राजा ने बताया काम करने का महत्व - एक प्रेरक कहानी

https://youtu.be/hC0k3NHqnMM

+42 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 34 शेयर

कामेंट्स

NK Pandey Jan 11, 2019
Jai Shri Ram Subh Sandhya Vandan Ji Mangalmay Ho

Dinesh sahu Jan 11, 2019
जय श्री राधे कृष्णा नाइस वेरी नाइस

https://youtu.be/_t6Uub8vADk

+58 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 45 शेयर

https://youtu.be/KcyHg-jJhw0

+11 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 10 शेयर

https://youtu.be/TOi_1ovSYWo

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 3 शेयर

https://youtu.be/INgkX0JEHtg

+11 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 16 शेयर

ठाकुर जी की महावर सेवा....... एक दिन प्रियतम कृष्ण श्री ललिता जी से विनम्र हो से कहा - मेरी एक विनती है मैं आज प्रिया जी के चरणों में महावर लगाने की सेवा करना चाहता हूं मुझे श्री चरणो मैं महावर लगाने का अवसर दिया जाए. प्रियतम की बात सुनकर ललिता जी बोली - क्या तुम महावर लगा पाओगे ? तो प्रियतम ने कहा - मुझे अवसर तो देकर देखो, मैं रंगदेवी से भी सुंदर उत्तम रीति से महावर लगा दूंगा श्री ललिता जी ने उनका अनुरोध स्वीकार कर लिया रंग देवी से कहा - कि आज श्री चरणो मैं महावर लगाने की सेवा प्रियतम करेंगे. प्रिया जी के स्नान के बाद सुदेवी जी ने कलात्मक ढंग से प्रिया जी की बेणी गूँथ दी, विशाखा जी ने प्रिया गालों पर सुंदर पत्रावली की रचना कर दी. अब प्रिया जी के चरणों में महावर लगाना था. रंगदेवी जी को ललिता जी ने कहां - आज महावर की सेवा प्रियतम करेगे प्रियतम पास में ही महावर का पात्र लेकर खड़े थे और विनती करने लगे आज महावर की सेवा में करू ऐसी अभिलाषा है प्रिया जू ने कहा - लगा पाओगे ? उस दिन वेणी तो गूँथ नहीं पाये आज महावर लगा पाओगे. प्रियतम ने अनुरोध किया - अवसर तो दे के देखो प्रिया जू ने नयनो के संकेत से स्वीकृति दे दी और मन ही मन सोचने लगी की प्रेम भाव में लगा नहीं पाओगे, स्वीकृति मिलते ही प्रियतम ने प्रिया जी चरण जेसे हाथ में लिए श्री चरणो की अनुपम सुंदरता कोमल ता देखकर श्याम सुंदर हृदय में भावनाओं की लहर आने लगी. प्रियतम सोचने लगे, कितने सुकोमल हैं श्रीचरण, प्यारी जी कैसे भूमि पर चलती होगी, कंकड़ की बात तो दूर भय इस बात का है के धूल के मृदुल कण भी संभवत श्री चरणों में चुभ जाते होंगे तब श्याम सुंदर ने वृंदावन की धूलि कण से प्रार्थना. कि जब प्रिया जी बिहार को निकले तो अति सुकोमल मखमली धूलि बिछा दिया करो और कठिन कठोर कण को छुपा लिया करो. प्रियतम भाव बिभोर सोचने लगे कि श्री चरण कितने सुंदर, सुधर, अरुणाभ, कितने गौर, कितने सुकोमल है,मुझे श्री चरणों को स्पर्श का अवसर मिला. प्रियतम ने बहुत चाहा पर महावर नहीं लगा पाये, चाहकर भी असफल रहे,ऐसी असफलता पर विश्व की सारी सफलता न्योछाबर, अनंत कोटि ब्रह्माण्ड नायक शिरोमणि जिनके बस में सब कुछ है हर कार्य करने में अति निपुण है उनकी ऐसी असफलताएँ पर बलिहार जाये.

+11 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 4 शेयर

🌸❣️🌸❣️🌸❣️🌸 👰उलूपी👰 उलूपी ऐरावत वंश के कौरव्य नामक नाग की कन्या थी। इस नाग कन्या का विवाह एक बाग से हुआ था। इसके पति को गरुड़ ने मारकर खा लिया जिससे यह विधवा हो गयी। एक बार अर्जुन, जो प्रतिज्ञा भंग करने के कारण बारह वर्ष का वनवास कर रहे थे, ब्रह्मचारी के वेश में तीर्थाटन करते हुए गंगा द्वार के निकट पहुँचें जहाँ इससे उनका साक्षात्कार हुआ। 🌸🌸 उलूपी अर्जुन को देखकर उनपर विमुग्ध हो गयी। वह अर्जुन को पाताल लोक में ले गयी और उनसे विवाह करने का अनुरोध किया। अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर उसने अर्जुन को समस्त जलचरों का स्वामी होने का वरदान दिया। जिस समय अर्जुन नागलोक में निवास कर रहे थे, उस समय चित्रांगदा से उत्पन्न अर्जुन का पुत्र वभ्रुवाहन, जो अपने नाना, मणिपुर नरेश का उत्तराधिकारी था, उनके स्वागत के लिए उनके पास आया। वभ्रुवाहन को युद्ध-सज्जा में न देखकर यथोचित व्यवहार नहीं किया। उलूपी वभ्रुवाहन की देख-रेख कर चुकने के कारण उस पर अपना प्रभाव रखती थी। उसने वभ्रुवाहन को अर्जुन के विरुद्ध भड़काया। फलतः पिता और पुत्र में युद्ध हुआ। 🌸🌸 उलूपी की माया के प्रभाव से वभ्रुवाहन अर्जुन को मार डालने में समर्थ हुआ किन्तु अपने इस कार्य के लिए उसे इतना दुःख हुआ कि उसने आत्म-हत्या करने का निश्चय किया। वभ्रुवाहन के संकल्प को जानकर उलूपी ने एक मणि की सहायता से अर्जुन को पुनः जीवनदान दिया। विष्णु पुराण के अनुसार अर्जुन से उलूपी ने इरावत नामक पुत्र को जन्म दिया। उलूपी अर्जुन के सदेह स्वगारोहण के समय तक उनके साथ थी। 💐जय श्री कृष्णा💐राधा सखी👸 🌸❣️🌸❣️🌸❣️🌸

+17 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 2 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB