जय सियाराम जय वीर हनुमान🙋 जय शनि देव जय शनि देव जय शनि देव💐 शुभ शनिवार की सुबह की राम राम सभी भक्तों और प्यारे प्यारे भाई बहनों को शनि देव बाबा और हनुमान बाबा की कृपा दृष्टि आप सभी पर सदा बरसती रहे शनि देव बाबा आपके व्यापार और उन्नति को आगे बढ़ाएं और हनुमान बाबा आपको बुरी नजरों से सदा बचा इसी कामना के साथ मेरा सादर प्रणाम🙏

जय सियाराम जय वीर हनुमान🙋
जय शनि देव जय शनि देव जय शनि देव💐
 शुभ शनिवार की सुबह की राम राम सभी भक्तों और प्यारे प्यारे भाई बहनों को शनि देव बाबा और हनुमान बाबा की कृपा दृष्टि आप सभी पर सदा बरसती रहे शनि देव बाबा आपके व्यापार और उन्नति को आगे बढ़ाएं और हनुमान बाबा आपको बुरी नजरों से सदा बचा इसी कामना के साथ मेरा सादर प्रणाम🙏

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कामेंट्स

Neha Sharma, Haryana Dec 7, 2019
*ये सुबह जितनी खूबसूरत है,*उतना ही खूबसूरत आपका हर पल हो,*जितनी भी खुशियाॅं आज आपके पास हैं,*उससे भी ज्यादा कल हों…🌹🙏 *जय श्री राधे कृष्णा* 🙏🌹 *शुभ प्रभात् वंदन बहना जी* 🙏🌹 *आपका और आपके परिवार का हर पल शुभ और मंगलमय हो मेरी प्यारी बहना जी* 🌹🙏😄🙋😄🙏🌹

Neha Sharma, Haryana Dec 7, 2019
*ये सुबह जितनी खूबसूरत है,*उतना ही खूबसूरत आपका हर पल हो,*जितनी भी खुशियाॅं आज आपके पास हैं,*उससे भी ज्यादा कल हों…🌹🙏 *जय श्री राधे कृष्णा* 🙏🌹 *शुभ प्रभात् वंदन बहना जी* 🙏🌹 *आपका और आपके परिवार का हर पल शुभ और मंगलमय हो मेरी प्यारी बहना जी* 🌹🙏😄🙋😄🙏🌹

Anilkumar marathe Dec 7, 2019
✍.. *कभी हँसते हुए छोड़ देती है ये जिंदगी* *कभी रोते हुए छोड़ देती है ये जिंदगी।* *न पूर्ण विराम सुख में,* *न पूर्ण विराम दुःख में,* *बस जहाँ देखो वहाँ अल्पविराम छोड़ देती है ये जिंदगी।* *प्यार की डोर सजाये रखो,* *दिल को दिल से मिलाये रखो,* *क्या लेकर जाना है साथ मे इस दुनिया से,* *मीठे बोल और अच्छे व्यवहार से* *रिश्तों को बनाए रखो*...........✍🏻 🙏 *जय श्रीकृष्ण* 🌹 *आपका दिन शुभ व मंगलमय हो*

((OP JAIN)) (Raj)🌱🌱🌹🌱🌱 Dec 7, 2019
जय जिनेन्द्र सा जय श्री शनिदेव जी जय श्री हनुमानजी आपका दिन शुभ और मंगलमय हो सुप्रभात दीदी

रमेश भाई ठक्कर Dec 7, 2019
जय श्री राम जय श्री राम जय बजरंगबली जय शनि देव *ख़्वाब भले टूटते रहे मगर "हौंसले"* *फिर भी ज़िंदा हो* *"हौसला " अपना ऐसा रखो जहाँ* *मुश्किलें भी शर्मिंदा हो .........!* आपका हर पल शुभ एवं मंगलमय हो 🌹🌻सुप्रभात🌻🌹

Pawan Saini Dec 7, 2019
सुबह की राम राम बहन जी 🙏 ऊं श्रीं हनुमंते नम संकट मोचन हनुमान जी की कृपा दृष्टि आप और आपके परिवार पर सदैव बना रहे बहन जी 🙏🌳 ईश्वर आप और आपके परिवार को हमेशा खुश रखे बहन जी 🙏 आप का हर एक पल मंगलमय हो शुभ प्रभात स्नेह वंदन बहन जी 🙏🌳🌸🌿

sukanya sharan Dec 7, 2019
hanuman ji Shree Ram Chandra ji ki kripa aseem kripa sada aap aur aapke parivar par Wirajmaan rahe aapka har pal shubh aur mangalmay ho 🌻🌻🌻🙏🙏🙏

Ramswaroop Chaurasia Dec 7, 2019
jai shre sita ram ji jai shre🍁🍁🌷⚘⚘⚘🌷🍁🍁 anjanilal ki kirpa hamesa bani ❤❤🌞🍒🍒🥦🌾🌱🌹🌺🌻🌲🌲🌿rahe ji with your family jai Mata di 🙏🏼🙏🏼🙏🏽🙏🏽

NK Pandey Dec 7, 2019
Om Hanu Hanumtey Namo Namah Subh Dophar Vandan Bahen Aap ka Har Pl Mangalmay Ho Bahen

GAJENDRABHAI Dec 7, 2019
જય શનિદેવ હનુમાનજી મહારાજની જય હો જયશ્રી કૃષ્ણ જયશ્રી રાધે શુભ દોપહર જી

K K MORI Dec 7, 2019
जय श्री राम 🙏 शुभ दो पहर वंदन बहन जी श्री हनुमान श्री शनिदेव की कृपा से आपके सभी कार्य सफल हो व आने वाला हर दिन आपके लिए शुभ हो 🌹🌸

Queen Dec 7, 2019
🌷🍁 Jai Shree Ram hanumaan Ji aap or apki family pr Ram hanumaan Ji Di kripa Bna rhe always be happy Good Afternoon My Dear Sweet Sister Ji 🍁🌷

राजेश अग्रवाल Dec 7, 2019
हम भी वही होते हैं,रिश्ते भी वही होते हैं और रास्ते भी वही होते हैं, बदलता है तो बस.......समय अहसास और नजरिया, राजेश भाई का आपको सादर नमन, 🙏🏻आपका दिन शुभ हो🙏 🌹

Harpal bhanot 004915751174224 Dec 7, 2019
jai Shree bajrang bali ji 🌷🌷🌷 Beautiful good afternonn ji my Sweet Sister 🙏🌻🙏 have a happy Saturday ji Sister

Anita Mittal Dec 7, 2019
जय श्री राम जी रामजी का आशीर्वाद व स्नेहानुराग आपके साथ बना रहे जी आपका हर पल मंगलमय व सर्वसुखप्रदायी हो जी 🌺🌺🌹🌹🌺🌺

Poonam Aggarwal Dec 7, 2019
🌺 jay shree ram jay hanuman ji 🙏🌺 ram ji ki kripa se aapka hr pal shubh mangalmay ho🌷shub ratri vandan sister ji 🌟🌟🌜🌜🍫🍫☺

Neha Sharma, Haryana Jan 27, 2020

*ओम् नमः शिवाय*🥀🥀🙏 *शुभ प्रभात् वंदन*🥀🥀🙏 भगवान शिव ने मातापार्वती को बताए थे जीवन के ये पांच रहस्य भगवान शिव ने देवी पार्वती को समय-समय पर कई ज्ञान की बातें बताई हैं। जिनमें मनुष्य के सामाजिक जीवन से लेकर पारिवारिक और वैवाहिक जीवन की बातें शामिल हैं। भगवान शिव ने देवी पार्वती को 5 ऐसी बातें बताई थीं जो हर मनुष्य के लिए उपयोगी हैं, जिन्हें जानकर उनका पालन हर किसी को करना ही चाहिए- 1. क्या है सबसे बड़ा धर्म और सबसे बड़ा पाप देवी पार्वती के पूछने पर भगवान शिव ने उन्हें मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा धर्म और अधर्म मानी जाने वाली बात के बारे में बताया है। भगवान शंकर कहते है- श्लोक- नास्ति सत्यात् परो नानृतात् पातकं परम्।। अर्थात- मनुष्य के लिए सबसे बड़ा धर्म है सत्य बोलना या सत्य का साथ देना और सबसे बड़ा अधर्म है असत्य बोलना या उसका साथ देना। इसलिए हर किसी को अपने मन, अपनी बातें और अपने कामों से हमेशा उन्हीं को शामिल करना चाहिए, जिनमें सच्चाई हो, क्योंकि इससे बड़ा कोई धर्म है ही नहीं। असत्य कहना या किसी भी तरह से झूठ का साथ देना मनुष्य की बर्बादी का कारण बन सकता है। 2. काम करने के साथ इस एक और बात का रखें ध्यान श्लोक- आत्मसाक्षी भवेन्नित्यमात्मनुस्तु शुभाशुभे। अर्थात- मनुष्य को अपने हर काम का साक्षी यानी गवाह खुद ही बनना चाहिए, चाहे फिर वह अच्छा काम करे या बुरा। उसे कभी भी ये नहीं सोचना चाहिए कि उसके कर्मों को कोई नहीं देख रहा है। कई लोगों के मन में गलत काम करते समय यही भाव मन में होता है कि उन्हें कोई नहीं देख रहा और इसी वजह से वे बिना किसी भी डर के पाप कर्म करते जाते हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और ही होती है। मनुष्य अपने सभी कर्मों का साक्षी खुद ही होता है। अगर मनुष्य हमेशा यह एक भाव मन में रखेगा तो वह कोई भी पाप कर्म करने से खुद ही खुद को रोक लेगा। 3. कभी न करें ये तीन काम करने की इच्छा श्लोक-मनसा कर्मणा वाचा न च काड्क्षेत पातकम्। अर्थात- आगे भगवान शिव कहते है कि- किसी भी मनुष्य को मन, वाणी और कर्मों से पाप करने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। क्योंकि मनुष्य जैसा काम करता है, उसे वैसा फल भोगना ही पड़ता है। यानि मनुष्य को अपने मन में ऐसी कोई बात नहीं आने देना चाहिए, जो धर्म-ग्रंथों के अनुसार पाप मानी जाए। न अपने मुंह से कोई ऐसी बात निकालनी चाहिए और न ही ऐसा कोई काम करना चाहिए, जिससे दूसरों को कोई परेशानी या दुख पहुंचे। पाप कर्म करने से मनुष्य को न सिर्फ जीवित होते हुए इसके परिणाम भोगना पड़ते हैं बल्कि मारने के बाद नरक में भी यातनाएं झेलना पड़ती हैं। 4. सफल होने के लिए ध्यान रखें ये एक बात संसार में हर मनुष्य को किसी न किसी मनुष्य, वस्तु या परिस्थित से आसक्ति यानि लगाव होता ही है। लगाव और मोह का ऐसा जाल होता है, जिससे छूट पाना बहुत ही मुश्किल होता है। इससे छुटकारा पाए बिना मनुष्य की सफलता मुमकिन नहीं होती, इसलिए भगवान शिव ने इससे बचने का एक उपाय बताया है। श्लोक-दोषदर्शी भवेत्तत्र यत्र स्नेहः प्रवर्तते। अनिष्टेनान्वितं पश्चेद् यथा क्षिप्रं विरज्यते।। अर्थात- भगवान शिव कहते हैं कि- मनुष्य को जिस भी व्यक्ति या परिस्थित से लगाव हो रहा हो, जो कि उसकी सफलता में रुकावट बन रही हो, मनुष्य को उसमें दोष ढूंढ़ना शुरू कर देना चाहिए। सोचना चाहिए कि यह कुछ पल का लगाव हमारी सफलता का बाधक बन रहा है। ऐसा करने से धीरे-धीरे मनुष्य लगाव और मोह के जाल से छूट जाएगा और अपने सभी कामों में सफलता पाने लगेगा। 5. यह एक बात समझ लेंगे तो नहीं करना पड़ेगा दुखों का सामना श्लोक-नास्ति तृष्णासमं दुःखं नास्ति त्यागसमं सुखम्। सर्वान् कामान् परित्यज्य ब्रह्मभूयाय कल्पते।। अर्थात- आगे भगवान शिव मनुष्यो को एक चेतावनी देते हुए कहते हैं कि- मनुष्य की तृष्णा यानि इच्छाओं से बड़ा कोई दुःख नहीं होता और इन्हें छोड़ देने से बड़ा कोई सुख नहीं है। मनुष्य का अपने मन पर वश नहीं होता। हर किसी के मन में कई अनावश्यक इच्छाएं होती हैं और यही इच्छाएं मनुष्य के दुःखों का कारण बनती हैं। जरुरी है कि मनुष्य अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं में अंतर समझे और फिर अनावश्यक इच्छाओं का त्याग करके शांत मन से जीवन बिताएं। *🌻कान दर्द से राहत पाने के लिए घरेलू उपाय* *🌻लहसुन की 10-12 कलियों को छीलकर रख लें। इन कलियों को अच्छी तरह पीस या कूट लें। पीसते या कूटते समय इसमें 10-12 बूंद पानी मिला लें। अब इसे किसी कपड़े या महीन छन्नी से छान या निचोड़ लें। दर्द बाली कान में उस रस के 2 बून्द रस कान में डालने से दर्द से राहत मिलता है ।* *🌻लहसुन की कलियों को 2 चम्‍मच तिल के तेल में तब तक गरम करें जब तक कि वह काला ना हो जाए। फिर इसे तेल की 2-3 बूंदे कानों में टपका लें।* *🌻जैतून के पत्तों के रस को गर्म करके बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।* *🌻तुलसी के पत्तों का रस गुनगुना कर दो-दो बूंद सुबह-शाम डालने से कान के दर्द में राहत मिलती है।* *🌻प्याज का रस निकाल लें,अब रुई के फाये या किसी वूलेन कपडे के टुकडे को इस रस में डुबायें अब इसे कान के ऊपर निचोड़ दें ,इससे कान में उत्पन्न सूजन,दर्द ,लालिमा एवं संक्रमण को कम करने में मदद मिलती है।* *🌻कान में दर्द हो रहा है तो अदरक का रस निकालकर दो बूंद कान में टपका देने से भी दर्द और सूजन में काफी आराम मिलता है।*

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white beauty Jan 26, 2020

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Shivani Jan 26, 2020

🙏⛳जय श्री राधे राधे जी ⛳ आपका दिन मंगलमय हो 🙏 अधूरी भक्ति 〰️🔸🔸〰️ एक छोटे से गाँव में साधू रहता था, वह हर वक्त कान्हा के स्मरण में लगा रहता। वह कान्हा के लिए रोज खीर चावल बनाता, और हर दिन उनकें इंतजार में आस लगाए बैठा रहता था, कि मेरे कान्हा कब आयेंगे, उस साधू की एक बुरी आदत थी, वह गाँव में रहने वाले नीची जाती के लोगो से दूर रहता था, उन्हें आश्रम में नही आने देता था, उसका मानना था, कान्हा इससे नाराज हो जाएंगे, वो तो स्वामी हैं, इन नीच छोटी जाति वालों के आश्रम में प्रवेश करने से मुझे दर्शन नही देंगे, इसलिए वह कभी किसी नीच जाती के लोगो से ठीक से बात नही करता था........... उसके आश्रम से थोड़ी दूर एक कोड़ी रहता था, वह भी कान्हा का भक्त था, नित्य प्रतिदिन उनकी उपासना करता था, और हर वक्त कान्हा की भक्ति में डूबा रहता जब भी साधू उसके घर के पास से गुजरता तो कोड़ी को कहता नीच तुझ जैंसे कोड़ी से कान्हा क्या मिलने आयेंगे, वो तो स्वामी हैं, तझ जैसे के घर में क्यूं आने लगें भला, और बोलते बोलते अपने आश्रम चले जाता। कुछ वर्ष व्यतीत हुये, अब साधू को लगने लगा, कान्हा क्यूं मुझे दर्शन नही दे रहे, और साधू उसकी मूर्ति के सामने रोने लगा, और कहने लगा प्रभु एक बार तो मुझे दर्शन दें दो, मैं प्रतिदन आपके लिए खीर_चावल बनाता हूं, एक बार तो आ कर भोग लगा लें, और उदास होकर कान्हा के चरणों में सो गया। दूसरे दिन एक गरीब दरिद्र, छोटा सा बालक साधू के आश्रम आया, साधू उस वक्त कान्हा को भोग लगाने जा रहा था, उस बालक ने कहा, साधू महराज मुझे कुछ खाने दे दीजिए मुझे जोरो की भूख लगी है। साधू गुस्सें से तिलमिला गया, एक तो दरिद्र और दूसरा कान्हा की भक्ति में विध्न, उसने आव देखा ना ताव, एक पत्थर उठाकर बच्चें को दे मारा, उस दरिद्र बच्चें के सर से खून निकलने लगा, साधू ने कहा भाग यहाँ सें, बच्चा उसके आश्रम से निकल गया और जाकर उस कोडी के घर में चला गया, कोड़ी ने उसका रक्त साफ किया पट्टी बाँधी और उस भूखें बच्चें को भोजन दिया, बच्चा भोजन कर के चला गया। दूसरे दिन फिर वो बच्चा साधू के आश्रम आया, साधू ने फिर उसे मारा और भागा दिया, फिर वह कोड़ी के घर चला गया, कोड़ी ने फिर उसकी पट्टी बाँधी और खाने को दिया बच्चा खाना खाकर चला जाता। वो बच्चा रोज आता साधू उसे मारता और वो कोड़ी के पास चला जाता। एक दिन साधू स्नान के लिए जा रहा था उसे रास्तें पर वही कोड़ी दिखा साधू ने उसे देखा तो आश्चचर्य से भर गया, उस कोड़ी का कोड़ गायब हो चुका था, वह बहुत ही सुंदर पुरूष बन चुका था, साधू ने कोड़ी नाम लेकर कहा, तुम कैंसे ठीक हो गयें, कोड़ी ने कहा, मेरे कान्हा की मर्जी, पर साधू को रास नही आया, उसने मन ही मन फैसला किया, पता लगाना पड़ेगा। दूसरे दिन फिर वहाँ दरिद्र बच्चा साधू के आश्रम आया, साधू ने फिर उसे मारा, बच्चा जाने लगा, तो साधू उठ खड़ा हुआ और मन ही मन सोचने लगा, मैं इस दरिद्र बच्चें को रोज मारता हूं, ये रोज उस कोड़ी के घर जाता हैं, आखिर चक्कर क्या हैं देखना पड़ेगा, साधू पीछे पीछे जाने लगता हैं जैसें ही वह कोड़ी की झोपड़ी में पहुंचता हैं, उसकी ऑखें फटी की फटी रह जाती हैं। स्वंय तीनो लोक के स्वामी कान्हा बांके बिहारी कोड़ी के घर पर बैंठे हैं और कोड़ी उनकी चोट पर मलहम लगा रहा हैं, और कान्हा जी भिक्षा में मांगी ना जाने कितनो दिनों की बासी रोटी को बड़े चाव से खा रहें हैं। साधू कान्हा के चरणों में गिर कहने लगा, मेरे कान्हा मेरे स्वामी मेरे आराध्य आपने मुझ भक्त को दर्शन नही दिये, और इस नीच को दर्शन दे दीये, मुझसे क्या गलती हो गयी, जो आप इस कोड़ी की झोपड़ी में आ गयें, भिख में मांगी बासी रोटी खा ली पर, मैं आपके लिए नित्य प्रतिदिन खीर चावल बनाता हूं उसे खाने नही आये, बोलो कान्हा बोलो। तब कान्हा जी ने कहा हे साधू, मैं तो रोज तेरे पास खाना मांगने आता था, पर तु ही रोज मुझे पत्थर से मारकर भागा देता था, मुझे भूख लगती थी, और मैं इतना भूखा रहता था, की इस मानव के घर चला आता था, ये जो मुझे प्यार से खिलाता मैं खाकर चला जाता, अब तु ही बता इसमें मेरी क्या गलती। साधू कान्हा के पैर पकड़ रोने लगता हैं और कहता हैं, मुझसे गलती हो गयी, मैं आपको पहचान नही पाया, मुझे माफ कर दिजिए, और फिर कहता हैं, तीनो लोक के स्वामी गरीब भिखारी दरिद्र बच्चा बनकर आप मेरे आश्रम क्यूं आते थे, मैं तो आपको दरिद्र समझकर मारता था, क्यूकि मेरे कान्हा तो स्वामी हैं वो दरिद्र कैसें हो सकते हैं। कान्हा जी ने कहा, हे साधू, तुझे किसने कहा मैं सिर्फ महलों में रहता हूं, तुझे किसने कहा, मैं सिर्फ 56 भोज खाता हूं, तुझे किसने कहा मैं, नंगे पैर नही आता, तुझे किसने कहा मैं दरिद्र नही, हे साधू, ये समस्त चरचरा मैं ही हूं, धरती आकाश पृथ्वी सब मैं ही हूं, मैं ही हूं महलों का स्वामी, तो मैं ही हूं झोपड़ी का दरिद्र भिखारी, मैं ही हूं जो प्यार और सच्ची श्राध्दा से खिलाने पर बासी रोटी खा लेता हैं और स्वार्थ से खिलाने पर 56 भोग को नही छूता, मैं हर जीव में बसा हूं, तु मुझे अमीर गरीब में ढूंढता हैं। तुजसे अच्छा तो ये कोड़ी हैं जो सिर्फ एक ही बात जानता हैं, ईश्वर हर किसी में निवास करते हैं ना की धनवान में, कान्हा कहने लगे, तुने मेरी भक्ति तो की पर अधूरी और कान्हा अंतर्ध्यान हो जाते हैं। साधू उनकी चरण रज पकड़ फूट फूटकर रोने लगता हैं और कहता हैं जिसका एक पल पाने के लिए लोग जन्मों जन्म तप करते है वो मेरी कुटिया में भीख मांगने आता था और मैं मूर्ख दरिद्र समपन्न देखता था और कोड़ी के पैर पकड़ कहता हैं मैंने तो सारी जिंदगी अधूरी भक्ति की आप मुझे सच्ची भक्ति के पथ पर ले आइयें, मुझे अपना शिष्य बना लीजिए, कोड़ी उसे गले लगा लेता हैं। "🌾ईश्वर कण कण में हैं वो भिखारी भी जो आपकी चौखट पर आता हैं ना, वो भी ईश्वर की मर्जी हैं। क्यूकि किसी ने कहा हैं वो भीख लेने ही नही, दुआ देने भी आता हैं, और किसी महान आदमी ने कहा हैं। दानें दानें पर लिखा हैं खाने वालें का नाम इसलिए कभी किसी का अनादर मत कीजिए। 🌿 जय बाँकेबिहारी लाल की 🌿

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kamlesh sharma Jan 26, 2020

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S.G PANDA Jan 26, 2020

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शनिदेव का लोहे से क्या है संबंध? जानें हनुमान जी से जुड़ी यह कथा शनिदेव को सूर्य पुत्र के नाम से भी जाना जाता है। अत्यंत तेज सूर्य की ऊष्मा की झलक शनिदेव में दिखाई देती है। धार्मिक कथानुसार, जब लंका से हनुमान जी ने शनि भगवान को शनिचरा मंदिर मुरैना में फेंका था तब से इस स्थान पर लोहे के मात्रा प्रचुर हो गयी थी। भगवान शनि का वार शनिवार को बताया गया है। शनिवार को कुछ चीजे खरीदना वर्जित है जिसमें से एक है घर पर नया लोहा खरीद कर लाना। इसे घर पर लाने से शनि का प्रकोप सहन करना पड़ता है। घर में कलह और अशांति हो जाती है| हालांकि इस दिन लोहे का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। शनिदेव के अशुभ प्रभावों की शांति या साढ़े साती या ढैय्या से बचाव हेतु लोहा धारण किया जाता है किन्तु यह लौह मुद्रिका सामान्य लोहे की नहीं बनाई जाती। यह घोड़े के नाल से बनती है जो उसके खुर के बचाव के लिए लगाई जाती है। इस लोहे से रिंग बनाई जाती है जो शनि के कुपित प्रभाव को शांत करती है। इसे आप सही और उत्तम समय जैसे शनिवार, पुष्य, रोहिणी, श्रवण नक्षत्र हो अथवा चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी तिथि पर खरीदे और धारण करें। काले घोड़े की नाल के प्रभावशाली उपाय और लाभ से कई कार्य सिद्ध होते हैं। नाव की कील भी इस कार्य के लिए उपयुक्त रहती है।

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