का सूर्य अस्ताचल की ओर प्रयाण शुरू कर दे तब हम एक-दूसरे की कमियां या गल्तियां ढूँढने की बजाए अगर ये याद करें हमारे साथी ने हमारे लिए कितना त्याग किया है, उसने हमें कितना प्रेम दिया है, कैसे पग-पग पर हमारा साथ दिया है तो निश्चित ही जीवन में प्रेम फिर से पल्लवित हो जाएगा। *सदैव प्रसन्न रहिये।* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।* 🙏🙏🙏🙏🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

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Renu Singh Feb 25, 2021

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