Devang S Bhatt
Devang S Bhatt Jul 20, 2017

🕉📿🏵🏵💮💮🏵🏵💮💮🏵🏵💮💮🏵🏵📿🕉 *💮VEDIC RAKHI💮* *📿वैदिक रक्षासू

#ज्ञानवर्षा
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*💮VEDIC RAKHI💮*
*📿वैदिक रक्षासूत्र📿*

*रक्षासूत्र मात्र एक धागा नहीं बल्कि शुभ भावनाओं व शुभ संकल्पों का पुलिंदा है । यही सूत्र जब वैदिक रीति से बनाया जाता है और भगवन्नाम व भगवद्भाव सहित शुभ संकल्प करके बाँधा जाता है तो इसका सामर्थ्य असीम हो जाता है

*📿कैसे बनायें वैदिक राखी ?📿*

*💮वैदिक राखी बनाने के लिए एक छोटा-सा ऊनी, सूती या रेशमी पीले कपड़े का टुकड़ा लें । उसमें💮*

*🍃(१) दूर्वा*

*🍃(२) अक्षत (साबूत चावल)*

*🍃(३) केसर या हल्दी*

*🍃(४) शुद्ध चंदन*

*🍃(५) सरसों के साबूत दाने*

*💮इन पाँच चीजों को मिलाकर कपड़े में बाँधकर सिलाई कर दें । फिर कलावे से जोड़कर राखी का आकार दें । सामर्थ्य हो तो उपरोक्त पाँच वस्तुओं के साथ स्वर्ण भी डाल सकते हैं ।💮*

*📿वैदिक राखी का महत्त्व📿*

*💮वैदिक राखी में डाली जानेवाली वस्तुएँ हमारे जीवन को उन्नति की ओर ले जानेवाले संकल्पों को पोषित करती हैं ।💮*

*🎋(१) दूर्वा*
*🏵जैसे दूर्वा का एक अंकुर जमीन में लगाने पर वह हजारों की संख्या में फैल जाती है, वैसे ही ‘हमारे भाई या हितैषी के जीवन में भी सद्गुण फैलते जायें, बढ़ते जायें...’ इस भावना का द्योतक है दूर्वा । दूर्वा गणेशजी की प्रिय है अर्थात् हम जिनको राखी बाँध रहे हैं उनके जीवन में आनेवाले विघ्नों का नाश हो जाय ।*

*🎋(२) अक्षत (साबूत चावल)*
*🏵हमारी भक्ति और श्रद्धा भगवान के, गुरु के चरणों में अक्षत हो, अखंड और अटूट हो, कभी क्षत-विक्षत न हो - यह अक्षत का संकेत है । अक्षत पूर्णता की भावना के प्रतीक हैं । जो कुछ अर्पित किया जाय, पूरी भावना के साथ किया जाय ।*

*🎋(३) केसर या हल्दी*
*🏵केसरकेसर की प्रकृति तेज होती है अर्थात् हम जिनको यह रक्षासूत्र बाँध रहे हैं उनका जीवन तेजस्वी हो । उनका आध्यात्मिक तेज, भक्ति और ज्ञान का तेज बढ़ता जाय । केसर की जगह पिसी हल्दी का भी प्रयोग कर सकते हैं । हल्दी पवित्रता व शुभ का प्रतीक है । यह नजरदोष व नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है तथा उत्तम स्वास्थ्य व सम्पन्नता लाती है ।*

*🎋(४) चंदन*
*🏵चंदनचंदन दूसरों को शीतलता और सुगंध देता है । यह इस भावना का द्योतक है कि जिनको हम राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में सदैव शीतलता बनी रहे, कभी तनाव न हो । उनके द्वारा दूसरों को पवित्रता, सज्जनता व संयम आदि की सुगंध मिलती रहे । उनकी सेवा-सुवास दूर तक फैले ।*

*🎋(५) सरसों*
*🏵सरसोंसरसों तीक्ष्ण होती है । इसी प्रकार हम अपने दुर्गुणों का विनाश करने में, समाज-द्रोहियों को सबक सिखाने में तीक्ष्ण बनें ।*

*💮अतः यह वैदिक रक्षासूत्र वैदिक संकल्पों से परिपूर्ण होकर सर्व-मंगलकारी है । यह रक्षासूत्र बाँधते समय यह श्लोक बोला जाता है :💮*

*🍃येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः ।*
*🍃तेन त्वां अभिबध्नामि१ रक्षे मा चल मा चल ।।*
*🍃इस मंत्रोच्चारण व शुभ संकल्प सहित वैदिक राखी बहन अपने भाई को, माँ अपने बेटे को, दादी अपने पोते को बाँध सकती है । यही नहीं, शिष्य भी यदि इस वैदिक राखी को अपने सद्गुरु को प्रेमसहित अर्पण करता है तो उसकी सब अमंगलों से रक्षा होती है भक्ति बढ़ती है

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*आप जहाँ-जहाँ जुड़े हो वहाँ-वहाँ पहुँचाये 🏻*🕉🕉🕉

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Rajiv Mishra Aug 11, 2020

*हरी ॐ भाव " क्या भगवान हमारे द्वारा चढ़ाया गया भोग खाते हैं ? यदि खाते हैं , तो वह वस्तु समाप्त क्यों नहीं हो जाती और यदि नहीं खाते हैं , तो भोग लगाने का क्या लाभ ?" - एक लड़के ने पाठ के बीच में अपने गुरु से प्रश्न किया । गुरु ने तत्काल कोई उत्तर नहीं दिया । वे पूर्ववत् पाठ पढ़ाते रहे । उस दिन उन्होंने पाठ के अन्त में एक श्लोक पढ़ाया -* *पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते ।* *पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥* *पाठ पूरा होने के बाद गुरु ने सभी शिष्यों से कहा कि वे पुस्तक देखकर श्लोक कंठस्थ कर लें ।* *एक घंटे बाद गुरु ने प्रश्न करने वाले शिष्य से पूछा कि उसे श्लोक कंठस्थ हुआ कि नहीं । उस शिष्य ने पूरा श्लोक शुद्ध-शुद्ध गुरु को सुना दिया । फिर भी गुरु ने सिर 'नहीं' में हिलाया , तो शिष्य ने कहा कि - " वे चाहें , तो पुस्तक देख लें ; श्लोक बिल्कुल शुद्ध है ।” गुरु ने पुस्तक दिखाते हुए कहा - “ श्लोक तो पुस्तक में ही है , तो तुम्हें कैसे याद हो गया ?” शिष्य कुछ नहीं कह पाया ।* *गुरु ने कहा - “ पुस्तक में जो श्लोक है , वह स्थूल रूप में है । तुमने जब श्लोक पढ़ा , तो वह सूक्ष्म रूप में तुम्हारे अंदर प्रवेश कर गया । उसी सूक्ष्म रूप में वह तुम्हारे मन में रहता है । इतना ही नहीं , जब तुमने इसको पढ़कर कंठस्थ कर लिया , तब भी पुस्तक के स्थूल रूप के श्लोक में कोई कमी नहीं आई । इसी प्रकार पूरे विश्व में व्याप्त परमात्मा हमारे द्वारा चढ़ाए गए निवेदन को सूक्ष्म रूप में ग्रहण करते हैं और इससे स्थूल रूप के वस्तु में कोई कमी नहीं होती । उसी को हम प्रसाद के रूप में स्वीकार करते हैं ।* *शिष्य को उसके प्रश्न का उत्तर मिल चुका था ।यह केवल उस शिष्य की ही जिज्ञासा नहीं , हम सर्वसाधारण जनों की भी यही स्थिति है । यदि भोग को प्रसाद के भाव से ग्रहण करें तो उस भोज्य पदार्थ का प्रभाव उस रुप में ही प्राप्त होता है ।* *श्लोक या पाठ शब्द ही हैं पर भाव द्वारा वह पूजा का रूप ले लेते हैं । भाव की पवित्रता और समर्पण आवश्यक है ।* *🙏शुभ की कामना सहित🙏* ‌‌ *🕉️🙏ऊं श्री गुरूवे नमः🙏🕉️*

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Shashank Arya Aug 9, 2020

यह कर्म और भाग्य को समझने के लिए सुंदर व्याख्या है This is a Beautiful interpretation of Karma and Bhagya ✍️एक चाट वाला था। जब भी उसके पास चाट खाने जाओ तो ऐसा लगता कि वह हमारा ही रास्ता देख रहा हो। हर विषय पर बात करने में उसे बड़ा मज़ा आता था। कई बार उसे कहा कि भाई देर हो जाती है, जल्दी चाट लगा दिया करो पर उसकी बात ख़त्म ही नहीं होती। एक दिन अचानक उसके साथ मेरी कर्म और भाग्य पर बात शुरू हो गई। तक़दीर और तदबीर की बात सुन मैंने सोचा कि चलो आज उसकी फ़िलासफ़ी भी देख ही लेते हैं। मैंने उससे एक सवाल पूछ लिया। मेरा सवाल उस चाट वाले से था कि, आदमी मेहनत से आगे बढ़ता है या भाग्य से ? और उसने जो जवाब दिया उसके जवाब को सुन कर मेरे दिमाग़ के सारे जाले ही साफ़ हो गए। वो चाट वाला मेरे से कहने लगा आपका किसी बैंक में लॉकर तो होगा? मैंने कहा हाँ, तो उस चाट वाले ने मेरे से कहा कि उस लाकर की चाबियां ही इस सवाल का जवाब है। हर लॉकर की दो चाबियां होती हैं। एक आपके पास होती है और एक मैनेजर के पास। आपके पास जो चाबी है वह है परिश्रम और मैनेजर के पास वाली चाबी भाग्य है। जब तक दोनों चाबियां नहीं लगती लाॅकर का ताला नहीं खुल सकता। आप कर्मयोगी पुरुष हैं और मैनेजर भगवान। अापको अपनी चाबी भी लगाते रहना चाहिये। पता नहीं ऊपर वाला कब अपनी चाबी लगा दे । कहीं ऐसा न हो कि भगवान अपनी भाग्यवाली चाबी लगा रहा हो और हम अपनी परिश्रम वाली चाबी न लगा पायें और ताला खुलने से रह जाये। ईश्वर आप सभी आर्यजनो को सदैव स्वस्थ और प्रसन्न रखें इसी कामनाओं के साथ ओइम् नमस्ते 🙏

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Swami Lokeshanand Aug 11, 2020

एक नियम है, जहाँ आपका मन लगा है वहीं आपकी भक्ति है। आपका मन स्त्री में लगा हुआ है तो आप स्त्री भक्त हैं, धन में लगा हुआ है तो धन के भक्त हैं। यहाँ सीताजी की स्थिति देखें, हिरन पर आँख गई तो भगवान दूर चले गए, रावण पर गई तो हरण ही हो गया। पर अब- "निजपद नयन, दिए मन राम पदकमल लीन" दृष्टि अपने चरणों पर, मन रामजी के चरणों में। आँख उठाती ही नहीं, माने बहिर्मुखता रही ही नहीं, और- "कृस तन, शीश जटा एक बेनी। जपति हृदँय रघुपति गुण श्रेणी॥" तन कृशकाय है, माने देह में मैं-पन का भाव अति क्षीण है। जटा एक पतली सी चोटी मात्र रह गई है, माने एक ही विचार रहता है, भगवान और उनके गुणों का निरंतर चिंतन करती हैं। "नाम पहारू दिवस निसि" जिव्हा पर दिन रात भगवान का नाम है। बस यही साधक की रहनी है। तन संसार में, मन परमात्मा में। नियम से, अन्तर्मुख होकर, नामजप करते हुए, एकमात्र भगवान के चरणों और गुणों का ध्यान। इधर हनुमानजी पहुँचे ही हैं, कि उधर से रावण आ गया, सीताजी ने विचार किया कि पहले जब यह आया था, तब मैं अकेली थी, आज भी अकेली हूँ, ऐसा करूं किसी को साथ ले लूं। सीताजी ने एक तिनका उठा लिया- "तृन धरि ओट कहति बैदेही" भाव यह है कि देखने की इच्छा हो तो बंद आँख से भी जगत देखा जा सकता है, और देखने की इच्छा न हो तो तिनके की ओट भी बहुत है। तिनका दिखा कर रावण को संकेत दे दिया, कि मैं उनकी पुत्रवधु हूँ जिन्होंने भगवान के वियोग में जीवन तिनके की तरह त्याग दिया, उनकी पत्नी हूँ जिन्होंने राजपद तिनके की त्याग दिया। यदि तूं बल-वैभव की बात करता है तो तेरा बल-वैभव भगवान के सामने तिनके के समान है। तेरे पाप के लिए एक दिन तुझे तिनका तिनका धिक्कारेगा। भगवान के रोष की आँधी तुझे ऐसे उड़ा ले जाएगी जैसे किसी तिनके को उड़ा ले जाती है। तिनका दिखाकर मानो रावण को उस तिनके का ध्यान दिलाना चाहती हैं, जो भगवान ने जयन्त के पीछे लगाया था। फिर यह तिनका भी सीताजी की ही तरह धरती का पुत्र है, सीताजी को यह अपना भाई सा लगता है। या तिन-का, माने उनका, रामजी का, मुझे अकेली मत समझना। "मत समझ अकेली सीता को, उसका राघव है साथ सदा। इस रोम रोम में नस नस में, बस रहा राम रघुनाथ सदा॥" राम रूपी सूर्य के सामने तूं, तेरा बल और तेरा वैभव, जुगनू के समान है। लोकेशानन्द के विचार से, ऐसी रहनी, ऐसा विचार, ऐसा विश्वास और ऐसा साहस, सच्चे साधक की पहचान है।

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Anita sharma Aug 11, 2020

*🌹जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त कब मनाएं* 🌹 भाद्रपद महीने की अष्टमी तिथि ,रोहिणी नक्षत्र ,चंद्र वृषभ राशि पर होने पर अति विशेष जयंती नाम शुभ मुहूर्त मैं हमारे तारणहार प्रभु कृष्ण का जन्म हुआ था। यह बहुत ही महत्वपूर्ण शुभ महा संयोग माना जाता है ।लेकिन इस साल जन्माष्टमी की तारीख को लेकर दो मत हैं। पंचांगों में 11 और 12 अगस्त को जन्माष्टमी बताई गई है। भारतवर्ष के अनेक विद्वानों ने परस्पर विचार विमर्श कर सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि 12 अगस्त को ही जन्मोत्सव ,जन्माष्टमी मनाना उत्तम और श्रेष्ठ है। मथुरा- वृंदावन- गोकुल और द्वारिका में 12 अगस्त को जन्मोत्सव मनाया जाएगा। जबकि जगन्नाथ पुरी, काशी और उज्जैन में 11 अगस्त को ऋषिकेश हरिद्वार में रोहिणी नक्षत्र युक्त 13 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। *🌹जन्माष्टमी पूजन का समय व शुभ मुहूर्त*🌹 💐 11 अगस्त 2020 मंगलवार को प्रातः 9 बज के:07 पर अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी इस दिन कृतिका नक्षत्र, चंद्रमा मेष राशि में, सूर्य कर्क राशि में,और वृद्धि योग है। अत सभी ( स्मार्त) गृहस्थी कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत इसी दिन रखेंगे। रात्रि में पूजा का समय 11 अगस्त की रात्रि 12 अगस्त की सुबह 12:05 से लेकर 12:47 तक शुभ पूजा का समय है।राहुकाल दिन में 3:00 बजे से लेकर 4:30 बजे तक रहेगा।और 12 अगस्त 2020 बुधवार को उदय कालीन अष्टमी है 11 बज के 17 मिनट तक रहेगी कृतिका नक्षत्र, वृष राशि के चंद्रमा मैं नवमी युक्त वैष्णवों को जन्माष्टमी एवं जन्मोत्सव मनाना श्रेष्ठ एवं उत्तम रहेगा राहु कॉल 12:00 बजे से लेकर 1:30 बजे तक रहेगा। श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत तथा श्री कृष्ण जन्मोत्सव यह दोनों अलग-अलग स्थितियां है, अतः जन्मोत्सव 12 अगस्त बुधवार को ही मनाया जाएगा। *💐🌹स्मार्त और वैष्णव में भेद*🌹💐 स्मार्त — श्रुति- स्मृति, पुराण, वेद, आदि शास्त्रों को मानने वाले धर्मानुलम्बी, धर्मपरायण समस्त गृहस्थी लोग स्मार्त कहलाते हैं। वैष्णव— वह धर्म परायण जो वैष्णव संप्रदाय से दीक्षित हो गले में कंठी व चंदन धारण किया हो मस्तक पर ऊर्द्धपुण्ड त्रिपुंड चंदन लगाया हो किसी विशिष्ट संप्रदाय के साधु सन्यासी तथा विदुषी एवं विधवाओं ने सन्यास धारण कर लिया हो वह सभी भक्तजन वैष्णव कहलाते हैं। धर्म सिंधु के अनुसार– एकादशी एवं अष्टमी के व्रत- उपवास सभी स्मार्त एवं गृहस्ती जन तिथि के प्रारंभ को ग्रहण कर व्रता व्रतादि करते हैं। लेकिन विधवा एवं वैष्णव संप्रदाय से संबंधित परवर्ती तिथि को ग्रहण कर उपवास व्रत आदि कर्म करते हैं। "स्मार्तानां ग्रहाणां पूर्वो पोष्या। यतिर्भि : निष्काम गृहिभि:" वनस्थौ:विधवाभि वैष्णवैश्च परैवोपोष्या।। *💐🌹 जयंती नाम योग में प्रभु का जन्म*🌹💐 श्री कृष्ण जी का जन्म विष्णु जी के आठवें अवतार के रूप में हुआ, पापी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र के महा सयोग से जयंती नाम योग में, आज से 5126 वर्ष पूर्व रात्रि के 12:00 बजे शून्यकाल में”अवतरण हुआ। *💐🌹 लड्डू गोपाल जी का श्रृंगार करें*🌹💐 लड्डू गोपाल जी के सिंगार में, सिर पर मुकुट ,उनके कानों में बाली, कलाई में कड़ा, हाथों में बांसुरी, पारिजात एवं वैजयंती के फूल अति प्रिय हैं,सुगंधित गोपी चंदन से तिलक करें पूजा में राखी रखें ,मोर पंख अवश्य होना चाहिए। *🌹 लड्डू गोपाल जी को भोग में प्रिय सामग्री*🌹 💐 कान्हा को माखन चोर के नाम से जाना जाता है इसलिए माखन, मिश्री, तुलसी, एवं धनिया की पंजीरी पंचमेवा मिश्रित , का भोग लगाएं। उससे पूर्व पंचामृत से स्नान कराकर , वह चरणामृत प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। *💐🌹व्रत परायण के बाद दान करें* 🌹💐 व्रत का पारण करने के पश्चात वस्तुओं का दान करने से दीर्घायु, सुख, शांति, समृद्धि,भगवान कृष्ण की कृपा से मनोकामना पूर्ति ,मन इच्छित वरदान,के साथ-साथ लक्ष्मी जी की अपार कृपा बरसती है। श्री कृष्ण जी पीतांबर धारी है अत: पीला वस्त्र,पीला अन्न स्वर्ण रजत, दान ब्राह्मण को करना श्रेयस्कर श्रेष्ठ उत्तम है।। *💐💥 मतभेद का कारण💥💐* इसका कारणः कृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र का एक साथ नहीं मिल रहे। 11 अगस्त को अष्टमी तिथि सूर्योदय के बाद लगेगी, लेकिन पूरे दिन और रात में रहेगी। किंतु चंद्रमा वृष राशि पर एवं उदय कालीन अष्टमी तिथि 12 अगस्त को है किंतु रात्रि में अष्टमी नहीं है भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस साल जन्माष्टमी पर्व पर श्रीकृष्ण की तिथि और जन्म नक्षत्र का संयोग नहीं बन रहा है। सभी धर्म प्रेमी एवं कृष्ण भक्त शास्त्र सम्मत मूर्धन्य विद्वानों के परामर्श अनुसार भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा भक्ति पूर्वक 12 अगस्त को ही मनाएंगे जय श्री राधे 💐🌹*“हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की”💐🌹 💐 “नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की “💐

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*A Useful Post for Human Being's Health.... *जय श्री राधेकृष्णा 🙏🌷 *शुभ प्रभात् नमन*🙏🏻🌷 *बाई करवट लेटने के लाभ* 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ *शरीर के लिए सोना बेहद जरूरी होता है। अच्छी सेहत के लिए शरीर को आराम देना कई तरह की बीमारियों से बचाता है। सोते समय हम कई बार करवट बदलकर सोते हैं जिसका हमारे शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ता है। किसी भी इंसान के लिए एक तरफ करवट लेकर सोए रहना नामुमकिन है। लेकिन क्या आपको पता है बांए ओर करवट लेने से आपको कई तरह के फायदे मिल सकते हैं। *बांए ओर करवट लेकर सोने के फायदे..... *आयुर्वेद में शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए बाएं ओर करवट लेकर सोने के बारे में बताया गया है। जिसे आज के वैज्ञानिकों ने शोध के आधार पर इसे माना है। शोध के अनुसार बाएं ओर करवट बदलकर सोने से पेट फूलने की समस्या, दिल के रोग, पेट की खराबी और थकान जैसी समस्याएं दूर होती हैं। यदि आप बाएं की जगह दाएं तरफ करवट लेकर सोते हैं तो इससे शरीर से टाक्सिन सही तरह से निकल नहीं पाते हैं और दिल पर जोर ज्यादा पड़ता है साथ ही पेट की बीमारी भी लगने लगती हैं। कई बार तो हार्ट रेट भी बढ़ सकता है। *सीधे लेटे रहने से भी इंसान को ठीक तरह से सांस लेने में परेशानी होती है। ज्यादातर वे लोग जिन्हें दमा या अस्थमा और स्लीप एपनिा की दिक्कत हो। उनको रात में सीधा नहीं लेटना चाहिए। इसलिए बांए ओर करवट लेकर सोने की आदत डालनी चाहिए। *किडनियां और लीवर के लिए..... *बाएं ओर करवट बदलकर सोने से लीवर और किडनियां ठीक तरह से काम करती हैं। शरीर से गंदगी को साफ करने में लीवर और किड़नी बेहद अहम भूमिका निभाती हैं इसलिए इन पर ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए। *पाचन में सुधार...... *शरीर तभी ठीक रहता है जब आपका पाचन तंत्र ठीक हो। एैसे में बाएं तरफ करवट लेने से आपके पाचन तंत्र को फायदा मिलता है। और खाया हुआ खाना भी आसानी से पेट तक पहुंचता है जो ठीक से हजम भी हो जाता है। इसके अलावा एक ओर फायादा यह है कि बदहजमी की दिक्कत भी दूर हो जाती है। *खतरनाक बीमारियों से बचाव....... *बाएं ओर करवट लेने से शरीर पर जमा हुआ टाक्सिन धीरे-धीरे निकलने लगता है और इस वजह से शरीर को लगने वाली खतरनाक बीमारियां नहीं होती हैं। *एसिडिटी में फायदा...... *सीने में जलन और एसिडिटी की समस्या को दूर करता है बायीं ओर करवट लेकर सोना। क्योंकि इस तरीके से पेट में मौजूद एसिड उपर की जगह से नीचे आने लगता है जिस वजह से सीने की जलन और एसिडिटी की परेशानी में फायदा मिलता है। *पेट को आराम...... *बांए ओर सोने से पेट को आराम मिलता है। क्योंकि इस पोजिशन में सोने से भोजन छोटी आंत से बड़ी आंत तक आसानी से पहुंच जाता है जिस वजह से सुबह आपका पेट खुलकर साफ होता है। *दिल की परेशानी में..... *बाएं ओर करवट बदलकर सोने से दिल से संबंधित परेशानियां दूर होती हैं क्योंकि इस अवस्था में सोने से दिल तक खून की पूर्ती बेहद अच्छे तरह से होती है जिसकी वजह से आक्सीजन और खून की सप्लाई आराम से दिमाग और शरीर तक पहुंचती है जो इंसान को दिल की बीमारी यानि कि हार्ट अटैक जैसे गंभीर रोग से बचा सकती है। *गलत तरीकों से सोना कई बीमारियों जैसे सिर दर्द, पीठदर्द, माइग्रेन, थकान व दर्द को न्योता देता है । अच्छी स्लीपिंग पोजीशन इंसान को स्मार्ट और सेहतमन्द बनाती है इसलिए अपने सोने के तरीके को बदलें और हमेशा स्वस्थ रहें। [*वर्षा ऋतु के समय बच्चों को गले और पेट में होने वाली समस्या से बचाने के लिए स्वादिष्ट औषधि* 1-सोंठ 1/2चम्मच 2-अजवाइन पाउडर 1/3 3-काला नमक 2 चुटकी 4- 20ग्राम गुड़ लगभग *ये एक बार की मात्रा है* इसे गुड़ में मिलाकर छोटी छोटी गोलियां बना लें* दिन में 2 अथवा 3 गोली चूसने के लिए दें* *गले मे दर्द के लिये आसान उपाय* गले के दर्द में 2चम्मच प्याज रस गर्मजल से कभी भी ले *शरीर या हाथ पैरों में सूनापन* जिन लोगो को ये परेशानी है वो लोग पीपल के पत्ते को पानी मे उबालकर उस पानी से कुछ दिन स्नान करे तो ये समस्या बिल्कुल ठिक हो जाएगी। वंदेमातरम।।। पवन गौड़।। [: *आँखों पर गुहेरी हो जाना* *जिस साइड की आंख पर हो उसके विपरीत वाले पैर के अँगूठे के नाखून पर आक का दूध लगाए।* वन्देमातरम। राजीव दीक्षित जी अमर रहे।।। [ *रक्त प्रदर के लिए घरेलू उपचार* लौकी/दुधीके बीजों को छीलकर उनका हलवा बनाकर सुबह ख़ाली पेट खाने से रक्त प्रदर दूर होता है। वंदेमातरम।।। : *🌹वात्त्, पित्त, कफ...??🌹* *अर्ध रोग हरि निद्रा,पूर्ण रोग हरि क्षुधा* अच्छी नींद आये तो, आधे रोग हर लिए जाते है।। *पित्त संबंधी रोग* रात्रि जागरण से पित्त की तकलीफ होती है। पित्त ज्यादा होने से रात्रि 12 बजे निन्द खुल जाती है।। 🌷 *उपाय* 🌷 🍁पित्त के रोगी को दूध पर रहना चाहिए।। 🍁सेव फल का सेवन करना चाहिए। 🍁त्रिफला सेवन करना चाहिए। *कफ संबंधी रोग* रोगी को प्रभात में खांसी उठती है और नींद टूट जाती है।| 🌷 *उपाय* 🌷 🍁कफ नाशक चीज़ों का सेवन करे जैसे चने,ममरे आदि।। 🍁बेसन से बनी चीजों का सेवन करने से लाभ होता है।। 🍁1 लीटर गुनगुने पानी में 10 ग्राम नामक डालकर खारा पानी पीये और फिर वमन (उल्टी) करने से कफ संबंधी दमा ,कफ आदि कीटाणु का नाश होता है।। *वायु सम्बंधी रोग* 🌒रोगी की नींद रात्रि 2 से 2:30 के समय खुल जाती हैं।। *उपाय* 🍁गोझरण के सेवन से 50 प्रकार के वायु सम्बंधी रोग नष्ट होते है।। 🍁गोझरण ३०मीली,१कटोरी पानी, इससे वायू एवं कफ संबधी रोग ठीक होते हैं| 🍁42 वर्ष की आयु के बाद त्रिफला या रसायन चूर्ण का नियमित रूप से सेवन करना चाहिये जिससे किडनी,लिवर,पेशाब सम्बन्धी तकलीफे न हो।। सिर पर और 👣 पर गाय के घी से रात्रि को मालिश करे।। *प्रगाढ़ नींद से आधे रोग नही होते है और उपवास से पूर्ण रोग खीच कर जठरा में स्वाहा हो जाते है*।। *उपवास में कमजोरी महसूस होने पर शहद के पानी,अंगूर के रस या अंगूर का सेवन करना चाहिए*।। *तुलसी के पत्ते रविवार को छोड़कर रोज सेवन करना चाहिये*।। *दोपहर के बाद फूल -पत्ते या तुलसी को तोड़ने से पाप लगता है ऐसा हमारे पुराणों में वर्णित है*।। 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ ************************* 🍃 *Arogya* 🍃 *सावन व भादों मास में खाने पीने का परहेज़* *-----------------------------------* 1. दूध ,दही लस्सी न लें । 2. हरे पत्ते वाली सब्ज़ी न खाएँ । 3. रसदार फल न लें । आम न खाएँ । 4. बैंगन ,लौकी न खाएँ । 5. गाजर मूली चुकंदर ककड़ी खीरा न खाएँ । 6. बाजार से फ़ास्ट फ़ूड न खाएँ। 7. मिठाईयां न खाएँ । 8. किसी प्रकार का माँस व मदिरा न लें । 9. तेज़ खट्टा न खाएँ । 10. ठंडी व बासी चीज़ न खाएँ । 11. आइसक्रीम एवं कोल्ड ड्रिंक का सेवन ना करेंl#आयुर्वेदा *फिर क्या खाएँ ।* -------------------- 1. पनीर , मटर की सब्ज़ी ,दालें सभी खा सकते हैं । 2. गाजर टमाटर का सूप , 3. अदरक,प्याज़ ,लस्सन, 4. सेब ,अनानास,बेल फल ,नारियल । 5. बेकरी व भुजिया products., 6. जलेबी , थोड़ा गर्म गुलाब जामुन व हलवाl 7. बेसन का ज़्यादा प्रयोग करें । 8. पानी उबाल कर , ताज़ा कर के पीएँ । 9. हल्दी वाला गर्म दूध ले सकते हैं । 10. देसी चाय ले सकते है । ब्राह्मी चाय या इम्यून चाय का सेवन इस मौसम में बहुत ही चमत्कारिक लाभ दिखाता हैl 11. विटामिन सी से युक्त आंवले से भरपूर रसायनप्राश का सेवन भी ऐसे मौसम में बहुत लाभ देता है *ध्यान रखें* इन दो महीनों व वर्षा ऋतु में ज्ठराग्नि ( पाचन शक्ति ) कमज़ोर व मंद होती है । इसलिए वात पित् व कफ रोग बड़ जाता है ।इस ऋतु में वर्षा के कारण जलवायु में कई प्रकार के विषाक्त कीटाणुओं का सब्ज़ियों व फलों पर व ठंडे पेय पदार्थों पर हमला हो जाता है जो कि मनुष्य ,पशु ,जानवरों ,पंछियों व पानी में रहने वाले जीवों को भी नुक्सान करता है इसलिए पानी भी उबाल कर पीएँ । तलाब व खड़े पानी व नदी दरिया के पानी में न नहाएँ ।अगर नहाना पड़ जाए तो बाद में नीम् युक्त साबुन से नहाएँ नहीं तो पित रोग का ख़तरा है । *जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌷 *कहानी* *सभी बहनों को समर्पित* क्या बहन बेटियाँ मायके सिर्फ लेने के लिए आती हैं खिडकी के पास खड़ी सिमरन सोचती हैं राखी आने वाली है पर इस बार न तो माँ ने फोन करके भैया के आने की बात कही और न ही मुझे आने को बोला ऐसा कैसे हो सकता है।हे भगवान बस ठीक हो सबकुछ।अपनी सास से बोली माँजी मुझे बहुत डर लग रहा है।पता नहीं क्या हो गया।मुझे कैसे भूल गए इस बार।आगे से सास बोली कोई बात नही बेटा तुम एक बार खुद जाकर देख आओ।सास की आज्ञा मिलनेभर की देर थी सिमरन अपने पति साथ मायके आती हैं परंतु इस बार घर के अंदर कदम रखते ही उसे सबकुछ बदला सा महसूस होता है।पहले जहाँ उसे देखते ही माँ-पिताजी के चेहरे खुशी से खिल उठते थे इसबार उनपर परेशानी की झलक साफ दिखाई दे रही थी, आगे भाभी उसे देखते ही दौडी चली आती और प्यार से गले लगा लेती थी पर इसबार दूर से ही एक हल्की सी मुस्कान दे डाली।भैया भी ज्यादा खुश नही थे।सिमरन ने जैसे-तैसे एक रात बिताई परन्तु अगले दिन जैसे ही उसके पति उसे मायके छोड़ वापिस गये तो उसने अपनी माँ से बात की तो उन्होंने बताया इसबार कोरोना के चलते भैया का काम बिल्कुल बंद हो गया।ऊपर से और भी बहुत कुछ।बस इसी वजह से तेरे भैया को तेरे घर भी न भेज सकी।सिमरन बोली कोई बात नहीं माँ ये मुश्किल दिन भी जल्दी निकल जाएँगे आप चिंता न करो।शाम को भैया भाभी आपस में बात कर रहे थे जो सिमरन ने सुन ली।भैया बोले पहले ही घर चलाना इतना मुश्किल हो रहा था ऊपर से बेटे की कॉलेज की फीस,परसो राखी है सिमरन को भी कुछ देना पड़ेगा।आगे से भाभी बोली कोई बात नहीं आप चिंता न करो।ये मेरी चूड़ियां बहुत पुरानी हो गई हैं।इन्हें बेचकर जो पैसे आएंगे उससे सिमरन दीदी को त्योहार भी दे देंगे और कॉलेज की फीस भी भर देंगे।सिमरन को यह सब सुनकर बहुत बुरा लगा।वह बोली भैया-भाभी ये आप दोनों क्या कह रहे हो।क्या मैं आपको यहां तंग करके कुछ लेने के लिए ही आती हुँ।वह अपने कमरे में आ जाती हैं।तभी उसे याद आता है अपनी शादी से कुछ समय पहले जब वह नौकरी करती थी तो बड़े शौक से अपनी पहली तनख्वाह लाकर पापा को दी तो पापा ने कहा अपने पास ही रख ले बेटा मुश्किल वक़्त में ये पैसे काम आएंगे।इसके बाद वह हर महीने अपनी सारी तनख्वाह बैंक में जमा करवा देती।शादी के बाद जब भी मायके आती तो माँ उसे पैसे निकलवाने को कहती पर सिमरन हर बार कहती अभी मुझे जरूरत नही,पर आज उन पैसों की उसके परिवार को जरुरत है।वह अगले दिन ही सुबह भतीजे को साथ लेकर बैंक जाती है और सारे पैसे निकलवा पहले भतीजे की कॉलेज की फीस जमा करवाती है और फिर घर का जरूरी सामान खरीद घर वापस आती है।अगले दिन जब भैया के राखी बांधती है तो भैया भरी आँखी से उसके हाथ सौ का नोट रखते है।सिमरन मना करने लगती है तो भैया बोले ये तो शगुन है पगली मना मत करना।सिमरन बोली भैया बेटियां मायके शगुन के नाम पर कुछ लेने नही बल्कि अपने माँबाप कीअच्छी सेहत की कामना करने,भैया भाभी को माँबाप की सेवा करते देख ढेरों दुआएं देने, बडे होते भतीजे भतीजियो की नजर उतारने आती हैं।जितनी बार मायके की दहलीज पार करती हैं ईश्वर से उस दहलीज की सलामती की दुआएं माँगती हैं।जब मुझे देख माँ-पापा के चेहरे पर रौनक आ जाती हैं, भाभी दौड़ कर गले लगाती है, आप लाड़ लड़ाते हो,मुझे मेरा शगुन मिल जाता हैं।अगले दिन सिमरन मायके से विदा लेकर ससुराल जाने के लिए जैसे ही दहलीज पार करती हैं तो भैया का फोन बजता है।उन्हें अपने व्यापार के लिए बहुत बड़ा आर्डर मिलता है और वे सोचते है सचमुच बहनें कुछ लेने नही बल्कि बहुत कुछ देने आती हैं मायके और उनकी आंखों से खुशी के आंसू बहने लगते है। सचमुच बहन बेटियाँ मायके कुछ लेने नही बल्कि अपनी बेशकीमती दुआएं देने आती हैं।जब वे घर की दहलीज पार कर अंदर आती हैं तो बरक़त भी अपनेआप चली आती हैं।हर बहन बेटी के दिल की तमन्ना होती हैं कि उनका मायका हमेशा खुशहाल रहे और तरक्की करे।मायके की खुशहाली देख उनके अंदर एक अलग ही ताकत भर जाती हैं जिससे ससुराल में आने वाली मुश्किलो का डटकर सामना कर पाती है।मेरा यह लेख सभी बहन बेटियों को समर्पित है और साथ ही एक अहसास दिलाने की कोशिश है कि वे मायके का एक अटूट हिस्सा है।जब मन करे आ सकती हैं।उनके लिए घर और दिल के दरवाजे़ हमेशा खुले रहेंगें। ************************************************ 🍁*आज का सुविचार*🍁 🏯🌺✨👏🕉️👏✨🌺🏯 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, जो देश की एकता एवं अखंडता के लिए बहुत जरूरी है। प्राणी मात्र की सेवा करना ही विराट ब्रह्म की आराधना है। प्राणी मात्र की सेवा करना मनुष्य का परम कर्त्तव्य है। इसे ही विराट ब्रह्म की आराधना कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है - "ते प्राप्नुवन्ति मामेव सर्व भूत हिते रता: ..."। अर्थात्, जो सब जीवों का हित-चिंतन करते हैं, वे मुझे प्राप्त होते हैं। अत: साधक के लिए तो यह और भी आवश्यक हो जाता है कि वह लोक-आराधक बनें, सेवाभावी बनें। विभिन्न दुर्गुणों का त्याग करने पर ही सेवाव्रत का पालन किया जा सकता है। स्वार्थ को छोड़े बिना सेवा का कार्य नहीं हो सकता। जिन्हें अपने इन्द्रिय सुखों की चिंता रहती है, वे व्यक्ति सेवा-कार्य में कभी भी सफल नहीं हो सकते। सेवाव्रती का हृदय करुणा और दया से ओत-प्रोत होता है। वह विषयों के प्रति आसक्त नहीं रहता। वह सब भोगों से निवृत्त रहता है। त्याग के कारण उसमें गुण-ग्राहयता बढ़ती जाती है। दीन-दु:खियों की सेवा, निर्बलों की रक्षा और रोगियों की सहायता ही सेवा का मुख्य लक्ष्य है। सेवाव्रती साधक किसी की हानि नहीं करता, किसी का निरादर नहीं करता। वह निरभिमानी, विनयी और त्यागी होता है। उसका अंत:करण पवित्र होने से मन की चंचलता भी नष्ट हो जाती है। मन शुद्ध हो तो अपने-पराये में भेद नहीं रहता। जब वस्तुओं का लोभ नष्ट हो जाता है, तब 'सत्' को अपनाना और 'शुद्ध संकल्पों' में लीन रहना साधक के अभ्यास में आ जाता है। उसमें कर्त्तव्य परायणता का उदय होता है और विषमता मिट जाती है। भेदभाव दूर होकर परम तत्व के अस्तित्व का बोध होता है। अहम् का शोधन होने पर मान-अपमान की चिंता नहीं रहती, असत्य से मोह मिट जाता है। अनित्य वस्तुओं के प्रति विरक्ति उत्पन्न हो जाती है और राग-द्वेष, तेरा-मेरा का झंझट समाप्त हो जाता है। जीवन में निर्विकल्पता का आविर्भाव हो जाता है। सेवा द्वारा सुखों के उपभोग की आसक्ति समाप्त हो जाती है। अत: सब प्राणियों में परमात्मा को स्थित मानते हुए निष्काम सेवा करना ही परमात्मा की सच्ची उपासना है। सच्ची सेवा वह है जो संसार के आसक्ति पूर्ण संबंधों को समाप्त कर देती है। इसलिए केवल किसी को अपना मानकर सेवा न करें, बल्कि सेवा को कर्त्तव्य मानकर सभी की सेवा करें; क्योंकि परमात्मा के अंशभूत होने के कारण सभी प्राणियों को अपना समझना ही सद्बुद्धि है ...। 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀ 🍃🎋🍃🎋🕉️🎋🍃🎋🍃 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 🕉👣🕉👣🕉👣🕉👣🕉👣 *👣🙏🏻🌼*जय राधे कृष्णा*🌼🙏🏻🕉* 🕉👣🕉👣🕉👣🕉👣🕉👣

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Vrinda S. Aug 11, 2020

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. ""आध्यात्म एवं ज्योतिष में अष्टमी तिथि का महत्त्व"" 🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸 हिंदू पंचाग की आठवी तिथि अष्टमी कहलाती है। इस तिथि का विशेष नाम कलावती है क्योंकि इस तिथि में कई तरह की कलाएं और विधाएं सीखना लाभकारी होता है। इसे हिंदी में अष्टमी, अठमी और आठें भी कहते हैं। यह तिथि चंद्रमा की आठवी कला है, इस कला में अमृत का पान अजेकपात नाम के देवता करते हैं। अष्टमी तिथि का निर्माण शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 85 डिग्री से 96 डिग्री अंश तक होता है। वहीं कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि का निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 265 से 276 डिग्री अंश तक होता है। अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव माने गए हैं लेकिन अष्टमी तिथि देवी दुर्गा की शक्ति के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। जीवन जीने की शक्ति और परेशानियों से लड़ने के लिए इस तिथि में जन्मे जातकों को भगवान शिव और मां दुर्गा की पूजा अवश्य करनी चाहिए। अष्टमी तिथि का ज्योतिष में महत्त्व 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ यदि अष्टमी तिथि बुधवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा अष्टमी तिथि मंगलवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय कार्य सिद्धि की प्राप्ति होती है। बता दें कि अष्टमी तिथि जया तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं शुक्ल पक्ष की अष्टमी में भगवान शिव का पूजन करना वर्जित है लेकिन कृष्ण पक्ष की अष्टमी में शिव का पूजन करना उत्तम माना गया है। चैत्र महीने के दोनों पक्षों में पड़ने वाली अष्टमी तिथि शून्य कही गई है। अष्टमी तिथि में जन्मे जातक धार्मिक कार्यों में निपुण और दयावान भी होते हैं। इन्हें सदैव सत्य बोलना पसंद होता है। ये भौतिक सुख-सुविधाओं में विशेष रुचि लेते हैं। इस तिथि में जन्म लेने वाले लोग कई चीजों में विद्वान होते हैं। इनके मन में हमेशा समाज के कल्याण की इच्छा जागती रहती है। ये लोग किसी भी कार्य को करने के लिए मेहनत मे कमी नहीं छोड़ते हैं। इनको घूमना बहुत पसंद होता है। ये लोग उन कार्यों में भाग लेना ज्यादा पसंद करते हैं जिनमें बल का इस्तेमाल करना पड़ता हो। ये लोग मनमौजी स्वभाव के होते हैं अपनी मर्जी से नियम बनाते हैं और खुद ही पालन भी करते हैं। अष्टमी तिथि के शुभ कार्य 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ अष्टमी तिथि में युद्ध, राजप्रमोद, लेखन, स्त्रियों को आभूषण, नये वस्त्र खरीदने जैसे कार्य करने चाहिए। मान्यता है कि इस तिथि में अभिनय, नृत्य, गायन कला सीखने के लिए प्रवेश लेना भी शुभ है। इस तिथि में आप वास्तुकर्म, घर बनवाना, शस्त्र बनवाने जैसे कार्य प्रारंभ कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी पक्ष की अष्टमी तिथि में नारियल नहीं खाना चाहिए। अष्टमी तिथि के प्रमुख हिन्दू त्यौहार एवं व्रत व उपवास 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी👉 जन्माष्टमी का त्यौहार श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मथुरा नगरी में असुरराज कंस के कारागृह में देवकी की आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी को पैदा हुए। उनके जन्म के समय अर्धरात्रि (आधी रात) थी, चन्द्रमा उदय हो रहा था और उस समय रोहिणी नक्षत्र भी था। इसलिए इस दिन को प्रतिवर्ष कृष्ण जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। अहोई अष्टमी 👉 अहोई अष्टमी व्रत कार्तिक मास की कृष्णपक्ष की अष्टमी को आता है| इस दिन अहोई माता के पूजन का विधान है। इस तिथि पर महिलाएं पुत्र प्राप्ति और संतान सुख के लिए व्रत रखती हैं और शाम के वक्त तारे देखकर उपवास तोड़ा जाता है। शीतला अष्टमी 👉 चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी मनाई जाती है। इस तिथि पर शीतला माता की पूजा की जाती है, जिससे चिकन पॉक्स या चेचक जैसे रोग दूर रहें। इस दिन बासी भोजन खाया जाता है। दुर्गाष्टमी 👉 नवरात्र में अष्टमी के दिन देवी दुर्गा की आठवी शक्ति माता महागौरी का पूजन किया जाता है। इस दिन घरों में कन्याभोज भी कराया जाता है। सीता अष्टमी 👉 फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को सीता अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन धरती पर माता सीता का जन्म हुआ था। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए और अविवाहित कन्याओं मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। राधा अष्टमी 👉 भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन राधा जी का जन्म हुआ था। इस तिथि पर राधारानी की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत करने से आपको राधारानी के साथ भगवान कृष्ण की कृपा भी मिल जाती है। 🔥""""गजेन्द्र प्रताप राजभर"""" 🔥 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️

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