. दिनांक 13. 04. 2021 दिन मंगलवार तदनुसार संवत् २०७८ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरम्भ होने जा रहे हैं :- "चैत्र नवरात्रे 2021" नवरात्री के नौ दिनों तक देवी माँ के एक स्वरुप की पूजा की जाती है। जो इस प्रकार है :- 01. 13 अप्रैल, 2021 (मंगलवार)- प्रतिपदा तिथि- घटस्थापना, श्री शैलपुत्री पूजा 02. 14 अप्रैल, 2021 (बुधवार)- द्वितीया तिथि- श्री ब्रह्मचारिणी पूजा 03. 15 अप्रैल, 2021 (गुरुवार)- तृतीय तिथि- श्री चंद्रघंटा पूजा 04. 16 अप्रैल, 2021 (शुक्रवार)- चतुर्थी तिथि- श्री कुष्मांडा पूजा 05. 17 अप्रैल, 2021 (शनिवार)- पंचमी तिथि- श्री स्कन्दमाता पूजा 06. 18 अप्रैल, 2021 (रविवार)- षष्ठी तिथि- श्री कात्यायनि पूजा 07. 19 अप्रैल, 2021 (सोमवार)- सप्तमी तिथि- श्री कालरात्रि पूजा 08. 20 अप्रैल, 2021 (मंगलवार)- अष्टमी तिथि श्री महागौरी पूजा, महाअष्टमी पूजा 09. 21 अप्रैल, 2021 (बुधवार)- नवमी तिथि- सिद्धिदात्री पूजा, नवमी पूजा "घट स्थापना" नवरात्री में घट स्थापना का बहुत महत्त्व है। नवरात्री की शुरुआत घट स्थापना से की जाती है। कलश को सुख समृद्धि, ऐश्वर्य देने वाला तथा मंगलकारी माना जाता है। कलश के मुख में भगवान विष्णु गले में रूद्र, मूल में ब्रह्मा तथा मध्य में देवी शक्ति का निवास माना जाता है। नवरात्री के समय ब्रह्माण्ड में उपस्थित शक्तियों का घट में आह्वान करके उसे कार्यरत किया जाता है। इससे घर की सभी विपदा दायक तरंगें नष्ट हो जाती है तथा घर में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहती है। "सामग्री" जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र, जौ बोने के लिए शुद्ध साफ की हुई मिटटी जिसमे कंकर आदि ना हो, पात्र में बोने के लिए जौ (गेहूं भी ले सकते है), घट स्थापना के लिए मिट्टी का कलश या फिर तांबे का कलश भी लें सकते हैं, कलश में भरने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल, रोली, मौली, पूजा में काम आने वाली साबुत सुपारी, कलश में रखने के लिए सिक्का (किसी भी प्रकार का कुछ लोग चांदी या सोने का सिक्का भी रखते हैं), आम के पत्ते, कलश ढकने के लिए ढक्कन (मिट्टी का या तांबे का), ढक्कन में रखने के लिए साबुत चावल, नारियल, लाल कपडा, फूल माला, फल तथा मिठाई, दीपक, धूप, अगरबत्ती। "घट स्थापना की विधि" सबसे पहले जौ बोने के लिए एक ऐसा पात्र लें जिसमे कलश रखने के बाद भी आस पास जगह रहे। यह पात्र मिट्टी की थाली जैसा कुछ हो तो श्रेष्ठ होता है। इस पात्र में जौ उगाने के लिए मिट्टी की एक परत बिछा दें। मिट्टी शुद्ध होनी चाहिए। पात्र के बीच में कलश रखने की जगह छोड़कर बीज डाल दें। फिर एक परत मिटटी की बिछा दें। एक बार फिर जौ डालें। फिर से मिट्टी की परत बिछाएँ। अब इस पर जल का छिड़काव करें। कलश तैयार करें। कलश पर स्वस्तिक बनायें। कलश के गले में मौली बाँधें। अब कलश को थोड़े गंगा जल और शुद्ध जल से पूरा भर दें। कलश में साबुत सुपारी, फूल डालें। कलश में सिक्का डालें। अब कलश में पत्ते डालें। कुछ पत्ते थोड़े बाहर दिखाई दें इस प्रकार लगाएँ। चारों तरफ पत्ते लगाकर ढ़क्कन लगा दें। इस ढ़क्कन में अक्षत यानि साबुत चावल भर दें। नारियल तैयार करें। नारियल को लाल कपड़े में लपेट कर मौली बाँध दें। इस नारियल को कलश पर रखें। नारियल का मुँह आपकी तरफ होना चाहिए। यदि नारियल का मुँह ऊपर की तरफ हो तो उसे रोग बढ़ाने वाला माना जाता है। नीचे की तरफ हो तो शत्रु बढ़ाने वाला मानते है, पूर्व की ओर हो तो धन को नष्ट करने वाला मानते हैं। नारियल का मुँह वह होता है जहाँ से वह पेड़ से जुड़ा होता है।अब यह कलश जौ उगाने के लिए तैयार किये गये पात्र के बीच में रख दें। "चौकी स्थापना और पूजा विधि" लकड़ी की एक चौकी को गंगाजल और शुद्ध जल से धोकर पवित्र करें। साफ कपड़े से पोंछ कर उस पर लाल कपड़ा बिछा दें। इसे कलश के दांयी तरफ रखें। चौकी पर माँ दुर्गा की मूर्ति अथवा फ्रेम युक्त फोटो रखें। माँ को चुनरी ओढ़ाएँ और फूल माला चढ़ायें। धूप, दीपक आदि जलाएँ। नौ दिन तक जलने वाली माता की अखंड-जोत जलाएँ। न हो सके तो आप सिर्फ पूजा के समय ही दीपक जला सकते हैं। देवी माँ को तिलक लगाएँ। माँ दुर्गा को वस्त्र, चंदन, सुहाग के सामान यानि हल्दी, कुमकुम, सिंदूर, अष्टगंध आदि अर्पित करें, काजल लगाएँ। मंगलसूत्र, हरी चूडियाँ, फूल माला, इत्र, फल, मिठाई आदि अर्पित करें। श्रद्धानुसार दुर्गा सप्तशती के पाठ, देवी माँ के स्रोत, दुर्गा चालीसा का पाठ, सहस्रनाम आदि का पाठ करें। फिर अग्यारी तैयार कीजिये अब एक मिटटी का पात्र और लीजिये उसमे आप गोबर के उपले को जलाकर अग्यारी जलाये घर में जितने सदस्य हैं उन सदस्यो के हिसाब से लॉग के जोड़े बनाये, लॉग के जोड़े बनाने के लिए आप बताशों में लॉग लगाएं यानि की एक बताशे में दो लॉग, ये एक जोड़ा माना जाता है और जो लॉग के जोड़े बनाये है फिर उसमे कपूर और सामग्री चढ़ाये और अग्यारी प्रज्वलित करें। देवी माँ की आरती करें। पूजन के उपरांत वेदी पर बोए अनाज पर जल छिड़कें। प्रतिदिन देवी माँ का पूजन करें तथा जौं वाले पात्र में जल का हल्का छिड़काव करें। जल बहुत अधिक या कम ना छिड़कें। जल इतना हो की जौ अंकुरित हो सकें। ये अंकुरित जौ शुभ माने जाते हैं। यदि इनमें से किसी अंकुर का रंग सफेद हो तो उसे बहुत अच्छा माना जाता है। "नवरात्री के व्रत की विधि" नवरात्रि के दिनों में बहुत से लोग आठ दिनों के लिए व्रत रखते हैं, (पड़वा से अष्टमी), और केवल फलाहार पर ही आठों दिन रहते हैं। फलाहार का अर्थ है, फल एवं और कुछ अन्य विशिष्ट सब्जियों से बने हुए खाने। फलाहार में सेंधा नमक का इस्तेमाल होता है। नवरात्रि के नौवें दिन भगवान राम के जन्म की रस्म और पूजा (रामनवमी) के बाद ही उपवास खोला जाता है। जो लोग आठ दिनों तक व्रत नहीं रखते, वे पहले और आख़िरी दिन उपवास रख लेते हैं, (यानी कि पड़वा और अष्टमी को)। व्रत रखने वालों को जमीन पर सोना चाहिए। नवरात्री के व्रत में अन्न नहीं खाना चाहिये। सिंघाडे के आटे की लप्सी, सूखे मेवे, कुटु के आटे की पूरी, समां के चावल की खीर, आलू, आलू का हलवा भी ले सकते हैं, दूध, दही, घीया, इन सब चीजों का फलाहार करना चाहिए और सेंधा नमक तथा काली मिर्च का प्रयोग करना चाहिये। दोपहर को आप चाहें तो फल भी ले सकते हैं। "नवरात्री में कन्या पूजन" महाअष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है। कुछ लोग अष्टमी के दिन और कुछ नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं। परिवार की रीति के अनुसार किसी भी दिन कन्या पूजन किया जा सकता है। तीन साल से नौ साल तक आयु की कन्याओं को तथा साथ ही एक लांगुरिया (छोटा लड़का) को खीर, पूरी, हलवा, चने की सब्जी आदि खिलाये जाते हैं। कन्याओं को तिलक करके, हाथ में मौली बाँधकर, गिफ्ट दक्षिणा आदि देकर आशीर्वाद लिया जाता है, फिर उन्हें विदा किया जाता है। ----------:::×:::---------- "जय माता दी" ********************************************

.         दिनांक 13. 04. 2021 दिन मंगलवार तदनुसार संवत् २०७८ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरम्भ होने जा रहे हैं :- 

                          "चैत्र नवरात्रे 2021"

           नवरात्री के नौ दिनों तक देवी माँ के एक स्वरुप की पूजा की जाती है। जो इस प्रकार है :-

01. 13 अप्रैल, 2021 (मंगलवार)- प्रतिपदा तिथि- घटस्थापना, श्री शैलपुत्री पूजा

02. 14 अप्रैल, 2021 (बुधवार)- द्वितीया तिथि- श्री ब्रह्मचारिणी पूजा

03. 15 अप्रैल, 2021 (गुरुवार)- तृतीय तिथि- श्री चंद्रघंटा पूजा

04. 16 अप्रैल, 2021 (शुक्रवार)- चतुर्थी तिथि- श्री कुष्मांडा पूजा

05. 17 अप्रैल, 2021 (शनिवार)- पंचमी तिथि- श्री स्कन्दमाता पूजा

06. 18 अप्रैल, 2021 (रविवार)- षष्ठी तिथि- श्री कात्यायनि पूजा

07. 19 अप्रैल, 2021 (सोमवार)- सप्तमी तिथि- श्री कालरात्रि पूजा

08. 20 अप्रैल, 2021 (मंगलवार)- अष्टमी तिथि श्री महागौरी पूजा, महाअष्टमी पूजा

09. 21 अप्रैल, 2021 (बुधवार)- नवमी तिथि-  सिद्धिदात्री पूजा, नवमी पूजा 

                               "घट स्थापना"

           नवरात्री में घट स्थापना का बहुत महत्त्व है। नवरात्री की शुरुआत घट स्थापना से की जाती है। कलश को सुख समृद्धि, ऐश्वर्य देने वाला तथा मंगलकारी माना जाता है। कलश के मुख में भगवान विष्णु गले में रूद्र, मूल में ब्रह्मा तथा मध्य में देवी शक्ति का निवास माना जाता है। नवरात्री के समय ब्रह्माण्ड में उपस्थित शक्तियों का घट में आह्वान करके उसे कार्यरत किया जाता है। इससे घर की सभी विपदा दायक तरंगें नष्ट हो जाती है तथा घर में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहती है।

                               "सामग्री"

          जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र, जौ बोने के लिए शुद्ध साफ की हुई मिटटी जिसमे कंकर आदि ना हो, पात्र में बोने के लिए जौ (गेहूं भी ले सकते है), घट स्थापना के लिए मिट्टी का कलश या फिर तांबे का कलश भी लें सकते हैं, कलश में भरने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल, रोली, मौली, पूजा में काम आने वाली साबुत सुपारी, कलश में रखने के लिए सिक्का (किसी भी प्रकार का कुछ लोग चांदी या सोने का सिक्का भी रखते हैं), आम के पत्ते, कलश ढकने के लिए ढक्कन (मिट्टी का या तांबे का), ढक्कन में रखने के लिए साबुत चावल, नारियल, लाल कपडा, फूल माला, फल तथा मिठाई, दीपक, धूप, अगरबत्ती।

                       "घट स्थापना की विधि"

          सबसे पहले जौ बोने के लिए एक ऐसा पात्र लें जिसमे कलश रखने के बाद भी आस पास जगह रहे। यह पात्र मिट्टी की थाली जैसा कुछ हो तो श्रेष्ठ होता है। इस पात्र में जौ उगाने के लिए मिट्टी की एक परत बिछा दें। मिट्टी शुद्ध होनी चाहिए। पात्र के बीच में कलश रखने की जगह छोड़कर बीज डाल दें। फिर एक परत मिटटी की बिछा दें। एक बार फिर जौ डालें। फिर से मिट्टी की परत बिछाएँ। अब इस पर जल का छिड़काव करें।
          कलश तैयार करें। कलश पर स्वस्तिक बनायें। कलश के गले में मौली बाँधें। अब कलश को थोड़े गंगा जल और शुद्ध जल से पूरा भर दें। कलश में साबुत सुपारी, फूल डालें। कलश में सिक्का डालें। अब कलश में पत्ते डालें। कुछ पत्ते थोड़े बाहर दिखाई दें इस प्रकार लगाएँ। चारों तरफ पत्ते लगाकर ढ़क्कन लगा दें। इस ढ़क्कन में अक्षत यानि साबुत चावल भर दें। नारियल तैयार करें। नारियल को लाल कपड़े में लपेट कर मौली बाँध दें। इस नारियल को कलश पर रखें। नारियल का मुँह आपकी तरफ होना चाहिए। यदि नारियल का मुँह ऊपर की तरफ हो तो उसे रोग बढ़ाने वाला माना जाता है। नीचे की तरफ हो तो शत्रु बढ़ाने वाला मानते है, पूर्व की ओर हो तो धन को नष्ट करने वाला मानते हैं। नारियल का मुँह वह होता है जहाँ से वह पेड़ से जुड़ा होता है।अब यह कलश जौ उगाने के लिए तैयार किये गये पात्र के बीच में रख दें।

                  "चौकी स्थापना और पूजा विधि"

          लकड़ी की एक चौकी को गंगाजल और शुद्ध जल से धोकर पवित्र करें। साफ कपड़े से पोंछ कर उस पर लाल कपड़ा बिछा दें। इसे कलश के दांयी तरफ रखें। चौकी पर माँ दुर्गा की मूर्ति अथवा फ्रेम युक्त फोटो रखें। माँ को चुनरी ओढ़ाएँ और फूल माला चढ़ायें। धूप, दीपक आदि जलाएँ। नौ दिन तक जलने वाली माता की अखंड-जोत जलाएँ। न हो सके तो आप सिर्फ पूजा के समय ही दीपक जला सकते हैं। देवी माँ को तिलक लगाएँ। माँ दुर्गा को वस्त्र, चंदन, सुहाग के सामान यानि हल्दी, कुमकुम, सिंदूर, अष्टगंध आदि अर्पित करें, काजल लगाएँ। मंगलसूत्र, हरी चूडियाँ, फूल माला, इत्र, फल, मिठाई आदि अर्पित करें। श्रद्धानुसार दुर्गा सप्तशती के पाठ, देवी माँ के स्रोत, दुर्गा चालीसा का पाठ, सहस्रनाम आदि का पाठ करें। फिर अग्यारी तैयार कीजिये अब एक मिटटी का पात्र और लीजिये उसमे आप गोबर के उपले को जलाकर अग्यारी जलाये घर में जितने सदस्य हैं उन सदस्यो के हिसाब से लॉग के जोड़े बनाये, लॉग के जोड़े बनाने के लिए आप बताशों में लॉग लगाएं यानि की एक बताशे में दो लॉग, ये एक जोड़ा माना जाता है और जो लॉग के जोड़े बनाये है फिर उसमे कपूर और सामग्री चढ़ाये और अग्यारी प्रज्वलित करें। देवी माँ की आरती करें। पूजन के उपरांत वेदी पर बोए अनाज पर जल छिड़कें। 
          प्रतिदिन देवी माँ का पूजन करें तथा जौं वाले पात्र में जल का हल्का छिड़काव करें। जल बहुत अधिक या कम ना छिड़कें। जल इतना हो की जौ अंकुरित हो सकें। ये अंकुरित जौ शुभ माने जाते हैं। यदि इनमें से किसी अंकुर का रंग सफेद हो तो उसे बहुत अच्छा माना जाता है।

                    "नवरात्री के व्रत की विधि"

           नवरात्रि के दिनों में बहुत से लोग आठ दिनों के लिए व्रत रखते हैं, (पड़वा से अष्टमी), और केवल फलाहार पर ही आठों दिन रहते हैं। फलाहार का अर्थ है, फल एवं और कुछ अन्य विशिष्ट सब्जियों से बने हुए खाने। फलाहार में सेंधा नमक का इस्तेमाल होता है। नवरात्रि के नौवें दिन भगवान राम के जन्म की रस्म और पूजा (रामनवमी) के बाद ही उपवास खोला जाता है। जो लोग आठ दिनों तक व्रत नहीं रखते, वे पहले और आख़िरी दिन उपवास रख लेते हैं, (यानी कि पड़वा और अष्टमी को)। व्रत रखने वालों को जमीन पर सोना चाहिए।
           नवरात्री के व्रत में अन्न नहीं खाना चाहिये। सिंघाडे के आटे की लप्सी, सूखे मेवे, कुटु के आटे की पूरी, समां के चावल की खीर, आलू, आलू का हलवा भी ले सकते हैं, दूध, दही, घीया, इन सब चीजों का फलाहार करना चाहिए और सेंधा नमक तथा काली मिर्च का प्रयोग करना चाहिये। दोपहर को आप चाहें तो फल भी ले सकते हैं।

                       "नवरात्री में कन्या पूजन"

          महाअष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है। कुछ लोग अष्टमी के दिन और कुछ नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं। परिवार की रीति के अनुसार किसी भी दिन कन्या पूजन किया जा सकता है। तीन साल से नौ साल तक आयु की कन्याओं को तथा साथ ही एक लांगुरिया (छोटा लड़का) को खीर, पूरी, हलवा, चने की सब्जी आदि खिलाये जाते हैं। कन्याओं को तिलक करके, हाथ में मौली बाँधकर, गिफ्ट दक्षिणा आदि देकर आशीर्वाद लिया जाता है, फिर उन्हें विदा किया जाता है।
                       ----------:::×:::----------

                            "जय माता दी"
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कामेंट्स

मेरे साईं (indian women) Apr 12, 2021
🙏🔱हर हर महादेव🔱🙏 🍁🌼🌼🔱🚩🔱🌼🌼 यदि सफलता एक सुन्दर पुष्प है तो विनम्रता उसकी सुगन्ध ll जिंदगी में जो चाहो हासिल कर लो, बस इतना ख्याल रखना कि, आपकी मंजिल का रास्ता, लोगो के दिलों को तोड़ कर ना गुजरे बल्कि दिलों से होकर गुजरे ll "अच्छी सोच", "अच्छा विचार", "अच्छी भावना" मन को हल्का करता है l🌿🌹🌿🌹🌿🌹 ll एक खूबसूरत मुस्कान के साथ ll ll आपका दिन शुभ और मँगलमय हो ll 🍁🌼🌼🔱🚩🔱🌼🌼🍁

sanjay choudhary Apr 12, 2021
🙏🙏 हर हर महादेव 🙏🙏 ।।। जय भोलेनाथ।।।। ।। शुभ प्र्भात् जी।।।। *🙏🌸!! प्रातःअभिनंदन!!🌸🙏* *✍️...कामयाब व्यक्ति अपने चेहरे पर दो ही चीज़ें रखता है – मुस्कुराहट और खामोशी।* *मुस्कुराहट मसलों को हल करने के लिए और खामोशी मसलों से दूर रहने के लिए...🙏* 🙏 *आज से हम* *मुस्कुराहट और खामोशी से अपने चेहरे को सजाएँ...* *🙏सुप्रभात🌸!!राधेराधे!!🙏* 🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃

Virendra Singh yadav Apr 12, 2021
जय माता दी सुप्रभात शुभ सोमवार 🌹🌹🙏🙏

A.K Apr 12, 2021
राम राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम राम🌹राम‌ राम🌷राम‌ राम🌹राम राम🌷राम

RAJ RATHOD Apr 12, 2021
🚩✋जय भोलेनाथ ✋🚩 🌹🌹शुभ सोमवार 🌹🌹 🙏🌅सुप्रभात वंदन 🌅🙏 आप सभी को सोमवति अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌸🌸🌺🌺 भोलेनाथ 👣की कृपा ✋सदा आप सभी 👉👭👨‍👩‍👧‍👦👫पर बनी रहे 🚩🚩

Renu Singh Apr 12, 2021
Jai Mata Di 🌹🙏 Shubh Prabhat Vandan Bhai ji 🙏 Bhole Nath Ka Aashirwad Aap aur Aàpke Pariwar pr Sadaiv Bna rhe 🙏🌹

dhruv wadhwani Apr 15, 2021
मां चंद्रघंटा आपकी सारी मनोकामना पूरी करें आपका दिन शुभ रहे मंगलमय रहे

Raj Rani Bansal May 6, 2021

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☘️☘️☘️जय संतोषी माता की ☘️☘️☘️☘️☘️☘️☘️सुप्रभात जी☘️☘️☘️☘️ 🙏💐 जय ज्वालामुखी मां 💐🙏 *🌹शुक्रवार के दिन यह 10 उपाय, प्रचुर धन के लिए जरूर आजमाएं🌹* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *⭕क्या आप जानते हैं उन कारणों को, जिनसे मां लक्ष्मी सदा प्रसन्न रहती है। शुक्रवार के दिन जो भक्त देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं, उनके लिए संसार में कुछ भी अप्राप्य नहीं है। गृहलक्ष्मी देवी गृहिणियों यानी घर की स्‍त्रियों में लज्जा, क्षमा, शील, स्नेह और ममता रूप में विराजमान रहती हैं। वे मकान में प्रेम तथा जीवंतता का संचार कर उसे घर बनाती हैं। इनकी अनुपस्थिति में घर कलह, झगड़ों, निराशा आदि से भर जाता है। गृहस्वामिनी को गृहलक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। जहां गृहस्वामिनी का सम्मान नहीं होता है, गृह लक्ष्मी उस घर को त्याग देती है। आइए जानते हैं शुक्रवार के 10 ऐसे उपाय जो देते हैं धन और समृद्धि का वरदान....* 1️⃣सुबह उठते ही मां लक्ष्मी को नमन कर सफेद वस्त्र धारण करें और मां लक्ष्मी के श्री स्वरूप व चित्र के सामने खड़े होकर श्री सूक्त का पाठ करें एवं कमल का फूल चढ़ाएं। 2️⃣घर से काम पर निकलते समय थोड़ा-सा मीठा दही खाकर निकलें। 3️⃣अगर पति-पत्नी में तनाव रहता है तो शुक्रवार के दिन अपने शयनकक्ष में प्रेमी पक्षी जोड़े की तस्वीर लगाएं। 4️⃣अगर आपके काम में अवरोध आ रहा है, तो शुक्रवार के दिन काली चींटियों को शकर डालें। 5️⃣शुक्रवार को माता लक्ष्मी के मंदिर जाकर शंख, कौड़ी, कमल, मखाना, बताशा मां को अर्पित करें। ये सब महालक्ष्मी मां को बहुत प्रिय हैं। 6️⃣गजलक्ष्मी मां की उपासना करने से संपत्ति और संतान की प्राप्ति होती है। 7️⃣वीरलक्ष्मी माता की उपासना सौभाग्य के साथ स्वास्‍थ्य भी देने वाली होती है। 8️⃣लक्ष्मी मां का एक रूप अन्न भी है। कुछ लोग क्रोध आने पर भोजन की थाली फेंक देते हैं। इस तरह की आदत धन, वैभव एवं पारिवारिक सुख के लिए नुकसानदायक होती है। 9️⃣घर में स्थायी सुख-समृद्धि हेतु पीपल के वृक्ष की छाया में खड़े रहकर लोहे के बर्तन में जल, चीनी, घी तथा दूध मिलाकर पीपल के वृक्ष की जड़ में डालने से घर में लंबे समय तक सुख-समृद्धि रहती है और लक्ष्मी का वास होता है। 🔟घर में बार-बार धनहानि हो रही हो तो वीरवार को घर के मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़ककर गुलाल पर शुद्ध घी का दोमुखी (दो मुख वाला) दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय मन ही मन यह कामना करनी चाहिए कि भविष्य में घर में धनहानि का सामना न करना पड़ें। जब दीपक शांत हो जाए तो उसे बहते हुए पानी में बहा देना चाहिए। 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

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