Jayshree Shah
Jayshree Shah Nov 4, 2017

Nmo Jinanm Parshvanath bhagvan Aangi Darshan

Nmo Jinanm Parshvanath bhagvan Aangi Darshan

पुण्य के उदयकाल मे दुनिया की कोई
शक्ति हमारा बाल बाँका नही कर सकती.

वहीं पाप के उदयकाल मे दुनिया का कोई
चमत्कार/तंत्र/मंत्र/शक्ति/विद्या आदि हमें
बचा नहीं सकती।

*यह जिनवाणी का शाश्वत सत्य है*

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~~🏵️~~ मर्यादाओं के बंधन में जो सुरक्षा समाई है उसे हम रक्षाबंधन कहते हैं जब परमात्मा इस सृष्टि पर अवतरित होते हैं तो वो हमें ज्ञान, प्यार और शक्ति देते हैं। परमात्मा से ज्ञान लेकर आत्मा को प्रतिज्ञा करनी होती है कि उस ज्ञान का जीवन में इस्तेमाल करना है। उस प्रतिज्ञा से हम बंधे हुए हैं। इस प्रतिज्ञा को जो आत्मा पूरा करेगी वह स्वयं की रक्षा होते हुए देख सकती है। जीवन की इस यात्रा पर इतने सारे लोग मिलते हैं जो कहते हैं कि वो डिप्रेशन से बाहर आ गए, कोई कहता है हम डिवोर्स के लिए सोच रहे थे लेकिन आज हम दोनों साथ-साथ रह रहे हैं। आज हमारा रिश्ता पहले से अच्छा हो गया। कुछ तो ऐसे भी भाई-बहन मिलते हैं जो कहते हैं कि हम सुसाइड तक पहुंच गए थे, लेकिन हम बच गए। किससे बच गए, हम अपनी ही सोच से बच गए ना। अधिकांश लोग यह कहते हैं कि हमारा सोचने का तरीका बदल गया। इसका मतलब है कि वे पहले से कहीं ज्यादा पावरफुल हो गए। यह एम्पावरमेंट कैसे हुआ? परमात्मा से हमने जो ज्ञान लिया था उसको इस्तेमाल करने की प्रतिज्ञा की। इतनी सारी हमारी आदतें हैं जिनको हम छोड़ नहीं पा रहे हैं, जैसे-खाने की, पीने की, टीवी देखने की, कम्प्यूटर पर कितनी देर बैठना है, ये आदतें हम छोड़ नहीं पाते क्योंकि हम अपने आपको बंधन में नहीं बांधते हैं। बंधन यानी अनुशासन। मर्यादाओं का भी बंधन होता है, जो बड़ा महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सिर्फ सुरक्षा समाई हुई है। यह एक ऐसा बंधन है जो बड़ा प्यारा लगता है, जिसे रक्षाबंधन कहते हैं। अब आज के वक्त में त्यौहार की संभावनाएं बदल गई हैं। इनके पहलुओं में बहुत अंतर आ गया है। आज अपने आपको इतना शक्तिशाली बनाना है कि वो आत्मा अपनी रक्षा खुद कर सके। यह रक्षा हमारी अपने आपसे है। जैसे कहते हैं न मन ही हमारा मित्र है तो मन ही हमारा शत्रु भी है। नकारात्मक विचार हमारे दुश्मन हैं, जैसे दुखी होने का संस्कार भी हमारा कितना बड़ा दुश्मन है। परमात्मा आकर हमें ये जो धागा बांधते हैं वो है ज्ञान का धागा। जो आत्मा, परमात्मा के ज्ञान और प्यार के धागे में बंध जाती है उस आत्मा की रक्षा हो जाती है। अब हम सोचते हैं कि परमात्मा कैसे हमारी रक्षा करेगा? परमात्मा ने जो ज्ञान दिया उससे हमारी रक्षा हुई तो हम यही कहते हैं कि परमात्मा ने हमारी रक्षा की। जितना हम मर्यादा में चलेंगे, सत्य ज्ञान का चिंतन करेंगे, मेडिटेशन करेंगे उससे आत्मा की शक्ति बढ़ेगी। फिर हर परिस्थिति को सहजता से पार कर लेंगे। जब हम पूजा करने बैठते हैं तो हम देवी-देवताओं का आह्वान करते हैं। मतलब आत्मा के अंदर जो दिव्यता है उसका आह्वान करते हैं। ग्रह, नक्षत्र भी हमारे संस्कारों को दर्शाते हैं। पंडित जी कहते हैं कि नक्षत्र और देवी-देवता हमारी रक्षा करेंगे मतलब हमारी दिव्यता ही रक्षाकवच है। अगर हमने परमात्मा को, देवी-देवताओं को, नक्षत्रों को बांध लिया अपनी रक्षा के लिए बांध लिया तो हमें अगले दिन न तो गुस्सा करना है न ही टेंशन बढ़ानी है। हमारी रक्षा तभी होगी जब अंदर से आह्वान करेंगे। अगर हमने अपनी दिव्यता का आह्वान किया है तब ही हमारा दिन अच्छा बीतेगा। .... ✍️BY - बी के शिवानी दीदी जी ।💦💦💦💦💦💦💦✍️✍️

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🗿मूड ऑफ होने का कारण क्या है❓ और 🎭 इसे ठीक कैसे किया जाए❓ 👉 मूड ऑफ होने का वास्तव में एक ही मुख्य कारण है। वो है - मरी अपेक्षा के अनुसार काम नहीं हुआ। मैं जो चाहता या चाहती हूँ। जैसा चाहता हूँ और जब चाहता हूँ। वैसा नहीं हुआ। इस सृष्टि पर हम मनुष्यों का सम्बन्ध 3 बातों से ही होता है। व्यक्ति, वस्तु और वैभव। वैभव में हमारी स्थूल एवं सूक्ष्म उपलब्धियाँ, नाम-मान-शान आदि सब आ जाता है। कभी किसी व्यक्ति से अपेक्षा। कभी किसी वस्तु के प्रति आसक्ति। तो कभी अपने स्वाभिमान पर आघात। इसमें कुछ भी उपर-नीचे हो गया तो मूड ऑफ। तो इन सभी बातों का मेरी इच्छा अनुसार ही हो, ऐसी इच्छा रखने वालों का मूड हमेशा ऑफ ही रहेगा। वह हमेशा उदास ही रहेगा। वह कभी भी खुश नहीं रह सकता। यह निश्चित है। इसलिए बाबा हमेशा कहते हैं कि - 'इच्छा कभी अच्छा बनने नहीं देता है।' तो इच्छा मात्रम् अविद्या - ऐसी धारणा वाले ही सदा खुश रह सकते हैं। मूड ऑफ माना उदास। खुशी गायब। मूड ऑफ माना अपनी खुशी की चाबी दूसरे के हाथ में दे देना। बाबा हमेशा कहते हैं कि - भले शरीर भी छूट जाए, परन्तु खुशी कभी नहीं जाए। खुशी जैसी खुराक नहीं। खुशी जैसी दवाई नहीं। खुशी जैसा खजाना नहीं। किसी भी कीमत पर खुशी नहीं गँवाना नहीं चाहिए। और यह तभी सम्भव होगा जब हम ड्रामा के गहरे राज को समझेंगे। ड्रामा के राज को समझने वाला कभी नाराज नहीं होगा। उसका मूड कभी ऑफ नहीं होगा। अगर कभी ऐसा हो भी जाए तो बाबा एक बहुत अच्छी युक्ति बताया करते हैं कि - उस समय बाबा के बनाये हुए अच्छे-अच्छे गीत सुनों। जिससे हमें अपने स्वमान की स्मृति आ जाए। अपने भाग्य की स्मृति आ जाए। तो फिर से खुशी से सराबोर हो जायेंगे और मूड फिर से ऑन हो जाएगा। ओम् शान्ति।💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦💦✍️✍️✍️🌹🌹🌹🌹🍧

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*💐सकारात्मक सोच &सकारात्मक परिणाम*💐 पुराने समय की बात है, एक गाँव में दो किसान रहते थे। दोनों ही बहुत गरीब थे, दोनों के पास थोड़ी थोड़ी ज़मीन थी, दोनों उसमें ही मेहनत करके अपना और अपने परिवार का गुजारा चलाते थे। अकस्मात कुछ समय पश्चात दोनों की एक ही दिन एक ही समय पर मृत्यु हो गयी। यमराज दोनों को एक साथ भगवान के पास ले गए। उन दोनों को भगवान के पास लाया गया। भगवान ने उन्हें देख के उनसे पूछा, *"अब तुम्हें क्या चाहिये, तुम्हारे इस जीवन में क्या कमी थी, अब तुम्हें क्या बना कर मैं पुनः संसार में भेजूं।”* भगवान की बात सुनकर उनमें से एक किसान बड़े गुस्से से बोला, *” हे भगवान! आपने इस जन्म में मुझे बहुत घटिया ज़िन्दगी दी थी। आपने कुछ भी नहीं दिया था मुझे। पूरी ज़िन्दगी मैंने बैल की तरह खेतो में काम किया है, जो कुछ भी कमाया वह बस पेट भरने में लगा दिया, ना ही मैं कभी अच्छे कपड़े पहन पाया और ना ही कभी अपने परिवार को अच्छा खाना खिला पाया। जो भी पैसे कमाता था, कोई आकर के मुझसे लेकर चला जाता था और मेरे हाथ में कुछ भी नहीं आया। देखो कैसी जानवरों जैसी ज़िन्दगी जी है मैंने।”* उसकी बात सुनकर भगवान कुछ समय मौन रहे और पुनः उस किसान से पूछा, *"तो अब क्या चाहते हो तुम, इस जन्म में मैं तुम्हें क्या बनाऊँ।”* भगवान का प्रश्न सुनकर वह किसान पुनः बोला, *"भगवन आप कुछ ऐसा कर दीजिये, कि मुझे कभी किसी को कुछ भी देना ना पड़े। मुझे तो केवल चारों तरफ से पैसा ही पैसा मिले।”* अपनी बात कहकर वह किसान चुप हो गया। भगवान ने उसकी बात सुनी और कहा, *"तथास्तु, तुम अब जा सकते हो मैं तुम्हे ऐसा ही जीवन दूँगा जैसा तुमने मुझसे माँगा है।”* उसके जाने पर भगवान ने पुनः दूसरे किसान से पूछा, *"तुम बताओ तुम्हें क्या बनना है, तुम्हारे जीवन में क्या कमी थी, तुम क्या चाहते हो?”* उस किसान ने भगवान के सामने हाथ जोड़ते हुए कहा, *"हे भगवन। आपने मुझे सबकुछ दिया, मैं आपसे क्या मांगू। आपने मुझे एक अच्छा परिवार दिया, मुझे कुछ जमीन दी जिसपर मेहनत से काम करके मैंने अपने परिवार को एक अच्छा जीवन दिया। खाने के लिए आपने मुझे और मेरे परिवार को भरपेट खाना दिया। मैं और मेरा परिवार कभी भूखे पेट नहीं सोया। बस एक ही कमी थी मेरे जीवन में, जिसका मुझे अपनी पूरी ज़िन्दगी अफ़सोस रहा और आज भी हैं। मेरे दरवाजे पर कभी कुछ भूखे और प्यासे लोग आते थे, भोजन माँगने के लिए, परन्तु कभी-कभी मैं भोजन न होने के कारण उन्हें खाना नहीं दे पाता था, और वो मेरे द्वार से भूखे ही लौट जाते थे। ऐसा कहकर वह चुप हो गया।”* भगवान ने उसकी बात सुनकर उससे पूछा, *”तो अब क्या चाहते हो तुम, इस जन्म में मैं तुम्हें क्या बनाऊँ।* किसान भगवान से हाथ जोड़ते हुए विनती की, *"हे प्रभु! आप कुछ ऐसा कर दो कि मेरे द्वार से कभी कोई भूखा प्यासा ना जाये।”* भगवान ने कहा, *“तथास्तु, तुम जाओ तुम्हारे द्वार से कभी कोई भूखा प्यासा नहीं जायेगा।”* अब दोनों का पुनः उसी गाँव में एक साथ जन्म हुआ। दोनों बड़े हुए। पहला व्यक्ति जिसने भगवान से कहा था, कि उसे चारों तरफ से केवल धन मिले और मुझे कभी किसी को कुछ देना ना पड़े, वह व्यक्ति उस गाँव का सबसे बड़ा भिखारी बना। अब उसे किसी को कुछ देना नहीं पड़ता था, और जो कोई भी आता उसकी झोली में पैसे डालके ही जाता था। और दूसरा व्यक्ति जिसने भगवान से कहा था कि उसे कुछ नहीं चाहिए, केवल इतना हो जाये की उसके द्वार से कभी कोई भूखा प्यासा ना जाये, वह उस गाँव का सबसे अमीर आदमी बना। *_हर बात के दो पहलू होते हैं_* *सकारात्मक और* *नकारात्मक,* *अब ये आपकी सोच पर निर्भर करता है कि आप चीज़ों को नकारत्मक रूप से देखते हैं या सकारात्मक रूप से। अच्छा जीवन जीना है तो अपनी सोच को अच्छा बनाइये, चीज़ों में कमियाँ मत निकालिये बल्कि जो भगवान ने दिया है उसका आनंद लीजिये और हमेशा दूसरों के प्रति सेवा का भाव रखिये !!!* Om namah shivay💦💦💦💦💦💦💦💦💕💕💕💕✍️✍️✍️

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