G R S
G R S Jan 11, 2018

अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिये ।।स्वामी विवेकानंद जी।।

अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिये                               

।।स्वामी विवेकानंद  जी।।

एक बार स्वामी विवेकानंद विदेश गए जहाँ उनके स्वागत के लिए कई लोग आये हुए थे उन लोगों ने स्वामी विवेकानंद की तरफ हाथ मिलाने के लिए हाथ बढाया और इंग्लिश में HELLO कहा जिसके जवाब में स्वामी जी ने दोनों हाथजोड़कर नमस्ते कहा... उन लोगो को लगा की शायद स्वामी जी को अंग्रेजी नहीं आती है तो उन लोगोमें से एक ने हिंदी में पूछा "आप कैसे हैं"?? तब स्वामी जी ने कहा"आई एम् फ़ाईन थैंक यू"उन लोगो को बड़ा ही आश्चर्य हुआ उन्होंने स्वामी जी से पूछा की जब हमने आपसे इंग्लिश में बात कीतो आपने हिंदी में उत्तर दिया औरजब हमने हिंदी में पूछा तो आपने इंग्लिश में कहा इसका क्या कारण है ??तब स्वामी जी ने कहा........जब आप अपनी माँ का सम्मान कर रहे थे तब मैं अपनी माँ का सम्मान कर रहा था और जब आपने मेरी माँ का सम्मान किया तब मैंने आपकी माँ का सम्मान किया.यदि किसी भी भाई बहन को इंग्लिश बोलना या लिखना नहीं आता है तो उन्हें किसी के भी सामने शर्मिंदा होने की जरुरत नहीं है बल्कि शर्मिंदा तो उन्हें होना चाहिए जिन्हें हिंदी नहीं आती है क्योंकि हिंदी ही हमारी राष्ट्र भाषा है हमें तो इस बात पर गर्व होना चाहिए की हमें हिंदी आती है.....क्या आपने किसी देश को देखा है जहाँ सरकारी काम उनकी राष्ट्र भाषा को छोड़ कर किसी अन्य भाषा या इंग्लिश में होता हो........यहाँ तक की जो भी विदेशी मंत्री या व्यापारी हमारे देश में आते हैं वो अपनी ही भाषा में काम करते हैं या भाषण देते हैं फिर उनके अनुवादक हमें हमारी भाषा या इंग्लिश में अनुवाद करके समझाते हैं......जब वो अपनी भाषा नहीं छोड़ते तो हमें हमारी राष्ट्र भाषा को छोड़कर इंग्लिश में काम करने की क्या जरुरत है......

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कामेंट्स

Pradeep Dwivedi Jan 11, 2018
१००% सच भारत माता की जय जय श्रीकृष्ण

Arvind Kumar Jan 12, 2018
अपनी भाषा का हमेशा मान रखो।जय भारत ।

Sheelu shrotriya Jan 12, 2018
सभी अपनी अपनी भाषा की परयोग करते है तो हमे भी तो अपनी रा्षटृीय भाषा ही काम मे लेनी चाहिए मातृ भाषा बोलने पर गऱव होना चाहिए जय श्रीकृष्ण राधे राधे जी

Neeru Miglani Apr 19, 2019

*ना जाने क्यों यदा-कदा खयाल आता है...?* ● घर में सबसे पहले गाय की, कूकर की, पक्षियों की, खूब सारे मेहमानों की रोटी रोज़ बनती थी। फिर भी घर का बज़ट संतुलित रहता था। आज सिर्फ अपने परिवार की रोटी महंगी हो गई...जाने क्यों...? ● परिवार बहुत बड़ा होता था, उसमें खेलते बहुत सारे परिवार और पड़ोसियों के भी बच्चे। फिर भी घर में शांति होती थी...जाने क्यों...? ● महिलाओं के लिए कोई जिम या कसरत के विशेष साधन नही थे, लेकिन फिर भी महिलाएं पूर्णतः स्वस्थ रहती थी...जाने क्यों...? ● खाने को सादा दाल रोटी होती थी। लेकिन फिर भी किसी को खून की कमी नही होती थी...जाने क्यों...? ● भाई बहनों में खूब मार पिटाई होती थी, लेकिन मनमुटाव नही होते थे...जाने क्यों ? ● स्कूल में अध्यापक खूब कान खींचते थे। डंडों से पिटाई होती थी। लेकिन कोई बच्चा स्कूल में डिप्रेशन के कारण आत्महत्या नही करता था...जाने क्यों...? ● महंगे खिलौने नही मिलते थे, लेकिन हर खेल बहुत आनंदित करता था...जाने क्यों...? ● माता पिता ज़रा सी बात पे थप्पड़ जड़ दिया करते थे, फिर भी उनका सम्मान कम नही होता था...जाने क्यों...? ● घर कच्चे होते थे, कमरे कम होते थे, लेकिन माँ-बाप कभी वृद्धाश्रम नही जाते थे...जाने क्यों...? *अगर आप इस क्यों के जवाब ढूँढ़ पाएं, तो कृपया अपने मित्रों और संबंधियों से साझा ज़रूर करें। यूँ ही एक से दो मिलने से कड़ी बनेगी, जो पहले जैसा सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने में अमुल्य योगदान देगी...!*🆎💐🙏💐

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Vijay Yadav Apr 19, 2019

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Naval Sharma Apr 19, 2019

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Purvin kumar Apr 19, 2019

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