saroj singh Baghel
saroj singh Baghel Nov 21, 2020

🌞ओम सूर्याय नमः सुबह 🙏 सुबह की राम राम जी🌞 💅🔺 गुड मॉर्निंग सुप्रभात 🔺💅 🔺💅 शुभ रविवार शुभ दिन 💅🔺 🔺💅 मंगलमय हो 💅🔺 🚩🌞 जय सूर्य देव नमो नमः उगते हुए सूर्य के साथ 🌞 🌞🚩नमस्कार प्रणाम जी आपका दिन आनंदमय हो 🚩 🌞🚩🌞 ओम सूर्य देवाय नमः शुभ प्रभात शुभ रविवार शुभ दिन आज का दिन मंगलमय हो💅⚖️💅⚖️💅⚖️ 🌞🌼भगवान सूर्य देव आप तथा आपके परिवार पर सदा कृपा बनाए रखें *आपका हर पल सुख मेंहो🌿⚖️🌿⚖️🙏 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 ☑️ 🌞🌞🌞🌞🌞 🙏 💅⚖️ 22 नवंबर 2020 महीने के चौथे रविवार की बहुत ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं आप सभी को हमारी तरफ से सबसे पहले राधे राधे जी🚩🌞🚩जयश्री कृष्णा जी सूर्य भगवान जी की कृपा सदा ही आप 🌿💲🌿💲💲🌿💲🌿💲🌿💲🌿और आपके फैमिली परिवार पर बनी रहे जी🔺❗🌞 शुभ रविवार जय सूर्य देव ⚖️ 🌞❗सात घोड़ों पर होके सवार भगवान सूर्य आए आपके#) द्वार_& किरणों से भरे आपका घर संसार 🌿 💲 🌿 💲🌿💲🌿💲🌿💲 सदा सुखी रहे आपका घर परिवार) सुबह सुबह का नमस्कार जी शुभ 🌿💲 🌿 💲 🌿💲🌿💲🌿💲🌿💲🌿रविवार शुभ दिन शुभ हो!!शुभ रविवार प्रकाश के देवता सूर्य नारायण🌿💲🌿💲 🌿!💲🌿💲🌿💲 की कृपा से आप और आपका परिवार! सदा सुखी रहे❗ इसी मनोकामना के साथ सुबह सुबह⚖️ की नमस्कार जी राधे राधे जी जय श्री कृष्णाजी☑️🌿☑️🙋‍♀️✍️👬💏👬 दोस्ती यारी⚖️सदा बनी रहे जी ✍️🙋‍♀️📀⚖️ 📀⚖️📀⚖️📀 ⚖️📀⚖️📀 ⚖️📀 ⚖️📀

🌞ओम सूर्याय नमः सुबह 🙏  सुबह की राम राम जी🌞
              💅🔺 गुड मॉर्निंग सुप्रभात 🔺💅
            🔺💅 शुभ रविवार शुभ दिन 💅🔺
                 🔺💅  मंगलमय हो  💅🔺
🚩🌞 जय सूर्य देव नमो नमः उगते हुए सूर्य के साथ 🌞 🌞🚩नमस्कार प्रणाम जी आपका दिन आनंदमय हो 🚩
🌞🚩🌞 ओम सूर्य देवाय नमः शुभ प्रभात शुभ रविवार शुभ दिन आज का दिन मंगलमय हो💅⚖️💅⚖️💅⚖️
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💅⚖️ 22 नवंबर 2020 महीने के चौथे रविवार की बहुत ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं आप सभी को हमारी तरफ से सबसे पहले राधे राधे जी🚩🌞🚩जयश्री कृष्णा जी सूर्य भगवान जी की कृपा सदा ही आप 🌿💲🌿💲💲🌿💲🌿💲🌿💲🌿और आपके फैमिली परिवार पर बनी रहे जी🔺❗🌞 शुभ  रविवार जय सूर्य देव ⚖️ 🌞❗सात घोड़ों पर होके सवार भगवान सूर्य आए आपके#) द्वार_& किरणों से भरे आपका घर संसार 🌿 💲 🌿 💲🌿💲🌿💲🌿💲 सदा सुखी रहे आपका घर परिवार) सुबह सुबह का नमस्कार जी शुभ 🌿💲 🌿 💲 🌿💲🌿💲🌿💲🌿💲🌿रविवार शुभ दिन शुभ हो!!शुभ रविवार प्रकाश के देवता सूर्य नारायण🌿💲🌿💲 🌿!💲🌿💲🌿💲 की कृपा से आप और आपका परिवार! सदा सुखी रहे❗ इसी मनोकामना के साथ सुबह सुबह⚖️ की नमस्कार जी राधे राधे जी जय श्री कृष्णाजी☑️🌿☑️🙋‍♀️✍️👬💏👬 दोस्ती यारी⚖️सदा बनी रहे जी ✍️🙋‍♀️📀⚖️ 📀⚖️📀⚖️📀 ⚖️📀⚖️📀 ⚖️📀 ⚖️📀

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कामेंट्स

saroj singh Baghel Nov 21, 2020
🙋‍♀️🌞 ओम सूर्याय नमः सूर्य भगवान की✍️ कृपा सदा ही आप ✍️☑️और आपके❗🙏 फैमिली परिवार पर बनी रहेजी , आज का दिन शुभ मंगलमय हो❗ महीने के चौथे रविवार की हार्दिक शुभकामनाएं ❗सबसे पहले हमारी तरफ से ❗❗आप सभी को आपका हर पल हर दिन खुशियों से भरा रहे इसी🙋‍♀️🙋‍♀️ मनोकामना के साथ सुबह सुबह की राम राम जी 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙋‍♀️🙋‍♀️🙋‍♀️

ramkumarverma Jan 25, 2021

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Mohan Jan 25, 2021

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Amar jeet mishra Jan 26, 2021

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इश्वर से क्या मांगना है इस पर पहले सोच विचार कर लेना चाहिए । *((एक पौराणिक कथा में से एक))* *महादेव शिवजी का वरदान जो ऋषि के लिए बोझ बन गया।* *लोमश ऋषि परम तपस्वी तथा विद्वान थे। वे बड़े-बड़े रोमों या रोओं वाले थे इसीकारण इनका नाम लोमश पड़ा। सप्त चिरंजीवियों के बारे में तो हम सबने सुना है लेकिन उसके अतिरिक्त भी कुछ ऐसे लोग है जिनके बारे में मान्यता है कि वे अमर हैं। उनमे से एक लोमश ऋषि भी हैं। अमरता का अर्थ यहाँ चिरंजीवी होना नहीं है बल्कि उनकी अत्यधिक लम्बी आयु से है। लोमश ऋषि ने युधिष्ठिर को ज्ञान की गूढ़ बातें बताई थी जिससे वे एक योग्य राजा बने।* *एक बार लोमश ऋषि भगवत कथा कर रहे थे। उसी भीड़ में बैठा एक व्यक्ति उन्हें बार-बार टोक रहा था। वो कभी एक प्रश्न पूछता तो कभी दूसरा। अंत में इससे क्रोधित होकर लोमश जी ने कहा - "रे मुर्ख! तू क्यों कौवे की तरह काँव-काँव कर रहा है? जा अगले जन्म में तू कौवा ही बन।" उनके इस वचन के कारण उस व्यक्ति को श्राप लग गया किन्तु उसने विनम्रता से उसे स्वीकार कर लिया। क्रोध शांत होने के पश्चात लोमश ऋषि को अत्यंत खेद हुआ और उस व्यक्ति की विनम्रता देख कर उन्होंने उसे वरदान दिया कि अगले जन्म में वो कौवा जरूर बनेगा लेकिन वो इतना पवित्र होगा कि जहाँ भी वो रहेगा वहाँ कलियुग का प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऋषि के श्राप के कारण वो व्यक्ति अगले जन्म में महान "काकभशुण्डि" के रूप में जन्मा। उन्होंने ही गरुड़ को भगवान शिव द्वारा कहा गया रामायण कथा सुनाया जिससे गरुड़ की अज्ञानता जाती रही।* *इनके लंबे जीवन के बारे में एक कथा है कि बचपन में लोमश मुनि को मृत्यु से बड़ा भय लगता था। इससे बचने के लिए उन्होंने भगवान शंकर की घोर तपस्या की। जब भगवान आशुतोष प्रसन्न हुए और उनसे वर मांगने को कहा तो उन्होंने कहा - "देवाधिदेव! यदि आप मुझसे प्रसन्न हैं तो मेरा यह नर तन अजर-अमर कर दीजिऐ क्योंकि मुझे मृत्यु से बड़ा भय लगता है। तब भगवान शंकर ने कहा - "लोमश! यह नहीं हो सकता। इस मृत्युलोक की सारी चीजें नश्वर हैं और आज नहीं तो कल सभी विनाश को प्राप्त होंगी। यह अटूट ईश्वरीय विधान है जिसको कोई भी नहीं बदल सकता। अतः तुम्हारे इस भौतिक शरीर को मैं अजर-अमर नहीं कर सकता किन्तु तुमने मुझे प्रसन्न किया है इसीलिए लम्बी आयु का वरदान माँग लो। तब लोमश ऋषि ने चालाँकि से कहा - "अच्छा! तो मैं यह मांगता हूँ कि एक कल्प के बाद मेरा एक रोम गिरे और इस प्रकार जब मेरे शरीर के सारे के सारे रोम गिर जाऐं तभी मेरी मृत्यु हो।" भगवान शंकर मुस्कुराये और 'एवमस्तु' कहकर तुरन्त अंर्त्ध्यान हो गऐ। आरम्भ में तो वे बड़े प्रसन्न हुए किन्तु जल्द ही अपने इस जीवन को जीते-जीते वे थक गए। उन्होंने मृत्यु की कामना भी की किन्तु वो संभव नहीं था क्यूंकि महादेव के वरदान के कारण उनके रोम की संख्या तक कल्प बीतने के बाद ही उनकी मृत्यु संभव थी।* *अपनी इसी वेदना को ऋषि लोमश श्रीराम के पिता महाराज दशरथ को कहते हैं। एक बार वे अयोध्या पहुँचे और देखा कि महाराज दशरथ अपने किले की मरम्मत करा रहे हैं। तब उन्होंने दशरथ से पूछा - "हे राजन! इतनी सुरक्षा की क्या आवश्यकता? क्या तुम भी चिरकाल तक जीना चाहते हो? अरे अधिक से अधिक तुम कई हजार साल जी लोगे लेकिन यहाँ देखो कि मैं मरना भी चाहूँ तो मर नहीं सकता।" तब उन्होंने दशरथ को महादेव द्वारा दिये गए वरदान की बात बताई और कहा - "हे राजन! आज अगर कोई मुझे मृत्यु दे सके तो मैं उसे अपनी सारी आयु और अपना समस्त पुण्य दे दूँ। लेकिन अभी तो मेरे बाएं पैर के घुटने तक ही रोम झड़े हैं। अभी पता नहीं मुझे और कितना जीना पड़े। मैंने महारुद्र को छलना चाहा और उसी का ये परिणाम है कि उनके ये वरदान भी मेरे लिए श्राप बन गया। इसीलिए हे राजन! ये जान लो कि किसी को भी ईश्वर से अपनी शक्ति के बाहर कुछ माँगना नहीं चाहिए।"

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Neeta Trivedi Jan 25, 2021

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TR. Madhavan Jan 25, 2021

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