Prince  Trivedi
Prince Trivedi Apr 17, 2019

*🏆🌞हनुमान जयंती 2019 - संकटमोचन हनुमानाष्टक मंत्र जप, पाठ, पूजा एवं व्रत* 🎂🍀🍂 *हर मनुष्य अपने जीवन में सुख, समृद्धि, शान्ति चाहता है तथा अपनी समस्त अभिलाषाए परिपूर्ण करने हेतु हर प्रकार से प्रयत्न भी करता है। किन्तु लाख भागीरथ प्रयास करने के बाद भी या तो यह मिलते नहीं और मिल भी जाएं तो क्षणिक होते हैं। असफलता का कारण जाने बिना ही मनुष्य खिन्न रहता है, उदास रहता और उसका विश्वास, निष्ठा, देवी-देवता, पूजा-पाठ आदि से उठ जाता है। उसका प्रमुख कारण किसी लालच या अविश्वास से की गई आराधना, आप जब भी कोई पूजा पाठ करें तो उस पूजा में तथा उस देवता में पूरी निष्ठा अनिवार्य है। ऐसे में जब आप सब कुछ कर के हार गए तो ये मत सोचिए की आपकी सफलता के सभी मार्ग बंद है या अवरोधित है। कलयुग में आशा की किरण व कल्याण के देवता हनुमान जी का द्वार आप के लिए ही है। किसी भी प्रकार के दु:खों, कष्टों या संकटों का निराकरण करने के लिए हमारे ऋषियों ने संकटमोचन हनुमान जी की उपासना का बड़ा सरल व सक्षम माध्यम प्रतिपादित किया है*।  *आयुर्वेद व अन्य प्रमाणिक शास्त्रों के अनुसार 'हनुमान' शब्द का शाब्दिक अर्थ है प्राण वायु अर्थात हमारी आती जाती जो श्वास है जिसके बिना जीवित रहना प्राणियों के लिए असंभव है, वह है हनुमान। यह पवन पुत्र सर्वव्याप्त है। ‘सुदर्शन संहिता’ के अनुसार श्री हनुमान जी जगत (ब्रह्मांड) के उत्साह, साहस एवं विश्वास के प्रतीक हैं। ‘गरुड़ी तन्त्र’ के अनुसार जब प्राणीमात्र में उत्साह, साहस एवं विश्वास जाग्रत हो जाता है, तब व्यक्ति अपनी कठिन से कठिन समस्या या संकट का समाधान करने में समर्थ हो जाता है। ‘अगस्त संहिता’ में उत्साह, साहस एवं विश्वास को हनुमान जी का नैसर्गिक गुण बताया गया है*। *स्वरूप और उपासना* *हनुमान जी महादेव शिव के रुद्रावतार है, जिन्हें कलयुग का प्रधान देवता भी बताया गया हे। श्री हनुमान जी ‘दास्य भक्ति’ के मूर्तवान स्वरूप हैं। इस अवतार में वे मां अंजनि के गर्भ से वायुदेव के पुत्र के रूप में अवतरित हुए हैं। संकट मोचन हनुमान जी का जप करने से तथा इनकी कृपा लेने से हर प्रकार के कष्ट, संताप, समस्या, उपसर्गबाधा, शत्रुकोप, रोग, शोक, ऋण, दु:ख -दारिद्र, जादू-टोना, नष्ट हो समस्त संकटों से मुक्ति एवं बल, बुद्धि, विद्या तथा सुख, सम्पत्ति एवं भगवद्भक्ति से परिपूर्ण करते हैं। साधक आदि का अपने सामर्थ्य के अनुसार चयन कर सकता है*। *मंत्र-आराधना* ’ *ऊं हं हनुमते नम:*।  ’ *ऊं हं हुं हनुमते नम:*।  ’ *ऊं हं हनुमते मां रक्ष रक्ष स्वाहा*। ’ *ऊं नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा*। *साधना प्रक्रिया-नित्य नियम से निवृत्त होकर, चंदन का टीका लगा कर, आसन पर पूर्वाभिमुख बैठ कर अपने सामने लकड़ी की चौकी या पट्टे पर लाल वस्त्र बिछा कर उस पर हनुमत पूजन यंत्र या श्री हनुमान जी की मूर्ति स्थापित कर पंचोपचार (सिन्दूर, चावल, फूल, धूप एवं दीप) से विधिवत पूजन कर उक्त मंत्र में से किसी एक का सवा लाख या कम से कम 24 हजार बार जप करें*। *उपासना की विधि* -*हनुमान जी की उपासना में उनके किसी मंत्र का विधिवत जप अथवा हनुमान चालीसा, बजरंगबाण, सुंदरकांड या रामायण का पाठ और इसका सामर्थ्य या समय न होने पर पूजन किया जा सकता है*।  -*हनुमान जी को अड़हुल, गेंदा, गुलाब, कमल एवं सूर्यमुखी के पुष्प, तुलसीपत्र, सिन्दूर, लाल चंदन, ऋतुफल, चूरमा, गुड-चना, केला, शहद-मुनक्का, लाल लंगोटे एवं लाल ध्वजा प्रिय है*। -*तुलसी पत्र पर रामनाम लिख कर चढ़ाने से हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं*। -*उपासना के दिनों में लाल वस्त्र धारण कर, लाल वस्त्र का ही आसन व अन्य प्रयोग के वस्त्र आदि लाल ही प्रयोग करें*।  -*मनसा, वाचा, कर्मणा शुद्धि का पूरा ध्यान रखें। पवित्रतापूर्वक पूजन, मन लगा कर जप, प्रेमभाव से पाठ एवं प्रार्थना करने के साथ दिन में एक बार फलाहार करना चाहिए। ‘ब्रह्मचर्य’ का पालन करना अनिवार्य है*। *संकटमोचन हनुमानाष्टक*  बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अँधियारो I ताहि सो त्रास भयो जग को, यह संकट काहू सो जात न टारो II देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ दियो रवि कष्ट निवारो I को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II बालि की त्रास कपीस बसे गिरि, जात महा प्रभु पंथ निहारो I चौंकि महा मुनि श्राप दियो तब, चाहिये कौन बिचार बिचारो II कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के शोक निवारो I को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II  अंगद के संग लेन गये सिया, खोज कपीस यह बैन उचारो I जीवत ना बचिहौ हम सो जो, बिना सुधि लाये यहाँ पगु धारौ II हेरि थके तट सिन्धु सबै तब, लाये सिया सुधि प्राण उबारो I को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II रावण त्रास दई सिया को तब, राक्षसि सों कहि शोक निवारो I ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनी चर मारो II चाहत सिया अशोक सों आगि सु, दें प्रभु मुद्रिका शोक निवारो I को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II बाण लाग्यो उर लक्ष्मण के तब, प्राण तज्यो सुत रावण मारो I ले गृह वैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सो वीर उपारो II आनि सजीवन हाथ दई तब, लक्ष्मण के तुम प्राण उबारो I को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II रावण युद्ध अजान कियो तब, नाग कि फाँस सबै सिर दारो I श्री रघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो II आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो I को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II बंधु समेत जबै अहिरावण, लै रघुनाथ पातळ सिधारो I देविहिं पूजि भलि विधि सो बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो II जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावण सैन्य समेत संघारो I को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II काज किये बड़ देवन के तुम, वीर महाप्रभु देखि बिचारो I कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुम सों नहिं जात है टारो II बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो I को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II दोहा लाल देह लाली लसे ,अरु धरि लाल लंगूर I बज्र देह दानव दलन,जय जय जय कपि सूर II  * JAI SHREE RAM*  *JAI SHREE MAHAKAL* 🙏हनुमानजयन्ती-2019-श्री हनुमान चालीसा + हनुमान जी के सिद्ध चमत्कारी मंत्र* Link👍👍https://www.mymandir.com/p/37jcLb?ref=share

*🏆🌞हनुमान जयंती 2019 - संकटमोचन हनुमानाष्टक मंत्र जप, पाठ, पूजा एवं व्रत* 🎂🍀🍂


*हर मनुष्य अपने जीवन में सुख, समृद्धि, शान्ति चाहता है तथा अपनी समस्त अभिलाषाए परिपूर्ण करने हेतु हर प्रकार से प्रयत्न भी करता है। किन्तु लाख भागीरथ प्रयास करने के बाद भी या तो यह मिलते नहीं और मिल भी जाएं तो क्षणिक होते हैं। असफलता का कारण जाने बिना ही मनुष्य खिन्न रहता है, उदास रहता और उसका विश्वास, निष्ठा, देवी-देवता, पूजा-पाठ आदि से उठ जाता है। उसका प्रमुख कारण किसी लालच या अविश्वास से की गई आराधना, आप जब भी कोई पूजा पाठ करें तो उस पूजा में तथा उस देवता में पूरी निष्ठा अनिवार्य है। ऐसे में जब आप सब कुछ कर के हार गए तो ये मत सोचिए की आपकी सफलता के सभी मार्ग बंद है या अवरोधित है। कलयुग में आशा की किरण व कल्याण के देवता हनुमान जी का द्वार आप के लिए ही है। किसी भी प्रकार के दु:खों, कष्टों या संकटों का निराकरण करने के लिए हमारे ऋषियों ने संकटमोचन हनुमान जी की उपासना का बड़ा सरल व सक्षम माध्यम प्रतिपादित किया है*। 


*आयुर्वेद व अन्य प्रमाणिक शास्त्रों के अनुसार 'हनुमान' शब्द का शाब्दिक अर्थ है प्राण वायु अर्थात हमारी आती जाती जो श्वास है जिसके बिना जीवित रहना प्राणियों के लिए असंभव है, वह है हनुमान। यह पवन पुत्र सर्वव्याप्त है। ‘सुदर्शन संहिता’ के अनुसार श्री हनुमान जी जगत (ब्रह्मांड) के उत्साह, साहस एवं विश्वास के प्रतीक हैं। ‘गरुड़ी तन्त्र’ के अनुसार जब प्राणीमात्र में उत्साह, साहस एवं विश्वास जाग्रत हो जाता है, तब व्यक्ति अपनी कठिन से कठिन समस्या या संकट का समाधान करने में समर्थ हो जाता है। ‘अगस्त संहिता’ में उत्साह, साहस एवं विश्वास को हनुमान जी का नैसर्गिक गुण बताया गया है*।


*स्वरूप और उपासना*

*हनुमान जी महादेव शिव के रुद्रावतार है, जिन्हें कलयुग का प्रधान देवता भी बताया गया हे। श्री हनुमान जी ‘दास्य भक्ति’ के मूर्तवान स्वरूप हैं। इस अवतार में वे मां अंजनि के गर्भ से वायुदेव के पुत्र के रूप में अवतरित हुए हैं। संकट मोचन हनुमान जी का जप करने से तथा इनकी कृपा लेने से हर प्रकार के कष्ट, संताप, समस्या, उपसर्गबाधा, शत्रुकोप, रोग, शोक, ऋण, दु:ख -दारिद्र, जादू-टोना, नष्ट हो समस्त संकटों से मुक्ति एवं बल, बुद्धि, विद्या तथा सुख, सम्पत्ति एवं भगवद्भक्ति से परिपूर्ण करते हैं। साधक आदि का अपने सामर्थ्य के अनुसार चयन कर सकता है*।

*मंत्र-आराधना*


’ *ऊं हं हनुमते नम:*। 


’ *ऊं हं हुं हनुमते नम:*। 


’ *ऊं हं हनुमते मां रक्ष रक्ष स्वाहा*।


’ *ऊं नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा*।


*साधना प्रक्रिया-नित्य नियम से निवृत्त होकर, चंदन का टीका लगा कर, आसन पर पूर्वाभिमुख बैठ कर अपने सामने लकड़ी की चौकी या पट्टे पर लाल वस्त्र बिछा कर उस पर हनुमत पूजन यंत्र या श्री हनुमान जी की मूर्ति स्थापित कर पंचोपचार (सिन्दूर, चावल, फूल, धूप एवं दीप) से विधिवत पूजन कर उक्त मंत्र में से किसी एक का सवा लाख या कम से कम 24 हजार बार जप करें*।


*उपासना की विधि*


-*हनुमान जी की उपासना में उनके किसी मंत्र का विधिवत जप अथवा हनुमान चालीसा, बजरंगबाण, सुंदरकांड या रामायण का पाठ और इसका सामर्थ्य या समय न होने पर पूजन किया जा सकता है*। 


-*हनुमान जी को अड़हुल, गेंदा, गुलाब, कमल एवं सूर्यमुखी के पुष्प, तुलसीपत्र, सिन्दूर, लाल चंदन, ऋतुफल, चूरमा, गुड-चना, केला, शहद-मुनक्का, लाल लंगोटे एवं लाल ध्वजा प्रिय है*।


-*तुलसी पत्र पर रामनाम लिख कर चढ़ाने से हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं*।


-*उपासना के दिनों में लाल वस्त्र धारण कर, लाल वस्त्र का ही आसन व अन्य प्रयोग के वस्त्र आदि लाल ही प्रयोग करें*। 


-*मनसा, वाचा, कर्मणा शुद्धि का पूरा ध्यान रखें। पवित्रतापूर्वक पूजन, मन लगा कर जप, प्रेमभाव से पाठ एवं प्रार्थना करने के साथ दिन में एक बार फलाहार करना चाहिए। ‘ब्रह्मचर्य’ का पालन करना अनिवार्य है*।


*संकटमोचन हनुमानाष्टक* 

बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अँधियारो I
ताहि सो त्रास भयो जग को, यह संकट काहू सो जात न टारो II
देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ दियो रवि कष्ट निवारो I
को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II

बालि की त्रास कपीस बसे गिरि, जात महा प्रभु पंथ निहारो I
चौंकि महा मुनि श्राप दियो तब, चाहिये कौन बिचार बिचारो II
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के शोक निवारो I
को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II 

अंगद के संग लेन गये सिया, खोज कपीस यह बैन उचारो I
जीवत ना बचिहौ हम सो जो, बिना सुधि लाये यहाँ पगु धारौ II
हेरि थके तट सिन्धु सबै तब, लाये सिया सुधि प्राण उबारो I
को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II

रावण त्रास दई सिया को तब, राक्षसि सों कहि शोक निवारो I
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनी चर मारो II
चाहत सिया अशोक सों आगि सु, दें प्रभु मुद्रिका शोक निवारो I
को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II

बाण लाग्यो उर लक्ष्मण के तब, प्राण तज्यो सुत रावण मारो I
ले गृह वैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सो वीर उपारो II
आनि सजीवन हाथ दई तब, लक्ष्मण के तुम प्राण उबारो I
को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II

रावण युद्ध अजान कियो तब, नाग कि फाँस सबै सिर दारो I
श्री रघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो II
आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो I
को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II

बंधु समेत जबै अहिरावण, लै रघुनाथ पातळ सिधारो I
देविहिं पूजि भलि विधि सो बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो II
जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावण सैन्य समेत संघारो I
को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II

काज किये बड़ देवन के तुम, वीर महाप्रभु देखि बिचारो I
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुम सों नहिं जात है टारो II
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो I
को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो II

दोहा
लाल देह लाली लसे ,अरु धरि लाल लंगूर I
बज्र देह दानव दलन,जय जय जय कपि सूर II 

* JAI SHREE RAM* 

*JAI SHREE MAHAKAL*


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Anjana Gupta May 21, 2019

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GEETA DEVI May 21, 2019

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sumitra May 21, 2019

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Archana Singh May 21, 2019

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MAHESH MALHOTRA May 21, 2019

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