🙋‍♀️🌹शुभ रात्रि वंदन 🌹🙏 *दो अनमोल हीरे* *एक सौदागर को बाज़ार में घूमते हुए एक उम्दा नस्ल का ऊंट दिखाई पड़ा!* *सौदागर और ऊंट बेचने वाले के बीच काफी लंबी सौदेबाजी हुई और आखिर में सौदागर ऊंट खरीद कर घर ले आया!* . *घर पहुंचने पर सौदागर ने अपने नौकर को ऊंट का कजावा ( काठी) निकालने के लिए बुलाया..!* . *कजावे के नीचे नौकर को एक छोटी सी मखमल की थैली मिली जिसे खोलने पर उसे कीमती हीरे जवाहरात भरे होने का पता चला..!* . *नौकर चिल्लाया,"मालिक आपने ऊंट खरीदा, लेकिन देखो, इसके साथ क्या मुफ्त में आया है!"* . *सौदागर भी हैरान था, उसने अपने नौकर के हाथों में हीरे देखे जो कि चमचमा रहे थे और सूरज की रोशनी में और भी टिम टिमा रहे थे!* . *सौदागर बोला: " मैंने ऊंट ख़रीदा है, न कि हीरे, मुझे उसे फौरन वापस करना चाहिए!"* . *नौकर मन में सोच रहा था कि मेरा मालिक कितना बेवकूफ है...!* . *बोला: "मालिक किसी को पता नहीं चलेगा!" पर, सौदागर ने एक न सुनी और वह फौरन बाज़ार पहुंचा और दुकानदार को मख़मली थैली वापिस दे दी!* . *ऊंट बेचने वाला बहुत ख़ुश था, बोला, "मैं भूल ही गया था कि अपने कीमती पत्थर मैंने कजावे के नीचे छुपा के रख दिए थे!* . *अब आप इनाम के तौर पर कोई भी एक हीरा चुन लीजिए!* . *"सौदागर बोला," मैंने ऊंट के लिए सही कीमत चुकाई है इसलिए मुझे किसी शुक्राने और ईनाम की जरूरत नहीं है!"* . *जितना सौदागर मना करता जा रहा था, ऊंट बेचने वाला उतना ही ज़ोर दे रहा था!* . *आख़िर में सौदागर ने मुस्कुराते हुए कहा: असलियत में जब मैंने थैली वापस लाने का फैसला किया तो मैंने पहले से ही दो सबसे कीमती हीरे इसमें से अपने पास रख लिए थे!* . *इस कबूलनामें के बाद ऊंट बेचने वाला भड़क गया उसने अपने हीरे जवाहरात गिनने के लिए थैली को फ़ौरन खाली कर लिया!* . *पर वह था बड़ी पशोपेश में बोला,"मेरे सारे हीरे तो यही है, तो सबसे कीमती दो कौन से थे जो आपने रख़ लिए?"* *सौदागर बोला:... " मेरी ईमानदारी और मेरी खुद्दारी."* *जिन जिन के पास यह 2 हीरे है वह दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं।......* *संकलित*

🙋‍♀️🌹शुभ रात्रि वंदन 🌹🙏

*दो अनमोल हीरे*

*एक सौदागर को बाज़ार में घूमते हुए एक उम्दा नस्ल का ऊंट दिखाई पड़ा!*

*सौदागर और  ऊंट बेचने वाले के बीच काफी लंबी सौदेबाजी हुई और आखिर में सौदागर ऊंट खरीद कर घर ले आया!*
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*घर पहुंचने पर  सौदागर ने अपने नौकर को ऊंट का कजावा ( काठी) निकालने के लिए बुलाया..!*
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*कजावे के नीचे नौकर को एक छोटी सी मखमल की थैली मिली जिसे खोलने पर उसे कीमती हीरे जवाहरात भरे होने का पता चला..!*
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*नौकर चिल्लाया,"मालिक आपने ऊंट खरीदा, लेकिन देखो, इसके साथ क्या  मुफ्त में आया है!"*
.
*सौदागर भी हैरान था, उसने अपने नौकर के हाथों में हीरे देखे जो कि चमचमा रहे थे और सूरज की रोशनी में और भी टिम टिमा रहे थे!*
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*सौदागर बोला: " मैंने ऊंट ख़रीदा है, न कि हीरे, मुझे उसे फौरन वापस करना चाहिए!"*
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*नौकर मन में सोच रहा था कि मेरा मालिक कितना  बेवकूफ है...!*
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*बोला: "मालिक किसी को पता नहीं चलेगा!" पर, सौदागर ने एक न सुनी और वह फौरन बाज़ार पहुंचा और दुकानदार को मख़मली थैली वापिस दे दी!* 
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*ऊंट बेचने वाला बहुत ख़ुश था, बोला, "मैं भूल ही गया था कि अपने कीमती पत्थर मैंने  कजावे के नीचे छुपा के रख दिए थे!*
.
*अब आप इनाम के तौर पर कोई  भी एक हीरा चुन लीजिए!*
.
*"सौदागर बोला," मैंने ऊंट के लिए सही कीमत चुकाई है इसलिए मुझे किसी शुक्राने और ईनाम की जरूरत नहीं है!"* 
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*जितना सौदागर मना करता जा रहा था, ऊंट बेचने वाला उतना ही ज़ोर दे रहा था!* 
.
*आख़िर में सौदागर ने मुस्कुराते हुए कहा: असलियत में जब मैंने थैली वापस लाने का फैसला किया तो मैंने पहले से ही दो सबसे कीमती हीरे इसमें से अपने पास रख लिए थे!*
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*इस कबूलनामें के बाद ऊंट बेचने वाला भड़क गया उसने अपने हीरे जवाहरात गिनने के लिए थैली को फ़ौरन खाली कर लिया!*
.
*पर वह था बड़ी पशोपेश में बोला,"मेरे सारे हीरे तो यही है, तो सबसे कीमती दो कौन से थे जो आपने रख़ लिए?"*
 

*सौदागर बोला:... " मेरी ईमानदारी और मेरी खुद्दारी."*

*जिन जिन के पास यह 2 हीरे है वह दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं।......*
            *संकलित*

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कामेंट्स

Kamala Sevakoti Jan 20, 2021
Jai shree Radhey jai shree Radhey jai shree Radhey jai shree Radhey jai shree Radhey jai shree Radhey

Jagdish Raj Jan 20, 2021
nice post good line good night preeti jn ji jai shri krishna radha

pawanthakur🙏🙏9716955827 Jan 20, 2021
🙏🙏ऊँ नमः शिवाय हर महादेव जी 🙏🙏 🙏🙏माँ पार्वती जी की कृपा से सह परिवार मं🙏🙏गलमय हो आप सदा खुश रहें हर मनोकामना 🙏🙏 पूर्ण हो 🌙🌷🌷💐शुभ रात्रि वंदना जी 💐🌷🌷🌙🍁🍁🍁🍁🍁🌺🌺🥀🥀🥀🥀🥀🌷🌷

Naresh Rawat Jan 20, 2021
जय राधे श्याम जय श्रीकृष्ण🙏🌷 राधे राधे जी सिस्टर जी🙏🌷 शुभ रात्रि वंदन सिस्टर जी🙏🌙 ठाकुर जी आप सपरिवार की हर मनोरथ पूर्ण करे आप सदा स्वस्थ 💪और खुश रहो 🙂जी🙏शुभ रात्रि सबा खैर 😴 जय श्रीकृष्ण 🙏🌹🌹

mantu Sharma Jan 20, 2021
हरे रामा हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे हरे शुभ रात्रि वंदन जी

Ashwinrchauhan Jan 20, 2021
राधे राधे जी राधारानी की कृपा आप पर आप के पुरे परिवार पर सदेव बनी रहे आप का हर पल मंगल एवं शुभ रहे ठाकुर जी आप की हर मनोकामना पूरी करे आप का आने वाला दिन शुभ रहे गुड नाईट जय जिनेन्द जय महावीर जय श्री कृष्ण

Kamala Sevakoti Jan 20, 2021
Jai shree Ram Jai shree Ram Jai shree Ram Jai shree Ram Jai shree Ram Jai shree Ram Jai shree Ram good night ji 🌷🌷🌷

Mamta Chauhan Jan 20, 2021
Radhe radhe ji🌷🙏 Shubh ratri vandan pyari bahan ji aapka har pal khushion bhara ho aapki sbhi manokamna puri ho🌷🌷🙏🙏

CG Sahu Jan 20, 2021
ati sunder khani nice good night 🙏🏻🌹🙏🏻🌹🌹🍀🌻🍀🍲🌻🌻🌻

R.S.PARMAR⚡JAY MAHAKAL Jan 20, 2021
🌹💐 शुभ प्रभात स्नेह वंदन जी 💐🌹 आप का दिन मंगलमय हो और आप हर पल खुश रहे स्वास्थ रहे और सदैव मुस्कराते रहे 🙏🌷 जय श्री राधे राधे 🌷🙏

🌷🌷A Mishra Ji 🌹🌹 Jan 21, 2021
शुभ रात्री वंदन जी जय श्रीकृष्ण राधे राधे जी शुभ रात्री नमस्ते जी

🍁💎💓🍁💎💓🍁💎💓🍁 ♦️♦️ *रात्रि कहानी* ♦️♦️ *💥ईश्वर बहुत ही दयालु है😇☝🏻* ✍एक राजा का एक विशाल फलों का बगीचा था। उसमें तरह-तरह के फल लगते थे। उस बगीचे की सारी देख-रेख एक किसान‌‌ अपने परिवार के साथ करता था। और वो किसान हर दिन बगीचे के ताजे फल लेकर राजा‌ के राजमहल में जाता था। एक दिन किसान ने पेड़ों पर देखा, कि नारियल, अनार, अमरूद और अंगूर आदि पक कर‌‌ तैयार हो रहे हैं। फिर वो किसान सोचने लगा- कि आज कौन सा फल‌ राजा को अर्पित करूं? और उसे लगा कि आज राजा को अंगूर अर्पित करने चाहिएं, क्योंकि वो बिल्कुल पक कर तैयार हैं। फिर उसने अंगूरों की टोकरी भर ली और राजा को देने चल पड़ा। किसान जब राजमहल में पहुंचा, तो राजा किसी दूसरे ख्याल में खोया हुआ था और थोड़ी सा नाराज भी लग रहा था। किसान ने रोज की तरह मीठे रसीले अंगूरों की टोकरी राजा के सामने रख दी, और थोड़ी दूरी पर बैठ गया। अब राजा उसी ख्यालों में टोकरी में से अंगूर उठाता, एक खाता और एक खींचकर किसान के माथे पर निशाना साधकर फेंक देता। राजा का अंगूर जब भी किसान के माथे या शरीर पर लगता था, तो किसान कहता- ईश्वर बड़ा ही दयालु है। राजा फिर और जोर से अंगूर फेंकता था, और किसान फिर वही कहता- ईश्वर बड़ा ही दयालु है। थोड़ी देर बाद जब राजा को एहसास हुआ, कि वो क्या कर रहा है और प्रत्युत्तर क्या आ रहा है, तो वो संभलकर बैठ गया और फिर किसान से कहा- मैं तुम्हें बार-बार अंगूर मार रहा हूं, और ये अंगूर तुम्हें लग भी रहे हैं, पर फिर भी तुम बार-बार यही क्यों कह रहे हो- ईश्वर बड़ा ही दयालु है। किसान बड़ी ही नम्रता से बोला- राजा जी! बागान में आज नारियल, अनार, अमरुद और अंगूर आदि फल तैयार थे, पर मुझे भान हुआ कि क्यों न मैं आज आपके लिए अंगूर ले चलूं। अब लाने को तो मैं नारियल, अनार और अमरुद भी ला सकता था, पर मैं अंगूर लाया। यदि अंगूर की जगह नारियल, अनार या अमरुद रखे होते, तो आज मेरा हाल क्या होता? इसीलिए मैं कह रहा था- ईश्वर बड़ा ही दयालु है। तात्पर्य------ इसी प्रकार ईश्वर भी हमारी कई मुसीबतों को बहुत ही हल्का करके हमें उबार लेता है। पर ये तो हम ही नाशुकरे हैं जो शुक्र न करते हुए, उल्टा उसे ही गुनहगार ठहरा देते हैं। मेरे साथ ही ऐसा क्यूं हुआ? मेरा क्या कसूर था ? *नित याद करो मन से शिव को💥* 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

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Mamta Chauhan Feb 24, 2021

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Archana Singh Feb 24, 2021

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Renu Singh Feb 24, 2021

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Neha Sharma, Haryana Feb 24, 2021

*बहुत ही सुंदर कहानी...."अनोखा कन्यादान.... *सुधा.... ये कया है बेटा ...तुम....सबकुछ ठीक तो है तेरे और मोहन के बीच मे ... *हां...मम्मी .....पर आप ये ...मतलब यूं अचानक बेटा तेरी सासूंमा का फोन आया था छ: महीने होने को आए अबतक कोई खुशखबरी .....उन्हें कुछ खटका तो उन्होंने मुझे फोन किया ...सच बता तेरे और मोहन के बीच सबकुछ ठीक तो है ना या कोई और परेशानी ... ऐसा कुछ नहीं है मम्मी जी ....मोहन ने अंदर आते हुए कहा अरे दामाद जी .....मोहन ने आगे बढकर चरण स्पर्श करते हुए कहा.... दरअसल मम्मी जी मैंने ही अभी परिवार को आगे बढाने से मना किया था सुधा को ....बस थोड़ा सा वक्त चाहिए था एक्चुअली गलती मेरी ही है मुझे मां को बता देना चाहिए था खमाखां आप और मम्मी दोनो परेशान हो गई ....माफ कीजियेगा मम्मी .... अरे ...मोहन तुम दामाद नहीं मेरे बेटे हो ....बेटा तुमदोनो को अपनी जिम्मेदारियों को निभाना है जैसा तुमदोनो को ठीक लगे ...अब बूढों को चिंता हुई तो ....खैर खुश रहो तुमदोनो ...ईश्वर की कृपा सदैव बनी रहे ....दोनो के सिरपर हाथ रखकर मां बोली.... सुधा ने एकबारगी फिर से गुस्सैल नजरों से मोहन को देखा ....मगर मां की ओर देखकर मुस्कुराते हुए कहा ...जी मम्मी .... मां के वापस चले जाने के बाद अकेले में बैठी सुधा को शादी की पहली रात का स्मरण हो उठा.... जब मोहन उसके समीप आया था तो सुधा ने खुदको समेटते हुए साफ इंकार करते हुए कहा था.... मे इसके लिए तैयार नहीं हूं..... तब मोहन ने कहा..... सुधा ....ये हमारे मिलन की रात है और दोनो और से जब समर्पण स्वीकृति हो तभी मिलन पूर्ण रूप से होता है मे तुम्हारे निर्णय का सम्मान करता हूं मगर एक पति के हक से जानना चाहता हूं वजह कया है .... वजह..... मोहनजी ....जानते है मे एक पढीलिखी लडकी हूं आपसे पहले भी मुझे दो लडके से मिलवाया गया था मैंने दोनो को रिजेक्ट कर दिया था और फिर आपसे मिलवाने पर मैंने आपको चुना जानते है कयो ....कयोंकि आपके विचारों ने मुझे आकर्षित किया था आपके दहेज प्रथा के विरुद्ध कहे शब्दों से मे बेहद प्रभावित थी ...और आपने तो साफ साफ दहेज के लिए मना किया था आपके मम्मी पापा ने भी ....जानते है उस वक्त मुझे आप किसी हीरो से कम नहीं लग रहे थे एक ऐसे इंसान की पत्नी बनने पर मुझे गर्व महसूस हो रहा था ....मगर कन्यादान के वक्त जब पापा ने आपको वो पच्चीस लाख का चेक दिया तो आपने माथे से लगाकर उसे आशिर्वाद के रुप मे तुरंत स्वीकार कर लिया ..... आप तो दोमुंहे वाले इंसान निकले ....और ऐसे इंसान के साथ मे कोई रिश्ता ....छी....आज आप हीरो नहीं ब्लकी वो विलेन जैसे दिखाई दे रहे है जो अपना बनकर पीठ मे छुरी घोप देता है .... ओह....तो ये बात है ..... हां....और मे सुबह होते ही यहां से चली जाऊंगी कहा.... कहीं भी ....पापा के घर नहीं जा सकती ....वरना लोगों के तानों से .... ....नहीं पढीलिखी हूं कहीं और चली जाऊंगी ..... अच्छा.... इतना सोचती हो अपने मम्मी पापा के लिए तो कभी सोचा तुम्हारे ऐसा करने पर उन्हें शाबाशी या तारीफें मिलेगी....सुधा ....मे तुम्हारे निर्णय लेने से नहीं रोक सकता ....तुम्हें मेरे साथ कोई सम्बंध नहीं बनाने तो मे तुम्हें बाध्य नहीं करूंगा मगर तुम शादी के बाद मेरी पत्नी स्वरूप मेरी जीवनसाथी हो ....तो एक सुझाव दूंगा.... तुम यही रहो .....एक पत्नी की तरह रिश्ता मत रखो मगर हम दोनो दोस्तों के जैसे तो रह सकते है ना.... यहां रहोगी तो ना केवल तुम्हारे मम्मी पापा ब्लकी मेरी मां को भी सुकून रहेगा ....देखो हमदोनों की ये दोस्ती दो परिवारों में सदैव सुकून और सम्मान बनाए रखेगी ... हां ....मे तुम्हें इसके लिए वचन देता हूं मे तुम्हें तुम्हारी स्वीकृति के बिना कभी भी छूने की कोशिश भी नहीं करूंगा ......सुधा ....बाहर दुनिया की नजरों में हमदोनों पति पत्नी का रुप बनाए रहेंगे मगर इस कमरे के अंदर केवल और केवल दो दोस्त बने रहेंगे जो एकदूसरे को बिना छुए बिना लडे अलग अलग रहेंगे ...मे वहां सोफे पर सोऊंगा तुम यहां बेड पर सो जाओ..... मगर.... मे ऐसे ..... सुधा ....कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने मम्मी पापा और मेरी मम्मी के बारे मे जरूर सोच लेना ....अन्यथा कल पछताने के आलावा कुछ नहीं बचेगा.... साल छ: महीने में दोनो परिवारों को समझा बुझा देगे हमारे बीच नहीं बन रही और ..... आगे तुम समझदार हो ....कहकर मोहन चादर तकिया लिए सोफे पर जा लेट गया था..... सुधा को भी उस वक्त मोहन की बातें सही लगी थी ....और उसने भी यही रहने का निर्णय ले लिया.... सचमुच मोहन अपने वचन पर अडिग रहा उसने कभी सुधा को छूने की कोशिश नहीं की .... ऐसे ही आज छ: महीने पूरे होने को आए थे दोनो ने अबतक कोई खुशखबरी नहीं दी थी तो मोहन की माता जी ने अपनी समधन सुधा की मम्मी से बातचीत की थी जिसके परिणाम स्वरूप वो सुधा से मिलने आई थी..... मगर अब सुधा ने निर्णय किया वो कल ही वकील से मिलकर मोहन से तलाक लेने की प्रक्रिया की शुरूआत करेगी ....अगले दिन वो एक वकील के पास पहुंची। सुधा अपने वकील के पास पहुंची और मोहन से तलाक के लिए बातचीत कर उसे नोटिस के जरिए सूचना देने की कार्यवाही में लग गई ...अचानक उसके मोबाइल पर बेल बजी....हैलो मम्मी...कया..... फोन हाथ से छूट गया ..... सुधा जी....सुधा जी .....कया हुआ ..... वकील साहब ....पापा ....पापा ....कहकर फूटफूटकर रोने लगी..... सुधा की माताजी ने फोन किया था उसके पिताजी अब इस दुनिया में नहीं रहे .... सुधा तुरंत अपने घर पहुंची ....कुछ ही देर मे मोहन और उसकी माता जी भी वहां पहुंच गई .... इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को पूरा किया गया .....अभी पंद्रह दिन ही बीते थे की सुधा के भैया भाभी ने सुधा से कहा.... सुधा ....पापा तो रहे नहीं ....तो हम सोच रहे है मां को किसी वृद्ध आश्रम..... कया..... ये आप दोनो कैसी बातें कर रहे है ....भैया वो मां है आपकी जन्म देनेवाली ....और पापा के जाते ही आप दोनो ....छी....कितनी घटिया सोच है आपकी ....और हां मत भूलो पापा की संपत्ति मे उनकी पत्नी यानी मां का बराबर का हक है ..... कया ....हक...संपत्ति..... वो तो कबकी हमारे नाम पर हो गई थी खुद मां ने पापा से साइन करवाकर दिए थे ..... खैर..... तुम चाहो कोर्ट जाओ या जहन्नुम मे ....मगर अब ये घर हमारा है और कुछ दिन तक रह सकती हो मगर जल्द ही अपना इंतजाम कर लेना ......समझी ....मां की चमची ....कहकर दोनो दूसरे कमरे में चले गए.... अब सुधा को समझ नहीं आ रहा था वो कया करे ....पापा रहे नहीं मां को ऐसे कहा अकेले छोडें ...ऊपर से उसने मोहन से तलाक की कार्यवाही ....ओह नो.....तभी उसने वकील को फोन किया.... हैलो ....जी....मतलब आपने नोटिस..... उफ्फ..... ये मैंने कया किया .....अब मां को लेकर कहा जाऊंगी.... अचानक घरके बाहर गाडी आकर रुकी .....सुधा ने देखा.... ये ...ये तो मोहन की गाडी..... मोहन गाडी से उतरा और मां से आकर बोला.... मां ....अब सभी क्रियाओं की समाप्ति हो गई है आपकी इच्छाओं के लिए मे चुप था मगर अब आप मेरे साथ चलेगी बस ....जो जरूरी हो ले लीजिए .... मां अपने कुछ कपडो और पति के समान को समेटने लगी तबतक मोहन सुधा के पास आकर बोला.... सुधा.... ये लो तुम्हारे तलाक के पेपर्स .....चाहता तो नहीं था मगर .... इसके आगे कुछ बोल पाता तबतक मां आ गई.... चलो बेटा .... जी ....कहकर मां के हाथों से समान ले लिया.... वहीं सुधा सोच रही थी जब तलाक के पेपर्स पर मोहनजी ने साइन कर दिए तो फिर ये हमें कहा लेकर जा रहे है और कयो....मगर मां पर पहले ही पापा के चले जाने का दुख ...अगर कुछ कहा तो कहीं मां भी .....नहीं.... नहीं.... सोचकर उसने चुप्पी साधे रहने मे ही भलाई समझी.... मोहन ने घरके बाहर आकर गाडी रोकी ....सुधा मां को लिए जैसे ही घरमे घुसने लगी तो मोहन ने रोका .....सुधा.... वहां नहीं यहां .....मां अपने घरमे रहेगी... कया...... मगर हमारा घर तो ये है वो तो किसी और का.... सुधा ....वो हमारा घर है और हमारी दोनो मांओं का भी ....मगर ये .....ये घर केवल मां का है .... कहकर दरवाजा खोलकर मां को अंदर ले गया जहां पहले से सुधा के माता पिता की बडी से तस्वीर लगी थी ...मां को कमरे में बिठाकर मोहन सुधा संग दरवाजे के गेट पर आया और सुधा को देखकर बोला.... जानती हो सुधा....शादी की पहली रात तुमनें मुझसे वो पच्चीस लाख को लेकर...... सुधा मे शुरू से ही दहेज विरोधी रहा हूं आज भी उसपर अडिग हूं मगर शादी से दो दिन पहले तुम्हारे पापा मेरे पास आए थे और उन्होंने उसी वक्त मुझे तुम्हारे भैया भाभी के बारे मे उनके लालचवश घर कारोबार हथियाने की चल रहे षड्यंत्रों के बारे मे बताया.... मैंने उनसे उनपर ऐसा ना करने के लिए कोर्ट जाने की बात भी कहीं तो वह बोले..... बेटा ....हमारे बाद भी तो सबकुछ उसीका है मुझे अपनी फिक्र नहीं जबतक हूं ये दोनो कुछ नहीं कर सकते जानते है मे सबकुछ वापिस कैसे ले सकता हूं मगर मेरे बाद मेरी पत्नी ....वो सीधी है बेटे बहु ने उसे अपनी बातों से उलझा कर ....खैर ...वो ममता है उसकी ...मगर बेटा कल जब मे नहीं रहूंगा तो ये उसकी ममता का खयाल नहीं करेंगे उसे निकाल बाहर कर देगे.... तो आप मुझसे कया चाहते है पापा जी ..... बेटा ....शादी के वक्त एक अनोखे कन्यादान के रुप मे मेरे हाथों पच्चीस लाख रु ....ले लेना ....मेरे बाद मेरी पत्नी के भविष्य के लिए .....वो दरदर की ठोकरें ना खाए बेटा.... और हां....इसबात का मेरे मरने तक किसी से जिक्र मत करना तुम्हें इस बूढे बाप की कसम... सुधा ....ना चाहते हुए भी मुझे वो रु लेने पडे .....और इसीलिए ....मे तुम्हें कुछ बता भी नहीं पाया.... सुधा पापा की बातों को मानकर मैंने इसमें कुछ रकम जोडकर अपने साथ वाला घर खरीद लिया ....अब मां यहां बिना किसी के रौब के स्वेच्छा से जैसे चाहे रह सकती हैं ..... बाकी ....हमारा घर इनका अपना है .....और मुझे दोनो मांओं के साथ रहकर दोनो के प्यार और आशीर्वाद के साये में जीवन व्यतीत करना है..... मोहनजी..... दौडते हुए सुधा मोहन के पैरों में गिर गई... मुझे माफ कर दीजिए ...मुझे माफ ...... मगर तुम्हें तो.....मोहन बोला.... नहीं चाहिए .....नहीं चाहिए.... कहकर पेपर्स फाड दिए ...... सुधा .....पत्नी की जगह कदमों में नहीं पति के दिल मे होती है कहकर मोहन ने सुधा को सीने से लगा लिया... *एक सुंदर रचना......👍🌸 *जय-जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸

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*जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन * *_⭕♦️परमात्मा से सम्बन्ध♦️⭕_* एक बार एक पंडित जी ने एक दुकानदार के पास पांच सौ रुपये रख दिए। उन्होंने सोचा कि जब मेरी बेटी की शादी होगी तो मैं ये पैसा ले लूंगा। कुछ सालों के बाद जब बेटी सयानी हो गई, तो पंडित जी उस दुकानदार के पास गए। लेकिन दुकानदार ने नकार दिया और बोला- आपने कब मुझे पैसा दिया था? बताइए! क्या मैंने कुछ लिखकर दिया है? पंडित जी उस दुकानदार की इस हरकत से बहुत ही परेशान हो गए और बड़ी चिंता में डूब गए। फिर कुछ दिनों के बाद पंडित जी को याद आया, कि क्यों न राजा से इस बारे में शिकायत कर दूं। ताकि वे कुछ फैसला कर देंगे और मेरा पैसा मेरी बेटी के विवाह के लिए मिल जाएगा। फिर पंडित जी राजा के पास पहुंचे और अपनी फरियाद सुनाई। राजा ने कहा- कल हमारी सवारी निकलेगी और तुम उस दुकानदार की दुकान के पास में ही खड़े रहना। दूसरे दिन राजा की सवारी निकली। सभी लोगों ने फूलमालाएं पहनाईं और किसी ने आरती उतारी। पंडित जी उसी दुकान के पास खड़े थे। जैसे ही राजा ने पंडित जी को देखा, तो उसने उन्हें प्रणाम किया और कहा- गुरु जी! आप यहां कैसे? आप तो हमारे गुरु हैं। आइए! इस बग्घी में बैठ जाइए। वो दुकानदार यह सब देख रहा था। उसने भी आरती उतारी और राजा की सवारी आगे बढ़ गई। थोड़ी दूर चलने के बाद राजा ने पंडित जी को बग्घी से नीचे उतार दिया और कहा- पंडित जी! हमने आपका काम कर दिया है। अब आगे आपका भाग्य। उधर वो दुकानदार यह सब देखकर हैरान था, कि पंडित जी की तो राजा से बहुत ही अच्छी सांठ-गांठ है। कहीं वे मेरा कबाड़ा ही न करा दें। दुकानदार ने तत्काल अपने मुनीम को पंडित जी को ढूंढ़कर लाने को कहा। पंडित जी एक पेड़ के नीचे बैठकर कुछ विचार-विमर्श कर रहे थे। मुनीम जी बड़े ही आदर के साथ उन्हें अपने साथ ले आए। दुकानदार ने आते ही पंडित जी को प्रणाम किया और बोला- पंडित जी! मैंने काफी मेहनत की और पुराने खातों को‌ देखा, तो पाया कि खाते में आपका पांच सौ रुपया जमा है। और पिछले दस सालों में ब्याज के बारह हजार रुपए भी हो गए हैं। पंडित जी! आपकी बेटी भी तो मेरी बेटी जैसी ही है। अत: एक हजार रुपये आप मेरी तरफ से ले जाइए, और उसे बेटी की शादी में लगा दीजिए। इस प्रकार उस दुकानदार ने पंडित जी को तेरह हजार पांच सौ रुपए देकर बड़े ही प्रेम के साथ विदा किया। *_⭕♦️तात्पर्य♦⭕_* *जब मात्र एक राजा के साथ सम्बन्ध होने भर से हमारी विपदा दूर जो जाती है,* *तो हम अगर इस दुनिया के राजा यानि कि दीनदयाल परमात्मा से अपना सम्बन्ध जोड़ लें*, *तो हमें कोई भी समस्या, कठिनाई या फिर हमारे साथ किसी भी तरह के अन्याय का तो कोई प्रश्न ही नही।* *🙏जय श्री राधे कृष्णा..🙏*

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