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कामेंट्स

Jai Mata Di Mar 1, 2021
Radhey Krishna Ji. Good Night Dear Sister. God Bless You And Your Family

GOVIND CHOUHAN Mar 1, 2021
JAI SHREE RADHEY RADHEY JIII 🌺 JAI SHREE RADHEY KRISHNA JII 🌺 SUBH RATRI VANDAN,🙏🙏

🔴 Suresh Kumar 🔴 Mar 1, 2021
राधे राधे जी 🙏 शुभ रात्रि वंदन सदा आनंदित रहो मेरी प्यारी बहन

Kamlesh Mar 1, 2021
जय श्री राधे राधे

Archana Singh Mar 1, 2021
🙏🏵️शुभ रात्रि वंदन मेरी प्यारी बहना जी🏵️🙏 मोर मुकुट बंसी वाले की जय हो🙏🌹🌹 राधे गोविंद जी आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें बहना जी🙏🌹

CG Sahu Mar 1, 2021
bahut sunder tasber radhe Krishna nice good night 👌🏻🙏🏻👌🏻🍀🍀🌺

Sushil Kumar Sharma 🙏🙏🌹🌹 Mar 1, 2021
Good Night My Sister ji 🙏🙏 Jay Shree Radhe Radhe Radhe 🙏🙏🌹🌹🌹 God Bless you And your Family Always Be Happy My Sister ji 🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹.

Rajpal singh Mar 1, 2021
jai shree krishna Radhey Radhey ji good night ji 🙏🙏

दुर्गा शर्मा Mar 3, 2021
@kamlesh3573 वो बचपन ही अच्छा था खेलते खेलते चाहे, छत पर सोए या ज़मीन पर, आँखे हमेशा बिस्तर पर ही खुलती सुप्रभात जी राधे राधे

A mishra ji Mar 3, 2021
राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे ji 🌷 🌷

A mishra ji Mar 4, 2021
Good morning ji Jay shree Radhe krishna ji 🙏

Shanti Pathak Apr 11, 2021

*जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन * 👌 *दानवीर राजा हरिश्चंद्र का दान* 👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏 *राजा हरिश्चंद्र एक बहुत बड़े दानवीर थे। उनकी ये एक खास बात थी कि जब वो दान देने के लिए✊ हाथ आगे बढ़ाते तो अपनी 😞नज़रें नीचे झुका लेते थे।* *ये बात सभी को अजीब लगती थी कि ये राजा कैसे दानवीर हैं। ये दान भी देते हैं और इन्हें शर्म भी आती है।* *ये बात जब तुलसीदासजी तक पहुँची तो उन्होंने राजा को चार पंक्तियाँ लिख भेजीं जिसमें लिखा था* - *ऐसी देनी देन जु* *कित सीखे हो सेन।* *ज्यों ज्यों कर ऊँचौ करौ* *त्यों त्यों नीचे नैन।।* *इसका मतलब था कि राजा तुम ऐसा दान देना कहाँ से सीखे हो? जैसे जैसे तुम्हारे हाथ ऊपर उठते हैं वैसे वैसे तुम्हारी नज़रें तुम्हारे नैन नीचे क्यूँ झुक जाते हैं?* *राजा ने इसके बदले में जो जवाब दिया वो जवाब इतना गजब का था कि जिसने भी सुना वो राजा का कायल हो गया।* *इतना प्यारा जवाब आज तक किसी ने किसी को नहीं दिया।* *राजा ने जवाब में लिखा* - *देनहार कोई और है* *भेजत जो दिन रैन।* *लोग भरम हम पर करैं* *तासौं नीचे नैन।।* *मतलब, देने वाला तो कोई और है वो ही मालिक है वो परमात्मा है वो दिन रात भेज रहा है। परन्तु लोग ये समझते हैं कि मैं दे रहा हूँ राजा दे रहा है। ये सोच कर मुझे शर्म आ जाती है और मेरी आँखें नीचे झुक जाती हैं।* *वो ही करता और वो ही करवाता है, क्यों बंदे तू इतराता है,* *एक साँस भी नही है तेरे बस की, वो ही सुलाता और वो ही जगाता है.........✍️🙏* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 सुतीक्ष्ण भक्त की कथा किसी ने कहा है की भगवान को भोलापन पसन्द होता है भगवान भोले भक्तो के वशीभूत रहते हैं अगर भक्त अपने सच्चे मन से भगवान को पुकारता है तो वो हाजिर होते है और इस बात का उदाहरण हम सुतीक्ष्ण मुनि की कथा से ले सकते है आज हम आपको त्रेता युग के भोले भक्त सुतीक्ष्ण की कथा सुनाने जा रहे है सुतीक्ष्ण भक्त के गुरु का नाम सुतीक्ष्ण भक्त ऋषि अगस्त्य के शिष्य थे और ऋषि अगस्त्य के आश्रम में ही रहते थे और शिक्षा ग्रहण करते थे मगर अध्यन में कमजोर थे उन्हें शिक्षा से ज्यादा अच्छा गाय चराना लगता था क्योंकि बहुत भोले थे और साफ मन के थे मगर गुरु भक्ति उनके मन में कुट कूट के भरी हुई थी एक रोज़ अगस्त्य ऋषि ने उनकी परीक्षा लेनी चाही उन्होने सुतीक्ष्ण से कहा शिष्य तुम्हारी शिक्षा पूर्ण हो चुकी है अब तुम यहां से जा सकते हो तो सुतीक्ष्ण ने कहा आपको में गुरु दक्षिणा क्या दू कुछ आज्ञा कीजिए ? तो अगस्त्य ऋषि ने कहा तुम्हारे जैसे गुरु भक्त शिष्य ही मेरी गुरुदक्षिना है सुतीक्ष्ण ने कहा गुरुदेव बिना गुरु दक्षिणा के शिक्षा का सही समय पर सदुपयोग नहीं क्या जा सकता है इसलिए कुछ तो अज्ञा कीजिए तो अगस्त्य ऋषि ने कहा कि सुतीक्ष्ण अगर तुम गुरु दक्षिणा ही देना चाहते हो तो प्रभु श्री राम को जानकी सहित आश्रम में ला दो ! सुतीक्ष्ण ने कहा ठीक है गुरुदेव में जरुर ये गुरु दक्षिणा दूंगा ओर यह कह कर आश्रम से चले गए और भगवान की भक्ति करने लगे समय बीतता गया उनकी तपस्या इतनी सघन हो गई की उनको किसी का भी अभाश नहीं होता था जब भगवान अपने वनवास के समय चित्रकूट पर्वत से पंचवटी की ओर जा रहे थे तब उन्होंने सुतीक्ष्ण भक्त को देखा और उन्हें जगाने की कोशिश करने लगे मगर वो नहीं जागे अंत में श्री राम ने उनको चतुर्भुज रूप दिखाया तब वे जागे ! कहते है की भगवान श्री राम ने रामायण में दो ही बार अपना चतुर्भुज रूप दिखाया था एक माता कोशल्या को ओर एक सुतीक्ष्ण भक्त को तो जैसे ही सुतीक्ष्ण भक्त ने चतुर्भुज रूप में भगवान को देखा तो वो खुश हो गए और अगस्त्य ऋषि के आश्रम पर भगवान श्री राम लक्ष्मण और माता सीता को लेकर चले गए और उन्हें द्वार के बाहर बैठा कर आश्रम में जाकर अपने गुरु से कहा गुरुदेव आज में आपको आपकी गुरु दक्षिणा देने आया हूं अगस्त्य ऋषि भी खुश हो गए उन्होंने भगवान श्री राम लक्ष्मण और सीता का पूजन और सतकार किया ओर सुतीक्ष्ण भक्त से कहा कि में तुम्हारे जैसा शिष्य पाकर धन्य हो गया |

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Shanti Pathak Apr 10, 2021

*जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन* : 🌹🌹 *सकारात्मक सोच*🌹🌹 एक राजा के पास कई हाथी थे, लेकिन एक हाथी बहुत शक्तिशाली था, बहुत आज्ञाकारी, समझदार व युद्ध-कौशल में निपुण था। बहुत से युद्धों में वह भेजा गया था और वह राजा को विजय दिलाकर वापस लौटा था, इसलिए वह महाराज का सबसे प्रिय हाथी था। समय गुजरता गया ... और एक समय ऐसा भी आया, जब वह वृद्ध दिखने लगा। अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर पाता था। इसलिए अब राजा उसे युद्ध क्षेत्र में भी नहीं भेजते थे। एक दिन वह सरोवर में जल पीने के लिए गया, लेकिन वहीं कीचड़ में उसका पैर धँस गया और फिर धँसता ही चला गया। उस हाथी ने बहुत कोशिश की, लेकिन वह उस कीचड़ से स्वयं को नहीं निकाल पाया। उसकी चिंघाड़ने की आवाज से लोगों को यह पता चल गया कि वह हाथी संकट में है। हाथी के फँसने का समाचार राजा तक भी पहुँचा। राजा समेत सभी लोग हाथी के आसपास इक्कठा हो गए और विभिन्न प्रकार के शारीरिक प्रयत्न उसे निकालने के लिए करने लगे। लेकिन बहुत देर तक प्रयास करने के उपरांत कोई मार्ग नहि निकला. तब राजा के एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि तथागत गौतम बुद्ध मार्गभ्रमण कर रहे है तो क्यो ना तथागत गौतम बुद्ध से सलाह मांगि जाये. राजा और सारा मंत्रीमंडल तथागत गौतम बुद्ध के पास गये और अनुरोध किया कि आप हमे इस बिकट परिस्थिती मे मार्गदर्शन करे. तथागत गौतम बुद्ध ने सबके अनुरोध को स्वीकार किया और घटनास्थल का निरीक्षण किया और फिर राजा को सुझाव दिया कि सरोवर के चारों और युद्ध के नगाड़े बजाए जाएँ। सुनने वालोँ को विचित्र लगा कि भला नगाड़े बजाने से वह फँसा हुआ हाथी बाहर कैसे निकलेगा, जो अनेक व्यक्तियों के शारीरिक प्रयत्न से बाहर निकल नहीं पाया। आश्चर्यजनक रूप से जैसे ही युद्ध के नगाड़े बजने प्रारंभ हुए, वैसे ही उस मृतप्राय हाथी के हाव-भाव में परिवर्तन आने लगा। पहले तो वह धीरे-धीरे करके खड़ा हुआ और फिर सबको हतप्रभ करते हुए स्वयं ही कीचड़ से बाहर निकल आया। अब तथागत गौतम बुद्ध ने सबको स्पष्ट किया कि हाथी की शारीरिक क्षमता में कमी नहीं थी, आवश्यकता मात्र उसके अंदर उत्साह के संचार करने की थी। हाथी की इस कहानी से यह स्पष्ट होता है कि यदि हमारे मन में एक बार उत्साह – उमंग जाग जाए तो फिर हमें कार्य करने की ऊर्जा स्वतः ही मिलने लगती है और कार्य के प्रति उत्साह का मनुष्य की उम्र से कोई संबंध नहीं रह जाता। *जीवन में उत्साह बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि मनुष्य सकारात्मक रहे।* 🌹 *राधे राधे*🌹 *भाई तू बड़ा हो गया* मायके आयी रमा, माँ को हैरानी से देख रही थी। माँ बड़े ध्यान से आज के अखबार के मुख पृष्ठ के पास दिन का खाना सजा रही थी। दाल, रोटी, सब्जी और रायता। फिर झट से फोटो खींच व्हाट्सप्प करने लगीं। “माँ ये खाना खाने से पहले फोटो लेने का क्या शौक हो गया है आपको ?” “अरे वो जतिन बेचारा, इतनी दूर रह कर हॉस्टल का खाना ही खा रहा है। कह रहा था की आप रोज लंच और डिनर के वक्त अपने खाने की तस्वीर भेज दिया करो उसे देख कर हॉस्टल का खाना खाने में आसानी रहती है। “ “क्या माँ लाड-प्यार में बिगाड़ रखा है तुमने उसे। वो कभी बड़ा भी होगा या बस ऐसी फालतू की जिद करने वाला बच्चा ही बना रहेगा !” रमा ने शिकायत की। रमा ने खाना खाते ही झट से जतिन को फोन लगाया। “जतिन माँ की ये क्या ड्यूटी लगा रखी है? इतनी दूर से भी माँ को तकलीफ दिए बिना तेरा दिन पूरा नहीं होता क्या ?” “अरे नहीं दीदी ऐसा क्यों कह रही हो। मैं क्यों करूंगा माँ को परेशान ?” “तो प्यारे भाई ये लंच और डिनर की रोज फोटो क्यों मंगवाते हो ?” बहन की शिकायत सुन जतिन हंस पड़ा। फिर कुछ गंभीर स्वर में बोल पड़ा : “दीदी पापा की मौत , तुम्हारी शादी और मेरे हॉस्टल जाने के बाद अब माँ अकेली ही तो रह गयी हैं। पिछली बार छुट्टियों में घर आया तो कामवाली आंटी ने बताया की वो किसी- किसी दिन कुछ भी नहीं बनाती। चाय के साथ ब्रेड खा लेती हैं या बस खिचड़ी। पूरे दिन अकेले उदास बैठी रहती हैं। तब उन्हें रोज ढंग का खाना खिलवाने का यही तरीका सूझा। मुझे फोटो भेजने के चक्कर में दो टाइम अच्छा खाना बनाती हैं। फिर खा भी लेती हैं और इस व्यस्तता के चलते ज्यादा उदास भी नहीं होती। “ जवाब सुन रमा की ऑंखें छलक आयी। रूंधे गले से बस इतना बोल पायी भाई तू सच में बड़ा हो गया है….. सदैव प्रसन्न रहिये जो प्राप्त है-पर्याप्त है

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jatan kurveti Apr 11, 2021

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