RAJENDRA BHAWSAR
RAJENDRA BHAWSAR Dec 7, 2020

🙏🌹🌹जय श्री श्याम 🌹🌹🙏

🙏🌹🌹जय श्री श्याम 🌹🌹🙏

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Sarita Choudhary Apr 11, 2021

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Sarita Choudhary Apr 10, 2021

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M.S.Chauhan Apr 12, 2021

*शुभ संध्या-शुभ संदेश* *जय श्रीकृष्ण गोविंद* *श्री कृष्ण का लॉकडाउन* *✍️🖌️🖋️एक कथा के अनुसार कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र को विशाल सेनाओं के आवागमन की सुविधा के लिए तैयार किया जा रहा था। उन्होंने हाथियों का इस्तेमाल पेड़ों को उखाड़ने और जमीन साफ करने के लिए किया। ऐसे ही एक पेड़ पर एक गौरैया अपने चार बच्चों के साथ रहती थी। जब उस पेड़ को उखाड़ा जा रहा था तो उसका घोंसला जमीन पर गिर गया, लेकिन चमत्कारी रूप से उसकी संताने अनहोनी से बच गई। लेकिन वो अभी बहुत छोटे होने के कारण उड़ने में असमर्थ थे.* *कमजोर और भयभीत गौरैया मदद के लिए इधर-उधर देखती रही। तभी उसने कृष्ण को अर्जुन के साथ वहा आते देखा। वे युद्ध के मैदान की जांच करने और युद्ध की शुरुआत से पहले जीतने की रणनीति तैयार करने के लिए वहां गए थे*. *उसने कृष्ण के रथ तक पहुँचने के लिए अपने छोटे पंख फड़फड़ाए और किसी प्रकार श्री कृष्ण के पास पहुंची.* *"हे कृष्ण, कृपया मेरे बच्चों को बचाये क्योकि लड़ाई शुरू होने पर कल उन्हें कुचल दिया जायेगा”* *सर्व व्यापी भगवन बोले "मैं तुम्हारी बात सुन रहा हूं, लेकिन मैं प्रकृति के कानून में हस्तक्षेप नहीं कर सकता”* *गौरैया ने कहा "हे भगवान ! मै जानती हूँ कि आप मेरे उद्धारकर्ता हैं, मैं अपने बच्चों के भाग्य को आपके हाथों में सौंपती हूं। अब यह आपके ऊपर है कि आप उन्हें मारते हैं या उन्हें बचाते हैं"* *"काल चक्र पर किसी का बस नहीं है," श्री कृष्ण ने एक साधारण व्यक्ति की तरह उससे बात की जिसका आशय था कि वहा ऐसा कुछ भी नहीं था जिसके बारे में वो कुछ भी कर सकते थे.* *गौरैया ने विश्वास और श्रद्धा के साथ कहा "प्रभु, आप कैसे और क्या करते है वो मै नहीं जान सकती,"। "आप स्वयं काल के नियंता हैं,यह मुझे पता है। मैं सारी स्थिति एवं परिस्थति एवं स्वयं को परिवार सहित आपको समर्पण करती हूं”* *भगवन बोले "अपने घोंसले में तीन सप्ताह के लिए भोजन का संग्रह करो”* *गौरैया और श्री कृष्ण के संवाद से अनभिज्ञ, अर्जुन गौरैया को दूर भगाने की कोशिश करते है । गौरैया ने अपने पंखों को कुछ मिनटों के लिए फुलाया और फिर अपने घोंसले में वापस चली गई।* *दो दिन बाद, शंख के उदघोष से युद्ध शुरू होने की घोषणा की गई।* *कृष्ण ने अर्जुन से कहा की अपने धनुष और बाण मुझे दो। अर्जुन चौंका क्योंकि कृष्ण ने युद्ध में कोई भी हथियार नहीं उठाने की शपथ ली थी। इसके अतिरिक्त, अर्जुन का मानना था कि वह ही सबसे अच्छा धनुर्धर है।* *"मुझे आज्ञा दें, भगवान,"अर्जुन ने दृढ़ विश्वास के साथ कहा, मेरे तीरों के लिए कुछ भी अभेद्य नहीं है.* *चुपचाप अर्जुन से धनुष लेकर कृष्ण ने एक हाथी को निशाना बनाया। लेकिन, हाथी को मार के नीचे गिराने के बजाय, तीर हाथी के गले की घंटी में जा टकराया और एक चिंगारी सी उड़ गई.* *अर्जुन ये देख कर अपनी हंसी नहीं रोक पाया कि कृष्ण एक आसान सा निशान चूक गए।* *"क्या मैं प्रयास करू?" उसने स्वयं को प्रस्तुत किया।* *उसकी प्रतिक्रिया को नजरअंदाज करते हुए, कृष्ण ने उन्हें धनुष वापस दिया और कहा कि कोई और कार्रवाई आवश्यक नहीं है*। *“लेकिन केशव तुमने हाथी को क्यों तीर मारा? अर्जुन ने पूछा।* *"क्योंकि इस हाथी ने उस गौरैया के आश्रय उसके घोंसले को जो कि एक पेड़ पर था उसको गिरा दिया था”* *"कौन सी गौरैया?" अर्जुन ने पूछा। "इसके अतिरिक्त, हाथी तो अभी स्वस्थ और जीवित है। केवल घंटी ही टूट कर गिरी है!"* *अर्जुन के सवालों को खारिज करते हुए, कृष्ण ने उसे शंख फूंकने का निर्देश दिया.* *युद्ध शुरू हुआ, अगले अठारह दिनों में कई जानें चली गईं। अंत में पांडवों की जीत हुई। एक बार फिर, कृष्ण अर्जुन को अपने साथ सुदूर क्षेत्र में भ्रमण करने के लिए ले गए। कई शव अभी भी वहाँ हैं जो उनके अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहे हैं। जंग का मैदान गंभीर अंगों और सिर, बेजान सीढ़ियों और हाथियों से अटा पड़ा था*. *कृष्ण एक निश्चित स्थान पर रुके और एक घंटी जो कि हाथी पर बाँधी जाती थी उसे देख कर विचार करने लगे.* "अर्जुन," उन्होंने कहा, "क्या आप मेरे लिए यह घंटी उठाएंगे और इसे एक तरफ रख देंगे?"* *निर्देश बिलकुल सरल था परन्तु अर्जुन के समझ में नहीं आया। आख़िरकार, विशाल मैदान में जहाँ बहुत सी अन्य चीज़ों को साफ़ करने की ज़रूरत थी, कृष्ण उसे धातु के एक टुकड़े को रास्ते से हटाने के लिए क्यों कहेंगे?* *उसने प्रश्नवाचक दृष्टि से उनकी ओर देखा।* *"हाँ, यह घंटी," कृष्ण ने दोहराया। "यह वही घंटी है जो हाथी की गर्दन पर पड़ी थी जिस पर मैंने तीर मारा था”* *अर्जुन बिना किसी और सवाल के भारी घंटी उठाने के लिए नीचे झुका। जैसे ही उन्होंने इसे उठाया, , उसकी हमेशा के लिए जैसे दुनिया बदल गई..... एक, दो, तीन, चार और पांच। चार युवा पक्षियों और उसके बाद एक गौरैया उस घंटी के नीचे से निकले । बाहर निकल के माँ और छोटे पक्षी कृष्ण के इर्द-गिर्द मंडराने लगे एवं बड़े आनंद से उनकी परिक्रमा करने लगे। अठारह दिन पहले काटी गई एक घंटी ने पूरे परिवार की रक्षा की थी.* *"मुझे क्षमा करें हे कृष्ण, अर्जुन ने कहा,"आपको मानव शरीर में देखकर और सामान्य मनुष्यों की तरह व्यवहार करते हुए, मैं भूल गया था कि आप वास्तव में कौन हैं”🙏* *✍️आइये हम भी तब तक इस घंटी रूपी घर मे परिवार के साथ संयम के साथ, अन्न जल ग्रहण करते हुए, प्रभु के प्रति आस्था रखते हुए विश्राम करें जब तक ये हमारे लिए उठाई न जाये।* *सदैव प्रसन्न रहिये !* *जो प्राप्त है-पर्याप्त है!!🙏* *जय श्री कृष्ण राधे राधे* 🌷💖😷🙏 😷💖🌷

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GL Choudhary Apr 13, 2021

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Vishnubhai Suthar Apr 12, 2021

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Shanti Pathak Apr 11, 2021

*जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन * 👌 *दानवीर राजा हरिश्चंद्र का दान* 👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏 *राजा हरिश्चंद्र एक बहुत बड़े दानवीर थे। उनकी ये एक खास बात थी कि जब वो दान देने के लिए✊ हाथ आगे बढ़ाते तो अपनी 😞नज़रें नीचे झुका लेते थे।* *ये बात सभी को अजीब लगती थी कि ये राजा कैसे दानवीर हैं। ये दान भी देते हैं और इन्हें शर्म भी आती है।* *ये बात जब तुलसीदासजी तक पहुँची तो उन्होंने राजा को चार पंक्तियाँ लिख भेजीं जिसमें लिखा था* - *ऐसी देनी देन जु* *कित सीखे हो सेन।* *ज्यों ज्यों कर ऊँचौ करौ* *त्यों त्यों नीचे नैन।।* *इसका मतलब था कि राजा तुम ऐसा दान देना कहाँ से सीखे हो? जैसे जैसे तुम्हारे हाथ ऊपर उठते हैं वैसे वैसे तुम्हारी नज़रें तुम्हारे नैन नीचे क्यूँ झुक जाते हैं?* *राजा ने इसके बदले में जो जवाब दिया वो जवाब इतना गजब का था कि जिसने भी सुना वो राजा का कायल हो गया।* *इतना प्यारा जवाब आज तक किसी ने किसी को नहीं दिया।* *राजा ने जवाब में लिखा* - *देनहार कोई और है* *भेजत जो दिन रैन।* *लोग भरम हम पर करैं* *तासौं नीचे नैन।।* *मतलब, देने वाला तो कोई और है वो ही मालिक है वो परमात्मा है वो दिन रात भेज रहा है। परन्तु लोग ये समझते हैं कि मैं दे रहा हूँ राजा दे रहा है। ये सोच कर मुझे शर्म आ जाती है और मेरी आँखें नीचे झुक जाती हैं।* *वो ही करता और वो ही करवाता है, क्यों बंदे तू इतराता है,* *एक साँस भी नही है तेरे बस की, वो ही सुलाता और वो ही जगाता है.........✍️🙏* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 सुतीक्ष्ण भक्त की कथा किसी ने कहा है की भगवान को भोलापन पसन्द होता है भगवान भोले भक्तो के वशीभूत रहते हैं अगर भक्त अपने सच्चे मन से भगवान को पुकारता है तो वो हाजिर होते है और इस बात का उदाहरण हम सुतीक्ष्ण मुनि की कथा से ले सकते है आज हम आपको त्रेता युग के भोले भक्त सुतीक्ष्ण की कथा सुनाने जा रहे है सुतीक्ष्ण भक्त के गुरु का नाम सुतीक्ष्ण भक्त ऋषि अगस्त्य के शिष्य थे और ऋषि अगस्त्य के आश्रम में ही रहते थे और शिक्षा ग्रहण करते थे मगर अध्यन में कमजोर थे उन्हें शिक्षा से ज्यादा अच्छा गाय चराना लगता था क्योंकि बहुत भोले थे और साफ मन के थे मगर गुरु भक्ति उनके मन में कुट कूट के भरी हुई थी एक रोज़ अगस्त्य ऋषि ने उनकी परीक्षा लेनी चाही उन्होने सुतीक्ष्ण से कहा शिष्य तुम्हारी शिक्षा पूर्ण हो चुकी है अब तुम यहां से जा सकते हो तो सुतीक्ष्ण ने कहा आपको में गुरु दक्षिणा क्या दू कुछ आज्ञा कीजिए ? तो अगस्त्य ऋषि ने कहा तुम्हारे जैसे गुरु भक्त शिष्य ही मेरी गुरुदक्षिना है सुतीक्ष्ण ने कहा गुरुदेव बिना गुरु दक्षिणा के शिक्षा का सही समय पर सदुपयोग नहीं क्या जा सकता है इसलिए कुछ तो अज्ञा कीजिए तो अगस्त्य ऋषि ने कहा कि सुतीक्ष्ण अगर तुम गुरु दक्षिणा ही देना चाहते हो तो प्रभु श्री राम को जानकी सहित आश्रम में ला दो ! सुतीक्ष्ण ने कहा ठीक है गुरुदेव में जरुर ये गुरु दक्षिणा दूंगा ओर यह कह कर आश्रम से चले गए और भगवान की भक्ति करने लगे समय बीतता गया उनकी तपस्या इतनी सघन हो गई की उनको किसी का भी अभाश नहीं होता था जब भगवान अपने वनवास के समय चित्रकूट पर्वत से पंचवटी की ओर जा रहे थे तब उन्होंने सुतीक्ष्ण भक्त को देखा और उन्हें जगाने की कोशिश करने लगे मगर वो नहीं जागे अंत में श्री राम ने उनको चतुर्भुज रूप दिखाया तब वे जागे ! कहते है की भगवान श्री राम ने रामायण में दो ही बार अपना चतुर्भुज रूप दिखाया था एक माता कोशल्या को ओर एक सुतीक्ष्ण भक्त को तो जैसे ही सुतीक्ष्ण भक्त ने चतुर्भुज रूप में भगवान को देखा तो वो खुश हो गए और अगस्त्य ऋषि के आश्रम पर भगवान श्री राम लक्ष्मण और माता सीता को लेकर चले गए और उन्हें द्वार के बाहर बैठा कर आश्रम में जाकर अपने गुरु से कहा गुरुदेव आज में आपको आपकी गुरु दक्षिणा देने आया हूं अगस्त्य ऋषि भी खुश हो गए उन्होंने भगवान श्री राम लक्ष्मण और सीता का पूजन और सतकार किया ओर सुतीक्ष्ण भक्त से कहा कि में तुम्हारे जैसा शिष्य पाकर धन्य हो गया |

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Neeru Devi Apr 12, 2021

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