jai mata di good night ji🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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कामेंट्स

Sagar ji🙏 Oct 23, 2020
🌹🙏जय माता दी 🌹🙏आपके के आने वाला हर पल शुभ मंगलमय हो🌹शुभ रात्रि दीदी🙏जय माता दी🌹🙏

madan pal Singh 🙏🏼 Oct 23, 2020
jai mata di shubh ratri vandan jiii Mata Rani ki karpa sadev AAP v aapka pariwar par bani rahe jiii 🌷🙏🏻🙏🏻

Gouri shankar Oct 23, 2020
🌺जय श्री कृष्ण जी 🌺 🚩👣जय माता दी 👣🚩

Anupama Shukla Oct 23, 2020
Shree radhe 🙏🙏🌹 Shubh ratri vandan ji 🙏🌹

Ramesh Soni.33 Oct 23, 2020
🚩Jay Shri Ram 🌹🚩🚩🚩Jay Bajrangbali ki Jay 🚩🚩🌹Jay Mata ki Jay Mata Ki🚩🌹🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌹🌹

शान्डिल्य महर्षि गुरुपद Oct 23, 2020
जाजलि नाम के एक ऋषि थे । एक बार वे महातपस्वी ऋषि निराहार रहकर केवल वायु भक्षण करते हुए काष्ठ की भाँति अविचलभाव से खड़े हो घोर तपस्या में प्रवृत्त हुए । उस समय कोई ठूँठ समझकर एक चिड़िया का जोड़ा उनकी जटाओं में अपने रहने का घोंसला बनाकर रहने लगा । कभी-कभी तो पाँच-दस दिन बाद भी लौटता था , पर ऋषि बिना हिले-डुले ही खड़े रहते थे । एक बार जब वे पक्षी उड़ने के बाद एक महीने तक वापस नहीं लौटे तब भी जाजलि ऋषि ज्यों के त्यों खड़े रहे । तदनन्तर जब उनका कुछ भी पता नहीं चला तो ऋषि को बड़ा आश्चर्य हुआ । अपने को सिद्ध मानकर उन्हें गर्व भी हो गया । अपने मस्तक पर चिड़ियों के पैदा होने और बढने आदि की बातें याद करके वे अपने को महान धर्मात्मा समझ आकाश की ओर देखकर बोल उठे, 'मैंने धर्म को प्राप्त कर लिया ।' इतने में आकाशवाणी हुई-'जाजलि ! तुम धर्म में तुलाधार की बराबरी नहीं कर सकते । काशीपुरी का धर्मात्मा तुलाधार भी ऐसी बात नहीं कहता ।' जाजलि को बड़ा आश्चर्य हुआ । वे तुलाधार को देखने काशी आये। वहाँ पहुँचकर उन्हौंने तुलाधार को सौदा बेचते हुए देखा । तुलाधार भी जाजलि को देखकर उठकर खड़े हो गये ,फिर आगे बढकर बड़ी प्रसन्नता के साथ उन्हौने जाजलि का स्वागत करते हुए कहा-'आप मेरे पास आ रहे हैं यह बात मुझे मालूम हो गई थी । आपने समुद्र तट पर एक वनमें रहकर बड़ी भारी तपस्या की है । उसमें सिद्धि प्राप्त होने के बाद आपके मस्तक पर चिड़ियों के बच्चे पैदा हुए , बड़े हुए और आपने उनकी भली-भाँति रक्षा की । जब वे इधर-उधर चले गये तब आपको बड़ा गर्व हो गया । विप्रवर आज्ञा दीजिये मैं आपका कौन सा प्रिय कार्य करूँ ?' जाजलि ने तुलाधार की बाँतों से प्रभावित होकर उनके धर्म का रहस्य जानने की इच्छा व्यक्त की । रस,गन्ध,वनस्पति,औषधि और मूल-फल बेचने वाले तुलाधार को धर्म में निष्ठा कैसे प्राप्त हुई-यह जाजलि के लिये आश्चर्य की बात थी । तुलाधार ने कहा मैं परम प्राचीन और सबका हित करने वाले सनातन धर्म और उसके गूढ रहस्यों को जानता हूँ ,किसी प्राणी से द्रोह नहीं करता । काठ और घास-पूस छाकर मैंने अपना घर बनाया है । में मदिरा आदि चीजें नहीं बेचता । माल बेचने में किसी प्रकार .की ठगी या छल-कपट नहीं करता ,मेरा किसी से राग-द्वेष नहीं । मेरा तराजू सबके लिये बराबर तोलता है मैं दूसरों के कार्यों की निन्दा-स्तुति नहीं करता । मिट्टी ,पत्थर और सोने मैं भेद नहीं मानता । क्षणभड़्गुर विषयों की इच्छा नहीं करता ।अहिंषा का परम धर्म मानता हूँ । धर्म का रहस्य अत्यन्त सूक्ष्म है मैं लोगों की देखा-देखी नहीं करता । जो मुझे मारता है तथा जो मेरी प्रशंसा करता है वे दौनों ही मेरे लिये समान है ॥--- श्री राधे राधे।।

S K Pandey 🌺🙏🏻🌺 Oct 23, 2020
🌹शुभ शुक्रवार,शुभ रात्रि वंदन!!🌹 🌹जय माता दी!🌻जय मां दुर्गा!🌹 🌹हम मिलकर बोले, जय माता दी🌹 🌹🌹प्रेम से बोले जय माता दी🌹🌹 🌹🌹सारे बोलो, जय माता दी!🌹🌹 🌹नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ🌹 🙏🏻जय माता कालरात्रि,शुभरात्रि.!! 🙏🏻

प्रवीण चौहान Oct 23, 2020
💝💝 जय श्री राधे कृष्ण 💝💝 🌷🍁🌷 जय माता दी 🌷🍁🌷 🧡🧡 माँ कालरात्री की भक्ति मय रात्रि का स्नेह वंदन 🧡🧡 जगतजननी माँ जगदंबा भवानी के नवरात्रि के सातवें दिन की शुभेच्छा सह आपको स्नेहिल वंदन जी 🥀🥀 🌼🌼 माता जी कृपा और आशीर्वाद सदैव आप पर बना रहे 🌼🌼 🌷🌷 जय कालरात्रि माँ 🌷🌷 🌺🌺 श्री श्री राधागिरीधारीजी 🌺🌺 🔱🥀ॐ ऐं ह्रीं क्रीं कालरात्रै नमः 🥀🔱

Ravi Kumar Taneja Oct 23, 2020
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Ravi Kumar Taneja Oct 23, 2020
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Mamta Chauhan Oct 23, 2020
Jai mata di 🌷🙏shubh ratri vandan bhai ji aapka har pal khushion se bhra ho aapki sbhi mnokamna puri ho 🌷🙏🌷🙏🙏

Ravi Kumar Taneja Oct 23, 2020
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Mita Vadiwala Oct 23, 2020
Jay Mata Di 🙏🙏🌹🌹 Mata Rani ki Krupa Aap evam Aapke Pariwar Par Sadaiv Bani Rahe Bhai ji Aapka Har Pal Shubh evam Mangalmay Ho.🌹🌹🙏🙏

Ravi Kumar Taneja Oct 24, 2020
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जितेन्द्र दुबे Oct 24, 2020
**🚩🔱🚩 शुभ प्रभात 🌹 राम राम जी🚩 🌹🚩सभी जगदम्बा एवं राम भक्त हनुमानजी के भक्तों को सादर प्रणाम🙏🙏🙏 🚩🔱🚩🕉: ॐ देवी महागौर्यै नमः॥🚩🔱🚩🌹🌺🚩🌹प्रार्थना🚩🌹 🚩श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।🚩 🚩महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥🚩 🚩स्तुति 🚩या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता।🚩 🚩नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ 🚩🙏🌹🚩🔱🚩ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🙏🙏🙏 🚩🌹🕉️महाकालेश्वाराय नमः 🚩🔱 🚩🌺🌹🌺🚩🌹ॐ राम रामाय नमः 🚩 🚩ॐ हं हनुमते नमः 🚩🚩🚩ऊँ श्री गणेशाय नमः 🚩ऊँ रामेश्वाराय नमः🚩🚩🌲ॐ नमः शिवाय 🚩🌺🚩ॐ सीता राम चंद्राय🚩 🚩🔱🚩ऊँ हं हनुमंते नमः🚩🌹 माता महागौरी की कृपा आप पर सदैव बनी रहे 🌹आप का हर पल मंगलमय हो 🌹जय मां अंबे🚩 जगदंबे जय माता दी 🌲🙏🙏🙏

*जय श्री राधे कृष्णा* *शुभरात्रि वंदन* #कम_से_कम_लड़कियां_इस_पोस्ट_को_अवश्य_पढ़ें 👇 #अकबर प्रति वर्ष दिल्ली में नौरोज का मेला आयोजित करवाता था...! इसमें पुरुषों का प्रवेश निषेध था! अकबर इस मेले में महिला की वेशभूषा में जाता था और जो महिला उसे मंत्र मुग्ध कर देतीं उसे दासियां छलकपट से अकबर के सम्मुख ले जाती थी! एक दिन मेले में महाराणा प्रताप सिंह जी की भतीजी छोटे भाई महाराज शक्तिसिंह जी की पुत्री मेले में सजावट देखने के लिए आई! जिनका नाम बाईसा किरण देवी था जिनका विवाह बीकानेर के पृथ्वीराज जी से हुआ था! बाईसा किरण देवी सुंदरता को देख कर अकबर अपने आप पर काबू नहीं रख पाया और उसने धोखा से बिना सोचे समझे दासियों के माध्यम से धोखा से जनाना महल में बुला लिया! जैसे ही अकबर ने बाईसा किरण देवी को स्पर्श करने की कोशिश की किरण देवी ने कमर से कटार निकाली और अकबर को नीचे पटक कर उसकी छाती पर पैर रखकर कटार गर्दन पर लगा दी! और कहा नीच नराधम तुझे पता नहीं कि मैं उस महाराणा प्रताप सिंह जी की भतीजी हुं जिनके नाम से तेरी नींद उड़ जाती हैं! बोल तेरी आखिरी इच्छा क्या है! अकबर का खुन सुख गया! उसने कभी सोचा भी नहीं था कि अकबर आज राजपूत बाईसा के चरणों में होगा! किरण देवी ने कहा आज के बाद कभी दिल्ली में नौरोज़ का मेंला मत लगवाना! और आज के बाद कभी भी किसी औरत को परेशान मत करना और अकबर की जान बख्श दी! इस घटना का वर्णन गिरधर आसिया द्वारा रचित# सगत रासों में 632 #पृष्ठ संख्या में दिया गया है बीकानेर संग्रहालय में लगी एक पेंटिंग में भी इस घटना को दोहे के माध्यम से बताया गया है! #किरण सिंहनी सी चढी उर पर खींच कटार! भीख मांगता प्राण की अकबर हाथ पसार! # आज भी इनका चित्र जयपुर संग्रहालय में सुरक्षित है! #आज की लड़कियों को इन चीजों का अनुसरण करना अति आवश्यक है# जय भवानी,जय मा करनी 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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Sanjay Awasthi Nov 23, 2020

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Radha Bansal Nov 23, 2020

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ajaysonpuri Nov 23, 2020

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*जय श्री राधे कृष्णा* *शुभरात्रि वंदन* *जय श्रीहरि* "प्रार्थना" उसे कहते हैं जब आप परमात्मा से बात करतें हैं, "ध्यान" उसे कहते हैं जब आप परमात्मा को सुनते हैं। एक बार नारद मुनि जी की एक ब्राह्मण से मुलाकात हुई। ब्राह्मण ने उनसे जाते हुये पूछा की मुनिवर अब आप कहाँ जा रहे हैं ? शायद अब आपकी भगवान से मुलाकात होगी, अतः उनसे पूछियेगा कि मैं उनके पास कब आऊँगा ? नारद जी ने कहा अच्छा। कुछ ही दूरी पर नारदजी को एक मोची मिला, जो कि एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर जूते सिल रहा था। बातों ही बातों में उसने भी नारदजी से वही बात पूछी जो ब्राह्मण ने पूछी थी। नारदजी जब वैकुण्ठ लोक पहुँचे तो नारदजी ने भगवान नारायण से उन दोनों के बारे में पूछा। भगवान नारायण ने कहा वो मोची तो इसी जन्म के बाद मेरे पास आ जायेगा, किन्तु उस ब्राह्मण को अभी बहुत जन्म लेने पड़ेंगे। नारदजी ने हैरानी से कहा मैं इस बात का रहस्य समझा नहीं। भगवान मुस्कुराये और बोले जब आप उनसे मिलेंगे तो आप उनको यह बात जरूर बोलना की मैं सुई के छेद में से हाथी को निकाल रहा था । जब नारद जी पृथ्वी पर लौटे तो पहले ब्राह्मण से मिलने गये। ब्राह्मण ने उनका स्वागत किया और पूछा की जब आप वैकुण्ठ में गये तो भगवान क्या कर रहे थे ? नारद जी ने कहा भगवान सुई के छेद में से हाथी को निकाल रहे थे । ब्राह्मण ने कहा - अरे नारदजी कैसी बात कर रहे हैं। मैं ऐसी अविश्वासी बातों पर विश्वास नहीं करता। नारदजी को समझते देर नहीं लगी कि इस आदमी की भगवान में तनिक भी श्रद्धा नहीं है। इसे तो केवल कोरा पोथी पत्रा का ज्ञान है। फिर नारदजी मोची के पास गये। मोची ने भी वही प्रश्न किया जिसका नारदजी ने वही उत्तर दिया की भगवान सुई के छेद में से हाथी को निकाल रहे थे। मोची यह सुनते ही रोने लगा। उसकी आँखों में आँसू आ गये और वह बोला हे मेरे प्रभु ! आप कितने विचित्र हैं। आप सब कुछ कर सकते हैं। नारदजी ने पूछा - क्या आपको विश्वास है की भगवान सुई के छेद में से हाथी को निकाल सकते हैं ? मोची ने कहा - क्यों नहीं ? मुझे पूरा विश्वास है। आप देख रहे हैं कि मैं इस बरगद के पेड़ के नीचे रोज बैठता हूँ और उससे नित्य अनेक फल गिरते हैं। और उन फलों के हर बीज में इस बड़े वृक्ष की ही तरह एक बरगद का वृक्ष समाया हुआ है। यदि एक छोटे से बीज के भीतर इतना बड़ा वृक्ष समाया रह सकता है। तो फिर भगवान द्वारा एक सुई के छेद से हाथी को निकालना कोई कठिन काम कैसे हो सकता है? इसे श्रद्धा कहते हैं। यह अन्ध-विश्वास नहीं है। विश्वास के पीछे कारण होता है। यदि भगवान इतने नन्हें नन्हें बीजों के भीतर एक एक विशाल वृक्ष भर सकते हैं तो उनके लिए सुई के छेद से हाथी निकालना कौन सी बड़ी बात है। ज़िन्दगी ईश्वर का उपन्यास है। ईश्वर को उसे लिखने दीजिये। जय श्री हरि

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sanjay dubey Nov 23, 2020

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Gopalchandra porwal Nov 23, 2020

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ajaysonpuri Nov 22, 2020

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