*उत्तम भक्त किसे कहते हैं.....?* *उत्तम भक्त वही है जो प्रशंसा को प्रभु चरणों में समर्पित कर दे और निंदा को अपनी गाँठ में इस प्रण के साथ रखले कि इस निंदा को प्रशंसा में अवश्य बदलूंगा और भगवान को भेंट चढ़ाऊंगा।* *भगवान श्रीराम ने भरतजी की प्रशंसा की तो भरत जी ने कहा :- "प्रशंसा तो आपकी क्योंकि मुझे आपकी छत्र-छाया मिली। आप स्वभाव से किसी में दोष देखते ही नहीं, इसलिए मेरे गुण आपको दीखते हैं।"* *श्रीरामजी ने कहा :- "चलो मान लिया कि मुझे दोष देखना नहीं आता, पर गुण देखना तो आता है, इसलिए कहता हूँ कि तुम गुणों का अक्षय कोष हो।"* *भरतजी बोले :- "प्रभु यदि तोता बहुत बढ़िया श्लोक पढ़ने लगे और बन्दर बहुत सुन्दर नाचने लगे तो इसमें बन्दर या तोते की क्या विशेषता है? विशेषता तो पढ़ाने और नचानेवाले की हैं।"* *भगवान ने कहा :- "पढ़ाने और नचानेवाले की।"* *भरतजी बोले :- "मैं उसी तोते और बन्दर की तरह हूँ। यदि मुझमें कोई विशेषता दिखाई देती है तो पढ़ाने और नचानेवाले तो आप ही हैं, इसलिए यह प्रशंसा आपको ही अर्पित है।"* भगवान ने कहा :- "भरत, तो प्रशंसा तुमने लौटा दी।" भरतजी बोले :- *"प्रभु, प्रशंसा पचा लेना सबके वश का नहीं। यह अजीर्ण पैदा कर देता है लेकिन आप इस प्रशंसा को पचाने में बड़े निपुण हैं। अनादिकाल से भक्त आपकी स्तुति कर रहे हैं, पर आपको तो कभी अहंकार हुआ ही नहीं, इसलिए यह प्रशंसा आपके चरण कमलों में अर्पित है। जय श्री राम

*उत्तम भक्त किसे कहते हैं.....?*

 *उत्तम भक्त वही है जो प्रशंसा को प्रभु चरणों में समर्पित कर दे और निंदा को अपनी गाँठ में इस प्रण के साथ रखले कि इस निंदा को प्रशंसा में अवश्य बदलूंगा और भगवान को भेंट चढ़ाऊंगा।*
      
*भगवान श्रीराम ने भरतजी की प्रशंसा की तो भरत जी ने कहा :- "प्रशंसा तो आपकी क्योंकि मुझे आपकी छत्र-छाया मिली। आप स्वभाव से किसी में दोष देखते ही नहीं, इसलिए मेरे गुण आपको दीखते हैं।"*

*श्रीरामजी ने कहा :- "चलो मान लिया कि मुझे दोष देखना नहीं आता, पर गुण देखना तो आता है, इसलिए कहता हूँ कि तुम गुणों का अक्षय कोष हो।"*

*भरतजी बोले :- "प्रभु यदि तोता बहुत बढ़िया श्लोक पढ़ने लगे और बन्दर बहुत सुन्दर नाचने लगे तो इसमें बन्दर या तोते की क्या विशेषता है? विशेषता तो पढ़ाने और नचानेवाले की हैं।"*

*भगवान ने कहा :- "पढ़ाने और नचानेवाले की।"*

*भरतजी बोले :- "मैं उसी तोते और बन्दर की तरह हूँ। यदि मुझमें कोई विशेषता दिखाई देती है तो पढ़ाने और नचानेवाले तो आप ही हैं, इसलिए यह प्रशंसा आपको ही अर्पित है।"*

भगवान ने कहा :- "भरत, तो प्रशंसा तुमने लौटा दी।"

भरतजी बोले :- *"प्रभु, प्रशंसा पचा लेना सबके वश का नहीं। यह अजीर्ण पैदा कर देता है लेकिन आप इस प्रशंसा को पचाने में बड़े निपुण हैं। अनादिकाल से भक्त आपकी स्तुति कर रहे हैं, पर आपको तो कभी अहंकार हुआ ही नहीं, इसलिए यह प्रशंसा आपके चरण कमलों में अर्पित है।

जय श्री राम

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कामेंट्स

Brajesh Sharma May 4, 2021
श्री राम भक्त वीर हनुमान की जय राम सिया राम सिया राम जय जय राम ॐ नमः शिवाय.. हर हर महादेव खुश रहो मस्त रहो स्वस्थ रहो

Ramesh Soni.33 May 4, 2021
🌹🌹Jay Shree Ram 🚩 Ki Jay 🌹🌹🚩🚩🚩🚩🚩🌹Jay Bajrangbali ki Jay🚩🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌹

Gajendrasingh kaviya May 4, 2021
Radhe Radhe good night sweet dreams my sweet sis 🌷🌹🌹🌹🌹 aap sada khush raho my pyari bena 🙏🌹🌹🌹 aap ki har manokamna puri ho 🌹🌹🌹🌹 Jai jinendra sa 🙏🙏🙏

Madhuben patel May 4, 2021
जय श्रीराधे कृष्णा जी शुभरात्रि स्नेहवंदन प्यारी बहना जी ठाकुरजी की कृपादृष्टि बनी रहेवे जी

sanjay prajapati May 4, 2021
Jay Jinendra Jay shree krishna Jay shree Radhe good night meri pyari bahena take care

🌷JK🌷 May 4, 2021
🌹🌹Radhe Radhe🌹🌹 subh ratri vandan ji🌹

Norat mal mali Rajasthan May 4, 2021
jay shree ram jay hanuman ji jay shree radhe radhe krishna ji jay shree hari balaji 🙏🙏🌹🌹 ram ram ji shubh vandan shubh ratri jiji jay jinendra ji jiji

GOVIND CHOUHAN May 4, 2021
Jai Shree Radhe Radhe Jiii 🌹 Jai Shree Radhe Krishna Jiii 🌹 Subh Ratri Vandan Pranaam Jai Jinendra Jii Didi 👏👏👏👏👏👏

Mohan Patidar May 4, 2021
jai shree Radhe krishna ji good night ji thanks you ji very happy ji RamRam ji Very nice post s.ji🌹🌷⚘🙋‍♀️🍹👈

N. K. M. May 4, 2021
beautiful ji jai dukh bhanjan kast haran mangal karan maruti nandan shree ramdutay namaha keval ek hi naam is kitaab me only preeti duja naa suhaay lagan ek door ki dujo naa bhaaye subh ratri vandan preeti ji jai jinender ji 🌹🌹🙏🌹🌹🙏🌹🌹🙏❤❤🌹🌹❤🌹🌹

madan pal 🌷🙏🏼 May 4, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जी शूभ रात्रि वंदन जी आपका हर पल शूभ मंगल हों जी ने 👌🏼👌🏼👌🏼👌🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🌹🌹🌹🌷

EXICOM May 5, 2021
🌹🙏🌹 ऊँ 🌹🙏🌹 🌹🙏🌹शाँतिं🌹🙏🌹 🌹🙏🌹दीदी🌹🙏🌹 🌹🙏🌹 जी 🌹🙏🌹

dhruv wadhwani May 5, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा

Kamala Sevakoti May 6, 2021
jai shree Ram Jai shree Ram Jai shree Ram Jai shree Ram Jai shree Ram good night ji 🙏🌹🌷🌷🙏

"सब-कुछ" लॉक-डाउन नहीं हुआ !! "सूरज" की किरणें कहां लॉक-डाउन है !! "मां" का प्यार कहां लॉक-डाउन है !! "परिवार" का साथ कहां लॉक-डाउन है !! "सीखने" की कला कहां लॉक-डाउन है !! "पशु-पक्षी" का प्यार कहां लॉक-डाउन है। !! "उम्मीद" की किरण कहां लॉक-डाउन है !! "मानवता" कहां लॉक-डाउन है !! "बच्चो" का प्यार कहां लॉक-डाउन है !! "फूलो" की सुगंध कहां लॉक-डाउन है !! "रसोई" मां की कहां लॉक-डाउन है !! "हंसना" सब का "मुस्कुराना" कहां लॉक-डाउन है !! "भगवान" की प्रार्थना कहां लॉक-डाउन है !! "अच्छे" और सात्विक विचार कहां लॉक डाउन हैं !! वो तो जरा हम "वक्त" के पहिए से "घूमे" जा रहे थे !! तो जरा "थम" कर सोचने का "मौका" मिला है !! ए"इंसान" कमाने की "होड़" में लगा है ! जरा कुछ "पल" सांस लें-लें ! कुछ "अपनों" को तो कुछ "अपने" लिए भी जी लें !!! कोई "परेशानी" अपने साथ बहुत कुछ "अच्छा" भी लाती है ! और "बहुत" कुछ "सिखा"कर भी "जाती" है ! तो जरा "पल-भर" ठहरो आत्म-चिंतन करो !! और "आने-वाले" सुखद समय की "प्रतीक्षा" और "स्वागत" करो !! *आप सभी सुरक्षित रहैं यही ईश्वर से मंगलकामना *

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एक आदमी घोड़े पर कहीं जा रहा था, घोड़े को जोर की प्यास लगी थी।कुछ दूर कुएं पर एक किसान बैलों से "रहट" चलाकर खेतों में पानी लगा रहा था।मुसाफिर कुएं पर आया और घोड़े को "रहट" में से पानी पिलाने लगा।पर जैसे ही घोड़ा झुककर पानी पीने की कोशिश करता, "रहट" की ठक-ठक की आवाज से डर कर पीछे हट जाता।फिर आगे बढ़कर पानी पीने की कोशिश करता और फिर "रहट" की ठक-ठक से डरकर हट जाता।मुसाफिर कुछ क्षण तो यह देखता रहा, फिर उसने किसान से कहा कि थोड़ी देर के लिए अपने बैलों को रोक ले ताकि रहट की ठक-ठक बन्द हो और घोड़ा पानी पी सके। किसान ने कहा कि जैसे ही बैल रूकेंगे कुएँ में से पानी आना बन्द हो जायेगा, इसलिए पानी तो इसे ठक-ठक में ही पीना पड़ेगा। ठीक ऐसे ही यदि हम सोचें कि जीवन की ठक-ठक (हलचल) बन्द हो तभी हम भजन, सन्ध्या, वन्दना आदि करेंगे तो यह हमारी भूल है। हमें भी जीवन की इस ठक-ठक (हलचल) में से ही समय निकालना होगा, तभी हम अपने मन की तृप्ति कर सकेंगे, वरना उस घोड़े की तरह हमेशा प्यासा ही रहना होगा। सब काम करते हुए, सब दायित्व निभाते हुए प्रभु सुमिरन में भी लगे रहना होगा, जीवन में ठक-ठक तो चलती ही रहेगी।

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एक बहुत ही सुंदर दृष्टांत... एक बार की बात है वीणा बजाते हुए नारद मुनि भगवान श्रीराम के द्वार पर पहुँचे। नारायण नारायण !! नारदजी ने देखा कि द्वार पर हनुमान जी पहरा दे रहे है। हनुमान जी ने पूछा: नारद मुनि ! कहाँ जा रहे हो? नारदजी बोले: मैं प्रभु से मिलने आया हूँ। नारदजी ने हनुमानजी से पूछा प्रभु इस समय क्या कर रहे है? हनुमानजी बोले: पता नहीं पर कुछ बही खाते का काम कर रहे है, प्रभु बही खाते में कुछ लिख रहे है। नारदजी: अच्छा?? क्या लिखा पढ़ी कर रहे है? हनुमानजी बोले: मुझे पता नहीं मुनिवर आप खुद ही देख आना। नारद मुनि गए प्रभु के पास और देखा कि प्रभु कुछ लिख रहे है। नारद जी बोले: प्रभु आप बही खाते का काम कर रहे है? ये काम तो किसी मुनीम को दे दीजिए। प्रभु बोले: नहीं नारद, मेरा काम मुझे ही करना पड़ता है। ये काम मैं किसी और को नही सौंप सकता। नारद जी: अच्छा प्रभु ऐसा क्या काम है? ऐसा आप इस बही खाते में क्या लिख रहे हो? प्रभु बोले: तुम क्या करोगे देखकर, जाने दो। नारद जी बोले: नही प्रभु बताईये ऐसा आप इस बही खाते में क्या लिखते हैं? प्रभु बोले: नारद इस बही खाते में उन भक्तों के नाम है जो मुझे हर पल भजते हैं। मैं उनकी नित्य हाजिरी लगाता हूँ। नारद जी: अच्छा प्रभु जरा बताईये तो मेरा नाम कहाँ पर है? नारदमुनि ने बही खाते को खोल कर देखा तो उनका नाम सबसे ऊपर था। नारद जी को गर्व हो गया कि देखो मुझे मेरे प्रभु सबसे ज्यादा भक्त मानते है। पर नारद जी ने देखा कि हनुमान जी का नाम उस बही खाते में कहीं नही है? नारद जी सोचने लगे कि हनुमान जी तो प्रभु श्रीराम जी के खास भक्त है फिर उनका नाम, इस बही खाते में क्यों नही है? क्या प्रभु उनको भूल गए है? नारद मुनि आये हनुमान जी के पास बोले: हनुमान ! प्रभु के बही खाते में उन सब भक्तों के नाम हैं जो नित्य प्रभु को भजते हैं पर आप का नाम उस में कहीं नहीं है? हनुमानजी ने कहा कि: मुनिवर,! होगा, आप ने शायद ठीक से नहीं देखा होगा? नारदजी बोले: नहीं नहीं मैंने ध्यान से देखा पर आप का नाम कहीं नही था। हनुमानजी ने कहा: अच्छा कोई बात नहीं। शायद प्रभु ने मुझे इस लायक नही समझा होगा जो मेरा नाम उस बही खाते में लिखा जाये। पर नारद जी प्रभु एक अन्य दैनंदिनी भी रखते है उसमें भी वे नित्य कुछ लिखते हैं। नारदजी बोले:अच्छा? हनुमानजी ने कहा: हाँ! नारदमुनि फिर गये प्रभु श्रीराम के पास और बोले प्रभु ! सुना है कि आप अपनी अलग से दैनंदिनी भी रखते है! उसमें आप क्या लिखते हैं? प्रभु श्रीराम बोले: हाँ! पर वो तुम्हारे काम की नहीं है। नारदजी: ''प्रभु ! बताईये ना, मैं देखना चाहता हूँ कि आप उसमें क्या लिखते हैं? प्रभु मुस्कुराये और बोले मुनिवर मैं इनमें उन भक्तों के नाम लिखता हूँ जिन को मैं नित्य भजता हूँ। नारदजी ने डायरी खोल कर देखा तो उसमें सबसे ऊपर हनुमान जी का नाम था। ये देख कर नारदजी का अभिमान टूट गया। कहने का तात्पर्य यह है कि जो भगवान को सिर्फ जीव्हा से भजते है उनको प्रभु अपना भक्त मानते हैं और जो ह्रदय से भजते है उन भक्तों के वे स्वयं भक्त हो जाते हैं। ऐसे भक्तों को प्रभु अपनी हृदय रूपी विशेष सूची में रखते हैं। 🚩जय सियाराम🚩

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बात कड़वी मगर सच्ची👍 🐦एक कबूतर और एक क़बूतरी एक पेड़ की डाल पर बैठे थे। उन्हें बहुत दूर से एक आदमी आता दिखाई दिया । क़बूतरी के मन में कुछ शंका हुआ औऱ उसने क़बूतर से कहा कि चलो जल्दी उड़ चले नहीं तो ये आदमी हमें मार डालेगा। क़बूतर ने लंबी सांस लेते हुए इत्मीनान के साथ क़बूतरी से कहा..भला उसे ग़ौर से देखो तो सही, उसकी अदा देखो, लिबास देखो, चेहरे से शराफत टपक रही है, ये हमें क्या मारेगा..? बिलकुल सज्जन पुरुष लग रहा है...? क़बूतर की बात सुनकर क़बूतरी चुप हो गई। जब वह आदमी उनके क़रीब आया तो अचानक उसने अपने वस्त्र के अंदर से तीर कमान निकाला औऱ झट से क़बूतर को मार दिया...औऱ बेचारे उस क़बूतर के वहीं प्राण पखेरू उड़ गए.... असहाय क़बूतरी ने किसी तरह भाग कर अपनी जान बचाई औऱ बिलखने लगी।उसके दुःख का कोई ठिकाना न रहा औऱ पल भर में ही उसका सारा संसार उजड़ गया। उसके बाद वह क़बूतरी रोती हुई अपनी फरियाद लेकर राजा के पास गई औऱ राजा को उसने पूरी घटना बताई। राजा बहुत दयालु इंसान था। राजा ने तुरंत अपने सैनिकों को उस शिकारी को पकड़कर लाने का आदेश दिया। तुरंत शिकारी को पकड़ कर दरबार में लाया गया।शिकारी ने डर के कारण अपना जुर्म कुबूल कर लिया। उसके बाद राजा ने क़बूतरी को ही उस शिकारी को सज़ा देने का अधिकार दे दिया औऱ उससे कहा कि " तुम जो भी सज़ा इस शिकारी को देना चाहो दे सकती हो औऱ तुरंत उसपर अमल किया जाएगा "। 🌀क़बूतरी ने बहुत दुःखी मन से कहा कि " हे राजन,मेरा जीवन साथी तो इस दुनिया से चला गया जो फ़िर क़भी भी लौटकर नहीं आएगा, इसलिए मेरे विचार से इस क्रूर शिकारी को बस इतनी ही सज़ा दी जानी चाहिए कि अगर वो शिकारी है 🏹तो उसे हर वक़्त शिकारी का ही लिबास पहनना चाहिए , ये शराफत का लिबास वह उतार दे क्योंकि शराफ़त का लिबास ओढ़कर धोखे से घिनौने कर्म करने वाले सबसे बड़े नीच होते हैं....।" ✒️इसलिए अपने आसपास शराफ़त का ढोंग करने वाले बहरूपियों से हमेशा सावधान रहें.......... सतर्क रहें औऱ अपना बहुत ख़याल रखें...!! 🚩 राम राम जी 🚩

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Renu Singh May 6, 2021

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Mamta Chauhan May 6, 2021

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