Swami Lokeshanand
Swami Lokeshanand Aug 2, 2017

सीता जी का प्राकट्य 2

#प्रवचन

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Daksh Narula Sep 16, 2020

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Ganesh jangid Sep 17, 2020

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Rahul Kumar Jha Sep 17, 2020

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sunita Sharma Sep 16, 2020

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Ganesh jangid Sep 17, 2020

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Vinod Kumar Kamra Sep 17, 2020

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Vijay Yadav Sep 15, 2020

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मैं क्षण भी हूँ, युग भी मैं कण भी हूँ, ब्रह्मांड भी मैं भीतर भी हूँ, बाहर भी मैं साकार भी हूँ, निराकार भी मैं आदि का प्रारंभ भी हूँ, और अंत का अंत भी प्रथा और रीति ये दोनों में यही तो अंतर है। रीति के साथ नीति जुड़ी होती है किन्तु प्रथा के साथ किसीकी मन की बुनी हुई कोई कथा। कभी कथाओं का पालन इसलिए ना करना क्यूँकि आपसे पहले किसने उसका पालन किया था। ये प्रथा उसकी स्थापना ऐसे लोग ही करते है जो दूर बुद्धि होते है, स्वार्थी होते हैं। तो पालन करने से पूर्व दस बार सोचना। संसार ईश्वर ने रचा है, तो सारे जीव, सारे प्राणी ये तो ईश्वर के संतान हुए ना, तो संतान एक दूसरे की बलि दे रहे है, ये ईश्वर को अच्छा क्यूँ लगेगा? ऐसी प्रथा का अंत यही पर कर दो। सारा परिवार साथ मिलके परमात्मा की पूजा करे। जिस लीला से संसार को आनंद ना मिले, भला क्या हो भी कोई लीला है? #श्री_राधे_राधे... 🎍🏵🎋👰👣👰🎋🏵🎍

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Ganesh jangid Sep 16, 2020

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