09⚘11⚘2017⚘भव्य श्रृंगार दर्शन⚘ श्रीनाथ जी⚘नाथद्वारा⚘राजस्थान⚘

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राजू भूमिहार ब्राह्मण जी Nov 9, 2017
🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉       🌷🌹💐🌺🌷🌹💐🌺  🌹🌷सनातन ज्ञान - वेदान्त 🌷🌹         🌷🌹💐🌺🌷🌹💐🌷 🕉 वेदान्त तुन्हें सिखाता है ये संसार एक शीश महल के समान हैं और ये सब शरीर विभिन्न दर्पणों के तुल्य हैं। और तुम्हारी सच्ची आत्मा या निज स्वरूप का सब ऒर ठीक वैसे ही प्रतिबिंब पड़ता हैं जैसे कि एक कुत्ता अपना प्रतिबिंब चारो ओर शीशे की दीवारों में देखता है  इस तरह एक अनंत आत्मा , एक अनंत ईश, एक शक्ति विभिन्न दर्पणों से अपना प्रतिबिंब डालती हैं। एक अनंत राम ही अपना स्वरूप इन सब शरीरो द्वारा प्रतिबिम्बित हो रहा है ।  मूर्ख लोग कुत्तो की तरह इस संसार मे आते और  दुसरो को धमकाते फिरते हैं। कोई किसी से भयभीत हो रहा है तो कोई किसी के टुकड़े करने पे तुला है।   *इस ईर्ष्या द्वेष ओर भय का कारण क्या है?* *कुत्ते की सी अज्ञानता इस संसार के समस्त भय , ईर्ष्या और द्वेष का कारण है* 🕉 कृपया इस संसार के शीश महल के मालिक की तरह इस संसार मे आईये। आप सम्पूर्ण संसार के स्वामी होंगे । आप एक मालिक की तरह सबको अपना स्वरूप समझ कर अपने शत्रुओं व प्रतिद्वंदियों ओर मित्रो व भाईओ को आगे बढ़ते हुए देखेंगे तो आप को हर्ष होगा।  कही भी किसी प्रकार का गौरव देख कर आप को प्रसन्ता होगी। *आप इस संसार को स्वर्ग बना सकते हैं*        🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🙏suprabhatam🙏       🕉🕉🙏हरि ॐ🙏 🕉🕉       🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉

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