Madhuvan
Madhuvan Apr 16, 2021

Jai shree shyam 🌹🌺🌺🌹

Jai shree shyam 🌹🌺🌺🌹

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Daya Shankar Apr 16, 2021
Jay Mata Rani ki 🌹 shubh ratri 🌹 Mata Rani aap ke har sapne phone Karen Jay Shri Radhe 🌹

Madhuvan May 5, 2021

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🙏🌱शुभ शनिवार 🌱🙏 *धन की परिभाषा* 🙏🏼जब कोई बेटा या बेटी ये कहे कि मेरे माँ बाप ही मेरे भगवान् है…. *ये “धन” है* 🙏🏼जब कोई माँ बाप अपने बच्चों के लिए ये कहे कि ये हमारे कलेजे की कोर हैं…. *ये “धन” है* 🙏🏼शादी के 20 साल बाद भी अगर पति पत्नी एक दूसरे से कहें.. I Love you… *ये “धन” है* 🙏🏼कोई सास अपनी बहु के लिए कहे कि ये मेरी बहु नहीं बेटी है और कोई बहु अपनी सास के लिए कहे कि ये मेरी सास नहीं मेरी माँ है…… *ये “धन” है* 🙏🏼जिस घर में बड़ों को मान और छोटों को प्यार भरी नज़रो से देखा जाता है…… *ये “धन” है* 🙏🏼जब कोई अतिथि कुछ दिन आपके घर रहने के पशचात् जाते समय दिल से कहे की आपका घर …घर नहीं मंदिर है…. *ये “धन” है* आपको ऐसे *”परम धन”* की प्राप्ति हो। *🙏👏🙏*

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*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐साधु की शिक्षा💐💐* एक विधवा थी | उसका घर निमाड़ के एक गांव में था | विधवा का एक लड़का था | जिसका नाम श्यामू था | एक दिन विधवा बाजार गयी हुई थी | तभी उसके घर एक साधु आया | श्यामू ने साधु की बड़ी आवभगत की | उनके चरण धोकर उन्हें भोजन करवाया | उनकी आवभगत से साधु बहुत प्रसन्न हुआ | उसने श्यामू को कुछ मांगने को कहा | श्यामू ने साधु से कहा – “ मुझे शिक्षा दीजिए |” साधु ने श्यामू को शिक्षा दी – “ बिन पैसे बाजार मत जाना तथा बिन साथी बाहर मत जाना | यह शिक्षा श्यामू को इतनी पसंद आयी कि उसने घर में रखे सौ रुपये साधु को लाकर दे दिये | उसकी विधवा मां जब लौट कर आयी तो श्यामू ने उसे बताया कि उसने सौ रुपये में शिक्षा खरीदी है | माँ ने जब सारी बात सुनी तो उसे साधु पर बड़ा ही क्रोध आया कि वह बेमतलब की बात बताकर उसके बेटे से सो रुपये ठग कर ले गया | वह उस साधु को बुरा भला कहने लगी | श्यामू को मां का यह व्यवहार पसंद नहीं आया और वह घर छोड़कर कुछ पैसे लेकर चल दिया | घर से बाहर निकल कर उसे साधु की शिक्षा याद आयी कि बिना साथी बाहर मत निकलना | उसको सामने एक केकड़ा नजर आया | उसने उसे ही उठाकर अपनी जेब में रख लिया | जब वह चलते-चलते थक गया तो एक पेड़ के नीचे बैठ गया | केकड़े को उसने एक तरफ रख दिया | उस पेड़ पर एक कौवा रहता था और पेड़ के नीचे बिल में एक सांप रहता था | इन दोनों में दोस्ती थी | जब कोई भी पेड़ के नीचे आकर रुकता कौवा बोलने लगता है और उसकी आवाज सुनकर सांप अपने बिल में से निकलकर बाहर रुके आदमी को डस लेता | कौवे ने जब श्यामू को पेड़ के नीचे सोता देखा तो वह बोलने लगा सांप बाहर आया और उसने श्यामू को डस लिया | श्यामू मर गया | फिर कोवा उसका मांस नोचने के लिए नीचे आकर मरे हुए लड़के के सिर पर बैठ गया | केकड़े ने पीछे से जाकर कौवे को दबोच लिया | कौवा डर के मारे सांप को पुकारने लगा कि – “ बाहर आकर लड़के को जीवित कर दो, उसके दोस्त के केकड़े ने मुझे मुसीबत में डाल दिया है |” सांप बाहर आया और उसने श्यामू का जहर खींच लिया | कोवा तो अधमरा था ही | जब सांप बिल में जाने लगा तो केकड़े ने उसे भी काट लिया | लड़का जीवित हो गया तथा सांप और कौवा दोनों मर गये | चलने से पूर्व श्यामू ने कौवे का एक पंख और सिर तथा सांप का सिर और पूछ काटकर अपने पास रख ली | फिर उसने आगे जाकर एक खेत पर नौकरी कर ली | जहां पर उसे बड़ी मेहनत करनी पड़ती थी | राज्य में उस सांप की चर्चा सब और फैली हुई थी | क्योंकि वह लोगों को डस चुका था | इसलिए राजा ने ढिंढोरा पिटवा दिया, कि जो कोई उस आदमखोर सांप का सिर तथा पूछ लाकर देगा | राजा अपनी बेटी की शादी उससे कर देगा | एक आदमी ने राजा का ढिंढोरा सुना | उसने पेड़ के नीचे पड़े सांप का शव देखा | मरे हुए सांप को उसने और मारा और उसे उठाकर राजा के पास ले गया | राजा ने पूछा कि – “ सांप का सिर तथा पूछ कहा है, तो वह बोला नाग को मारने में सिर और उसकी पूंछ बुरी तरह कुचल गये | तभी श्यामू राजा के पास पहुंचा और उसने सांप का सिर तथा पूछ उसे देकर कहा – “ सांप को मारने वाला असली आदमी तो मैं हूं |” इसके बाद उसने सारी घटना सुनायी | राजा ने सांप के शरीर से उसके सिर तथा पूछ का मिलान किया | उसे विश्वास हो गया कि, वास्तव में सांप को इसी ने मारा है | उसने राजकुमारी की शादी श्यामू से कर दी | शादी के बाद भी श्यामू नियमानुसार समय से काम पर पहुंच जाता था | तथा जी-तोड़ मेहनत करता | राजा श्यामू की मेहनत तथा ईमानदारी से बड़ा प्रसन्न था | उसने उसे रहने का महल दिया तथा अपना सलाहकार बना दिया | श्यामू ने गांव से अपनी मां को भी बुलवा लिया | श्यामू की मां समझ गयी कि साधु द्वारा सो रुपये में दी गयी शिक्षा व्यर्थ नहीं गयी | अब वह मन ही मन साधु का धन्यवाद अदा कर रही थी | *सदैव प्रसन्न रहिये।* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।* 🙏🙏🙏🙏🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 . एक संत थे। एक दिन वे एक जाट के घर गए। जाट ने उनकी बड़ी सेवा की। सन्त ने उसे कहा कि रोजाना नाम -जप करने का कुछ नियम ले लो। . जाट ने कहा बाबा, हमारे को वक्त नहीं मिलता। सन्त ने कहा कि अच्छा, रोजाना ठाकुर जी की मूर्ति के दर्शन कर आया करो। . जाट ने कहा मैं तो खेत में रहता हूं और ठाकुर जी की मूर्ति गांव के मंदिर में है, कैसे करूँ ? . संत ने उसे कई साधन बताये, कि वह कुछ -न-कुछ नियम ले लें। पर वह यही कहता रहा कि मेरे से यह बनेगा नहीं, मैं खेत में काम करू या माला लेकर जप करूँ। इतना समय मेरे पास कहाँ है ? . बाल -बच्चों का पालन पोषण करना है। आपके जैसे बाबा जी थोड़े ही हूँ। कि बैठकर भजन करूँ। . संत ने कहा कि अच्छा तू क्या कर सकता है ? जाट बोला कि पड़ोस में एक कुम्हार रहता है। उसके साथ मेरी मित्रता है। उसके और मेरे खेत भी पास -पास है। . और घर भी पास -पास है। रोजाना एक बार उसको देख लिया करूगाँ। सन्त ने कहा कि ठीक है। उसको देखे बिना भोजन मत करना। . जाट ने स्वीकार कर लिया। जब उसकी पत्नी कहती कि भोजन कर लो। तो वह चट बाड़ पर चढ़कर कुम्हार को देख लेता। और भोजन कर लेता। . इस नियम में वह पक्का रहा। एक दिन जाट को खेत में जल्दी जाना था। इसलिए भोजन जल्दी तैयार कर लिया। . उसने बाड़ पर चढ़कर देखा तो कुम्हार दीखा नहीं। पूछने पर पता लगा कि वह तो मिट्टी खोदने बाहर गया है। जाट बोला कि कहां मर गया, कम से कम देख तो लेता। . अब जाट उसको देखने के लिए तेजी से भागा। उधर कुम्हार को मिट्टी खोदते -खोदते एक हाँडी मिल गई। जिसमें तरह -तरह के रत्न, अशर्फियाँ भरी हुई थी। . उसके मन में आया कि कोई देख लेगा तो मुश्किल हो जायेगी। अतः वह देखने के लिए ऊपर चढा तो सामने वह जाट आ गया। . कुम्हार को देखते ही जाट वापस भागा। तो कुम्हार ने समझा कि उसने वह हाँडी देख ली। और अब वह आफत पैदा करेगा। . कुम्हार ने उसे रूकने के लिए आवाज लगाई। जाट बोला कि बस देख लिया, देख लिया। . कुम्हार बोला कि अच्छा, देख लिया तो आधा तेरा आधा मेरा, पर किसी से कहना मत। जाट वापस आया तो उसको धन मिल गया। . उसके मन में विचार आया कि संत से अपना मनचाहा नियम लेने में इतनी बात है। अगर सदा उनकी आज्ञा का पालन करू तो कितना लाभ है। . ऐसा विचार करके वह जाट और उसका मित्र कुम्हार दोनों ही भगवान् के भक्त बन गए। . मेरे कान्हा... मुझे मेरे करमो पर भरोसा नहीं पर तेरी रहमतो पर भरोसा है मेरे करमों में कमी रह सकती है लेकिन तेरी रहमतों में नही.... ((((((( जय जय श्री राधे )))))))

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*भोजन सम्बन्धी कुछ नियम* १ पांच अंगो ( दो हाथ , २ पैर , मुख ) को अच्छी तरह से धो कर ही भोजन करे ! २. गीले पैरों खाने से आयु में वृद्धि होती है ! ३. प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है ! ४. पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुह करके ही खाना चाहिए ! ५. दक्षिण दिशा की ओर किया हुआ भोजन प्रेत को प्राप्त होता है ! ६ . पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है ! ७. शैय्या पर , हाथ पर रख कर , टूट...े फूटे वर्तनो में भोजन नहीं करना चाहिए ! ८. मल मूत्र का वेग होने पर , कलह के माहौल में , अधिक शोर में , पीपल , वट वृक्ष के नीचे , भोजन नहीं करना चाहिए ! ९ परोसे हुए भोजन की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए ! १०. खाने से पूर्व अन्न देवता , अन्नपूर्णा माता की स्तुति कर के , उनका धन्यवाद देते हुए , तथा सभी भूखो को भोजन प्राप्त हो इस्वर से ऐसी प्राथना करके भोजन करना चाहिए ! ११. भोजन बनने वाला स्नान करके ही शुद्ध मन से , मंत्र जप करते हुए ही रसोई में भोजन बनाये और सबसे पहले ३ रोटिया अलग निकाल कर ( गाय , कुत्ता , और कौवे हेतु ) फिर अग्नि देव का भोग लगा कर ही घर वालो को खिलाये ! १२. इर्षा , भय , क्रोध , लोभ , रोग , दीन भाव , द्वेष भाव , के साथ किया हुआ भोजन कभी पचता नहीं है ! १३. आधा खाया हुआ फल , मिठाईया आदि पुनः नहीं खानी चाहिए ! १४. खाना छोड़ कर उठ जाने पर दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए ! १५. भोजन के समय मौन रहे ! १६. भोजन को बहुत चबा चबा कर खाए ! १७. रात्री में भरपेट न खाए ! १८. गृहस्थ को ३२ ग्रास से ज्यादा न खाना चाहिए ! १९. सबसे पहले मीठा , फिर नमकीन , अंत में कडुवा खाना चाहिए ! २०. सबसे पहले रस दार , बीच में गरिस्थ , अंत में द्राव्य पदार्थ ग्रहण करे ! २१. थोडा खाने वाले को --आरोग्य , आयु , बल , सुख, सुन्दर संतान , और सौंदर्य प्राप्त होता है ! २२. जिसने ढिढोरा पीट कर खिलाया हो वहा कभी न खाए ! २३. कुत्ते का छुवा , रजस्वला स्त्री का परोसा , श्राध का निकाला , बासी , मुह से फूक मरकर ठंडा किया , बाल गिरा हुवा भोजन , अनादर युक्त , अवहेलना पूर्ण परोसा गया भोजन कभी न करे ! २४. कंजूस का , राजा का , वेश्या के हाथ का , शराब बेचने वाले का दिया भोजन कभी नहीं करना चाहिए !

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pramod singh May 7, 2021

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Pooja Dixit May 7, 2021

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