Durga Pawan Sharma
Durga Pawan Sharma Apr 19, 2019

जय श्री राधे कृष्ण

जय श्री राधे कृष्ण

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कामेंट्स

Renu Singh Apr 19, 2019
Bilkul shi 👍 👍 🌸 🌸 👌 🙏Jai Shree Radhe Krishna Bhai ji Shubh Sandhya vandan ji lshwar ki kripa aap aur aapki family pr sadaiv bni rhe Aapka har pal mangalmay ho Bhai ji 🙏 🙏 🌷 🌷 🙏 🙏 🌷 🌷

Pawan Saini Apr 19, 2019
बिल्कुल सही कहा बहन 👌👌👌 ईश्वर आप और आपके परिवार को हमेशा खुश रखे बहन आप का हर एक पल मंगलमय हो शुभ संध्या स्नेह वंदन बहनजी 🙏🏵️🌼🌻

Prabha Jain Apr 19, 2019
Jai Shri Krishana jai Shri ram sister ji ram Ji ki kripa aap pur aur aapki parivear pur khushiya barshati rahe god bless you and your family sister ji shubh sandhya 🌱🌹🌱🌹🌱

Sangeeta Patel Apr 19, 2019
very very nice Post ji schchi bat or achchhi bat👌👌👌🙏🙏🙏

Ritu Sen May 21, 2019

Good morning ji

+52 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 46 शेयर
YASHWANT KUMAR SAHU May 21, 2019

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Asha Shrivastava May 21, 2019

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Anuradha Tiwari May 21, 2019

🙏राधा रानी की शक्ति-.💗 गोवर्धन लीला के बाद समस्त ब्रजमंडल के कृष्ण के नाम की चर्चा होने लगी, सभी ब्रजवासी कृष्ण की जय-जयकार कर रहे थे और उनकी महिमा का गान कर रहे थे। . ब्रज के गोप-गोपियों के मध्य कृष्ण की ही चर्चा थी। . एक स्थान पर कुछ गोप और गोपियाँ एकत्रित थी और यही चर्चा चल रही थी तभी एक गोप मधुमंगल बोला इसमें कृष्ण की क्या विशेषता है, यह कार्य तो हम लोग भी कर सकते है। . वहां राधा रानी की सखी ललीता भी उपस्थित थी वह तुरंत बोल उठी ... . "हां हां देखी है तुम्हारी योग्यता, जब कृष्ण ने पर्वत उठाया था तो तुम सभी ने अपनी-अपनी लाठियां पर्वत के नीचे लगा थी ... . और कान्हा से हाथ हठा लेने के लिए कहा था, हाथ हठाना तो दूर कान्हा ने थोड़ी से अंगुली टेढ़ी की और तुम सब की लाठियां चटाचट टूट गई थी, . तब तुम सब मिलकर यही यही बोले थे कान्हा तुम्ही संभालो, तब कान्हा ने ही पर्वत संभाला था"... . यह सुनकर मधुमंगल बोला "हाँ हाँ मान लिया की कान्हा ने ही संभाला, किन्तु हम ने प्रयास तो किया तुमने क्या किया " . यह सुनकर ललिता बोली " हां हां देखी है तुम्हारे कान्हा की भी शक्ति, माना हमने कुछ नहीं किया किन्तु हमारी सखी राधारानी ने तो किया" . मधुमंगल बोला "अच्छा जी राधा रानी ने क्या करा तनिक यह तो बताओ" . ललीता ने उत्तर दिया "पर्वत तो हमारी राधारानी ने ही उठाया था, कृष्ण का तो बस नाम हो गया" . यह सुनकर सभी गोप सखा हंसने लगे और बोले "लो जी अब यह राधा रानी कहाँ से आ गई, पर्वत उठाया कान्हा ने, हाथ दुखे कान्हा के.... . पूरे सात दिन एक स्थान पर खड़े रहे कान्हा, ना भूंख की चिंता ना प्यास की, ना थकान का कोई भाव, ना कोई दर्द, सब कुछ किया कान्हा ने और बीच में आ गई राधारानी" . तब ललीता बोली.. लगता है जिस समय कान्हा ने पर्वत उठाया था उस समय तुम लोग कही और थे, अन्यथा तुमको भी पता चल जाता कि पर्वत तो हमारी राधारानी ने ही उठाया था" . या सुनकर सभी गोपसखा बोले "ऐसी प्रलयकारी स्थिति में कही और जा कर हमको क्या मरना था, एक कृष्ण ही तो हम सबका आश्रय थे, जिन्होंने सबके प्राणों की रक्षा की" . ललीता बोली "तब भी तुमको यह नहीं पता चला कि पर्वत हमारी राधारानी ने उठाया था" . सभी गोपसखा बोले "हमने तो ऐसा कुछ भी नहीं देखा" . तब ललीता बोली "अच्छा यह बताओ कि कान्हा ने पर्वत किस हाथ से उठाया था" . मधुमंगल बोला "कान्हा ने तो पर्वत अपने बायें हाथ से ही उठा दिया था, दायें हाथ की तो आवश्यकता ही नहीं पड़ी" . तब ललीता बोली.. तभी तो में कहती हूँ की पर्वत हमारी राधारानी ने उठाया, कृष्ण ने नहीं, यदि कृष्ण अपनी शक्ति से पर्वत उठाते तो वह दायें हाथ से उठाते... . किन्तु उन्होंने पर्वत बायें हाथ से उठाया, क्योकि किसी भी पुरुष का दायां भाग उसका स्वयं का तथा बायाँ भाग स्त्री का प्रतीक होता है, . जब कान्हा ने पर्वत उठाया तब उन्होंने श्री राधारानी का स्मरण किया और तब पर्वत उठाया, इसी कारण उन्होंने पर्वत बाएं हाथ से उठाया, . कृष्ण के स्मरण करने पर श्री राधा रानी ने उनकी शक्ति बन कर पर्वत को धारण किया।" . अब किसी भी बालगोपाल के पास ललीता के इस तर्क का कोई उत्तर नहीं था, सभी निरुत्तर हो गए और ललीता राधे-राधे गुनगुनाती वहां से चली गई। . *यह सत्य है कि राधे रानी ही भगवान श्री कृष्ण की आद्यशक्ति है, जब भी भगवान कृष्ण ने कोई विशेष कार्य किया पहले अपनी शक्ति का स्मरण किया, . श्री राधा रानी कृष्ण की शक्ति के रूप में सदा कृष्ण के साथ रही, इसलिए कहा जाता है, कि श्री कृष्ण को प्राप्त करना है तो श्रीराधा रानी को प्रसन्न करना चाहिए। . जहाँ राधा रानी होंगी वहां श्री कृष्ण स्वयं ही चले आते हैं। यही कारण है कि भक्त लोग कृष्ण से पहले राधा का नाम लेते है। ** चन्दा से मुख पे, बड़ी बड़ी अखियाँ, लट लटके घुँघराली, गुलाम तेरो बनवारी। बड़ी बड़ी अखियों मैं, श्याम रंग कजरा, घायल कुंज बिहारी, गुलाम तेरो बनवारी। सुन बरसाने वारी ((((((((जय जय श्री राधे ))))))))))))) 🙏🙏🌹🌹

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P.B May 21, 2019

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Devendra Angira May 21, 2019

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Anuradha Tiwari May 21, 2019

जय श्री राधे कृष्णा एक बार राधा रानी को एक सर्प ने काट लिया। राधा जी की सभी सखियाँ दौड़ी-दौड़ी माँ के पास आई और कहती है अपनी बेटी को देखो एक काले सर्प ने इसे डस लिया है। और राधा की के सर से दोहनी गिर गई और वो बेहोश हो गई। अब इसके विष को उतरने के लिए किसी गुणी को बुलाना पड़ेगा। माँ डर गई और रोते रोते राधा जी को अपने ह्रदय से लगा लिया। सूरदास जी कहते हैं की श्याम बहुत ही गुणवान हैं वे ही राधा का यह विष उतार सकते हैं। एक सखी कहने लगी यदि राधा जी को ठीक करना है तो कृष्ण जी को बुला लाओ। अगर कृष्ण जी आ जायेंगे तो राधा जी तुरंत ही जीवित हो जाएँगी। क्योंकि कृष्ण जी गारुड़ी हैं। तीनो लोकों में उनसे श्रेष्ठ कोई नही है। सूरदास जी बता रहे हैं की राधा रानी को ठीक करने के लिए आज कृष्ण जी को बुलाया जा रहा है। अब राधा रानी की सखियाँ कृष्ण जी की मैया यशोदा के पास आई है और कहती हैं- तुम्हारा कृष्ण सांप के विष को मन्त्रों से उतारने वाले गारुड़ी हैं; आप अपने पुत्र को हमारे साथ भेज दो। राधा रानी को काले सांप ने डस लिया है। ये सब सुनकर माँ मुस्कराने लगी की अभी थोड़ी देर पहले तो राधा मेरे घर आई थी। सूरदास जी कहते हैं राधा रानी की मूर्च्छा के मूल कारण को समझकर माँ यशोदा चुप हो गई( और सखियों को वह कारण नही बताया) माँ ने कृष्ण जी को पुकारा। और माँ कहती है राधा के यहाँ कीरति नाम की ग्वालिन तुम्हे बुलाने आई थी, तुम वहां चले जाओ। राधा को काले सांप ने डस लिया है। और तुम कबसे गारुणी बन गए लाला। जैसी जाओ और उसका विष झाड़ आओ। सूरदास जी कहते हैं की माँ ने मन ही मन मुस्कराकर कहा- कृष्ण! सुना है तुम कुछ ऐसा जंत्र-मन्त्र जानते हो की काले सांप का विष उतार जाता है। भगवान कृष्ण जी गारुणी बनकर वहां आये। जब वृषभानु सुता- राधा ने सुना तो मन में प्रसन्न हुई। की कृष्ण आज मेरे द्वार पर आये हैं। और अपने आप को राधा जी धन्य समझने लगती है। प्रेमवश में वह एकदम मुरझा गई, और राधा जी की आँखों से प्रेम के आंसू गिरने लगे। राधा को इस प्रकार देखकर माँ और भी व्याकुल हो गई। वे समझने लगी की राधा के एक-एक अंग में विष का गहरा प्रभाव हो गया है। लेकिन सूरदास जी कहते हैं की माँ चाहे जो समझे लेकिन प्रेम पूर्ण ह्रदय के प्रेम भावों को तो राधा और कृष्ण दोनों ही पूरी तरह से समझ रहे हैं। माँ रोती-रोती व्याकुल होकर इधर-उधर फिर रही है। वे अपनी पुत्री को बार बार गले से लगाती है और राधा की दशा देखकर पानी-पानी हो रही है। माँ दौड़कर आई कृष्ण जी के पैरों को पकड़कर के कहने लगी- हे मोहन! मेरी लाड़ली बेटी राधा बहुत ही व्याकुल है। कृपा करके इसे ठीक कर दो। तब कृष्ण ने कुछ झाड़ फूंक करने शुरू कर दिया। और राधा जी को स्पर्श किया। जैसे ही उन्होंने राधा जी को स्पर्श किया तो एकदम से किशोरी जी , श्री राधा रानी ने आँखे खोल दी। सूरदास जी कहते हैं- श्री कृष्ण जी वास्तव में बहुत बड़े गारुणी हैं। शरीर का विष तो उन्होंने झाड़ दिया लेकिन मन और सर पर प्रेम का जादू कर दिया। अब राधा जी ने होश में आकर अपने नेत्र खोले और आगे कृष्ण जी को खड़े देखा तो बस एकटक निहारती रही। फिर लाज से एकदम कड़ी हुई और अपने अंग वस्त्रों को सँभालने लगी। फिर राधा जी अपनी माँ से पूछती हैं की आज क्या है? सब लोग इकट्ठे क्यों हैं? माँ ने कहा- राधा तुम्हे सांप ने डस लिया था। और तुम्हे अपने तन-मन की सुधि नही रह गई थी। सूरदास जी कहते हैं की माता राधा को बताने लगी की कृष्ण ने मन्त्रों के द्वारा तुम्हारा उपचार किया है। राधा की माँ बार-बार कुंवर कन्हाई की बड़ाई कर रही है। माँ ने कृष्ण जी के मुख को चूमा,गले से लगाया और फिर अपने घर भेज दिया। वह कहती हैं की माँ यशोदा की कोख धन्य-धन्य है जिससे कृष्ण जैसे सुपुत्र का अवतार हुआ है। इसने तो तुरंत ही ऐसा उपाय कर दिया की मेरी मरी हुई बेटी को जिन्दा कर दिया। माता मन ही मन सोचती है की राधा-कृष्ण की यह जोड़ी तो मनो विधना में सोच-समझकर बनाई है( कितना अच्छा हो की राधा को कृष्ण जैसे वर प्राप्त हो) सूरदास जी कहते हैं की ब्रज के घर-घर में यह चर्चा चल पड़ी की कृष्ण जी बहुत बड़े गारुड़ी हैं। भगवान ने इस तरह से सुंदर प्रेम लीला की। फिर भगवान ने महारास भी रचाया है। कृष्ण 11 वर्ष की अवस्था में श्रीकृष्ण मथुरा चले गए थे। और राधा और कृष्ण का 100 साल का वियोग हुआ है। जिसके पीछे एक श्राप हैं कुछ संत कहते हैं की ये श्राप राधा जी को नही बल्कि कृष्ण जी को हुआ। क्योंकि एक बार वृन्दावन जाने के बाद 100 वर्षों तक श्री कृष्ण दोबारा वृन्दावन नही जा सके। और मन ही मन कहते थे हे राधे मैंने तुम्हारा क्या अपराध कर दिया। मैं वृन्दावन आना चाहता हूँ लेकिन तुम्हारी कृपा के बिना कोई जीव जंतु तक वृन्दावन में नही आ सकता है। 100 वर्ष बीत जाने पर राधा और कृष्ण दोनों का पुनर्मिलन कुरुक्षेत्र में बताया जाता है, जहां सूर्यग्रहण के अवसर पर द्वारिका से कृष्ण और वृंदावन से नंद के साथ राधा आई थीं। राधा सिर्फ कृष्ण को देखने और उनसे मिलने ही नंद के साथ गई थी। इसका जिक्र पुराणों में मिलता है। और सत्य तो ये है। राधा कृष्ण की लीला कल भी होती थी , आज भी होती है और हमेशा होती रहेंगी । जय श्री राधेकृष्णा 🙏🙏🌹🌹

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