आशुतोष
आशुतोष Jan 22, 2021

मेरे पापा की औक़ात, बाप बेटी की यह कहानी आपका दिल छू लेगी...

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कामेंट्स

आशुतोष Jan 22, 2021
@seemasharma89 ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।। || जय माता दी || ༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻

आशुतोष Jan 22, 2021
@monika142 ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।। || जय माता दी || ༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻

S.P Sharma Jan 22, 2021
🌷🌷heart touching post ashutosh ji radhey radhey jai shri Krishna🌷🌷

laltesh kumar sharma Jan 22, 2021
🌹🌿🌹ati sundar 🌹🌿🌹 jai shree radhe krishan ji 🌹🌿🌹🙏🙏

आशुतोष Jan 22, 2021
@vineetatripathi2 सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।। || जय माता दी || ༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻ 🌼🌸 शुभरात्रि वंदन 🌸🌼

आशुतोष Jan 22, 2021
@spsharma26 धन्यवाद जी... सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।। || जय माता दी || ༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻ 🌼🌸 शुभरात्रि वंदन 🌸🌼

आशुतोष Jan 22, 2021
@lalteshkumarsharma धन्यवाद जी... सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।। || जय माता दी || ༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻ 🌼🌸 शुभरात्रि वंदन 🌸🌼

आशुतोष Jan 22, 2021
@arvindsharma26 धन्यवाद जी... सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।। || जय माता दी || ༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻ 🌼🌸 शुभरात्रि वंदन 🌸🌼

आशुतोष Jan 22, 2021
@poonampanwar1 सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।। || जय माता दी || ༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻ 🌼🌸 शुभरात्रि वंदन 🌸🌼

आशुतोष Jan 23, 2021
@somprakashgupta1 ‘ॐ शं शनिश्चराय नम:’ ।। जय जय शनिदेव ।। ।। जय बजरंगबली ।। ༺꧁ Զเधॆ Զเधॆ꧂༻ 🌼🌻मंगल दिवस की शुभकामनाएँ🌻🌼

शंकर राजलवाल Jan 24, 2021
इतनी बेहतरीन कहानी के लिए धन्यवाद हमारी बेटिया हमारा गरूर होती है उनकी मुस्कराहट कायनात का बेहतरीन तोफा होता है

🥀🥀 Feb 26, 2021

*Bahut sunder poem hai *मैं नारी नदी सी, मेरे दो किनारे* 👩👩👩👩👩👩👩👩 मै नारी नदी सी मेरे दो किनारे। *एक किनारे ससुराल, दूजी ओर मायका* दोनों मेरे अपने फिर भी अलग दोनों का जायका। *एक तरफ मां जिसकी कोख का मैं हिस्सा ।* दूजी ओर सास जिनके लाल संग जुड़ा मेरे जीवन भर का किस्सा *एक तरफ पिता , जिनसे है अपनत्व की धाक।* दूजी ओर ससुरजी जिनकी हैं सम्मान की साख। *मायके का आँगन मेरे जन्म की किलकारी* ससुराल का आँगन मेरे बच्चों की चिलकारी *मायके में मेरी बहने , मेरी हमजोली* ससुराल में मेरी ननदे है, शक्कर सी मीठी गोली। *मायके में मामा, काका है पिता सी मुस्कान* ससुराल के देवर जेठ हैं तीखे में मिष्टान। *मायके में भाभी है* ममता के खजाने की चाबी,* ससुराल में देवरानी जेठानी हैं मेरी तरह ही बहती नदी का पानी। *मायके में मेरा भईया* एक आस जो बनेगा दुख में मेरी नय्या ससुराल में मेरे प्राणप्रिय सैया जो हैं मेरे जीवन के खेवैया।* . *ससुराल ओर मायका हैं दो नदी की धारा* जो एक नारी में समाकर नारी को बनाती है सागर सा गहरा। *नारी शक्ति को प्रणाम* 🙏👍👍

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Anju Mishra Feb 28, 2021

💐🙏जय श्री राधे कृष्णा 🙏💐 व्यवहार की सुंदरता पर ध्यान दें: प्रेरक कहानी 👉एक सभा में गुरु जी ने प्रवचन के दौरान एक 30 वर्षीय युवक को खडा कर पूछा कि, आप मुम्बई मे जुहू चौपाटी पर चल रहे हैं और सामने से एक सुन्दर लडकी आ रही है, तो आप क्या करोगे? युवक ने कहा: उस पर नजर जायेगी, उसे देखने लगेंगे। गुरु जी ने पूछा: वह लडकी आगे बढ गयी, तो क्या पीछे मुडकर भी देखोगे? लडके ने कहा: हाँ, अगर धर्मपत्नी साथ नहीं है तो। सभा में सभी हँस पडे, गुरु जी ने फिर पूछा: जरा यह बताओ वह सुन्दर चेहरा आपको कब तक याद रहेगा? युवक ने कहा 5-10 मिनट तक, जब तक कोई दूसरा सुन्दर चेहरा सामने न आ जाए। गुरु जी ने उस युवक से कहा: अब जरा कल्पना कीजिये! आप जयपुर से मुम्बई जा रहे हैं और मैंने आपको एक पुस्तकों का पैकेट देते हुए कहा कि मुम्बई में अमुक महानुभाव के यहाँ यह पैकेट पहुँचा देना। आप पैकेट देने मुम्बई में उनके घर गए। उनका घर देखा तो आपको पता चला कि ये तो बडे अरबपति हैं। घर के बाहर 10 गाडियाँ और 5 चौकीदार खडे हैं। उन्हें आपने पैकेट की सूचना अन्दर भिजवाई, तो वे महानुभाव खुद बाहर आए। आप से पैकेट लिया। आप जाने लगे तो आपको आग्रह करके घर में ले गए। पास में बैठाकर गरम खाना खिलाया। चलते समय आप से पूछा: किसमें आए हो? आपने कहा: लोकल ट्रेन में। उन्होंने ड्राइवर को बोलकर आपको गंतव्य तक पहुँचाने के लिए कहा और आप जैसे ही अपने स्थान पर पहुँचने वाले थे कि उस अरबपति महानुभाव का फोन आया: भैया, आप आराम से पहुँच गए? अब आप बताइए कि आपको वे महानुभाव कब तक याद रहेंगे? युवक ने कहा: गुरु जी! जिंदगी में मरते दम तक उस व्यक्ति को हम भूल नहीं सकते। गुरु जी ने युवक के माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए कहा: यह है जीवन की हकीकत। सुन्दर चेहरा थोड़े समय ही याद रहता है, पर सुन्दर व्यवहार जीवन भर याद रहता है।... ...बस यही है जीवन का गुरु मंत्र! अपने चेहरे और शरीर की सुंदरता से ज़्यादा अपने व्यवहार की सुंदरता पर ध्यान दें। जीवन अपने लिए आनंददायक और दूसरों के लिए अविस्मरणीय प्रेरणादायक बन जाएगा।

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ramkumarverma Feb 28, 2021

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Mrs.Bajaj. Feb 27, 2021

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ramkumarverma Feb 27, 2021

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(((((((((( सच्चा सन्यास )))))))))) 🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸 एक व्यक्ति प्यास से बेचैन भटक रहा था. उसे गंगाजी दिखाई पड़ी. पानी पीने के लिए नदी की ओर तेजी से भागा लेकिन नदी तट पर पहुंचने से पहले ही बेहोश होकर गिर गया। थोड़ी देर बाद वहां एक संन्यासी पहुंचे. उन्होंने उसके मुंह पर पानी का छींटा मारा तो वह होश में आया. व्यक्ति ने उनके चरण छू लिए और अपने प्राण बचाने के लिए धन्यवाद करने लगा। संन्यासी ने कहा- बचाने वाला तो भगवान है. मुझमें इतना सामर्थ्य कहां है ? शक्ति होती तो मेरे सामने बहुत से लोग मरे मैं उन्हें बचा न लेता. मैं तो सिर्फ बचाने का माध्यम बन गया। इसके बाद संन्यासी चलने को हुए तो व्यक्ति ने कहा कि मैं भी आपके साथ चलूंगा. संन्यासी ने पूछा- तुम कहां तक चलोगे. व्यक्ति बोला- जहां तक आप जाएंगे। संन्यासी ने कहा मुझे तो खुद पता ही नहीं कि कहां जा रहा हूं और अगला ठिकाना कहां होगा. संन्यासी ने समझाया कि उसकी कोई मंजिल नहीं है लेकिन वह अड़ा रहा. दोनों चल पड़े। कुछ समय बाद व्यक्ति ने कहा- मन तो कहता है कि आपके साथ ही चलता रहूं लेकिन कुछ टंटा गले में अटका है. वह जान नहीं छोड़ता. आपकी ही तरह भक्तिभाव और तप की इच्छा है पर विवश हूं। संन्यासी के पूछने पर उसने अपने गले का टंटा बताना शुरू किया. घर में कोई स्त्री और बच्चा नहीं है. एक पैतृक मकान है उसमें पानी का कूप लगा है। छोटा बागीचा भी है. घर से जाता हूं तो वह सूखने लगता है. पौधों का जीवन कैसे नष्ट करूं. नहीं रहने पर लोग कूप को गंदा करते हैं. नौकर रखवाली नहीं करते, बैल भूखे रहते हैं. बेजुबान जानवर है उसे कष्ट दूं। बहुत से संगी-साथी हैं जो मेरे नहीं होने से उदास होते हैं, उनके चेहरे की उदासी देखकर उनका मोह भी नहीं छोड़ पाता। दादा-परदादा ने कुछ लेन-देन कर रखा था. उसकी वसूली भी देखनी है. नहीं तो लोग गबन कर जाएंगे. अपने नगर से भी प्रेम है। बाहर जाता हूं तो मन उधर खिंचा रहता है. अपने नगर में समय आनंदमय बीत जाता है. लेकिन मैं आपकी तरह संन्यासी बनना चाहता हूं. राह दिखाएं। संन्यासी ने उसकी बात सुनी फिर मुस्कराने. लगे. उन्होंने कहा- जो तुम कर रहे हो वह जरूरी है. तुम संन्यास की बात मत सोचो. अपना काम करते रहो। व्यक्ति उनकी बात समझ तो रहा था लेकिन उस पर संन्यासी बनने की धुन भी सवार थी। चलते-चलते उसका नगर आ गया. उसे घर को देखने की इच्छा हुई. उसने संन्यासी से बड़ी विनती की- महाराज मेरे घर चलें. कम से कम 15 दिन हम घर पर रूकते हैं. सब निपटाकर फिर मैं आपके साथ निकल जाउंगा। संन्यासी मुस्कुराने लगे और खुशी-खुशी तैयार हो गए. उसकी जिद पर संन्यासी रूक गए और उसे बारीकी से देखने लगे। सोलहवें दिन अपना सामान समेटा और निकलने के लिए तैयार हो गए. व्यक्ति ने कहा-महाराज अभी थोड़ा काम रहता है. पेड़-पौधों का इंतजाम कर दूं. बस कुछ दिन और रूक जाएं निपटाकर चलता हूं। संन्यासी ने कहा- तुम हृदय से अच्छे हो लेकिन किसी भी वस्तु से मोह त्यागने को तैयार ही न हो. मेरे साथ चलने से तुम्हारा कल्याण नहीं हो सकता. किसी भी संन्यासी के साथ तुम्हारा भला नहीं हो सकता। उसने कहा- कोई है ही नहीं तो फिर किसके लिए लोभ-मोह करूं। संन्यासी बोले- यही तो और चिंता की बात है. समाज को परिवार समझ लो, उसकी सेवा को भक्ति. ईश्वर को प्रतिदिन सब कुछ अर्पित कर देना. तुम्हारा कल्याण हो इसी में हो जाएगा. कुछ और करने की जरूरत नहीं। वह व्यक्ति उनको कुछ दूर तक छोड़ने आया. विदा होते-होते उसने कहा कि कोई एक उपदेश तो दे दीजिए जो मेरा जीवन बदल दे। संन्यासी हंसे और बोले- सत्य का साथ देना, धन का मोह न करना. उन्होंने विदा ली। कुछ साल बाद वह संन्यासी फिर वहां आए. उस व्यक्ति की काफी प्रसिद्धि हो चुकी थी. सभी उसे पक्का और सच्चा मानते थे. लोग उससे परामर्श लेते. छोटे-मोटे विवाद में वह फैसला देता तो सब मानते.उसका चेहरा बताता था कि संतुष्ट और प्रसन्न है। संन्यासी कई दिन तक वहां ठहरे. फिर एक दिन अचानक तैयार हो गए चलने को। उस व्यक्ति ने कहा- आप इतनी जल्दी क्यों जाने लगे. आपने तो पूछा भी नहीं कि मैं आपके उपदेश के अनुसार आचरण कर रहा हूं कि नहीं। संन्यासी ने कहा- मैंने तुम्हें कोई उपदेश दिया ही कहां था ? पिछली बार मैंने देखा कि तुम्हारे अंदर निर्जीवों तक के लिए दया है लेकिन धन का मोह बाधा कर रहा था. वह मोह तुम्हें असत्य की ओर ले जाता था हालांकि तुम्हें ग्लानि भी होती थी। तुम्हारा हृदय तो सन्यास के लिए ऊर्वर था. बीज पहले से ही पड़े थे, मैंने तो बस बीजों में लग रही घुन के बारे में बता दिया. तुमने घुन हटा दी और फिर चमत्कार हो गया. संन्यास संसार को छोड़कर ही नहीं प्राप्त होता. अवगुणों का त्याग भी संन्यास है। हम सब में उस व्यक्ति की तरह सदगुण हैं. जरूरत है उन्हें निखारने की. निखारने वाले की. अपने काम करने के तरीके में थोड़ा बदलाव करके आप चमत्कार कर सकते हैं। एक बदलाव आजमाइए- हर किसी से प्रेम से बोलें. उनसे ज्यादा मीठा बोलेंगे जिन पर आपका शासन है. आपमें जो मधुरता आ जाएगी वह जीवन बदल देगी कम से कम इसे आजमाकर देखिए। 🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸

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ramkumarverma Feb 27, 2021

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आज की कहानी सभी नवीन बहुओं के लिए है, इस बहू की चतुराई को पढ़ आप सभी हतप्रभ रह जाएंगे सभी श्रवण पान करे एक लड़की विवाह करके ससुराल में आयी| घर में एक तो उसका पति था, एक सास थी और एक दादी सास थी| वहाँ आकर उस लड़की ने देखा कि दादी सास का बड़ा अपमान, तिरस्कार हो रहा है! छोटी सास उसको ठोकर मार देती, गाली दे देती| यह देखकर उस लड़की को बड़ा बुरा लगा और दया भी आयी! उसने विचार किया कि अगर मैं सास से कह कहूँ कि आप अपनी सास का तिरस्कार मत किया करो तो वह कहेगी कि कल की छोकरी आकर मुझे उपदेश देती है, गुरु बनती है! अतः उसने अपनी सास से कुछ नहीं कहा| उसने एक उपाय सोचा| वह रोज काम-धंधा करके दादी सास के पास जाकर बैठ जाती और उसके पैर दबाती| जब वह वहाँ ज्यादा बैठने लगी तो यह सास को सुहाया नहीं| एक दिन सास ने उससे पूछा कि ‘बहु! वहाँ क्यों जा बैठी?’ लड़की ने कहा कि ‘बोलो, काम बताओ!’ सास बोली कि ‘काम क्या बतायें, तू वहाँ क्यों जा बैठी?’ लड़की बोली कि ‘मेरे पिता जी ने कहा था कि जवान लड़कों के साथ तो कभी बैठना ही नहीं, जवान लड़कियों के साथ भी कभी मत बैठना; जो घर में बड़े-बूढ़े हों, उनके पास बैठना, उनसे शिक्षा लेना| हमारे घर में सबसे बूढ़ी ये ही हैं, और किसके पास बैठूँ? मेरे पिताजी ने कहा था कि वहाँ हमारे घर की रिवाज नहीं चलेगी, वहाँ तो तेरे ससुराल की रिवाज चलेगी| मेरे को यहाँ की रिवाज सीखनी है, इसलिये मैं उनसे पूछती हूँ कि मेरी सास आपकी सेवा कैसे करती है?’ सास ने पूछा कि ‘बुढ़िया ने क्या कहा?’ वह बोली कि ‘दादी जी कहती हैं कि यह मेरे को ठोकर नहीं मारे, गाली नहीं दे तो मैं सेवा ही मान लूँ!’ सास बोली कि ‘क्या तू भी ऐसा ही करेगी?’ वह बोली कि ‘मैं ऐसा नहीं कहती हूँ, मेरे पिता जी ने कहा कि बड़ों से ससुराल की रीति सीखना!’ सास डरने लग गयी कि मैं अपनी सास के साथ जो बर्ताव करुँगी, वही बर्ताव मेरे साथ होने लग जायगा! एक जगह कोने में ठीकरी इकट्ठी पड़ी थीं| सास ने पूछा-‘बहू! ये ठीकरी क्यों क्यों इकट्ठी की हैं?’ लड़की ने कहा-‘आप दादी जी को ठीकरी में भोजन दिया करती हो, इसलिये मैंने पहले ही जमा कर ली|’ ‘तू मेरे को ठीकरी में भोजन करायेगी क्या?’ ‘मेरे पिता जी ने कहा कि तेरे वहाँ की रीति चलेगी|’ ‘यह रीति थोड़े ही है!’ ‘तो आप फिर आप ठीकरी मैं क्यों देती हो?’ ‘थाली कौन माँजे?’ ‘थाली तो मैं माँज दूँगी|’ ‘तो तू थाली में दिया कर, ठीकरी उठाकर बाहर फेंक|’ अब बूढ़ी माँजी को थाली में भोजन मिलने लगा| सबको भोजन देने के बाद जो बाकी बचे, वह खिचड़ी की खुरचन, कंकड़ वाली दाल माँ जी को दी जाती थी| लड़की उसको हाथ में लाकर देखने लगी| सास ने पूछा-‘बहू! क्या देखती हो?’ ‘मैं देखती हूँ कि बड़ों को भोजन कैसा दिया जाय|’ ‘ऐसा भोजन देने की कोई रीति थोड़े ही है!’ ‘तो फिर आप ऐसा भोजन क्यों देती हो?’ ‘पहले भोजन कौन दे?’ ‘आप आज्ञा दो तो मैं दे दूँगी|’ ‘तो तू पहले भोजन दे दिया कर|’ ‘अच्छी बात है!’ अब बूढ़ी माँ जी को बढ़िया भोजन मिलने लगा| रसोई बनते ही वह लड़की ताजी खिचड़ी, ताजा फुलका, दाल-साग ले जाकर माँ जी को दे देती| माँ जी तो मन-ही-मन आशीर्वाद देने लगी| माँ जी दिनभर एक खटिया में पड़ी रहती| खटिया टूटी हुई थी| उसमें से बन्दनवार की तरह मूँज नीचे लटकती थी| लड़की उस खटिया को देख रही थी| सास बोली कि ‘क्या देखती हो?’ ‘देखती हूँ कि बड़ों को खाट कैसे दी जाय|’ ‘ऐसी खाट थोड़े ही दी जाती है! यह तो टूट जाने से ऐसी हो गयी|’ ‘तो दूसरी क्यों नही बिछातीं?’ ‘तू बिछा दे दूसरी|’ ‘आप आज्ञा दो तो दूसरी खाट बिछा दूँ!’ अब माँ जी के लिए निवार की खाट लाकर बिछा दी गयी| एक दिन कपड़े धोते समय वह लड़की माँ जी के कपड़े देखने लगी| कपड़े छलनी हो रखे थे| सास ने पूछा कि ‘क्या देखती हो?’ ‘देखती हूँ कि बूढों को कपड़ा कैसे दिया जाय|’ ‘फिर वही बात, कपड़ा ऐसा थोड़े ही दिया जाता है? यह तो पुराना होने पर ऐसा हो जाता है|’ ‘फिर वही कपड़ा रहने दें क्या?’ ‘तू बदल दे|’ अब लड़की ने माँ जी का कपड़ा चादर, बिछौना आदि सब बदल दिया| उसकी चतुराई से बूढ़ी माँ जी का जीवन सुधर गया! अगर वह लड़की सास को कोरा उपदेश देती तो क्या वह उसकी बात मान लेती? बातों का असर नहीं पड़ता, आचरण का असर पड़ता है| इसलिये लड़कियों को चाहिये कि ऐसी बुद्धिमानी से सेवा करें और सबको राजी रखें|

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jyotipandey94 Feb 27, 2021

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